भारतकोश
श्री चैतन्य चरितामृत (कृष्णदास कविराज गोस्वामी - सम्पूर्ण आदि, मध्य एवं अन्त्य लीला)

श्री चैतन्य चरितामृत (कृष्णदास कविराज गोस्वामी - सम्पूर्ण आदि, मध्य एवं अन्त्य लीला)

Sri Chaitanya Charitamrita of Krishnadas Kaviraj with Hindi Commentary

श्रील कृष्णदास कविराज गोस्वामी द्वारा

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श्रीचैतन्यचरितामृत आदिलीला पूर्वार्द्धमें उद्धृत प्रमाण-ग्रन्थ तालिका आदिपुराण—४/१८४, २१२, २१३, २१६; उज्ज्वलनीलमणि—४/७०; उपपुराण—३/८२; एकादशीतत्त्व—२/७४; कृष्णकर्णामृत—१/५७; गीतगोविन्द—४/२१९, २२४; गोविन्दलीलामृत—४/१२५; गौतमीय-तन्त्र—३/१०३; ४/१६३; तत्त्व-सन्दर्भ—३/८०; दानकेलिकौमुदी—४/१३१; पद्मपुराण—३/९०; ४/२१५; प्राचीनकृत श्लोक—१/५०, १०६; विदग्ध-माधव—१/४; ३/४; ४/११८; विष्णुपुराण—४/६३, ११६; ७/११९; बृहद्गौतमीयतन्त्र—४/८३; बृहन्नारदीयपुराण—७/७६; ब्रह्मसंहिता—२/१४, १०७; ४/७२; ५/२२, ७१, १५५; ब्रह्माण्डपुराण—५/३९; भक्तिरसामृतसिन्धु—४/४५, ११७, २०२, २०३; ५/३६, ५/३९, २२४; भगवद्गीता—१/४९; २/२०; ३/२२-२५; ४/२०, १७८; ७/११८ भागवत—१/४६, ४८, ५१-५६, ५९, ६०, ६२, ६३, ७१-७४, ९१; २/११, १७, २१, ३०, ५५, ६३, ६७, ९१, ९२; ३/३६, ३९, ५१, ६८, ११०; ४/२३, ३४, ६६, ८८, १५२, १५३, १५५, १५६, १७३, १७६, १८०, २०५-२०८; ५/३५, ७२, ७९, ८३, ८४, ८७, १३८, १३९, १४०, १४१, २१४; ६/२२, ५९-६०, ६३, ६६, ६७, ७०, ७२, ७३, १००; ७/९४; भावार्थ-दीपिका—१/९३; २/५३, ९५; महाभारत—३/४९; यामुनाचार्यकृत-श्लोक—३/८६, ८८; रूपगोस्वामीकृत-श्लोक—४/२६०; लघुभागवतामृत—१/७५, ७७; ३/२७; ४/१८४, २१२, २१३, २१५, २१६; ५/७७; ललितमाधव—४/१४६, २५९; सात्वत-तन्त्र—५/७७; स्तवमाला—३/५७, ६२, ६५; ४/५१, ५२, १९६, २७५; स्तोत्ररत्न—३/८६, ८८; स्वरूप-गोस्वामीकृत कड़चा—१/५-१४; ४/५५, २३०; ५/७, १३, ५०, ९३, १०९; ६/४, ५; ७/६; हरिभक्तिविलास—३/१०३; हरिभक्तिसुधोदय—७/९८;

अमृतप्रवाह भाष्यमें उद्धृत ग्रन्थादि-तालिका अलङ्कार शास्त्र—२/६-९, ७४; उपपुराण—३/८३; ऋग्वेद—७/१११-११५; ऐतरेयोपनिषद्—७/१११-११५; कठोपनिषद्—७/१२८-१३२; क्रमसन्दर्भ—३/५१; भगवद्गीता—२/३६-३७; छान्दोग्योपनिषद्—७/१२०-१२७, १२८-१३२; तन्त्र—३/८३; तलवकार उपनिषद्—७/१११-११५; तैत्तिरीयोपनिषद्—७/१२०-१२७; नारदपञ्चरात्र—७/१११-११५; पद्मपुराण—७/११०; प्रश्नोपनिषद्—७/१११-११५; बृहदारण्यकोपनिषद्—७/१११-११५, १२८-१३२, १३८-१४०; वेदान्त—४/५६; ब्रह्मसूत्र—७/१२०-१२७; भागवत—३/८३; ५/३५, ८३; भागवतामृत—१/८१; महाभारत—३/५१, ८३; माण्डुक्योपनिषद्—७/१२०-१२७; श्वेताश्वतरोपनिषद्—७/१११-११५, १२०-१२७; शिवपुराण—७/११०; श्रीसम्प्रदायिवैष्णव-ग्रन्थ—५/२७-२८; सार्वभौम श्लोक—३/५१;

उद्धृत ग्रन्थ तालिका | xxix