श्री चैतन्य चरितामृत (कृष्णदास कविराज गोस्वामी - सम्पूर्ण आदि, मध्य एवं अन्त्य लीला)
Sri Chaitanya Charitamrita of Krishnadas Kaviraj with Hindi Commentary
श्रील कृष्णदास कविराज गोस्वामी द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें[ याँर-रूपे याँर प्राणधन-नित्यानन्द ५/२२९ | युग-मन्वन्तरावतार ४/११ | राङ्गा यष्टि हस्ते दोले ५/१९० याँर प्रेमगुणे कृष्ण ६/६९ | ये आगे पड़ये, तारे ५/२०९ | रात्रे प्रलाप करे स्वरूपेर ४/१०९ याँर भगवत्ता हैते अन्येर २/८८ | येइ कहे, से पाषण्डी ३/७८ | राधाकृष्ण एक आत्मा, ४/५६ याँर भाव-शुद्धसख्य ६/७४ | येइ जन कृष्ण देखे ४/१५४ | राधाकृष्ण ऐछे सदा एकइ ४/९८ याँर माधुरीते करे लक्ष्मी ५/२२३ | येइ जपे, तार कृष्णे ७/८३ | राधाकृष्ण-भक्ति बिने ५/२२९ याँर हय, ताँर नाहि २/९६ | येई याँहा पाय, ताँहा ७/२३ | राधा-पूर्णशक्ति, कृष्ण ४/९६ याँ-सबार ऊपरे कृष्णेर ६/६५ | येइ येइ रूपे जाने, सेइ ५/१३२ | राधाप्रेम तैछे सदा ४/१२७ याँ-सबा लञा ७/१८, ७/१९ | “ये किछु कहिले तुमि ७/१०० | राधा-प्रेमा विभु-यार ४/१२८ याँहाके त' कला कहि ५/७५ | ये नयन देखिते अश्रु ५/१६५ | राधाभाव अङ्गीकरि' ४/२६८ याँहा याँहा नेत्र पड़े ४/८५ | ये ना माने, तार ६/८३ | राधा-भाव-कान्ति दुइ ४/९९ याँहार कृपाते पाइनु ५/२०० | ये पुरुष सृष्टि-स्थिति ६/८ | राधार अधर-रसे आमा ४/२४६ याँहार छटाय नाशे ३/५८ | ये-प्रकारे हय ४/१९७ | राधार वचने हरे आमार ४/२४४ याँहार तुलसीदले, याँहार ६/३३ | ये बले आमारे करे ४/१२३ | राधार दर्शने ४/२४३, २५० याँहार प्रकाशे सर्व १/८७ | येबा अज्ञे करे ताँरे ५/२२५ | राधासह क्रीड़ा रस ४/२१७ याँहार महिमा नहे ६/६ | येबा केह अन्य जाने, ४/१६१ | राधिका करेन कृष्णेर ४/९४ याँहार हुङ्कारे कैल ६/१११ | ये यैछे भजे ४/१७७ | राधिकादि लञा कैल ४/११४ याहार श्रवणे मन ४/१५७ | ये लागि कहिते भय, ४/२३६ | राधिकार प्रेम-गुरु, ४/१२४ याँहा हइते विघ्ननाश १/१०३ | यैछे कहि,–एइ विप्र २/७७ | राधिकार प्रेमे आमा ४/१२२ याँहा हैते पाइनु रघुनाथ ५/२०२ | यैछे तैछे कहि किछु ७/१७० | राधिकार भावकान्ति ४/२६७ याँहा हैते पाइनु रूप ५/२०१ | यैछे बलदेव १/७८ | राधिकार भाव-वर्ण ४/२७१ याँहा हैते पाइनु श्रीराधा ५/२०४ | यैछे वासुदेव प्रद्युम्नादि १/७८ | राधिकार भावमूर्त्ति प्रभुर ४/१०६ याँहा हैते विश्वोत्पत्ति, ५/४६ | योगमाया करिबेक ४/२९ | राधिकार भाव यैछे ४/१०८ यार एक कणा ५/५४ | | राधिकार रूप-गुण ४/२४८ यार ये लक्षण ताहा २/६९ | र | राधिकार स्पर्शे आमा ४/२४७ यारे यैछे नाचाय, से ५/१४२ | रत्नमण्डप, ताहे ५/२१८ | राधिका-स्वरूप हइते ४/१४५ याहा वइ गुरुवस्तु नाहि ४/१२९ | रस आस्वादिते आमि ४/२६४ | राधिका हयेन कृष्णेर ४/५९ याहा वइ सुनिर्मल ४/१३० | रस आस्वादिते तत्त्व ७/५ | राम-लक्ष्मण-कृष्ण ५/१५३ याहा हैते कृष्णभक्ति १/९२ | रसमय-मूर्त्ति कृष्ण ४/२२२ | रामेर चरित्र सब ५/१५० याहा हैते हय १/२४, ४/५८ | रसिक-शेखर कृष्ण ४/१६ | रासविलासी साक्षात् ५/२१२ युगधर्मकाल हैल ४/३८ | रसिकशेखर कृष्णेर ४/१०३ | रासादिक-लीला प्रभु ५/२२० युगधर्म नाम-प्रेम कैल ४/२२० | रहिते नाहिक स्थान ५/९५ | रासादि-लीलाय तिन ४/११५ युगधर्मप्रवर्त्तन नहे ४/३७ | रागमार्ग भक्ति लोके ४/१५ | रासादि-विलासी, व्रज ७/८ युगधर्म-प्रवर्त्तन हय ३/२६ | रागमार्गे भक्त भक्ति करे ४/२६५ | रुद्ररूप धरि' करे जगत् ५/१०५ युगधर्म प्रवर्त्तामु ३/१९ | रागमार्गे भजे येन ४/३३ | रूपे, गुणे, सौभाग्ये ४/२१४ ४७० | श्रीश्रीचैतन्यचरितामृत