श्री चैतन्य चरितामृत (कृष्णदास कविराज गोस्वामी - सम्पूर्ण आदि, मध्य एवं अन्त्य लीला)

श्री चैतन्य चरितामृत (कृष्णदास कविराज गोस्वामी - सम्पूर्ण आदि, मध्य एवं अन्त्य लीला)
Sri Chaitanya Charitamrita of Krishnadas Kaviraj with Hindi Commentary
श्रील कृष्णदास कविराज गोस्वामी द्वारा
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[ शुद्ध-सबे
| 'शुद्धभक्त'-तत्त्वमध्ये ताँ ७/१६ | श्री-भू-नीला-शक्ति ५/२८ | ५/१३२ |
| शुद्धभावे करिब ३/१०० | श्रीमदनगोपाल-श्रीगोविन्द ५/२११ | सकल सम्भवे ताँते २/१११, |
| शुद्धसत्त्वमय यत वैकुण्ठ ५/४३ | श्रीराधा-मदनमोहन प्रभु ५/२१६ | ५/१२७ |
| शुन उद्धव, सत्य, कृष्ण ६/५७ | श्रीराधा-ललिता-सङ्गे ५/२१३ | सङ्कर्षण-अवतार-कारण ६/८९ |
| शुनि' चमत्कार हैल ७/१३४ | श्रीराधिका हैते ४/७५ | सखा शुद्धसख्ये करे ४/२५ |
| शुनि' देखि' आनन्दित ७/१५३ | श्रीरामेर दास्य तिँहो ६/८८ | सच्चिदानन्द, पूर्ण, कृष्णेर ४/६१ |
| शुनिते ना पारि, फाटे ७/५१ | श्रीरूप-कृपाय पाइनु ५/२०३ | सज्जन, दुर्जन, पङ्गु ७/२६ |
| शुनिले खण्डिबे चित्तेर १/१०७ | श्रीरूप, सनातन, भट्ट १/३६ | सत्य एइ हेतु ४/६ |
| शुनिले जानिबे सब १/१०९ | श्रीवास, हरिदास, रामदास ६/४८ | सत्य-त्रेता-कलिकाले ३/३७ |
| 'शेष'-रूपे करे कृष्णेर ५/१० | श्रीवासादि, आर यत ५/१४४ | सत्य, त्रेता, द्वापर ३/७ |
| शेषलीलाय धरे नाम ३/३४ | श्रीवासादि परिषद ३/७४ | सदा आमा नाना नृत्य ४/१२४ |
| शेषलीलाय प्रभुर कृष्ण ४/१०७ | श्रीवासादि यत कोटि ७/१६ | सनकादि भागवत शुने ५/१२२ |
| शेष-शयन-जले करिल ५/९९ | सनातन-कृपाय पाइनु ५/२०३ | |
| श्याम-चिक्कण कान्ति, ५/१८४ | ष | सनातन गोसाञि आसि' ७/४७ |
| षड्विधैश्वर्य ताँहा सकल ५/४४ | सन्धिनी सार अंश ४/६४ | |
| श्र | षड्विधैश्वर्यपूर्ण, परतत्त्व ७/१३८ | संन्यास-आश्रम प्रभु ७/३३ |
| श्रवणादि भक्ति-कृष्ण ७/१४१ | षडैश्वर्यपूर्ण लक्ष्मीकान्त २/२३ | संन्यास करिया प्रभु कैला ७/३५ |
| श्रवणे, दर्शने आकर्षये ४/१४८ | संन्यासी हइया कर नर्त्तन ७/६८ | |
| श्रीअङ्ग, श्रीमुख येइ ३/६३ | स | संन्यासी हइया करेन ७/४१ |
| श्रीकृष्णचैतन्य आर प्रभु १/८७ | सङ्कर्षणेर विभूति सब ५/४४ | सब अवताररे करि २/६८ |
| श्रीकृष्णचैतन्य गोसाञि ४/२२२, | सङ्कीर्त्तन प्रचारिया सब ६/११२ | सब अण्डे प्रवेशिला ५/९४ |
| ४/४२५ | सङ्कीर्त्तन-प्रवर्त्तक ३/७६ | सब निस्तारिते करे ७/३८ |
| श्रीकृष्णचैतन्य प्रभु स्वयं १/४२ | सङ्कीर्त्तन-यज्ञे ताँरे ३/७६ | सब रस हैते शृङ्गारे ४/४४ |
| श्रीकृष्णचैतन्यरूपे कैल ४/१०० | संन्यासीर सङ्गे नाहि ७/४६ | सब श्रोतागणेर करि २/११६ |
| श्रीकृष्णचैतन्यरूपे सर्व ६/१०७ | संन्यासीरे कृपा लागि' ७/५६ | सब श्रोता-वैष्णवेरे १/३० |
| श्रीकृष्ण जानाये सब ३/३४ | सकल जगते मोरे ३/१५ | सबाकारे कृष्णनाम ७/१५० |
| श्रीगोलोक, श्वेतद्वीप ५/१७ | सकल जीवेर तिँहो हुये ५/११२ | सबा नमस्करि' गेला पाद ७/५९ |
| श्रीगोविन्द बसियाछेन ५/२१९ | सकल वेदेर हय ७/१३९ | सबा निस्तारिते प्रभु कृपा ७/३८ |
| श्रीचैतन्य-नित्यानन्द १/१०८ | सकल वैष्णव ताँर ५/१६३ | सबार आश्रय कृष्ण २/१०४ |
| श्रीचैतन्य-सेइ कृष्ण ५/१५६ | सकल वैष्णव, शुन १/३१ | सबा लञा निज-कार्य ५/१४५ |
| श्रीजीव, गोपालभट्ट १/३६ | सकल संन्यासी कहे ७/१३५, | सबा हैते सकलांशे ६/६८ |
| श्रीदामादि ब्रजे यत ६/६१ | १४७ | सबे आसि' कृष्ण-अङ्गे ४/१२ |
| श्रीबलराम गोसाञि मूल ५/८ | सकल संन्यासी मुञि ७/५४ | सबे एड़ाइल मात्र काशीर ७/३९ |
| श्रीभागवत-आदि शास्त्रेर ७/४८ | सकल सम्भवे कृष्ण २/११५, | सबे परिषद, सबे ५/१४५ |
४७२ | श्रीश्रीचैतन्यचरितामृत