श्री चैतन्य चरितामृत (कृष्णदास कविराज गोस्वामी - सम्पूर्ण आदि, मध्य एवं अन्त्य लीला)
Sri Chaitanya Charitamrita of Krishnadas Kaviraj with Hindi Commentary
श्रील कृष्णदास कविराज गोस्वामी द्वारा
पृष्ठ 515, कुल 2549 में से
संदर्भ में पढ़ेंसम्प्रदाय-सेइ ] सम्प्रदाय-अनुरोधे तत्त्व ७/१३६ | सहस्र विस्तीर्ण याँर ५/११८ | सेइकाले श्रीअद्वैत करेन ४/२७० सम्बन्ध, अभिधेय ७/१४६ | सहाय करेन ताँर लइया ६/११ | सेइ कृष्ण अवतारी २/१०९ सम्यक् आस्वादिते नारे ४/१५८ | साक्षात् कन्दर्प, यैछे ५/१८४ | सेइ कृष्ण अवतीर्ण २/९, सर्व-अवतार-बीज ५/८२, | साक्षात् व्रजेन्द्रसुत ५/२२५ | ६/८२, ७/९ ५/१०१ | साताइश चतुर्युग गेले ३/९ | सेइ कृष्ण-नवद्वीपे ५/६ सर्व अवतार-लीला ५/१३३ | साधनभक्ति हैते हय ७/१४२ | सेइ कृष्णनाम कभु ७/९६ सर्व-अवतारी कृष्ण ५/४ | साधिलेन निजवाञ्छा ४/५० | सेइकाले एक विप्र ७/५२ 'सर्वकान्ति'-शब्देर ४/९४ | सावरणे प्रभुरे १/४३ | सेइ क्षणे वृन्दावने करिनु ५/१९९ सर्वग, अनन्त, ब्रह्म ५/१५ | साम्प्रदायिक संन्यासी तुमि ७/६७ | सेइ गीत-श्लोके सुख ४/११० सर्वग, अनन्त, विभु ५/१८ | सायुज्य ना लय भक्त ३/१८ | सेइ गोपीगण-मध्ये ४/२१४ सर्वगुणखनि कृष्णकान्ता ४/६९ | सायुज्येर अधिकारी ताँहा ५/३८ | सेइ गोविन्द भजि आमि २/१६ सर्वचतुर्व्यूह-अंशी, तुरीय ५/२४ | सार्टि, सारूप्य आर ३/१८ | सेइ चारियुगे दिव्य ३/७ सर्वत्याग करि करे ४/१६९ | सालोक्य-सामीप्य-सार्टि ५/३० | सेइजन आह्लादिते पारे ४/२४० सर्वत्र मागिये १/२५ | सिंहग्रीव, सिंहवीर्य ३/३० | सेइ जले कैल अर्थ ५/९६ सर्वदा ईश्वर-तत्त्व ५/८८ | 'सिद्धलोक' नाम तार ५/३३ | सेइ त' अंशरे कहि ५/८१ सर्वपालिका, सर्व ४/८९ | सिद्धान्त बलिया चित्ते २/११७ | सेइ त' अनन्त, याँर ५/१२५ सर्व वेदसूत्रे करे कृष्णेर ७/१३१ | सुखवाञ्छा नाहि ४/१८६ | सेइ त' 'अनन्त' 'शेष' ५/१२० सर्वभावे करिल कृष्ण, ४/२६९ | सुवर्ण-कुण्डल कर्णे ५/१८६ | सेइ त' कारणार्णवे ५/५५ सर्वमन्त्रसार नाम, -एइ ७/७४ | सुवलित हस्त, पद ५/१८४ | सेइत' गोविन्द २/२२ सर्व-यज्ञ हैते ३/७७ | सूर्य चन्द्र बाहिरेर १/९७ | सेइ त' पुरुष याँर 'अंश' ५/९१ सर्वरूपे आस्वाद्ये कृष्ण ५/११ | सूर्यचन्द्र हरे यैछे १/८८ | सेइ त' पुरुष अनन्त ५/९४ सर्वलक्ष्मीगणेर तिँहो ४/९० | सूर्य जिनि' मणिगण करे ५/११८ | सेइ त' भक्तेर वाक्य २/१११ सर्वलक्ष्मीगणेर शोभा ४/९२ | सूर्यमण्डल येन बाहिरे ५/३४ | सेइ त' मायार दुइविध ५/५८ सर्व-सौन्दर्य-कान्ति ४/९२ | सूर्य येन सविग्रह २/२५ | सेइ त' सुमेधा ३/७७ सर्वांश आसि' तबे ५/१३१ | स्थितिकर्त्ता विष्णु ४/८ | सेइ तिनजनेर तुमि २/५६ सर्वाश्रय ईश्वरेर करि ७/१२९ | सृष्टिलीला-कार्य करे ५/९ | सेइ तिन जलशायी २/५० सर्वाश्रय, सर्वाद्भुत, ऐश्वर्य ५/४७ | सृष्टि-स्थिति-प्रलय ५/१०५ | सेइ तिन सुख कभु नहे ४/२६७ सर्वोपरि श्रीगोकुल ५/१७ | सृष्ट्यादि-निमित्ते येइ ५/८१ | सेइ तिनेर अंशी २/५७ सहस्र-चरण-हस्त ५/१०१ | सृष्ट्यादिक सेवा,-ताँर ५/१० | सेइ दुइ एक एबे ४/५७ सहस्रनामे कैल ताँर ३/४७ | से आनन्देर प्रति ४/२०१ | सेइ दुइ जगतेरे १/८६ सहस्र मस्तक ताँर ५/१०० | सेइ अंश लज्ञा ज्येष्ठ ५/१५४ | सेइ दुइ प्रभुर करि १/१०३ सहस्र-वदने करे कृष्ण ५/१२१ | सेइ अपराधे तार ५/२२६ | सेइ दुइ, याँर अंश ५/७६ सहस्रवदने येँहो शेष ६/७६ | सेइ अभिमान-सुखे ६/४२ | सेइ द्वारे आचण्डाले ४/४० 'सहस्रवदने' शेष नाहि ५/२३४ | सेह एक जीवेर १/९४ | सेइ द्वारे प्रवर्त्ताइल ४/२२६ पद्य-सूची | ४७३