भारतकोश
श्री चैतन्य चरितामृत (कृष्णदास कविराज गोस्वामी - सम्पूर्ण आदि, मध्य एवं अन्त्य लीला)

श्री चैतन्य चरितामृत (कृष्णदास कविराज गोस्वामी - सम्पूर्ण आदि, मध्य एवं अन्त्य लीला)

Sri Chaitanya Charitamrita of Krishnadas Kaviraj with Hindi Commentary

श्रील कृष्णदास कविराज गोस्वामी द्वारा

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पृष्ठ 516

[ सेइ-ह्लादिनीर सेइ নহে, याते कर्त्ता-हेतु ५/६२ सेइ नारायण कृष्णेर २/२८ सेइ नारायणेर मुख्य अङ्ग ६/२१ सेइ नेत्रे अविच्छिन्न बहे ५/१६५ सेइ पश्चतत्त्व मिलि' ७/२० सेइ पद्मनाले हैल चौद्द ५/१०३ सेइ पद्मे हैल ब्रह्मार ५/१०२ सेइ परव्योमे नारायणेर ५/४० सेइ परिकरगण सङ्गे ७/९ सेइ पुरुष सृष्टि-स्थिति ५/८० सेइ पुरुषादि-सबार २/१०५ सेइ पुरुषेर सङ्कर्षण ५/४६ सेइ प्रभु नित्यानन्द ५/१०७, ५/११६ सेइ प्रेमार आमि ४/१३२ सेइ प्रेमार राधिका ४/१३२ सेइभावे कहे—'मुञि ५/१३४ सेइ भावे मत्त प्रभु ४/१०८ सेइभावे सुख-दुःख ४/१०६ सेइ भावे हइ आमि ४/२२ सेइ बन्या ता-सबारे ७/३० सेइ बलराम-गौरसङ्गे ५/११ सेइ बलराम-सङ्गे ५/६ सेइ ब्रह्म गोविन्देर २/१५ सेइ भक्तगण हय १/६४ सेइ भावे अनुगत ताँर ६/८६ सेइभावे निजवाञ्छा ४/२२१ सेइ रस आस्वादिते ४/२२३ सेइ रात्रे प्रभु मोरे ५/१८० सेइ राधाभाव लञा ४/२२० सेइ लिखि, येइ शुनि ६/११३ सेइ विष्णु 'शेष'-रूपे ५/११७ सेइ विष्णु हय याँर ५/११६ सेइ सब अस्त्र ३/७२ सेइ सब महादक्ष धाञा ७/३० सेइ सब लभ्य एइ ५/२३२ सेइ सर्ववेदेर 'अभिधेय' ७/१४२ सेइ सिंह वसुक ३/३१ सेइ सुखमाधुर्य-घ्राणे ४/२६३ सेइ सुखे मत्त, किछु ६/१०४ सेइ सूत्र-एइ तार कैल ५/२३१ सेइ हैते संन्यासीर फिरे ७/१४९ सेतुबन्ध पर्यन्त कैला ७/१६७ से पुरुषेर अंश-अद्वैत ६/१० से प्रतिज्ञा भङ्ग हैल ४/१७९ से वैष्णवेर पदरेणु ५/२३० से मङ्गलाचरण हय १/२२ से माधुर्य बाड़े ४/१९० सेवक योगाय ताम्बूल ५/१९२ से-सब तोमार अंश २/४८ से सब पाइनु आमि ५/२३२ से से लीला करिब ४/२८ सेह गोविन्देर अंश २/१८ सेहो त' कृष्णेर ४/१८१ सेहो तोमार अंश ३/६९ स्तुति-भक्त्ये करे ताँर ६/४० स्त्री, वृद्ध, बालक, युवा ७/२५ स्थितिकर्त्ता विष्णु ४/८ स्वकीया-परकीया-रूपे ४/४६ स्वगण सहिते चैतन्येर ६/३३ स्वच्छ धौतवस्त्रे ४/१७० स्वजने करये यत्न ४/१६८ स्वतःप्रमाण वेद-प्रमाण ७/१३२ स्वतन्त्र लीलाय दुःख ५/१५० स्वप्नभङ्ग हैल, देखि ५/१९७ स्वामाधुर्य आस्वादिते ६/१०६ स्वमाधुर्य देखि' कृष्ण ४/१३७ स्वमाधुर्ये लोकेर मन ५/२१५ 'स्वयं-भगवत्ता' पिछे २/८२ स्वयं भगवान् २/८, ७०, ८८, १०६, १२०, ७/७ स्वयं भगवानेर कर्म ४/८ स्वयं-भगवानेर कृष्णत्व २/८३ स्वयंरूप कृष्णेर कायव्यूह १/८१ स्वरूप-ऐश्वर्ये ताँर नाहि ७/१३९ स्वरूप-गोसाञि-प्रभुर ४/१०५ स्वरूप गोसाञि मात्र ४/१६० स्वरूपविग्रह कृष्णेर ५/२७ स्वरूपशक्ति—'ह्लादिनी' ४/५९ स्वसुखार्थ सालोक्य ४/२०४ स्व-स्व-प्रेम-अनुरूप ४/१४३ स्वेद, कम्प, रोमाञ्चाश्रु ७/८९ ह हरिध्वनि करे लोक ७/१५९ हस्तमुखनेत्र-अङ्ग ६/३७ हासाय, नाचाय, मोरे ७/८२ हासि, कान्दि, नाचि, गाइ ७/७८ हिरण्यगर्भ, अन्तर्यामी ५/१०६ हिरण्यगर्भे आत्मा २/५१ हीनाचार कर केने, इथे ७/७० हृदये धरये ये चैतन्य ४/२३३ हृदये बाड़ये प्रेम-लोभ ४/१३६ हेनकाले आइल ४/२६९ हेन चित्र-लीला करे ७/१५२ हेन जीवतत्त्व लञा ७/१२० हेन नारायण,-याँर ५/१०७ हेन प्रभु नित्यानन्द, के ५/१२५ हेन ये गोविन्द प्रभु, ५/२२७ हैते पुरुष करे मायाते ५/६५ ह्लादिनी कराय कृष्णे ४/६० ह्लादिनीर द्वारा करे ४/६० ह्लादिनीर सार 'प्रेम' ४/६८ ४७४ | श्रीश्रीचैतन्यचरितामृत