श्री चैतन्य चरितामृत (कृष्णदास कविराज गोस्वामी - सम्पूर्ण आदि, मध्य एवं अन्त्य लीला)

श्री चैतन्य चरितामृत (कृष्णदास कविराज गोस्वामी - सम्पूर्ण आदि, मध्य एवं अन्त्य लीला)
Sri Chaitanya Charitamrita of Krishnadas Kaviraj with Hindi Commentary
श्रील कृष्णदास कविराज गोस्वामी द्वारा
DevanagariHindipublished2,549 पृष्ठ
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वन्दे चैतन्यकृष्णस्य 14/5 | शाखारूपान् भक्तगणान् 10/7 | सुजनस्येव येषां वै 9/46 वन्दे चैतन्यदेवं तं भगवन्तं 8/1 | श्रीचैतन्यपदाम्भोज 10/1 | सुमनोऽर्पणमात्रेण तं 15/1 वन्दे श्रीकृष्णचैतन्य 10/7 | श्रीचैतन्यामरतरोर्द्वितीय 12/3 | सेयं साधनसाहस्रैर्हरि 8/17 वन्दे स्वैराद्भुतेहं तं 17/1 | श्रीमदद्वैतचन्द्रस्य शाखा 12/3 | स्याद्वपुः सुन्दरमपि 16/71 विद्यारम्भमुखा पाणिग्रहणा 15/4 | सङ्कल्पो विदितः साध्यो 14/69 | हरावभक्तस्य कुतो 8/58 विद्या-सौन्दर्य-सद्देश 17/4 | स प्रसीदतु चैतन्यदेवो 13/1 | हरेर्नाम हरेर्नाम हरे 17/21 विस्मृते विपरीतं स्यात् 14/1 | सर्वसद्गुणपूर्णां तां 13/19 | हित्वाऽसारान् सारभृतो 12/1
272 | श्रीचैतन्यचरितामृत