श्री चैतन्य चरितामृत (कृष्णदास कविराज गोस्वामी - सम्पूर्ण आदि, मध्य एवं अन्त्य लीला)
Sri Chaitanya Charitamrita of Krishnadas Kaviraj with Hindi Commentary
श्रील कृष्णदास कविराज गोस्वामी द्वारा
पृष्ठ 809, कुल 2549 में से
संदर्भ में पढ़ेंप्रयोजनीय अंशकी पद्य-सूची [वर्णक्रमानुसार प्रथम और द्वितीय चरण] अ अतएव दुइगणे दुँहार 11/15 अनन्तदास, कानुपण्डित 12/61 अतएव प्रभु ताँरे बले 13/78 अनन्त नित्यानन्दगण-के 11/57 अङ्के लञा शची ताँरे 14/10 अतएव पुनः कहों 8/13 अनन्त वैकुण्ठ-ब्रह्माण्ड 17/105 अङ्गसेवा गोविन्देर दिलेन 10/141 अतएव बाल्यलीला संक्षेपे 14/96 अनर्गल प्रेम सबार, चेष्टा 11/59 अञ्जलि अञ्जलि भरि' 9/30 अतएव भज, लोक, चैतन्य 8/43 अनायासे पाइल सेइ 12/74 अ-कलङ्क गौरचन्द्र 13/91 अतएव भागवते व्यासेर 17/312 अनायासे भवक्षय, कृष्णेर 8/28 अकिञ्चन प्रभुर प्रिय 10/66 अतएव 'विश्वरूप' नाम 13/76 अनुपम, जीव, राजेन्द्रादि 10/85 अक्रूर बलि' प्रभु याँरे 10/76 अतएव शब्दालङ्कार 16/75 अनुपम वल्लभ, श्रीरूप 10/84 अग्नि उल्का मोर मुखे 17/189 अतएव सब फल देह' 9/39 अन्तरीक्षे देवगण 13/106 अचिन्त्य, अद्भुत कृष्ण 17/306 अतएव 'हरि' 'हरि' बले 13/24 अन्तरे ईश्वर-चेष्टा, बाहिरे 11/10 अचिन्त्य चरित्र प्रभुर 17/304 अतएव हिन्दुमात्र ना करे 17/159 अन्तरे जानिला प्रभु 16/22 अचिरे मिलिबे तारे 17/332 अतएव हैल ताँर 13/25 अन्तरे विस्मित शची 14/30 अच्युतानन्द-अद्वैत 10/150 अतिथि-विप्रेर अन्न खाइल 14/37 अन्तर्धान कैला सङ्गेत 17/282 अच्युतानन्द-प्राय, चैतन्य 12/75 अत्यन्त विरक्त, सदा 11/31 अन्न-जल त्याग कैल 10/98 अच्युतानन्द-बड़ शाखा 12/13 'अद्भुतगुणा'-एइ पुनराय 16/66 अन्यथा ये माने, तार 17/25 अट्ट अट्ट हासे, करे 17/180 अद्भुत चैतन्यलीलाय याहार 17/309 अन्य लोक नाहि जाने 17/87 अतएव अवश्य आमि 17/265 अद्यापि याँहार कृपा-महिमा 11/11 अन्वेषिते आइला ताहाँ 17/283 अतएव आदिखण्डे 13/18 अद्यापिह देख चैतन्य 8/22 अपत्य-विरहे मिश्रेर 13/73 अतएव आपने प्रभु 17/303 अद्वैत आचार्य, आर पण्डित 13/55 अपरश याय गोसाञि 10/142 अतएव आमि आज्ञा 9/36 अद्वैत-आचार्येर स्थाने 13/63 अपराध नाहि, कैले लोकेर 17/97 अतएव गोवध करे बड़ 17/158 अद्वैत-आचार्य-गोसाञि 17/298 अमोघ पण्डित, हस्तिगोपाल 12/86 अतएव गोवध केह ना 17/163 अद्वैत-आचार्य-भार्या 13/111 अयाचित-वृत्ति, किम्बा 17/29 अतएव जरद्गव मारे 17/161 अद्वैत-आचार्य-महाविष्णु 17/319 अलङ्कार नाहि पड़, नाहि 16/92 अतएव तटे रहि' चाकि 12/94 अद्वैत पाइल विश्वरूप 17/10 अलौकिक ऐछे प्रभुर 10/59 अतएव ताँ-सबार वन्दिये 12/92 अध्ययन-लीला प्रभुर दास 15/7 अलौकिक प्रेम ताँर 11/24 अतएव ताँ-सबारे करि' 10/6 अनन्त आचार्य, कविदत्त 12/80 अलौकिक वृक्ष करे 9/32 अतएव दण्ड करि' 12/35 अनन्त चैतनलीला क्षुद्र 13/44 अल्पकाले हैला पञ्जी 15/6 अतएव दिङमात्र इहाँ 15/33 अनन्त चैतन्यभक्त ना 10/121 अल्प दिने द्वादश-फला 14/94