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श्री चैतन्य चरितामृत (कृष्णदास कविराज गोस्वामी - सम्पूर्ण आदि, मध्य एवं अन्त्य लीला)

Sri Chaitanya Charitamrita of Krishnadas Kaviraj with Hindi Commentary

श्रील कृष्णदास कविराज गोस्वामी द्वारा

DevanagariHindipublished2,549 पृष्ठ

530 श्रीश्रीचैतन्यचरितामृत अन्त्यलीला प्राक्त-विक्षि ] प्राक्तन-प्राचीन प्रादुर्भूत-आविर्भूत, अवतरित प्रादेशिक वाक्य-प्रसङ्गत, स्थानीय वाक्य प्रापक-प्राप्त करने या करानेवाला प्रापञ्चिक-जगत् या प्रपञ्च-सम्बन्धी प्राप्य-प्राप्त होने योग्य प्रार्थित-प्रार्थना किया हुआ प्रेमास्पद-प्रेमका स्थल प्रेमोत्कर्ष-प्रेमका उत्कर्ष ब बाहुल्य-अधिकता बाह्य अङ्ग-बाहरी अङ्ग बहिर्वास-शरीरके ऊपरी भागको लपेटनेवाला वस्त्र बिद्ध-छेदा हुआ, आहत बृहत्-बड़ा बोधगम्य-समझमें आने योग्य ब्रह्मलय-ब्रह्ममें लय होना ब्रह्मवेत्ता-ब्रह्मको जाननेवाला ब्रह्मानन्द-ब्रह्मका आनन्द ब्रह्मानुभूति-ब्रह्मकी अनुभूति भ भक्तानन्दायिनी-भक्तोंको आनन्द देनेवाली भोक्तृत्वभाव-भोक्ता होनेका भाव म मत्सम्बन्धी-मेरे सम्बन्धी मत्सरता-डाह, जलन, द्वेष मथन-मथनेका भाव मधुरिमा-माधुर्य मन्वन्तर-ब्रह्माजीके दिनका चौदहवाँ भाग मन्तव्य-विचार, मत मर्मार्थ-सार महत्-बड़ा मायाच्छन्न-मायाके द्वारा आच्छन्न मुकुलित-आधा विकसित मुमुक्षु-मुक्तिकी इच्छा करनेवाला मेधायुक्त-मेधावी मोहान्ध-मोहसे अन्धा म्लेच्छ-चारो वर्णोंसे भी नीच य यतिगण-संन्यासी लोग याग-यज्ञ यादृच्छिक-स्वतन्त्र, ऐच्छिक युक्तियुक्त-उचित, युक्तिपूर्ण युगपत्-एक ही समयमें, साथ-साथ युगावतार-प्रत्येक युगमें लेनेवाले अवतार योगमाया-भगवान्‌की परा शक्ति योगस्थैर्य-योगकी स्थिरता र रक्तिम-लालिमायुक्त रञ्जित-रंगा हुआ रूक्ष-रूखा, नीरस ल लिङ्गशरीर-सूक्ष्म शरीर लिप्सा-किसी वस्तुको पानेकी इच्छा लुब्ध-ललचाया हुआ, लोभित लोकपाल-लोकका पालन करनेवाला लोकप्रवर्त्तन-लोगोंके कल्याणके लिये व वञ्चक-वञ्चना करनेवाला वयस-उम्र वर्चस्व-अधिकार वर्णविशिष्ट-वर्णवाला वर्णसङ्कर-भिन्न जातियोंके स्त्री-पुरुषसे उत्पन्न वाक्-वाणी, बोलनेकी इन्द्रिय वाचाल-अधिक बोलनेवाला वागिन्द्रिय-जिह्वा विक्षिप्त-पागल, उद्विग्न

[ विगु-साम्य शब्दकोश 531 विगुण—गुणहीन विच्युति—भूल, पतन, वियोग विजितात्मा—जिसने मनको जीत लिया है विज्ञ—पण्डित, जाननेवाला विदित—मालूम विधर्म—धर्मविरुद्ध विधिवादिगण—नैतिक लोग विधेय—करने योग्य विधेयात्मा—जिसकी आत्मा संयत हो विन्यास—व्यवस्थित करना विपर्यय—प्रतिकूलता, विपरीतता विभूति—ऐश्वर्य विरहकातर—विरहसे कातर विरोधाभास—विचारमें विरोध प्रतीत होना विलास—क्रीड़ा विवक्षित—इच्छित, कथित विवृत—स्पष्ट, व्यक्त विशारद—निपुण विशिष्ट—विशेषतायुक्त विशिष्टता—विशेषता विशुद्धचित्त—जिसका चित्त शुद्ध है विशेषत्व—विशेषता विषयणी—विषयसे सम्बन्धित विहित—आदेश किया हुआ वृष्टि—वर्षा वेदज्ञ—वेदोंके जाननेवाला वैषम्य—विषमता व्यङ्गोक्ति—गूढ़भाषा, वह भाषा जिसमें व्यङ्ग हो व्यतिक्रम—उल्लङ्घन व्यतिरेक—असङ्गति, निषेध व्यवहृत—व्यवहार किया हुआ व्योम—आकाश श शोच्य—शोचनीय शैव—शिवके उपासक श्रुत—सुना हुआ श्रोतव्य—सुनने योग्य श्लेषोक्ति—छिपे अर्थवाली बात ष षडैश्वर्यपूर्ण—छः ऐश्वर्योंसे परिपूर्ण स सङ्कीर्णता—उदार ना होनेका भाव संवरण—छिपाना संवेदन—अनुभूति संस्पर्श—अच्छी तरहसे होनेवाला स्पर्श संहर्त्ता—संहार करनेवाला सङ्गति—मेल सञ्चित—जमा किया हुआ सदातन—विष्णु सद्विवेकी—सद् विवेकवाला समत्वभाव—समताका भाव सन्निविष्ट—उत्तम रूपसे एकाग्र समाहर—समुच्चय, समूह समाहित—संयमित, व्यवस्थित सम्बन्धविशिष्ट—सम्बन्धवाला सम्मत—सहमत, एक मत समन्वित—संयुक्त, स्वाभाविक रूपसे क्रमबद्ध सम्यक्—भलीभाँति, अच्छी तरह सर्वतन्त्र—समस्त सिद्धान्त सर्वतोभावेन—सम्पूर्ण रूपसे सर्वभूतात्मा—सभी जीवोंके आत्मा अर्थात् परमात्मा सर्वभुक्—सब कुछ खा जानेवाला सर्वात्मकत्व—सर्वात्मकता सहस्र—हजार साम—सामवेद सामर्थ्यविशिष्ट—सामर्थ्यवान् साम्यलक्षण—समानताका लक्षण

532 श्रीश्रीचैतन्यचरितामृत अन्त्यलीला सार-हृद ] सारगर्भित—तत्त्वपूर्ण स्पृहा—इच्छा, आकाङ्क्षा सालोक्य मुक्ति—जीवका भगवान्‌के साथ स्फुरण—व्यक्त होना एक ही लोकमें वास करना स्फुलिङ्ग—चिङ्गारी साष्टाङ्ग प्रणाम—आठ अङ्गोंसे प्रणाम (सिर, स्मार्त्त—स्मृति शास्त्रका अनुयायी हाथ, पैर, आँख, जंघा, हृदय, स्थायित्व—स्थिरता वचन और मन) स्रुवा—घीमें आहुति डालनेकी करछी सुखान्वेषी—सुखकी खोज करनेवाला स्वच्छन्द—स्वतन्त्र सुदुराचारी—अति दुराचारी स्वधर्मस्थ—अपने धर्ममें स्थित सुधा—अमृत स्वयंभू—स्वयं उत्पन्न सुरस—रसयुक्त स्वानन्दपूर्ण—अपने आनन्दमें पूर्ण सुष्ठु—भली भाँति, अच्छी तरह ह सुस्पष्ट—विशेषरूपसे स्पष्ट हत—मरा हुआ सौम्य—सुन्दर, कोमल हतभागा—भाग्यहीन स्खलित—गिरा हुआ हन्त—मारना स्निग्ध—स्नेहयुक्त, प्रियता हिरण्यगर्भ—ब्रह्मा स्नेहाधिक्य—स्नेहकी अधिकता हेयता—तुच्छता स्फूर्ति—स्फुरण, व्यक्त होना हृदगत—हृदय-सम्बन्धी