श्रीलिंगमहापुराण

श्रीलिंगमहापुराण
Linga MahaPurana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
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| अध्याय | विषय | पृष्ठ-संख्या | अध्याय | विषय | पृष्ठ-संख्या |
|---|---|---|---|---|---|
| २५- | शिवहोमार्चाके लिये कुण्ड-मेखला-निर्माण, अरणि-मन्थन, पात्रासादन, आज्यसंस्कार, अग्निसंस्कार तथा हवन-विधानका वर्णन | ६७५ | ४२- | सुवर्णगजदानविधि | ७२७ |
| ४३- | लोकपालाष्टकमहादानविधि | ७२८ | |||
| २६- | शिवलिङ्गमें अघोरार्चनकी विधि और उसका माहात्म्य | ६८५ | ४४- | त्रिमूर्तिदानविधि | ७२९ |
| २७- | राजाओंको विजयप्राप्ति करानेवाले विजयमण्डलके निर्माण तथा पूजनकी विधि एवं जयाभिषेकका वर्णन; स्वायम्भुव मनु और विभिन्न देवताओंके जयाभिषेकका विवरण | ६८८ | ४५- | जीवितावस्थामें किये जानेवाले जीवच्छ्राद्धका विधान | ७३० |
| ४६- | लिङ्गमें सभी देवताओंकी स्थितिका वर्णन और लिङ्गार्चनसे सभीके पूजनका फलनिरूपण | ७३४ | |||
| ४७- | लिङ्गमूर्तिकी प्रतिष्ठाकी विधि | ७३६ | |||
| २८- | स्वायम्भुव मनुके प्रति सनत्कुमारप्रोक्त षोडश महादानोंमें तुलापुरुषदानकी विधिका वर्णन | ७०७ | ४८- | देवताओंकी प्रतिमाओंकी संक्षेपमें प्रतिष्ठा-विधि तथा विविध देवताओंके गायत्रीमन्त्र | ७४० |
| २९- | षोडशमहादानान्तर्गत हिरण्यगर्भदानकी विधि | ७१५ | ४९- | अघोरेश्वररूप भगवान् शिवके निमित्त किये गये जप, हवन एवं पूजनका फल | ७४४ |
| ३०- | तिलपर्वतदानविधि | ७१६ | ५०- | विभिन्न कामनाओंके लिये अघोरमन्त्रसिद्धिका विधान | ७४५ |
| ३१- | सूक्ष्म तिलपर्वतदानकी विधि | ७१७ | ५१- | भगवान् शिवकी संहारिका शक्ति-वज्रेश्वरीविद्याके माहात्म्यमें वृत्रासुरकी उत्पत्तिकी कथा | ७४९ |
| ३२- | सुवर्णपृथ्वीमहादानविधि | ७१८ | ५२- | वज्रेश्वरीविद्याकी सिद्धिका विधान | ७५१ |
| ३३- | कल्पपादपदानविधि | ७१९ | ५३- | मृत्युंजयहवन-विधान | ७५३ |
| ३४- | गणेशेशदानविधि | ७२० | ५४- | मृत्युहर त्र्यम्बकमन्त्रका माहात्म्य तथा मन्त्रका व्याख्यान | ७५३ |
| ३५- | सुवर्णधेनुदानविधि | ७२० | ५५- | योगमार्गके द्वारा भगवान् महेश्वरके ध्यानकी विधि, पाँच प्रकारके योग, शिवपाशुपतयोगकी महिमा, श्रीलिङ्गमहापुराणका परिचय तथा श्रीलिङ्गमहापुराणके श्रवण एवं पठनका माहात्म्य | ७५६ |
| ३६- | ऐश्वर्यप्रद महालक्ष्मीदानविधि | ७२१ | |||
| ३७- | तिलधेनुदानविधिनिरूपण | ७२२ | |||
| ३८- | महादानोंमें परिगणित गोसहस्रदानकी विधि | ७२४ | |||
| ३९- | हिरण्याश्वदानविधि | ७२५ | |||
| ४०- | कन्यादानविधि | ७२६ | |||
| ४१- | हिरण्यवृषभमहादानविधि | ७२६ |
श्रीलिङ्गमहापुराण-परिशिष्ट
| अध्याय | विषय | पृष्ठ-संख्या | अध्याय | विषय | पृष्ठ-संख्या |
|---|---|---|---|---|---|
| १- | अविमुक्तक्षेत्रकी महिमा और वहाँ स्थित लिङ्गायतनका वर्णन | ७६२ | ९- | व्याघ्रेश्वर, दण्डीश्वर, जैगीषव्येश्वर तथा शातातपेश्वर आदि लिङ्गोंका वर्णन | ८०० |
| २- | मातृमण्डल और आकाशलिङ्गका वर्णन | ७७० | १०- | गभस्तीश्वर तथा उसके समीपस्थ लिङ्गोंका माहात्म्य एवं कलशेश्वरलिङ्गकी उत्पत्ति-कथा | ८०४ |
| ३- | सगेश्वर, भद्रेश्वर, शूलेश्वर, नारदेश्वर, वरणेश्वर तथा कोटीश्वर आदि लिङ्गोंका वर्णन | ७७२ | ११- | कलशेश्वरके समीपस्थ लिङ्गोंके माहात्म्यका वर्णन | ८११ |
| ४- | कपालमोचन, ऋणमोचन एवं कपिलेश्वर आदि तीर्थोंका माहात्म्य | ७७४ | १२- | अविमुक्त तथा उसके समीपस्थ लिङ्गोंका माहात्म्य-वर्णन | ८१६ |
| ५- | कपिलेश्वरमें सिद्धि प्राप्त करनेवाले मुनियोंका वर्णन | ७७८ | १३- | भगवान् श्रीराम, दत्तात्रेय, हरिकेश, प्रियव्रत तथा ब्रह्माजीद्वारा स्थापित लिङ्गोंका वर्णन | ८१९ |
| ६- | श्रीकण्ठ, ओंकारेश्वर और बृहस्पतीश्वर आदि लिङ्गोंकी महिमाका वर्णन | ७७९ | १४- | हरिश्चन्द्रेश्वर, नैर्ऋतेश्वर, अम्बरीषेश्वर, शंकुकर्णेश्वर, कपर्दीश्वर, अंगारेश्वर तथा छागलेश्वर आदि लिङ्गोंकी महिमाका वर्णन | ८२२ |
| ७- | कामेश्वर, भीष्मेश्वर, बालखिल्येश्वर, सनकेश्वर, मार्कण्डेश्वर, दधीचेश्वर तथा कालेश्वर आदि लिङ्गोंका वर्णन | ७८२ | १५- | चतुर्दशायतन, अष्टायतन तथा पंचायतनयात्राका वर्णन | ८२५ |
| ८- | कृत्तिवासेश्वर तथा उसके समीपस्थ लिङ्गोंका वर्णन | ७९२ | १६- | काशीमें लिङ्गार्चनकी महिमा | ८३० |