श्रीलिंगमहापुराण

श्रीलिंगमहापुराण
Linga MahaPurana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
DevanagariHindipublished833 पृष्ठ
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अध्याय ४६ ] भुवनसन्निवेशमें सात द्वीपों तथा सात समुद्रोंका वर्णन २०५
| संस्कृत श्लोक | हिन्दी अनुवाद |
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| जलदं च कुमारं च सुकुमारं मणीचकम्।<br>कुसुमोत्तरमोदाकी सप्तमस्तु महाद्रुमः॥ २५<br>जलदं जलदस्याथ वर्षं प्रथममुच्यते।<br>कुमारस्य तु कौमारं द्वितीयं परिकीर्तितम्॥ २६<br>सुकुमारं तृतीयं तु सुकुमारस्य कीर्त्यते।<br>मणीचकं चतुर्थं तु माणीचकमिहोच्यते॥ २७<br>कुसुमोत्तरस्य वै वर्षं पञ्चमं कुसुमोत्तरम्।<br>मोदकं चापि मोदाकेर्वर्षं षष्ठं प्रकीर्तितम्॥ २८<br>महाद्रुमस्य नाम्ना तु सप्तमं तन्महाद्रुमम्।<br>तेषां तु नामभिस्तानि सप्त वर्षाणि तत्र वै॥ २९ | शक्तिशाली राजा हव्यने भी जलद, कुमार, सुकुमार, मणीचक्र, कुसुमोत्तर, मोदाकी और सातवें महाद्रुम—इन पुत्रोंको उत्पन्न किया। जलदके नामसे जलद नामक प्रथम वर्ष कहा जाता है। कुमारके नामसे कौमार नामक दूसरा वर्ष कहा गया है। सुकुमारके नामसे सुकुमार नामक तीसरा वर्ष कहा जाता है। मणीचकके नामसे माणीचक नामक चौथा वर्ष कहा जाता है। कुसुमोत्तरके नामसे कुसुमोत्तर नामक पाँचवाँ वर्ष एवं मोदाकीके नामसे मोदक नामक छठा वर्ष कहा गया है। महाद्रुमके नामसे सातवाँ महाद्रुम नामक वर्ष कहा गया है। इस प्रकार उनके नामोंसे वे सात वर्ष हैं॥ २२—२९॥ |
| क्रौञ्चद्वीपेश्वरस्यापि पुत्रा द्युतिमतस्तु वै।<br>कुशलो मनुगश्चोष्णः पीवरश्चान्धकारकः॥ ३०<br>मुनिश्च दुन्दुभिश्चैव सुता द्युतिमतस्तु वै।<br>तेषां स्वनामभिर्देशाः क्रौञ्चद्वीपाश्रयाः शुभाः॥ ३१ | क्रौञ्चद्वीपके राजा द्युतिमान्के भी कुशल, मनुग, उष्ण, पीवर, अन्धकार, मुनि और दुन्दुभि—ये पुत्र उत्पन्न हुए। जो द्युतिमान्के पुत्र थे, उन्हींके अपने-अपने नामोंसे क्रौञ्चद्वीपमें स्थित शुभ देश प्रसिद्ध हुए॥ ३०-३१॥ |
| कुशलदेशः कुशलो मनुगस्य मनोज्ञनुगः।<br>उष्णास्योष्णः स्मृतो देशः पीवरः पीवरस्य च॥ ३२<br>अन्धकारस्य कथितो देशो नाम्नान्धकारकः।<br>मुनेर्देशो मुनिः प्रोक्तो दुन्दुभेर्दुन्दुभिः स्मृतः॥ ३३<br>एते जनपदाः सप्त क्रौञ्चद्वीपेषु भास्वराः। | कुशलके देशको कुशल, मनुगके देशको मनोज्ञनुग, उष्णके देशको उष्ण और पीवरके देशको पीवर कहा गया है। अन्धकारके देशको उनके नामपर अन्धकार कहा गया है। मुनिके देशको मुनि कहा गया है और दुन्दुभिके देशको दुन्दुभि कहा गया है। क्रौञ्चद्वीपमें ये सात प्रकाशमान जनपद (देश) हैं॥ ३२-३३½॥ |
| ज्योतिष्मन्तः कुशद्वीपे सप्त चासन्महौजसः॥ ३४<br>उद्भिदो वेणुमांश्चैव द्वैरथो लवणो धृतिः।<br>षष्ठः प्रभाकरश्चापि सप्तमः कपिलः स्मृतः॥ ३५<br>उद्भिदं प्रथमं वर्षं द्वितीयं वेणुमण्डलम्।<br>तृतीयं द्वैरथं चैव चतुर्थं लवणं स्मृतम्॥ ३६<br>पञ्चमं धृतिमत्षष्ठं प्रभाकरमनुत्तमम्।<br>सप्तमं कपिलं नाम कपिलस्य प्रकीर्तितम्॥ ३७ | कुशद्वीपके राजा ज्योतिष्मान्के सात महापराक्रमी पुत्र हुए। वे उद्भिद, वेणुमान्, द्वैरथ, लवण, धृति, छठें प्रभाकर और सातवें कपिल कहे गये हैं। [उद्भिदके नामसे] पहला वर्ष उद्भिद, [वेणुमान्के नामसे] दूसरा वर्ष वेणुमण्डल, [द्वैरथके नामसे] तीसरा वर्ष द्वैरथ और [लवणके नामसे] चौथा वर्ष लवण कहा गया है। इसी प्रकार [धृतिके नामसे] पाँचवाँ वर्ष धृति, [प्रभाकरके नामसे] छठा उत्तम वर्ष प्रभाकर और कपिलके नामसे सातवाँ वर्ष कपिल कहा गया है॥ ३४—३७॥ |
| शाल्मलस्येश्वराः सप्त सुतास्ते वै वपुष्मतः।<br>श्वेतश्च हरितश्चैव जीमूतो रोहितस्तथा॥ ३८<br>वैद्युतो मानसश्चैव सुप्रभः सप्तमस्तथा।<br>श्वेतस्य देशः श्वेतस्तु हरितस्य च हारितः॥ ३९ | शाल्मलिद्वीपके राजा वपुष्मान्के भी सात पुत्र हुए। वे [पृथक्-पृथक् देशोंके] राजा बने। श्वेत, हरित, जीमूत, रोहित, वैद्युत, मानस और सातवाँ सुप्रभ—ये पुत्रोंके नाम हैं। श्वेतके देशको श्वेत, हरितके देशको |