भारतकोश
श्रीलिंगमहापुराण

श्रीलिंगमहापुराण

Linga MahaPurana

महर्षि वेदव्यास द्वारा

DevanagariHindipublished833 पृष्ठ

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| २७८ | श्रीलिङ्गमहापुराण | [ पूर्वभाग | | :--- | :--- |

संस्कृत श्लोकहिन्दी अनुवाद
मानवेयो महाभागः स्त्रीपुंसोर्लक्षणान्वितः।<br>इक्ष्वाकोरभवद्वीरो विकुक्षिर्धर्मवित्तमः॥ ३१हुई और स्त्री-पुरुषके लक्षणोंसे युक्त, महायशस्वी तथा महाभाग्यशाली मनुपुत्र [सुद्युम्न]-ने राज्य प्राप्त करके उसे पुरूरवाको दे दिया॥ २८-३०१/२॥<br><br>सौ पुत्रोंवाले इक्ष्वाकुके ज्येष्ठ पुत्र विकुक्षि थे; वे महान् धर्मज्ञ थे।
ज्येष्ठः पुत्रशतस्यासीद्दश पञ्च च तत्सुताः।<br>अभूज्ज्येष्ठः ककुत्स्थश्च ककुत्स्थात्तु सुयोधनः॥ ३२उनके पचास पुत्र हुए; उनमें ककुत्स्थ सबसे बड़े थे। ककुत्स्थसे सुयोधन उत्पन्न हुए।
ततः पृथुर्मुनिश्श्रेष्ठा विश्वकः पार्थिवस्तथा।<br>विश्वकस्यार्द्रको धीमान् युवनाश्वस्तु तत्सुतः॥ ३३हे श्रेष्ठ मुनियो! उन [सुयोधन]-से पृथु और पृथुसे विश्वक उत्पन्न हुए। विश्वकके पुत्र बुद्धिमान् आर्द्रक थे और उनके पुत्र युवनाश्व थे।
शाबस्तिश्च महातेजा वंशकस्तु ततोऽभवत्।<br>निर्मिता येन शाबस्ती गौडदेशे द्विजोत्तमाः॥ ३४हे श्रेष्ठ द्विजो! उनके पुत्र महातेजस्वी शाबस्ति थे, जिन्होंने गौड़देशमें शाबस्ती नगरीका निर्माण किया।
वंशाच्च बृहदश्वोऽभूत्कुवलाश्वस्तु तत्सुतः।<br>धुन्धुमारत्वमापन्नो धुन्धुं हत्वा महाबलम्॥ ३५उनसे वंशक [नामक पुत्र] उत्पन्न हुए और वंश [वंशक]-से बृहदश्व हुए। कुवलाश्व उन [बृहदश्वके] पुत्र थे; उन्होंने महाबली ‘धुन्धु’ को मारकर धुन्धुमार नाम प्राप्त किया था।
धुन्धुमारस्य तनयास्त्रयस्त्रैलोक्यविश्रुताः।<br>दृढाश्वश्चैव चण्डाश्वः कपिलाश्वश्च ते स्मृताः॥ ३६धुन्धुमारके तीन पुत्र हुए, जो तीनों लोकोंमें प्रसिद्ध थे; वे दृढाश्व, चण्डाश्व तथा कपिलाश्व [नामवाले] कहे गये हैं।
दृढाश्वस्य प्रमोदस्तु हर्यश्वस्तस्य वै सुतः।<br>हर्यश्वस्य निकुम्भस्तु संहताश्वस्तु तत्सुतः॥ ३७दृढाश्वके पुत्र प्रमोद और उनके पुत्र हर्यश्व थे। हर्यश्वके पुत्र निकुम्भ और उन [निकुम्भ]-के पुत्र संहताश्व थे।
कृशाश्वोऽथ रणाश्वश्च संहताश्वात्मजावुभौ।<br>युवनाश्वो रणाश्वस्य मान्धाता तस्य वै सुतः॥ ३८संहताश्वके कृशाश्व तथा रणाश्व [नामक] दो पुत्र थे। रणाश्वके पुत्र युवनाश्व थे और उन [युवनाश्व]-के पुत्र मान्धाता थे।
मान्धातुः पुरुकुत्सोऽभूदम्बरीषश्च वीर्यवान्।<br>मुचुकुन्दश्च पुण्यात्मा त्रयस्त्रैलोक्यविश्रुताः॥ ३९मान्धाताके तीन पुत्र हुए—पुरुकुत्स, पराक्रमी अम्बरीष तथा पुण्यात्मा मुचुकुन्द;