श्रीलिंगमहापुराण

श्रीलिंगमहापुराण
Linga MahaPurana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
DevanagariHindipublished833 पृष्ठ
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| अध्याय १०२] | पार्वतीकी तपस्यासे प्रसन्न हो भगवान् शिवका उन्हें वरदान देना | ५३१ | | :--- | :--- |
| संस्कृत श्लोक | हिन्दी अनुवाद |
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| स एवं परमेशानः स्वयं च वरयिष्यति।<br>वरदे येन सृष्टासि न विना यस्त्वयाम्बिके॥ ७<br><br>वर्तते नात्र सन्देहस्तव भर्ता भविष्यति। | हमलोग जिन देवाधिदेवके सेवक कहे जाते हैं, वे परमेश्वर ही स्वयं आपका वरण करेंगे। हे वरदे! जिन्होंने आपका सृजन किया है और हे अम्बिके! जो आपके बिना रह नहीं सकते; वे [शिवजी] आपके पति होंगे; इसमें सन्देह नहीं है'॥ ३—७½॥ |
| इत्युक्त्वा तां नमस्कृत्य मुहुः सम्प्रेक्ष्य पार्वतीम्॥ ८<br><br>गते पितामहे देवो भगवान् परमेश्वरः।<br>जगामानुग्रहं कर्तुं द्विजरूपेण चाश्रमम्॥ ९ | ऐसा कहकर उन पार्वतीको नमस्कार करके बार-बार उनकी ओर देखकर पितामह (ब्रह्मा)-के चले जानेपर भगवान् परमेश्वर [शिव] अनुग्रह करनेके लिये ब्राह्मणके रूपमें उस आश्रममें गये॥ ८-९॥ |
| सा च दृष्ट्वा महादेवं द्विजरूपेण संस्थितम्।<br>प्रतिभाद्यैः प्रभुं ज्ञात्वा ननाम वृषभध्वजम्॥ १०<br><br>सम्पूज्य वरदं देवं ब्राह्मणं छद्मनागतम्।<br>तुष्टाव परमेशानं पार्वती परमेश्वरम्॥ ११ | द्विजरूपसे उपस्थित महादेवको देखकर उन पार्वतीने उनकी दीप्ति आदिके द्वारा उन्हें भगवान् वृषभध्वज जानकर प्रणाम किया। ब्राह्मणके छद्मरूपमें आये हुए वरदाता महादेवकी पूजा करके पार्वतीने उन परमेशान परमेश्वरकी स्तुति की॥ १०-११॥ |
| अनुगृह्य तदा देवीमुवाच प्रहसन्निव।<br>कुलधर्माश्रयं रक्षन् भूधरस्य महात्मनः॥ १२<br><br>क्रीडार्थं च सतां मध्ये सर्वदेवपतिर्भवः।<br>स्वयंवरे महादेवि तव दिव्यसुशोभने॥ १३<br><br>आस्थाय रूपं यत्सौम्यं समेष्येऽहं सह त्वया। | तदनन्तर देवीपर अनुग्रह करके शिवजी हँसते हुए बोले—'हे महादेवि! सभी देवताओंका स्वामी मैं शिव महात्मा हिमालयके कुलधर्मकी परम्पराकी रक्षा करता हुआ क्रीड़ा करनेके लिये सज्जनोंके मध्य तुम्हारे दिव्य तथा अतिसुन्दर स्वयंवरमें सौम्य रूप धारण करके तुमसे मिलूँगा'॥ १२-१३½॥ |
| इत्युक्त्वा तां समालोक्य देवो दिव्येन चक्षुषा॥ १४<br><br>जगामेष्टं तदा दिव्यं स्वपुरं प्रययौ च सा।<br>दृष्ट्वा हृष्टस्तदा देवीं मेनया तुहिनाचलः॥ १५ | ऐसा कह करके उन्हें दिव्य दृष्टिसे देखकर शिवजी अपने अभीष्ट (प्रिय) दिव्य लोकको चले गये |