श्रीलिंगमहापुराण

श्रीलिंगमहापुराण
Linga MahaPurana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
DevanagariHindipublished833 पृष्ठ
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| श्रीलिङ्गमहापुराण | [ उत्तरभाग |
|---|---|
| ६९८ |
| संस्कृत | हिन्दी अनुवाद |
|---|---|
| पत्रिणी चैव गान्धारी योगमाता सुपीवरा।<br>रक्ता मालांशुका वीरा संहारी मांसहारिणी ॥ १४२<br>फलहारी जीवहारी स्वेच्छाहारी च तुण्डिका।<br>रेवती रङ्गिणी सङ्गा द्वितीये षोडशैव तु ॥ १४३ | अब द्वितीय आवरण सुनिये। पत्रिणी, गान्धारी, योगमाता, सुपीवरा, रक्ता, मालांशुका, वीरा, संहारी, मांसहारिणी, फलहारी, जीवहारी, स्वेच्छाहारी, तुण्डिका, रेवती, रंगिणी तथा संगा—ये सोलह [शक्तियाँ] द्वितीय आवरणमें कही गयी हैं॥ १३६-१४३॥ |
| चण्डव्यूहः समाख्यातश्चण्डाव्यूहस्तथोच्यते।<br>चण्डी चण्डमुखी चण्डा चण्डवेगा महारवा ॥ १४४<br>भ्रुकुटी चण्डभूश्चैव चण्डरूपाष्टमी स्मृता।<br>प्रथमावरणं प्रोक्तं द्वितीयावरणं शृणु ॥ १४५<br>चन्द्रघ्राणा बला चैव बलजिह्वा बलेश्वरी।<br>बलवेगा महाकाया महाकोपा च विद्युता ॥ १४६<br>कङ्काली कलशी चैव विद्युता चण्डघोषिका।<br>महाघोषा महारावा चण्डभानङ्गचण्डिका ॥ १४७<br>चण्डायाः कथितो व्यूहो हरव्यूहं शृणुष्व मे।<br>चण्डाक्षी कामदा देवी सूकरी कुक्कुटानना ॥ १४८<br>गान्धारी दुन्दुभी दुर्गा सौमित्रा चाष्टमी स्मृता।<br>प्रथमावरणं प्रोक्तं द्वितीयावरणं शृणु ॥ १४९<br>मॄतोद्भवा महालक्ष्मीर्वर्णदा जीवरक्षिणी।<br>हरिणी क्षीणजीवा च दण्डवक्त्रा चतुर्भुजा ॥ १५०<br>व्योमचारी व्योमरूपा व्योमव्यापी शुभोदया।<br>गृहचारी सुचारी च विषाहारी विषार्तिहा ॥ १५१ | चण्डव्यूह कह दिया गया, अब चण्डाव्यूह बताया जाता है। चण्डी, चण्डमुखी, चण्डा, चण्डवेगा, महारवा, भ्रुकुटी, चण्डभू तथा आठवीं शक्ति चण्डरूपा बतायी गयी है। प्रथम आवरण कह दिया गया, अब द्वितीय आवरण सुनिये। चन्द्रघ्राणा, बला, बलजिह्वा, बलेश्वरी, बलवेगा, महाकाया, महाकोपा, विद्युता, कंकाली, कलशी, विद्युता, चण्डघोषिका, महाघोषा, महारावा, चण्डभा, अनंग-चण्डिका—[ये सोलह शक्तियाँ द्वितीय आवरणमें कही गयी हैं।] चण्डाव्यूहका वर्णन मैंने कर दिया, अब हरव्यूहके विषयमें मुझसे सुनिये। चण्डाक्षी, कामदादेवी, सूकरी, कुक्कुटानना, गान्धारी, दुन्दुभी, दुर्गा और आठवीं शक्ति सौमित्रा कही गयी है। प्रथम आवरण बता दिया गया, अब द्वितीय आवरण सुनिये। मृतोद्भवा, महालक्ष्मी, वर्णदा, जीवरक्षिणी, हरिणी, क्षीणजीवा, दण्डवक्त्रा, चतुर्भुजा, व्योमचारी, व्योमरूपा, व्योमव्यापी, शुभोदया, गृहचारी, सुचारी, विषाहारी और विषार्तिहा—[ये सोलह शक्तियाँ द्वितीय आवरणमें बतायी गयी हैं]॥ १४४-१५१॥ |
| हरव्यूहः समाख्यातो हराया व्यूह उच्यते।<br>जम्भाच्युता च कङ्कारी देविका दुर्धरा वहा ॥ १५२<br>चण्डिका चपला चेति प्रथमावरणे स्मृताः।<br>चण्डिका चामरी चैव भण्डिका च शुभानना ॥ १५३<br>पिण्डिका मुण्डिनी मुण्डा शाकिनी शाङ्करी तथा।<br>कर्तरी भर्तरी चैव भागिनी यज्ञदायिनी ॥ १५४<br>यमदंष्ट्रा महादंष्ट्रा कराला चेति शक्तयः।<br>हरायाः कथितो व्यूहः शौण्डव्यूहं शृणुष्व मे ॥ १५५ | हरव्यूहका वर्णन कर दिया गया, अब हराव्यूह बताया जा रहा है। जंभा, अच्युता, कंकारी, देविका, दुर्धरा, वहा, चण्डिका तथा चपला—[ये आठ शक्तियाँ] प्रथम आवरणमें कही गयी हैं। चण्डिका, चामरी, भण्डिका, शुभानना, पिण्डिका, मुण्डिनी, मुण्डा, शाकिनी, शांकरी, कर्तरी, भर्तरी, भागिनी, यज्ञदायिनी, यमदंष्ट्रा, महादंष्ट्रा तथा कराला—[ये द्वितीय आवरणकी सोलह] शक्तियाँ हैं। |
| विकराली कराली च कालजङ्घा यशस्विनी।<br>वेगा वेगवती यज्ञा वेदाङ्गा चाष्टमी स्मृता ॥ १५६<br>प्रथमावरणं प्रोक्तं द्वितीयावरणं शृणु।<br>वज्रा शङ्खातिशङ्खा वा बला चैवाबला तथा ॥ १५७<br>अञ्जनी मोहिनी माया विकटाङ्गी नली तथा।<br>गण्डकी दण्डकी घोणा शोणा सत्यवती तथा ॥ १५८ | हराव्यूह कह दिया गया, अब शौण्डव्यूह मुझसे सुनिये। विकराली, कराली, कालजंघा, यशस्विनी, वेगा, वेगवती, यज्ञा तथा आठवीं शक्ति वेदांगा बतायी गयी है। प्रथम आवरण बता दिया गया, अब द्वितीय आवरण सुनिये। वज्रा, शंखा, अतिशंखा, बला, अबला, अंजनी, मोहिनी, माया, विकटांगी, नली, गण्डकी, |