भारतकोश
श्रीलिंगमहापुराण

श्रीलिंगमहापुराण

Linga MahaPurana

महर्षि वेदव्यास द्वारा

DevanagariHindipublished833 पृष्ठ

पृष्ठ 703, कुल 834 में से

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पृष्ठ 703

अध्याय २७] राजाओंको विजयप्राप्ति करानेवाले विजयमण्डलके निर्माणका वर्णन ७०१

संस्कृत श्लोकहिन्दी अनुवाद
भाविनी च प्रजा विद्या ख्यातिश्चैवाष्टमी स्मृता।<br>प्रथमावरणं प्रोक्तं द्वितीयावरणं शृणु॥ १९२<br>उल्लेखा च पताका च भोगा भोगवती खगा।<br>भोगभोगव्रता योगा भोगाख्या योगपारगा॥ १९३<br>ऋद्धिर्बुद्धिर्धृतिः कान्तिः स्मृतिः साक्षाच्छ्रुतिर्धरा।<br>शाकुनाया महाव्यूहः कथितः कामदायकः॥ १९४तता, भाविनी, प्रजा, विद्या तथा आठवीं शक्ति ख्याति बतायी गयी है। पहला आवरण बता दिया गया, अब दूसरा आवरण सुनिये। उल्लेखा, पताका, भोगा, भोगवती, खगा, भोगभोगव्रता, योगा, भोगाख्या, योगपारगा, ऋद्धि, बुद्धि, धृति, कान्ति, स्मृति, श्रुति और धरा—[ये सोलह शक्तियाँ कही गयी हैं।] कामनाओंको पूर्ण करनेवाला यह महान् शाकुनाव्यूह कह दिया गया॥ १८७—१९४॥
स्वायम्भुव शृणु व्यूहं सुमुत्याख्यं सुशोभनम्।<br>परेष्टा च परादृष्टा ह्यमृता फलनाशिनी॥ १९५<br>हिरण्याक्षी सुवर्णाक्षी देवी साक्षात्कपिज्जला।<br>कामरेखा च कथितं प्रथमावरणं शृणु॥ १९६<br>रत्नद्वीपा च सुद्वीपा रत्नदा रत्नमालिनी।<br>रत्नशोभा सुशोभा च महाशोभा महाद्युतिः॥ १९७<br>शाम्बरी बन्धुरा ग्रन्थिः पादकर्णा करानना।<br>हयग्रीवा च जिह्वा च सर्वभासेति शक्तयः॥ १९८<br>कथितः सुमतिव्यूहः सुमत्या व्यूह उच्यते।<br>सर्वाशी च महाभक्षा महादंष्ट्रातिभैरवा॥ १९९<br>विस्फुलिङ्गा विलिङ्गा च कृतान्ता भास्करानना।<br>प्रथमावरणं प्रोक्तं द्वितीयावरणं शृणु॥ २००<br>रागा रङ्गवती श्रेष्ठा महाक्रोधा च रौरवा।<br>क्रोधनी वसनी चैव कलहा च महाबला॥ २०१<br>कलन्तिका चतुर्भदा दुर्गा वै दुर्गमानिनी।<br>नाली सुनाली सौम्या च इत्येवं कथितं मया॥ २०२हे स्वायम्भुव! अब सुमति नामक अति सुन्दर व्यूहको सुनिये। [इसके प्रथम आवरणमें ये आठ शक्तियाँ हैं—] परेष्टा, परादृष्टा, अमृता, फलनाशिनी, हिरण्याक्षी, सुवर्णाक्षी, देवी कपिंजला तथा कामरेखा। पहला आवरण बता दिया गया, अब दूसरा आवरण सुनिये। रत्नद्वीपा, सुद्वीपा, रत्नदा, रत्नमालिनी, रत्नशोभा, सुशोभा, महाशोभा, महाद्युति, शाम्बरी, बन्धुरा, ग्रन्थि, पादकर्णा, करानना, हयग्रीवा, जिह्वा और सर्वभासा—ये [सोलह] शक्तियाँ हैं। सुमतिव्यूह कह दिया गया, अब सुमत्याव्यूह बताया जाता है। सर्वाशी, महाभक्षा, महादंष्ट्रा, अतिरौरवा, विस्फुलिङ्गा, विलिङ्गा, कृतान्ता तथा भास्करानना [ये पहले आवरणकी आठ शक्तियाँ हैं]। प्रथम आवरण बता दिया गया, अब दूसरा आवरण सुनिये। रागा, रंगवती, श्रेष्ठा, महाक्रोधा, रौरवा, क्रोधनी, वसनी, कलहा, महाबला, कलन्तिका, चतुर्भेंदा, दुर्गा, दुर्गमानिनी, नाली, सुनाली तथा सौम्या—इस प्रकार मैंने यह [दूसरा आवरण] कह दिया॥ १९५—२०२॥
गोपव्यूहं वदाम्यत्र शृणु स्वायम्भुवाखिलम्।<br>पाटली पाटवी चैव पाटी विटिपिटा तथा॥ २०३<br>कङ्कटा सुपटा चैव प्रघटा च घटोद्भवा।<br>प्रथमावरणं चात्र भाषया कथितं मया॥ २०४<br>नादाक्षी नादरूपा च सर्वकारी गमागमा।<br>अनुचारी सुचारी च चण्डनाडी सुवाहिनी॥ २०५<br>सुयोगा च वियोगा च हंसाख्या च विलासिनी।<br>सर्वगा सुविचारा च वञ्चनी चेति शक्तयः॥ २०६<br>गोपव्यूहः समाख्यातो गोपायीव्यूह उच्यते।<br>भेदिनी छेदिनी चैव सर्वकारी क्षुधाशनी॥ २०७<br>उच्छुष्मा चैव गान्धारी भस्माशी वडवानला।<br>प्रथमावरणं चैव द्वितीयावरणं शृणु॥ २०८हे स्वायम्भुव! अब मैं गोपव्यूह बता रहा हूँ; आप वह सब सुनिये। पाटली, पाटवी, पाटी, विटिपिटा, कंकटा, सुपटा, प्रघटा तथा घटोद्भवा [प्रथम आवरणमें ये आठ शक्तियाँ हैं]। मैंने पहला आवरण बता दिया। नादाक्षी, नादरूपा, सर्वकारी, गमा, अगमा, अनुचारी, सुचारी, चण्डनाड़ी, सुवाहिनी, सुयोगा, वियोगा, हंसा, विलासिनी, सर्वगा, सुविचारा तथा वंचनी—ये शक्तियाँ [दूसरे आवरणकी] हैं; गोपव्यूह बता दिया गया, अब गोपायीव्यूहका वर्णन किया जाता है। भेदिनी, छेदिनी, सर्वकारी, क्षुधाशनी, उच्छुष्मा, गान्धारी, भस्माशी तथा वडवानल [ये पहले आवरणकी आठ शक्तियाँ हैं]।
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