श्रीलिंगमहापुराण

श्रीलिंगमहापुराण
Linga MahaPurana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
DevanagariHindipublished833 पृष्ठ
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| संस्कृत श्लोक | हिन्दी अनुवाद |
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| अन्था बाह्मासिनी बाला दीपाक्ष्मा तथैव च।<br>अक्षा त्र्यक्षा च हल्लेखा हृद्गतामायिकापरा ॥ २०९<br>आमयासादिनी भिल्ली सह्यासह्या सरस्वती।<br>रुद्रशक्तिर्महाशक्तिर्महामोहा च गोनदी ॥ २१० | प्रथम आवरण बता दिया गया, अब द्वितीय आवरण सुनिये। अन्था, बाह्मासिनी, बाला, दीपाक्ष्मा, अक्षा, त्र्यक्षा, हल्लेखा, हृद्गतामायिकापरा, आमयासादिनी, भिल्ली, सह्यासह्या, सरस्वती, रुद्रशक्ति, महाशक्ति, महामोहा और गोनदी॥ २०३—२१०॥ |
| गोपायी कथितो व्यूहो नन्दव्यूहं वदामि ते।<br>नन्दिनी च निवृत्तिश्च प्रतिष्ठा च यथाक्रमम् ॥ २११<br>विद्या नासा खग्रसिनी चामुण्डा प्रियदर्शिनी।<br>प्रथमावरणं प्रोक्तं द्वितीयावरणं शृणु ॥ २१२<br>गृह्णा नारायणी मोहा प्रजा देवी च चक्रिणी।<br>कङ्कटा च तथा काली शिवाद्योषा ततः परम् ॥ २१३<br>विरामा या च वागीशी वाहिनी भीषणी तथा।<br>सुगमा चैव निर्दिष्टा द्वितीयावरणे स्मृता ॥ २१४ | गोपायीव्यूहके विषयमें बता दिया, अब आपको नन्दव्यूह बता रहा हूँ। नन्दिनी, निवृत्ति, प्रतिष्ठा, विद्या, नासा, खग्रसिनी, चामुण्डा तथा प्रियदर्शिनी [ये पहले आवरणकी शक्तियाँ हैं]। पहला आवरण कह दिया गया, अब दूसरा आवरण सुनिये। गृह्णा, नारायणी, मोहा, प्रजादेवी, चक्रिणी, कंकटा, काली, शिवा, आद्या, उषा, विरामा, वागीशी, वाहिनी, भीषणी, सुगमा तथा निर्दिष्टा—ये [सोलह शक्तियाँ] दूसरे आवरणमें कही गयी हैं। |
| नन्दव्यूहो मया ख्यातो नन्दाया व्यूह उच्यते।<br>विनायकी पूर्णिमा च रङ्कारी कुण्डली तथा ॥ २१५<br>इच्छा कपालिनी चैव द्वीपिनी च जयन्तिका।<br>प्रथमावरणे चाष्टौ शक्तयः परिकीर्तिताः ॥ २१६<br>प्रथमावरणं प्रोक्तं द्वितीयावरणं शृणु।<br>पावनी चाम्बिका चैव सर्वात्मा पूतना तथा ॥ २१७<br>छगली मोदिनी साक्षाद्देवी लम्बोदरी तथा।<br>संहारी कालिनी चैव कुसुमा च यथाक्रमम् ॥ २१८<br>शुक्रा तारा तथा ज्ञाना क्रिया गायत्रिका तथा।<br>सावित्री चेति विधिना द्वितीयावरणं स्मृतम् ॥ २१९ | मैंने नन्दव्यूह बता दिया, अब नन्दाव्यूह बताता हूँ। विनायकी, पूर्णिमा, रंकारी, कुण्डली, इच्छा, कपालिनी, द्वीपिनी तथा जयन्तिका—ये आठ शक्तियाँ प्रथम आवरणमें बतायी गयी हैं। पहला आवरण बता दिया गया, अब दूसरा आवरण सुनिये। पावनी, अम्बिका, सर्वात्मा, पूतना, छगली, मोदिनी, देवी लम्बोदरी, संहारी, कालिनी, कुसुमा, शुक्रा, तारा, ज्ञाना, क्रिया, गायत्री तथा सावित्री—ये क्रमसे [सोलह देवियाँ] हैं। इसे [नन्दाव्यूहका] द्वितीय आवरण कहा गया है॥ २११—२१९॥ |
| नन्दायाः कथितो व्यूहः पैतामहमतः परम्।<br>नन्दिनी चैव फेत्कारी क्रोधा हंसा षडङ्गुला ॥ २२०<br>आनन्दा वसुदुर्गा च संहारा ह्यमृताष्टमी।<br>प्रथमावरणं प्रोक्तं द्वितीयावरणं शृणु ॥ २२१<br>कुलान्तिकानला चैव प्रचण्डा मर्दिनी तथा।<br>सर्वभूताभया चैव दया च वडवामुखी ॥ २२२<br>लम्पटा पन्नगा देवी कुसुमा विपुलान्तका।<br>केदारा च तथा कूर्मा दुरिता मन्दरोदरी ॥ २२३<br>खड्गचक्रेति विधिना द्वितीयावरणं स्मृतम्।<br>व्यूहः पैतामहः प्रोक्तो धर्मकामार्थमुक्तिदः ॥ २२४ | नन्दाव्यूह कह दिया, अब इसके बाद पैतामहव्यूह बताता हूँ। नन्दिनी, फेत्कारी, क्रोधा, हंसा, षडंगुला, आनन्दा, वसुदुर्गा तथा संहारामृता आठवीं शक्ति बतायी गयी हैं। यह प्रथम आवरण कह दिया गया, अब दूसरा आवरण सुनिये। कुलान्तिका, अनला, प्रचण्डा, मर्दिनी, सर्वभूताभया, दया, वड़वामुखी, लम्पटा, पन्नगा देवी, कुसुमा, विपुलान्तका, केदारा, कूर्मा, दुरिता, मन्दरोदरी, खड्गचक्रा—यह द्वितीय आवरण सम्यक् रूपसे कहा गया है। धर्म, अर्थ, काम तथा मोक्ष प्रदान करनेवाले पैतामहव्यूहका वर्णन कर दिया, अब मैं पितामहव्यूह |
| पितामहाया व्यूहं च कथयामि शृणुष्व मे।<br>वज्रा च नन्दना शावा राविका रिपुभेदिनी ॥ २२५<br>रूपा चतुर्थी योगा च प्रथमावरणे स्मृताः।<br>भूतानादा महाबाला खर्परा च तथापरा ॥ २२६ | बता रहा हूँ; इसे मुझसे सुनिये। वज्रा, नन्दना, शावा, राविका, रिपुभेदिनी, रूपा, चतुर्थी तथा योगा—ये शक्तियाँ प्रथम आवरणमें बतायी गयी हैं। भूतानादा, |