श्रीलिंगमहापुराण

श्रीलिंगमहापुराण
Linga MahaPurana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
DevanagariHindipublished833 पृष्ठ
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अध्याय २१ ] ब्रह्मा तथा विष्णुद्वारा की गयी भगवान् महेश्वरकी स्तुति एवं उसका माहात्म्य ९५
| संस्कृत श्लोक | हिन्दी अनुवाद |
|---|---|
| नमो योगस्य प्रभवे सांख्यस्य प्रभवे नमः।<br>नमो ध्रुवनिबद्धानामृषीणां प्रभवे नमः॥ ७ | स्वामीको नमस्कार है॥ ६॥<br>योगके प्रभुको नमस्कार है और सांख्यके प्रभुको नमस्कार है। ध्रुवसे सम्बन्धित ऋषियों अर्थात् सप्तर्षियोंके प्रभुको नमस्कार है॥ ७॥ |
| ऋक्षाणां प्रभवे तुभ्यं ग्रहाणां प्रभवे नमः।<br>वैद्युताशनिमेघानां गर्जितप्रभवे नमः॥ ८ | नक्षत्रोंके स्वामीको नमस्कार है, ग्रहोंके स्वामीको नमस्कार है, आपको नमस्कार है। विद्युताग्निसे युक्त मेघोंकी गर्जनाके स्वामीको नमस्कार है॥ ८॥ |
| महोदधीनां प्रभवे द्वीपानां प्रभवे नमः।<br>अद्रीणां प्रभवे चैव वर्षाणां प्रभवे नमः॥ ९<br><br>नमो नदीनां प्रभवे नदानां प्रभवे नमः।<br>महौषधीनां प्रभवे वृक्षाणां प्रभवे नमः॥ १० | महासागरोंके स्वामी तथा द्वीपोंके स्वामीको नमस्कार है। पर्वतों तथा भारत आदि नौ वर्षोंके स्वामीको नमस्कार है। नदियों तथा नदोंके स्वामीको नमस्कार है। महौषधियों तथा वृक्षोंके स्वामीको नमस्कार है॥ ९-१०॥ |
| धर्मवृक्षाय धर्माय स्थितीनां प्रभवे नमः।<br>प्रभवे च परार्धस्य परस्य प्रभवे नमः॥ ११ | अनेकविध धर्मोंके कारणरूप धर्मवृक्षको नमस्कार है, धर्मको नमस्कार है तथा स्थितियोंके स्वामीको नमस्कार है। परार्धके स्वामी तथा परके स्वामीको नमस्कार है॥ ११॥ |
| नमो रसानां प्रभवे रत्नानां प्रभवे नमः।<br>क्षणानां प्रभवे चैव लवानां प्रभवे नमः॥ १२<br><br>अहोरात्रार्धमासानां मासानां प्रभवे नमः।<br>ऋतूनां प्रभवे तुभ्यं संख्यायाः प्रभवे नमः॥ १३ | सभी रसोंके स्वामी तथा रत्नोंके स्वामीको नमस्कार है। क्षणोंके स्वामी तथा लवों (क्षणांश)-के स्वामीको नमस्कार है। दिन, रात, अर्धमास (पक्ष) तथा मासोंके स्वामीको नमस्कार है। ऋतुओंके स्वामी तथा संख्याओंके स्वामी आप शिवको नमस्कार है॥ १२-१३॥ |
| प्रभवे चापरार्धस्य परार्धप्रभवे नमः।<br>नमः पुराणप्रभवे सर्गाणां प्रभवे नमः॥ १४<br><br>मन्वन्तराणां प्रभवे योगस्य प्रभवे नमः।<br>चतुर्विधस्य सर्गस्य प्रभवेऽनन्तचक्षुषे॥ १५ | अपरार्ध तथा परार्धके स्वामीको नमस्कार है। पुराणोंके स्वामीको नमस्कार है। सर्गोंके स्वामीको नमस्कार है। मन्वन्तरोंके स्वामी तथा योगके स्वामीको नमस्कार है। (जरायुज, अण्डज, स्वेदज तथा उद्भिज्जरूप) चार प्रकारकी सृष्टिके स्वामीको नमस्कार है। अनन्त ज्योतिको नमस्कार है॥ १४-१५॥ |
| कल्पोदयनिबन्धनां वार्तानां प्रभवे नमः।<br>नमो विश्वस्य प्रभवे ब्रह्माधिपतये नमः॥ १६<br><br>विद्यानां प्रभवे चैव विद्याधिपतये नमः।<br>नमो व्रताधिपतये व्रतानां प्रभवे नमः॥ १७ | कल्पके उदयमें प्रणीत धर्मशास्त्रों तथा वार्ताओं (कृषि एवं वाणिज्यशास्त्रों)-के स्वामीको नमस्कार है। विश्वके स्वामीको नमस्कार है। ब्रह्माधिपतिको नमस्कार है। विद्याओंके स्वामी तथा विद्याधिपतिको नमस्कार है। व्रतोंके स्वामीको नमस्कार है। व्रताधिपतिको नमस्कार है॥ १६-१७॥ |
| मन्त्राणां प्रभवे तुभ्यं मन्त्राधिपतये नमः।<br>पितॄणां पतये चैव पशूनां पतये नमः॥ १८ | मन्त्रोंके स्वामी तथा मन्त्रोंके अधिपति आपको नमस्कार है। पितरोंके पति तथा पशुओंके पतिको |