भारतकोश
श्रीलिंगमहापुराण

श्रीलिंगमहापुराण

Linga MahaPurana

महर्षि वेदव्यास द्वारा

DevanagariHindipublished833 पृष्ठ

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पृष्ठ 98
९६श्रीलिङ्गमहापुराण[ पूर्वभाग
संस्कृत श्लोकहिन्दी अनुवाद
वाग्वृषाय नमस्तुभ्यं पुराणवृषभाय च।<br>नमः पशूनां पतये गोवृषेन्द्रध्वजाय च॥ १९नमस्कार है। श्रेष्ठ वाणीवाले तथा पुराणश्रेष्ठ आप शिवको नमस्कार है। पशुओंके पति तथा गोवृषेन्द्रध्वजको नमस्कार है॥ १८-१९॥
प्रजापतीनां पतये सिद्धीनां पतये नमः।<br>दैत्यदानवसंङ्घानां रक्षांसां पतये नमः॥ २०<br><br>गन्धर्वाणां च पतये यक्षाणां पतये नमः।<br>गरुडोरगसर्पाणां पक्षिणां पतये नमः॥ २१प्रजाओंके पति तथा सिद्धियोंके पतिको नमस्कार है। दैत्य, दानव तथा राक्षससमूहोंके पतिको नमस्कार है। गन्धर्वों तथा यक्षोंके पतिको नमस्कार है। गरुड़, उरग, सर्प तथा पक्षियोंके पतिको नमस्कार है॥ २०-२१॥
सर्वगुह्यपिशाचानां गुह्याधिपतये नमः।<br>गोकर्णाय च गोप्त्रे च शङ्कुकर्णाय वै नमः॥ २२<br><br>वराहायाप्रमेयाय ऋक्षाय विरजाय च।<br>नमो सुराणां पतये गणानां पतये नमः॥ २३सभी गुप्त पिशाचोंके गुह्याधिपतिको नमस्कार है। गोकर्ण, गोप्ता तथा शंकुकर्णको नमस्कार है। वाराहको, अप्रमेयको, ऋक्षको तथा विरजको नमस्कार है। देवताओंके पति तथा गणोंके पतिको नमस्कार है॥ २२-२३॥
अम्भसां पतये चैव ओजसां पतये नमः।<br>नमोऽस्तु लक्ष्मीपतये श्रीपाय क्षितिपाय च॥ २४<br><br>बलाबलसमूह्याय अक्षोभ्यक्षोभणाय च।<br>दीप्तशृङ्गैकशृङ्गाय वृषभाय ककुद्मिने॥ २५जलोंके पति तथा ओजोंके पतिको नमस्कार है। लक्ष्मीपति, लक्ष्मीके रक्षक तथा पृथ्वीके पालन-कर्ताको नमस्कार है। शक्तिमान् तथा शक्तिहीन प्राणियोंके समुच्चयस्वरूप शिवको नमस्कार है। अक्षोभ्यक्षोभणको नमस्कार है। दीप्तशृंग, एकशृंग, वृषभ तथा ककुद्मीको नमस्कार है॥ २४-२५॥
नमः स्थैर्याय वपुषे तेजसानुव्रताय च।<br>अतीताय भविष्याय वर्तमानाय वै नमः॥ २६<br><br>सुवर्चसे च वीर्याय शूराय ह्यजिताय च।<br>वरदाय वरेण्याय पुरुषाय महात्मने॥ २७स्थैर्य, तेजोमयवपु तथा अनुव्रतको नमस्कार है। अतीत, भविष्य तथा वर्तमानरूप शिवको नमस्कार है। सुवर्चा, वीर्य, शूर, अजित, वरद, वरेण्य, पुरुष तथा महात्माको नमस्कार है॥ २६-२७॥
नमो भूताय भव्याय महते प्रभवाय च।<br>जनाय च नमस्तुभ्यं तपसे वरदाय च॥ २८<br><br>अणवे महते चैव नमः सर्वगताय च।<br>नमो बन्धाय मोक्षाय स्वर्गाय नरकाय च॥ २९भूत, भव्य, महत् तथा प्रभवको नमस्कार है। जन, तप तथा वरदको नमस्कार है; आपको नमस्कार है। अणु (परम सूक्ष्म), महत् (महा-आकारसम्पन्न) तथा सर्वगत (सर्वत्र व्याप्त रहनेवाले)-को नमस्कार है। बन्ध (जन्म-मरण-बन्धन), मोक्ष, स्वर्ग तथा नरकरूपको नमस्कार है॥ २८-२९॥
नमो भवाय देवाय इज्याय याजकाय च।<br>प्रत्युदीर्णाय दीप्ताय तत्त्वायातिगुणाय च॥ ३०<br><br>नमः पाशाय शस्त्राय नमस्त्वाभरणाय च।<br>हुताय उपहूताय प्रहुतप्राशिताय च॥ ३१भव, देव, इज्य (देवताओंके आचार्य) तथा याजक (यज्ञ करानेवाले)-को नमस्कार है। प्रत्युदीर्ण (महान्), दीप्त (आलोकयुक्त), तत्त्व तथा अतिगुण (गुणातीत)-को नमस्कार है। पाश, शस्त्र तथा आभरणको नमस्कार है। हुत (हविद्रव्यरूप), उपहूत (यज्ञ आदिमें आवाहन किये जानेवाले), प्रहुतप्राशित (भक्तिपूर्वक दी गयी आहुतिको भोज्यरूपमें ग्रहण करनेवाले) शिवको नमस्कार है॥ ३०-३१॥