श्री रामकृष्ण वचनामृत (प्रथम भाग - सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला' द्वारा अनूदित)

श्री रामकृष्ण वचनामृत (प्रथम भाग - सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला' द्वारा अनूदित)
Sri Ramakrishna Vachanamrita (Part 1 - Tr. Nirala)
श्री 'म' (महेंद्रनाथ गुप्त) / सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला' द्वारा
DevanagariHindipublished711 पृष्ठ
पृष्ठ 688, कुल 711 में से
संदर्भ में पढ़ेंपृष्ठ 688
Digitized by Arya Samaj Foundation Chennai and eGangotri
२९ सितम्बर, १८८४ \qquad परिच्छेद १४ \qquad ६६५
भक्तगण भी नाच रहे हैं। सब लोग एक साथ कीर्तन गाते हुए नाच रहे हैं। श्रीरामकृष्ण ने भी एक गाना गाया।
मास्टर ने भी गाया था। श्रीरामकृष्ण को इसकी बड़ी खुशी है। गाना हो जाने पर श्रीरामकृष्ण हँसते हुए मास्टर से कह रहे हैं, “अच्छा खोल बजानेवाला होता तो गाना और जमता। ताक्ताक् ता धिना, दाक्, दाक् दा धिना, ये सब बोल बजते!” कीर्तन होते होते शाम हो गयी।
☐ ☐ ☐
CC-0. In Public Domain. Gurukul Kangri Collection, Haridwar