श्रीमद्भगवद्गीतारहस्य अथवा कर्मयोगशास्त्र (लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक)

श्रीमद्भगवद्गीतारहस्य अथवा कर्मयोगशास्त्र (लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक)
Srimad Bhagavad Gita Rahasya by Bal Gangadhar Tilak
लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक द्वारा
DevanagariHindipublished956 पृष्ठ
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अध्यात्म २६१ लोग अपनी पोथी समेटने लग जाते हैं। परंतु ऐसा करना, हमारे मतसे, गीताके मुख्य उद्देश्यकी ओरही दुर्लक्ष करना है। अतएव अब आगे क्रमसे इस बातका विचार किया जायगा, कि भगवद्गीतामें उपर्युक्त प्रश्नोंके क्या उत्तर दिये गये हैं।