भारतकोश
श्रीमद्भगवद्गीतारहस्य अथवा कर्मयोगशास्त्र (लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक)

श्रीमद्भगवद्गीतारहस्य अथवा कर्मयोगशास्त्र (लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक)

Srimad Bhagavad Gita Rahasya by Bal Gangadhar Tilak

लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक द्वारा

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३६ गीतारहस्य अथवा कर्मयोगशास्त्र वह क्यों उत्पन्न हुआ है, इस विषयमें पुराने ईसाई पंडितोंकी राय – एसीन पंथ और यूनानी तत्त्वज्ञान – ईसाई धर्मके साथ बौद्ध धर्मकी अद्भुत समता – इनमें बौद्ध- धर्मकी निर्विवाद प्राचीनता – इस बातका प्रमाण, कि यहुदियोंके देशमें बौद्ध यतियोंका प्रवेश प्राचीन समयमेंही हो गया था – अतएव ईसाई धर्मके तत्त्वोंका बौद्ध-धर्मसेही अर्थात् पर्यायसे वैदिक धर्मसेही अथवा गीतासेही लिया जाना पूर्ण संभव है – इससे सिद्ध होनेवाली गीताकी निस्सन्दिग्ध प्राचीनता । पृ. ५१०-५९५