भारतकोश
श्रीमद्भगवद्गीतारहस्य अथवा कर्मयोगशास्त्र (लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक)

श्रीमद्भगवद्गीतारहस्य अथवा कर्मयोगशास्त्र (लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक)

Srimad Bhagavad Gita Rahasya by Bal Gangadhar Tilak

लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक द्वारा

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गीताकी बहिरंगपरीक्षा ५९१ ( साँथिया ) के रूपमें वैदिक तथा बौद्ध धर्मवाले ईसाके सैकड़ों वर्ष पहलेसेही शुभदायक चिन्ह मानते थे; और प्राचीन शोधकोंने यह निश्चय किया है, कि मिश्र आदि, पृथ्विके पुरातन खंडोंके देशोंहीमें नहीं, किंतु कोलंबससे कुछ शतक पहले अमेरिकाके पेरू तथा मेक्सिको देशमेंभी स्वस्तिक चिन्ह शुभदायक माना जाता था ।* इससे यह अनुमान करना पड़ता है, कि ईसाके पहलेही सब लोगोंको स्वस्तिक चिन्ह पूज्य हो चुका था; और उसीका उपयोग आगे चल कर ईसाके भक्तोंने एक विशेष रीतिसे कर लिया है । बौद्ध भिक्षु और प्राचीन ईसाई धर्मोपदेशकोंकी - विशेषतः पुराने पादड़ियोंकी - पोशाक और धर्मविधिमेंभी कहीं अधिक समता पाई जाती है । उदाहरणार्थ, 'बाप्तिस्मा' अर्थात् स्नानके पश्चात् दीक्षा देनेकी विधिभी ईसासे पहलेही प्रचलित थी; और अब सिद्ध हो चुका है, कि दूर दूरके देशोंमें धर्मोपदेशक भेजकर धर्म-प्रसार करनेकी पद्धति, ईसाई धर्मोपदेशकोंसे पहलेही, बौद्ध भिक्षुओंको पूर्णतया स्वीकृत हो चुकी थी । किसीभी विचारवान् मनुष्यके मनमें यह प्रश्न होना बिलकुलही स्वाभाविक है, कि बुद्ध और ईसाके चरित्रोंमें तथा उनके नैतिक उपदेशोंमें और उनके धर्मोंकी धार्मिक विधियोंतकमें यह जो अद्भुत और व्यापक समता पाई जाती है, उसका क्या कारण है ?† बौद्ध धर्म-ग्रंथोंका अध्ययन करनेसे जब पहले पहल यह समता पश्चिमी लोगोंको दीख पड़ी, तब कुछ ईसाई पंडित कहने लगे, कि बौद्ध धर्मवालोंने इन तत्त्वोंको 'नेस्टोरियन' नामक ईसाई पंथसे लिया होगा, कि जो एशिया खंडमें प्रचलित था; परंतु यह बातही संभव नहीं है । क्योंकि नेस्टार-पंथका प्रवर्तकही ईसासे लगभग सवा चार सौ वर्षके पश्चात् उत्पन्न हुआ था; और अब अशोकके शिलालेखोंसे यह भली भांति सिद्ध हो चुका है, कि ईसाके लगभग पाँच सौ वर्ष पहले, अर्थात् नेस्टारसे तो लगभग नौ सौ वर्ष पहले, बुद्धका जन्म हो गया था; अशोकके समय और अर्थात् सन् ईसवीसे कम-से-कम ढाई सौ वर्ष पहले, बौद्ध धर्म हिंदुस्तानमें और आसपासके देशोंमें तेजीसे फैला हुआ था, एवं बुद्ध-चरित आदि ग्रंथभी उस समय तैयार हो चुके थे । इस प्रकार जब बौद्ध धर्मकी प्राचीनता निर्विवाद है, तब ईसाई तथा बौद्ध धर्ममे दीख पडनेवाले साम्यके विषयमें वे दोही पक्ष रह जाते है

  • See The ' Secret of the Pacific ' by C. Reginald Enock, 1912. pp. 248-252. † इस विषयपर मि. आर्थर लिलीने Buddhism in Christendom नामक एक स्वतंत्र ग्रंथ लिखा है । इसके सिवा Buddha and Buddhism नामक ग्रंथके अन्तिम चार भागोंमें उन्होंने अपने मतका संक्षिप्त निरूपण स्पष्ट रूपसे किया है । हमने परिशिष्टके इस भागमें जो विवेचन किया है, उसका आधार विशेषतया यही दूसरा ग्रंथ है। Buddha and Buddhism ग्रंथ The World's Epoch- makers' Series में सन् १९०० ईसवीमें प्रसिद्ध हुआ है । उसके दसवें भागमें बौद्ध और ईसाई धर्मके कोई ५० समान उदाहरणोंका दिग्दर्शन कराया है ।