भारतकोश
श्रीमद्भगवद्गीतारहस्य अथवा कर्मयोगशास्त्र (लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक)

श्रीमद्भगवद्गीतारहस्य अथवा कर्मयोगशास्त्र (लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक)

Srimad Bhagavad Gita Rahasya by Bal Gangadhar Tilak

लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक द्वारा

DevanagariHindipublished956 पृष्ठ

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पृष्ठ 637

५९२ गीतारहस्य अथवा कर्मयोगशास्त्र (१) वह साम्य स्वतंत्र रीतिसे दोनों ओर उत्पन्न हुआ हो; अथवा (२) इन तत्त्वोंको ईसाने या उसके शिष्योने बौद्ध धर्मसे लिया हो। इसपर प्रोफेसर व्हिस्- डेविड्स्का मत है, कि बुद्ध और ईसाकी परिस्थिति एकहीसी होनेके कारण दोनों ओर यह सादृश्य आप-ही-आप स्वतंत्र रीतिसे उत्पन्न हुआ है।* परंतु, थोड़ा-सा विचार करनेपर यह बात सबके ध्यानमें आजावेगी, कि यह कल्पना समाधानकारक नहीं है। क्योंकि, जब कोई नई बात किसीभी स्थानपर स्वतंत्र रीतिसे उत्पन्न होती है, तब उसका उदय सदैव क्रमशः हुआ करता है; और इसलिये उसकी उन्नतिका क्रमभी बतलाया जा सकता है। उदाहरण लीजिये - सिलसिलेवार ठीक तौरपर यह बतलाया जा सकता है, कि वैदिक कर्मकांडसे ज्ञानकांड, और ज्ञानकांड अर्थात् उपनिषदोंहीसे आगे चलकर भक्ति, पातंजलयोग अथवा अंतमें बौद्ध धर्म कैसे उत्पन्न हुआ ? परंतु यजमय यहूदी धर्ममें संन्यास-प्रधान एसी या ईसाई धर्मका उदय उक्त प्रकारसे नहीं हुआ है। वह एकदम उत्पन्न हो गया है; और ऊपर बतलाही चुके है, कि प्राचीन ईसाई पंडितभी यह मानते हैं, कि इस रीतिसे उसके एकदम उदय हो जानेमें यहूदी धर्मके अतिरिक्त कोई अन्य बाहरी कारण निमित्त रहा होगा। इसके सिवा बौद्ध, तथा ईसाई धर्ममें जो समता दीख पड़ती है, वह इतनी विलक्षण और पूर्ण है, कि वैसी समताका स्वतंत्र रीतिसे उत्पन्न होना संभवभी नहीं है। यदि यह बात सिद्ध हो गई होती, कि उस समय यहूदी लोगोंको बौद्ध धर्मका ज्ञान होनाही सर्वथा असंभव था, तो बात दूसरी थी। परंतु इतिहाससे सिद्ध होता है, कि सिकंदरके समयसे आगे - और विशेष कर अशोकके समयसेही (अर्थात् ईसासे लगभग २५० वर्ष पहले) - पूर्वकी ओर मिस्रके एलेक्जेंड्रिया तथा यूनानतक बौद्ध यतियोंकी पहुँच हो चुकी थी। अशोकके एक शिलालेखमेही यह बात लिखी है, कि यहूदी लोगोके तथा आसपासके देशोके यूनानी राजा एंटिओकससे उसने संधि की थी। इसी प्रकार बाइबलमे (मेथ्यू. २. १) वर्णन है, कि जब ईसा पैदा हुआ, तब पूर्वकी ओरके कुछ ज्ञानी पुरुष जेरूसलेम गये थे। ईसाई लोग कहते हैं, कि ये ज्ञानी पुरुष मगी अर्थात् ईरानी धर्मके होंगे - हिंदुस्थानी नही। परंतु चाहे जो कहा जाय; अर्थ तो दोनोका एकही है। क्योंकि, इतिहासमे यह बात स्पष्टतया विदित होती है, कि बौद्ध धर्मका प्रसार इस समयसे पहलेही कश्मीर और काबुलमें हो गया था; एव वह पूर्वकी ओर ईरान तथा तुर्किस्तानतकभी पहुंच चुका था। इसके सिवा प्लूटार्कने†

  • See Buddhist Suttas, S. B. E. Series, Vol. XI, p. 163. † See Plutarch's Morals - Theosophical Essays translated by C. N. King (George Bell & Sons) pp. 96-97. पाली भाषाके महावंशमे (२९. ३९) यवनो अर्थात् यूनानियोके अलमंदा (योन-नगरऽलसंदा) नामक शहरका उल्लेख है। उसमें यह लिखा है, कि ईसाकी सदीमे कुछ वर्ष पहले जब सिंहलद्वीपमे एक मंदिर बन रहा था, तब वहाँ बहुत-से बौद्ध यति उसवार्थ