भारतकोश
श्रीमद्भगवद्गीतारहस्य अथवा कर्मयोगशास्त्र (लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक)

श्रीमद्भगवद्गीतारहस्य अथवा कर्मयोगशास्त्र (लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक)

Srimad Bhagavad Gita Rahasya by Bal Gangadhar Tilak

लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक द्वारा

DevanagariHindipublished956 पृष्ठ

पृष्ठ 697, कुल 956 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 697

६५२ गीतारहस्य अथवा कर्मयोगशास्त्र

इस प्रकार श्रीभगवानके गाये हुए - अर्थात् कहे हुए उपनिषदमें, ब्रह्मविद्या- न्तर्गत योग - अर्थात् कर्मयोग - शास्त्रविषयक, श्रीकृष्ण और अर्जुनके संवादमें सांख्ययोग नामक दूसरा अध्याय समाप्त हुआ। [ इस अध्यायमें, आरंभमें सांख्य अथवा संन्यास-मार्गका विवेचन है, इस कारण इसको सांख्ययोग नाम दिया गया है। परंतु इससे यह न समझ लेना चाहिये, कि पूरे अध्यायमें वही विषय है। एकही अध्यायमें प्रायः अनेक विषयोंका वर्णन होता है। जिस अध्यायमें जो विषय आरंभमें आ गया है, अथवा जो विषय उसमें प्रमुख है, उसके अनुसार उस अध्यायका नाम रख दिया जाता है। (गीतारहस्य प्रकरण १४, पृ. ४४६.)]