भारतकोश
श्रीमद्भगवद्गीतारहस्य अथवा कर्मयोगशास्त्र (लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक)

श्रीमद्भगवद्गीतारहस्य अथवा कर्मयोगशास्त्र (लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक)

Srimad Bhagavad Gita Rahasya by Bal Gangadhar Tilak

लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक द्वारा

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पृष्ठ 75, कुल 956 में से

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२८ गीतारहस्य अथवा कर्मयोगशास्त्र के झगडे कैसे बिकट होते हैं और अनेक बार " इसे करूँ कि उसे " यह सूझ न पडनेके कारण मनुष्य कैसा घबड़ा उठता है, ऐसेही प्रसंगोंके अनेक उदाहरणोंका विचार किया जायगा, जो हमारे शास्त्रोंमें - विशेषतः महाभारतमें - पाये जाते हैं।

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