श्रीमद्भगवद्गीतारहस्य अथवा कर्मयोगशास्त्र (लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक)
Srimad Bhagavad Gita Rahasya by Bal Gangadhar Tilak
लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक द्वारा
पृष्ठ 800, कुल 956 में से
संदर्भ में पढ़ेंनवाँ अध्याय ७५५ § § सर्वभूतानि कौन्तेय प्रकृतिं यान्ति मामिकाम् । कल्पक्षये पुनस्तानि कल्पादौ विसृजाम्यहम् ॥ ७ ॥ प्रकृतिं स्वामवष्टभ्य विसृजामि पुनः पुनः । भूतग्राममिमं कृत्स्नमवशं प्रकृतेर्वशात् ॥ ८ ॥ न च मां तानि कर्माणि निबध्नन्ति धनंजय । उदासीनवदासीनमसक्तं तेषु कर्मसु ॥ ९ ॥ मयाध्यक्षेण प्रकृतिः सूयते सचराचरम् । हेतुनानेन कौन्तेय जगद्विपरिवर्तते ॥ १० ॥ करके अर्जुनकी जिज्ञासाको जागृतकर चुकनेपर अब भगवान् फिर कुछ फेरफारसे वही वर्णन प्रसंगानुसार करते हैं, कि जो सातवें और आठवें अध्यायमें पहले किया जा चुका है - अर्थात् मुझसे व्यक्त-सृष्टि किस प्रकार होती है और मेरे व्यक्त रूप कौन-से हैं (गीता ७. ४-१८; ८. १७-२०) । 'योग' शब्दका अर्थ यद्यपि अलौकिक सामर्थ्य या युक्ति किया जाय, तथापि स्मरण रहे, कि अव्यक्तसे व्यक्त होनेके इस योग अथवा युक्तिकोही माया कहते हैं । इस विषयका प्रतिपादन गीता ७. २५ की टिप्पणीमें और रहस्यके नवें प्रकरणमें (पृ. २३८- २४१) हो चुका है । परमेश्वरको यह 'योग' अत्यंत सुलभ है, कदाचित् यह परमेश्वरका दासही है, इसलिये परमेश्वरको योगेश्वर (गीता १८. ७५) कहते हैं । अब बतलाते हैं, कि इस योगसामर्थ्यसे जगतकी उत्पत्ति और नाश कैसे हुआ करते हैं:-] (७) हे कौन्तेय ! कल्पके अंतमें सब भूत मेरी प्रकृतिमें आ मिलते हैं, और कल्पके आरंभमें (अर्थात् ब्रह्माके दिनके आरंभमें) उनको मैंही फिर निर्माण करता हूँ । (८) मैं अपनी प्रकृतिकों हाथमें लेकर, (अपने अपने कर्मोंसे बँधे हुए) भूतोंके उस समस्त समुदायको पुनः पुनः निर्माण करता हूँ, कि जो (उस) प्रकृतिके काबूमें रहनेसे अवश अर्थात् परतंत्र है । (९) (परंतु) हे धनंजय ! इस (सृष्टि- निर्माण करनेके) काममें मेरी आसक्ति नहीं है, मैं उदासीनसा रहता हूँ, इस कारण मुझे वे कर्म बंधक नहीं होते । (१०) मैं अध्यक्ष होकर प्रकृतिसे सब चराचर सृष्टि उत्पन्न करवाता हूँ । हे कौन्तेय ! इस कारण जगतका यह बनना - बिगड़ना हुआ करता है। [पिछले अध्यायमें बतला चुके हैं, कि ब्रह्मदेवके दिनका (कल्पका) आरंभ होतेही अव्यक्त प्रकृतिसे व्यक्त-सृष्टि बनने लगती है (गी. ८. १८)। यहाँ इसी बातका अधिक स्पष्टीकरण किया है, कि परमेश्वर प्रत्येकके कर्मानुसार