श्रीमद्भगवद्गीतारहस्य अथवा कर्मयोगशास्त्र (लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक)
Srimad Bhagavad Gita Rahasya by Bal Gangadhar Tilak
लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें७७४ गीतारहस्य अथवा कर्मयोगशास्त्र अहमात्मा गुडाकेश सर्वभूताशयस्थितः । अहमादिश्च मध्यं च भूतानामन्त एव च ॥ २० ॥ आदित्यानामहं विष्णुर्ज्योतिषां रविरंशुमान् । मरीचिर्मरुतामस्मि नक्षत्राणामहं शशी ॥ २१ ॥ वेदानां सामवेदोऽस्मि देवानामस्मि वासवः । इन्द्रियाणां मनश्चास्मि भूतानामस्मि चेतना ॥ २२ ॥ | समझाया है; और वही (भाग. ११. १६. ६-८) प्रारंभमें कह दिया है, कि यह | वर्णन गीताके इस अध्यायवाले वर्णनके अनुसार है । ] (२०) हे गुडाकेश ! सब भूतोके भीतर रहनेवाला आत्मा मैं हूँ; और (सब) भूतोका आदि, मध्य और अंतभी मैं हूँ। (२१) (बारह) आदित्योंमेंसे विष्णु मैं हूँ; तेजस्वियोंमें किरणमाली सूर्य, (सात अथवा उनचास) मरुतोंमें मरीचि और नक्षत्रोंमें चंद्रमा मैं हूँ। (२२) मैं वेदोंमें सामवेद हूँ; देवताओंमें इंद्र हूँ; और इंद्रियोंमें मन हूँ; भूतोंमें चेतना अर्थात् प्राणकी चलन-शक्ति मैं हूँ। | [ यहाँ वर्णन है, कि मैं वेदोंमें सामवेद हूँ, अर्थात् सामवेद मुख्य है; ठीक | ऐसाही महाभारतके अनुशासनपर्वमेंभी (१४. ३१७) “सामवेदश्च वेदानां | यजुषां शतरुद्रियम्” कहा है। पर अनुगीतामें “ॐकारः सर्ववेदानां ०” (अश्व. | ४४. ६) इस प्रकार सब वेदोंमें ॐकारकोही श्रेष्ठता दी है; तथा गीतामेंभी | (गीता ७. ८) पहले “प्रणवः सर्ववेदेषु” कहा है। ऐसेही गीता ९. १७ के | “ऋक्सामयजुरेव च” इस वाक्यमें सामवेदकी अपेक्षा ऋग्वेदको अग्रस्थान | दिया गया है और साधारण लोगोंकी समझभी ऐसीही है। इन परस्पर-विरोधी | वर्णनोंपर कुछ लोगोंने अपनी कल्पनाओंको खूब सरपट दौड़ाया है। छांदोग्य | उपनिषदमें ॐकारहीका नाम 'उद्गीथ' है, और लिखा है, कि यह उद्गीथ साम- | वेदका सार है और सामवेद ऋग्वेदका सार है” (छां. १. १. २)। इस विषयके | भिन्न भिन्न उक्त विधानोंका मेल छांदोग्यके इस वाक्यसे, सब वेदोंमें कौन वेद | श्रेष्ठ है, हो सकता है। क्योंकि सामवेदके मंत्रभी मूल ऋग्वेदसेही लिये गये हैं। | पर इतनेसे संतुष्ट न हो कर कुछ लोग कहते हैं, कि गीतामें सामवेदको यहाँ पर | जो प्रधानता दी गयी है, उसका कुछ-न-कुछ गूढ कारण होना चाहिये। यद्यपि | छांदोग्य उपनिषदमें सामवेदको प्रधानता दी है, तथापि मनुने कहा है, कि | “सामवेदकी ध्वनि अशुचि है” (मनु. ४. १२४)। अतः एकने अनुमान किया | है, कि सामवेदको प्रधानता देनेवाली गीता मनुसे पहलेकी होगी; और दूसरा | कहता है, कि गीता बनानेवाला सामवेदी होगा, इसीसे उसने यहाँपर सामवेदको | प्रधानता दी होगी। परंतु हमारी समझमें ‘मैं वेदोंमें सामवेद हूँ’ इसकी