भारतकोश
श्रीमद्भगवद्गीतारहस्य अथवा कर्मयोगशास्त्र (लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक)

श्रीमद्भगवद्गीतारहस्य अथवा कर्मयोगशास्त्र (लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक)

Srimad Bhagavad Gita Rahasya by Bal Gangadhar Tilak

लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक द्वारा

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कर्मजिज्ञासा ५१ प्रयुक्त हुआ है। यह शब्द हमारा मनगढ़ंत नहीं है। भगवद्गीताहीके समान योग- वासिष्ठमेंभी वसिष्ठ मुनिने श्रीरामचंद्रजीको ज्ञान-मूलक प्रवृत्तिमार्गहीका उपदेश किया है। परंतु यह ग्रंथ गीताके बादका है; और उसमें गीताहीका अनुकरण किया है। अतएव ऐसे ग्रंथोंसे गीताकी उस अपूर्वता या विशेषतामें-जो ऊपर कही गई है-कोई बाधा नहीं आती।