सुभाषितरत्नभाण्डागार (पण्डित काशीनाथ शर्मा संग्रह)

सुभाषितरत्नभाण्डागार (पण्डित काशीनाथ शर्मा संग्रह)
Subhashita Ratna Bhandagara
पण्डित काशीनाथ शर्मा (सम्पादक: नारायण राम आचार्य) द्वारा
स्रोत: Subhashita Ratna Bhandagara (10,000+ Classic Sanskrit Epigrams & Maxims - Nirnaya Sagar Press) (उद्गम)
DevanagariSanskritpublished516 पृष्ठ
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| १२ | सुभाषितरत्नभाण्डागारस्थपद्याना |
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| आलानं (का प्र १० ४०६) १०९।२११ | आशु लङ्घितव(शिशु १० ६४) ३१७।२५ | आस्तां तावद्वचनर २९२।२२ |
| आलापं कलकण्ठि २८८।२२१ | आ शैलेन्द्रादिच्छ ११२।२८४ | आस्ता दूरतया १८७।१०९ |
| आलापान्भ्रूविलासो २५७।६० | आशौचं राक्षसी पुंसा ७६।१३ | आस्ता दूरेण विश्वे (सु २०८७) ३१८।१ |
| आलापैर्मधुरैश्च का ३५०।८० | आश्चर्यं समराम्बरे १२४।१३ | आस्ता विश्वसनं (अमरु ६३) ३५४।६० |
| आलिङ्गन्ते मलय ३३४।१२८ | आश्रय कियतामेष २११।९ | आस्तामकण्टक (शा श २ १५) ३६८।३४ |
| आलिङ्गतो वसु (सूक्ति १०० ५) १३९।१ | आश्रयवशेन सततं(शा.प ३२७) ८६।११ | आस्तामन्यत्सु (शा प २४३) ४७।११३ |
| आलिङ्गसे चारुलता २२३।६४ | आश्रयितव्यो नर १५१।३७३ | आस्तीर्यन्तामुपान्ते १४१।६ |
| आलिङ्गिता परैयां (शा प ३४२) ६४।५ | आश्रिताना भृतौ (हि २.३३) १६३।४७१ | आस्तृन्तेऽभिन (शिशु १० ८९) ३२१।१५ |
| आलि बालिशतया २८४।९ | आश्लिष्टभूमिं (शिशु ३ ७२) १४०।३ | आस्ते दामोद (नैषध १२ ९५) १३८।८३ |
| आलीचालितपद्मि २७७।६१ | आश्लेषचुम्बनर् (शा प ३६६१) ३१६।२ | आस्ते विधु पर २१०।२३ |
| आलीभि शपथैर ३५९।७९ | आश्लेषशेषा रतिरङ्ग ३२३।५ | आस्थामलम्ब्य (किरात १५ ४) ४६।६८ |
| आलीभि सह भान्ति २९।१२ | आश्लेषाधरबिम्ब (सूक्ति १) १११।६६ | आस्थित स्थगि (किरात ९ ९) २९४।२८ |
| आलोकत्रस्त (शा प ५७४) २०८।२८ | आश्लेषे प्रथमं कृ(शा प.३६६४) ३१६।६ | आस्माकी युव (शिशु ८ ५०) ३३९।१०७ |
| आलोकमार्गं सहसा (रघु ७ ६) १२६।३२ | आश्वासलेहमक्तीना १०२।२८ | आस्यं यस्या सु ३७२।१३६ |
| आलोकवन्त (शा प ७४८) २०९।१ | आश्वास्य पर्वत (शा प ७७८) २१२।३८ | आस्य सहासे नय २५१।३५ |
| आलोकान्तप्रति १०७।१७३ | आषाढी कार्तिकी १८१।२१ | आस्येन्दो परिवे २७०।४२७ |
| आलोकैरतिपाटलै ३२५।६५ | आसंसारात्रिभुव (भर्तृ ३ ८२) ३६९।६१ | आस्वादितं खादुम ३३१।२१ |
| आलोक्य चन्द्रम ३०३।१२५ | आसक्ता प्रतिकोट २१३।६९ | आस्वादितदयिताध २९१।४ |
| आलोक्य चिकुरनि २७०।१० | आसन्नतमेति(शा प ४१३४) ३७२।१५७ | आस्वाद्य निर्विशेष २२४।१५ |
| आलोचनं च वचनं ३७१।१२८ | आसन्नमार्गमृति(शा प ३४७१)२७८।४३ | आस्वाद्य स्वयमे (शा श १ १६) ७४।४२ |
| आलोलामलका (अमरु ३) ३२०।१८ | आसन्नमेव नृप (पच.१ ४१) १५२।४०३ | आस्वाद्याश्च मधू २२४।१०७ |
| आलोलैरुपगम्यते २५२।५८ | आसन्नामवलम्ब्य (सु १००) २८६।२१ | आस्वाद्यैष कषायमङ्क ८५।१३ |
| आवर्त संशया (भर्तृ १ ७६) ३५०।८३ | आसन्नान्पुरतो भाव ७६।२४ | आहत कुचत (शिशु १०.७४) ३१९।१७ |
| आवर्त एव ना (सा द १० ११) ३१२।२० | आसन्नाय सुदूराय (सु २१) ७।१३ | आह्लाहल मूर्ध्नि(शा प ५९७)२०७।१६ |
| आवर्तशोभा नत (रघु १६ ६३) ३३७।६४ | आसन्यावन्ति याज्ञा २११।४ | आहवे जगदु (सा द १० ३०) ११५।४१ |
| आवर्त्य कण्ठं सिच २५८।२८ | आसा व्रतमतीवा ३५९।६२ | आहवेषु च ये (हि ३ १४७) १४८।२४५ |
| आवारा क्रिय (भर्तृ १ ३१) १५५।२९३ | आसा जला (रघु १६ ६२) ३३७।६३ | आहार फलमू (शा श २ २२) ३७०।९५ |
| आवासोत्सुकपक्षिण २३५।६८ | आसादितप्रकट (मा द ६ २७) ३४५।४० | आहारयति (वै ०९) ३८३।२५४ |
| आवासो वि (गीत ४ ८ १०) २८९।६९ | आसाद्यापि महोद ९४।१०३ | आहारे वडवानलक्ष ९७।१८ |
| आ विन्ध्या (शा प १२५५) ११६।७० | आसाद्याम्रवनीमि २२५।१४६ | आहारे विरति (सा द ४ ११) २८६।२५ |
| आविर्भूतानुरा १८०।१०५७ | आसायं सलिलभ(रसगङ्गाधर) २६२।१७२ | आहारे शुचिता ध्वनो (धर्म ४) ९४।१०४ |
| आविर्भूते शशि (विक्रम उ १ ९) ३१०।२ | आसारेण न ह (भर्तृ १ ४६) ३४२।६७ | आहारो द्विगु (हि २ ११९) १६२।४०९ |
| आविशद्भिरुट (कुमार ८ ३८) २९४।१७ | आसिष्ये सुखितो (सु ३२६०) ७७।५५ | आहिते तु मधु (किरात ९ ६९) ३१६।६१ |
| आवृणोति यदि सा २५५।२१ | आसीत्ताम्रमयं शरी (सु.३२०६) ६८।८७ | आहूतेषु विहं (भल्लट ६९) १८०।१०५३ |
| आवृण्वतो लोचन (रघु ७ ४२) १२८।२८ | आसीत्पूर्वं विमलज २१८।७१ | आहूतोऽपि सहा (ध्वन्या.१) ३४७।४७ |
| आवृतान्यपि निर ३१७।१७ | आसीत्सत्ययुगे बलिस्त ९८।१ | आह्वल्य रक्ष्यमाणानि ८७।८ |
| आशङ्क्य प्रणतिं (अमरु ४७) ३५८।६० | आसीदासीम (नैषध १२ १८) ११२।२८१ | आह्वानं किं भवति २०३।१०० |
| आशा नाम न (भर्तृ ३.०१) ३६९।७६ | आसीन शयित २८१।१०१ | इ |
| आशा नाम मनु (भर्तृ स.४०५) ७६।१० | आसीने पूर्णिण (शा प ९३) ८।१०३ | इक्षुदण्डास्तिला १६०।३२७ |
| आशा निष्ठाप्रति ३७१।११४ | आसुर कुलमना १७१।८०९ | इक्षुर्धन्व शरा प्रसू २५०।२१ |
| आशा बलवती क (सु.३२४६) ७६।२२ | आसे चेत्खगृहे कुद्ध (सु.३१९८) ६८।८२ | इक्षोरग्रात्क्रमश (पच २ ३९) ४७।१०८ |
| आशाया ये दासास्ते(कविता.२७) ७६।२८ | आस्ता गाढतरा २४०।१३० | इङ्गिताकारतत्त्व (चा नी.१०८) १४४।७६ |
| आशावलम्बोपचिता ७६।३५ | आस्ता तावत्किम (पच.४ ५७) ३४९।२९ | इच्छता सह वधू (किरात ९ १३) २९६।५ |
| आशाशु राशीभवदङ्ग ३।८ | आस्ता तावदहो २१६।३२ | इच्छति शती सह (पच ५ ६९) ७६।३१ |