सुभाषितरत्नभाण्डागार (पण्डित काशीनाथ शर्मा संग्रह)

सुभाषितरत्नभाण्डागार (पण्डित काशीनाथ शर्मा संग्रह)
Subhashita Ratna Bhandagara
पण्डित काशीनाथ शर्मा (सम्पादक: नारायण राम आचार्य) द्वारा
स्रोत: Subhashita Ratna Bhandagara (10,000+ Classic Sanskrit Epigrams & Maxims - Nirnaya Sagar Press) (उद्गम)
DevanagariSanskritpublished516 पृष्ठ
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२० सुभाषितरत्नभाण्डागारस्थपद्यानां
| का काबला निधुवन २२३।१८ | कान्तारभूमिरुहमौलि ८७।३१ | कामेघादुपजाति २०४।१९३ |
| काकाल्लौल्यं यमा (सूक्ति ८९ ३५) ४५।१ | कान्ता रुचिं मुनि १९०।७७ | कामेन कामं प्रहि ३४०।१९ |
| काकुत्स्थस्य दशाननो ७८।१३ | कान्तावियोग (चा नी २ १४)३८०।४७९ | कामेनाक्रुध्य चापं २६।२०८ |
| काकुत्स्थेन (शा प ४०१८) ३६३।२१ | कान्तारे जलवृक्षवै १३०।२३ | कामो वामदशा १२२।१६५ |
| का कृता विष्णुना १९८।१० | कान्ते कञ्चलिकाम २१८।१८ | काय सनिहिता (हि.२.६५) १६३।४६६ |
| काके कार्ण्यम् (सूक्ति १५ ११) २२७।३८ | कान्ते कद्यपि (अमरु.१३) ३५७।३७ | काय कष्ट (शा प १०३९) २४१।१५४ |
| काके शौचं (विक्रम ४१) १७७।८१३ | कान्ते कथंचिद्र (अमरु.१५८) ३२९।६ | कायस्थेनोदरस्थेन (शा प.४०४३) ४५।२ |
| काकै सह विवृद्ध (शा प ८३८) ४५।३५ | कान्ते कलितचोलान्ते ३१८।३ | कारञ्जी कुञ्ज (शा प ३८५१) ३३९।१२५ |
| काकोलं कलक (शा प ३६०२) २९७।३० | कान्ते घोरकृतान्त ३११।३९ | कारणान्मित्रता(पञ्च १ ३१७) १६५।५२५ |
| का खलेन सह (वृ चा ४ ३५) ५६।१०४ | कान्ते जग्मुषि ताम्र ३२४।४७ | कारणोत्पन्नकोऽ (शा प ३९३८) ३४७।२ |
| काच काञ्चनसंस (हि प्र ४२) ८६।१२ | कान्ते तथा (शृङ्गारति १ ३९) ३१९।२८ | कारण्वं सवि (पञ्च २ २७) १४९।३०६ |
| का चक्रे हरिणा २०३।१०९ | कान्ते तल्पमु (अमरु १०१) ३२९।२१ | कारुण्यामृतनीरमाध्रि २१।८४ |
| काचा काञ्चनभूषि २१८।६३ | कान्तेत्युत्पललो (भर्तृ.१ ७२) २५०।१९ | कार्कश्यं स्तनयो (पञ्च १ २०२)३५०।७८ |
| काचित्कीर्णा (शिशु १५ ९६) १२६।२२ | कान्ते वावय मे पा १८८।३० | कार्त्स्येन निर्वर्णयि २७०।२७ |
| काचिद्दाला रमणव १९१।८४ | कान्तो यास्यति दूरदे ३३०।२ | कार्पण्याेन यश (नव.५ ) १७९।१०३३ |
| काचिद्वियोगानलतप्त १९०।६७ | कान्तोऽसि नित्य(भोज २३५)२४२।१७८ | कार्पासकृतकूर्पास २५१।१५ |
| काचिद्विलोलोकनयना १९०।७६ | कान्पृच्छाम सुरा (शा प १४७) ३०।१ | कार्यकार्ये किम (सु २८६१) ३६९।७२ |
| काचिन्निवासितब (शा प.३५२३) २७३।३ | का पाण्डुपत्नीगृहभू १९७।२४ | कार्यपेक्षी जन (दृ श.४५) १६८।६९० |
| काचिन्मृगाक्षी (शा प ५१९) १८५।२१ | कापिशायनसुग (शिशु १० ४) ३१४।७ | कार्येणापि विलम्बन ३५४।६१ |
| काचे मणिर्मणौ (पञ्च १ ८३) १४९।२७३ | कापुरुष कुकुरश्च ५५।२७ | कार्ये दासी रतौ वेश्या ३५०।९ |
| काचो मणिर्मणि (भट्ट.३) ४६।७१ | का प्रियेण रहिता २००।५५ | कार्येषु मन्त्री करणे ३५१।२७ |
| काचिद्दिनावैससये १८२।४० | का प्रीति सह १६७।६४८ | कार्ये सत्यपि जातु ३५३।५२ |
| काञ्चीगुणैरिव (शा.प.३३४५)२६६।३१९ | कामं कामदुघ धु (शा प.४९५) १८१।२ | कार्य्यं चेत्प्रतिप (हनु.६ ४०) २९०।८५ |
| काञ्ची काञ्चो न ११८।१०९ | कामं कामसमस्तव १०८।२०४ | कालक्रमकमनीयक्री २३९।९९ |
| काठिन्य कुचकुम्भ ११५।५१ | काम जीर्णपलाशसह ७४।४७ | कालक्रमेण परिणा १७६।९७० |
| काठिन्य कुचयो ह्य (कुव १३४) १३१।४ | काम नृपा सन्ति (कुव ५२) १०४।१९० | कालागुरौ सुरभि २३७।४९ |
| काठिन्यमङ्गैर् (शा प ३३४१)२६५।२७७ | काम प्रियानपि (सु ५१३) ७९।१ | कालातिक्रमणं (पञ्च १ २६०) १४९।२८४ |
| काणा कुब्जा (शा प १३३९) १४४।७३ | कामं भवन्तु (शा प ११४४)२४०।४२४ | कालातिक्रमण (शा प ७८६) २१३।६६ |
| का तव का (मोहमुद्गर ) ३८७।४०५ | काम वनेषु हरि (शान्ति ४ ४) ८०।२८ | कालिदासकवि (पद्यस १५) ३८४।२९० |
| का त्व पुत्र पुत्री नरेन्द्र(भोज १८२)१३३।३८ | काम वाच कतिचिद ६९।२७ | कालिन्दि ब्रूहि कु (कुव ६६) ११४।२३ |
| कानने सरिदुर्गै (सा द १० ७४)१०३।६४ | कामकर्मुकतया कथ २५८।५६ | कालिन्दीनर्मदाम्भ १३८।९० |
| कान्त ना (शा प ३८२८) २३६।३० | कामनाम्ना किरातेन ३४८।८ | कालिन्दीतुलिनोदरेषु (सु ३८) २५१।८४ |
| कान्त कुन्तचरि २८७।५ | कामपि श्रियमासाद्य ८२।१२ | कालिन्द्या पुलिनेषु (वेणी.१.२) २४१।६६ |
| कान्तं वक्ति कपोति (धर्म.५ ) ९५।१२४ | कामबाणप्रहारेण २६३।२०७ | काले देशे यथासु १९९।१६ |
| कान्त विना नदीती १९३।१० | कामारिरहितामिच्छ २०२।७७ | कालेन शिति (शा प ४१६७) ३७४।२०२ |
| कान्त वीक्ष्य विपक्ष ३५६।२१ | कामसागरविधौ मृगी ३२१।६ | कालेन शी (भा १२ ७३९) ३९४।७०४ |
| कान्तादूत्य इव (किरात ९.६) २९४।२५ | कामान्दुग्धे विप्र (उत्तर.५ ३०) ८५।१२ | काले नीलवला (शा प ३८७६) ३४२।६४ |
| कान्तं निरीक्ष्य बल ३५६।१५ | कामाय स्पृहय (दृ श २४) १६९।७१८ | काले पयोधराणामय १८६।४ |
| कान्तया कान्तसयोगे १९३।७ | कामेन कृत (शिशु १०.६१) ३१७७२२ | काले मृदु (भा १२ ५३१४) ३९०।६९८ |
| कान्तया सपदि (शिशु.१० ७३)३१९।१६ | कामिनामसक (शिशु.१० ५७) ३१७।१८ | काले सहि(काम नी ८०.३६) २८७।४०७ |
| कान्तसगमप (किरात ९ ५२) ३१९।४४ | कामिनीनयनकज्जल २५९।९५ | का लोकमाता किमु १९७।१८ |
| कान्ता कामपि कामय ७८।३ | कामिनो हन्त हेमन्त ३०५।६ | कालो दैव कर्म ३८४।२९६ |
| कान्ताकटाक्षविशि (भर्तृ २ ७६) ७८।१२ | कामिन्या स्तनभा २०३।१०७ | कालो मधु कुपित २८७७४ |
| कान्ताकेलि क (शा प ९९१) २३७।५१ | कामुका स्यु कया १९९।१३ | कालो हेतुं (भा १२ ५०६८)३९४।६८७ |
| कान्तामुखं सु (अमरु.१६२) २७८।३८ | कामुजहार ह (सूक्ति.९८.३४) २०२।८९ | का विधा कवि १७९।१०३८ |