सुभाषितरत्नभाण्डागार (पण्डित काशीनाथ शर्मा संग्रह)

सुभाषितरत्नभाण्डागार (पण्डित काशीनाथ शर्मा संग्रह)
Subhashita Ratna Bhandagara
पण्डित काशीनाथ शर्मा (सम्पादक: नारायण राम आचार्य) द्वारा
स्रोत: Subhashita Ratna Bhandagara (10,000+ Classic Sanskrit Epigrams & Maxims - Nirnaya Sagar Press) (उद्गम)
DevanagariSanskritpublished516 पृष्ठ
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| ३० | सुभाषितरत्नभाण्डागारस्थपद्यानां |
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| स्तम्भ १ | स्तम्भ २ | स्तम्भ ३ |
|---|---|---|
| जङ्गे तदीये (शा प ३३५८) २६९।३९९ | जयश्रिय कृपाणीय ११५।३२ | जाता शुद्धकुले १८४।३९ |
| जटा नेयं वेणीकृत (कुव २९) २८५।४४ | जयश्री (गीत ११ ०० ४) २३।१३८ | जातिमात्रेण किं (हि १ ५८) १६३।४४३ |
| जटाभाभि (का प्र १०.१४०) ३०१।८१ | जये च लभते (हि.२ १७२) १४७।२२० | जातियांतु रसातल (भर्तृ स २५) ६४।१५ |
| जठरज्वलनज्वलता २२९।१८ | जये वरीया (शा प ३०८५) २५१।३४ | जातिस्तस्य न २२८।२३० |
| जडास्त (शा प ४१७५) ३७५।२३८ | जरठ इव मरालो ३२।२६ | जाते जगति ३५।१९ |
| जडे प्रभवति (सु २९२) १८८।६॥३ | जरःशृग (म क ७ ६२) ७०।१४ | जातेति कन्या महती ९०।१ |
| जडेषु जानप्रतिभाभि ४०।३१ | जरा हरु हर (भा प १३४१) १७५।१३३ | जातोऽह ३७१।१०६ |
| जन जनपदा नित्य (हि २ ७८) १४५।१४१ | जरीज़म्भन्न्रौद्रद्य ३४६।२७ | जायन्त्याय च दुर्भु(भर्तृ स १०९) ३५५।९ |
| जनक सानुविशेषा २३७।४५ | जर्जरनॄणा (आ प ८९६) २२९।२३४ | जात्युत्कृष्टस्य हि ८१।२२ |
| जननी जन्म १५७।७० | जलद ममुद्रसेवा २१२।१९ | जानन्ति (शा प १४४८) १५३।२४ |
| जनयन्त्यर्जने दुख (हि १ १८४) ६८।८ | जलदपङ्क्ति (शिशु ६ ३१) ३४१।३७ | जानन्ति हि गुणा १५५।१२२ |
| जनस्थाने भ्रान्त (हनु १० २४) ७३।३३ | जलवर जल (शा प ७६९) २११।१५ | जानन्नपि (पच ४.३७) १६०।३३५ |
| जनि सरोऽङ्गादपि २४४।२२० | जलवर निर्ल (मृच्छ ५ २८) २९८।७ | जानाति वि (भा प १०७५) ३९३।६४३ |
| जनिता चोपने(चा नी ५ १२) १६५।५४२ | जलनिधौ जनन २७५।७७ | जानामि नागेन्द्र तव ८६।१२ |
| जनो दुर्लक्ष्यो (शा प ३६१८) ३५६।२६ | जलविन्दुनि (चा नी १२ १०) १५६।५५३ | जानीमस्तव गौरि २८६।३० |
| जन्तोर्निरुपभोगस्य (दृ श ३४) १६८।६८७ | जलग्नोत्पत्तित्कृते २८५।१७ | जानीमहे (सा द १० ६३) २७३।५ |
| जन्म क्षीरनिधौ २११।४६ | जलमसिषिंप श(हि १ १६५) १५३।४५७ | जानीमो वदन २७२।७४ |
| जन्म क्षीरमहार्णवे २११।३८ | जलरेखा खल(वृ.चा १७ ९) ३९३।६६६ | जानीमो वयमासनस्य २७२।७५ |
| जन्मनि केशबहु (हि १.१८६) १६३।४६३ | जलबिललितवस्त्र ३३९।११५ | जानीयात्सगरे (चा नी १ ११) १५५।९८ |
| जन्म ब्रह्मकुलेऽप्रजो ९४।११९ | जलसेकेन वर्धन्ते ८०।२५ | जानुभ्यामुपविश्य ५८।३३२ |
| जन्मस्थान न (शा प १२०२) २४७।६१ | जलाद्रीं शष्पा । ३३६।२३ | जानुस्थापितदर्पणं २५८।३६ |
| जन्मान्तरीण (सा द १०.०६) ११।५ | जलाहुती(कथा मा १२ ४२) ३८७।३९५ | जाने कोप (शा प ३४५४) २८०।८९ |
| जन्माभूदुदधौ २३७।३७ | जले तैल खले (चा नी १४ ५) १५६।१३८ | जानेऽति (नैषध ७ ३९) २६१।१५१ |
| जन्मिनोऽस्य(किरात ११ ३०) १६१।३७३ | जलाकयो (काशीखण्ड३८ ८५) ३८८।२८४ | जाने युष्मत्प्रयाणे १२६।२३ |
| जन्मेन्दोरमले (वेणी. ६ ७) ३६१।३६ | जलौका के(काशीखण्ड३६ ८६) ३८४।२८५ | जाने रात्रिशु २६७।३४५ |
| जन्मैव मास्तु यदि ३५२।३० | जत्पन्ति मार्य (चा ना १६ २) ३४८।५ | जाने खन्न्र (म क ५ १६९) २८१।१९९ |
| जन्मैव (शा प ४१४९) ३७४।२०५ | जद्यो हि ससे (वानराष्टक ८) १७४।८९७ | जामाता जठर १५७।१६९ |
| जम्बीर वा कमल २६५।२९२ | जहाति सहसासन ७२।५७ | जामाता पुरुषोत्तमो ९४।१०२ |
| जम्बीरश्रियमति (रसगङ्गाधर) २६५।२८९ | जहीहि कोप (किरात ८ ८) ३०८।९ | जायन्ते नव सौ १९३।९४ |
| जम्बुद्वीपगृह १२२।१८६ | जहीहि गुरुगर्जिन २३२।७९ | जालान्तरप्रेषित (रघु ७ ९) १२६।३५ |
| जम्बूफलानि पक्वानि १८१।२२ | जाग्रत (शा प ३३६१) २६९।४०४ | जाल्मो गुरु २३४।१४१ |
| जम्भारातीभ (सूर्यशतक १ २) २७।११ | जाड्य धियो हरति (भर्तृ स ४२) ८७।२९ | जाह्नवी मूर्ध्नि पादे वा १३।१ |
| जम्भारिरेव (शा पू ११६९) २८५।१० | जाड्य हीमति (भर्तृ स २४) ६१।२६३ | जिप्रत्याननमिन्दु २७१।५६ |
| जयति जटाकिजल्कं ४।२२ | जात कूर्म स (भर्तृ स २४८) ९८।११ | जितरोषतया (शिशु १६ २६) ४९।१५६ |
| जयति परिमुषित ९।१३५ | जात केलिकलावती २३८।६० | जितेन्दुपुद्गलावण्य २६२।१६० |
| जयति प्रियापदान्ते ४।१८ | जात सूर्यकुले पिता(धर्मवि १०) ९३।१०१ | जितेन्द्रियत (का प्र १० १३९) १०३।६१ |
| जयति मनसिज २५०।१ | जात स्तम न २२०।१० | जितेन्द्रिय (किरात ?) १७३।८६९ |
| जयति ललाटस्फाल ९।१३८ | जानमात्र न (पच १ २५६) १७७।१९६ | जिते लक्ष्मीमृते १५०।३५१ |
| जयति स नाभि (वेणि [पा १] १०) १७।६ | जानश्च नाम न विन ७०।३५ | जिह्वो लोके कथ ६१।२५८ |
| जयति स भग (वेणी [पा] १.२) १४।४ | जास्तस्ते निशि ३५६।१६ | जिह्वादूषितसत्पात्र ५५।७९ |
| जयत्युपेन्द्र स चकार १७।१७ | जाता पक्क (मुरारि) ३२५।५५ | जिहायाश्छेदन (शा प ४०३१) ३६३।१ |
| जयन्ति जगता मातु १६९।१ | जाता प्रासादपत्री २९८।२१ | जिहे लोचन (शातिश ४ १२) २७४।१०० |
| जयन्ति जितमत्सरा ५२।२५५ | जाता नोक्त (अमरु ८८) ३११।३२ | जिह्वारलोल्यप्रस (पच २ ३) १६४।५२० |
| जयन्ति ते पञ्चमनाद ३२।३० | जाता लता हि शाले (कुव ८२) ३६३।९ | जिह्वैकव सतामुखे ८३।४ |
| जयन्ति ते सुकृ (शा.प.१६६) ३२।१ | जाता शिखण्डिनी ३५।२७ |