सुभाषितरत्नभाण्डागार (पण्डित काशीनाथ शर्मा संग्रह)

सुभाषितरत्नभाण्डागार (पण्डित काशीनाथ शर्मा संग्रह)
Subhashita Ratna Bhandagara
पण्डित काशीनाथ शर्मा (सम्पादक: नारायण राम आचार्य) द्वारा
स्रोत: Subhashita Ratna Bhandagara (10,000+ Classic Sanskrit Epigrams & Maxims - Nirnaya Sagar Press) (उद्गम)
DevanagariSanskritpublished516 पृष्ठ
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३२ सुभाषितरत्नभाण्डागारस्थपद्यानां
| तप सीमा मुक्ति (प्र भ १०) | ३८३।२४२ | तव तन्वि तरुणपुण्या | ३१८।५ | ताडिता अपि (पच ४ ५६) | ३४९।२८ |
| तपति तनुगात्रि (अ शा ३ १३) | २९१।५ | तव नित्यमुत्सव | १०५।१३४ | ताडितोऽपि (पच १ ९७) | १४४।८९ |
| तपनस्तपति स्म | ३४७।६ | तव निर्वेणीदृष्टणं | १०३।५१ | तात क्षीर (शा प १११७) | २१८।८० |
| तपखिनोऽप्यन्त | २०२।८३ | तव विरहमसहमाना | २८८।१२ | तात त्वं निजकर्म | ३६३।४० |
| तपस्वी का गतोऽवस्था | ११।६ | तव विरहे मलय | २८८।२५ | तातं तत्तातात कनय | ७।९८ |
| तपापाये गोदापरतट | १८४।४६ | तव विरहे विबुवदना | २८७।५ | तातार्थमन्त्रिसुत | १५२।४०७ |
| तप्तं केर्न तपोभि | २११।२४ | तव विरहे हरिणाक्षी | २८८।२३ | तातेन कथितं पुत्र | १८८।३९ |
| तप्ता गामिव सस्रुषु | १२५।११ | तव सा कथासु (शिशु ० ६४) | २८८।२८ | तादृक्सप्तसमुद्रमुद्रित | ६।८० |
| तप्ता मही विरहिणा | ३३६।१६ | तवाग्रतो वीर | १०४।१०९ | तादृग्दण्डविवर्ते | १३३।४० |
| तप्ते मङ्गाविरह (अमरु ८६) | २७८।३७ | तवाङ्गने सुन्दर (शा प १२६५) | ११६।६२ | तादृग्धीर्धविरित्रि (भाव १ ८) | १३४।१८ |
| तम स्तोम (शा प ३५२१) | २७१।४३ | तवानन सुन्दरि फुल्ल | ३१२।३९ | तादृशी जायते (चा नी ६ ६) | ९१।२१ |
| तम स्तोम भृश | २५७।६ | तवारिनारीनयनाम्बु | १३३।५ | तानि तानि कमलानि | २१९।४ |
| तम स्तोम सोमं | ३२०।१५ | तवाद्ववादिन क्लीबं | १५०।३४६ | तानि प्राब्धि | २६३।२०४ |
| तमद्दढे (शिशु ३ ६०) | १२२।४ | तवाहवे (का प्र १० ४५६) | १०४।९५ | तानि स्पर्श (गीत ० ७ १५) | २८०।९७ |
| तमसि वर। (शा प ४०४७) | ३६४।२८ | तवेद पश्यन्त्या (गीत ८ १८ १) | ३०९।४ | तानीन्द्रियाण्य (पच ५ २८) | ६५।१६ |
| तमांसि ध्वसन्ते | ५२।२४७ | तवैतद्वाचि (शा प ८८२) | २२५।११६ | तापं लुम्पसि | २१३।७१ |
| तमाखुपत्रं राजेन्द्र | १००।१ | तवैव प्रावीण्यं जलद | २१३।५५ | तापनैरिव तेजो | २९३।२ |
| तमृषिं मनुष्यलोक | ३६।४९ | तवैष विन्दु (शा प ३३१०) | २६१।१३७ | तापापहे (शा प ११६८) | ६३।२७ |
| तमोगगविनाशिनी | ३।१२ | तवोपकोष्ठस्थित | २६५।२८२ | तापो नापगत (शा प ९२३) | २३२।८४ |
| तमोभि पीयन्ते | ३२४।३८ | तस्करस्य कुतो (वृ चा ९ ११) | १६८।३९१ | तापोऽम्म प्रसर्र्तं | २९०।८३ |
| तया गाढ मुक्तो | २७९।७५ | तस्करेभ्यो (हि २ १०९) | ७४।२०७ | तामनङ्गजय (का प्र ७ ३२२) | २७३।७ |
| तरङ्गय दृशो (विद्ध ३ २७) | ३०६।३८ | तस्मात्सभ्य (शा प १३४६) | १४६।१५१ | तामिन्दुसुन्दर (मालती १ २१) | २७८।४७ |
| तरत्तरलतृष्णेन | ३७४।२०६ | तस्मात्सर्वप्रयत्नेन (पव ४ ५०) | ३४८।२५ | ताम्बूलं (शा प १४१६) | ३८५।३२५ |
| तरुकुलसुषमापहरां | २१५।२ | तस्मान्महीपतीनाम | ३६४।३१ | ताम्बूलरागोऽश्वर | ३१२।३६ |
| तरुणतरणि (शा प ३८३९) | ३३६।३९ | तस्मिन्गताद्र्धाभावे | ५८।१९७ | ताम्बूलाक्त दशन | ३५३।३९ |
| तरुणतमालकोमल | ३०४।१६१ | तस्मिन्वन्धुशरे स्मरे | २८०।९८ | ताम्बूलेन विना | १०२।४९ |
| तरुणा दिवाकरमयूख | ३२३।९ | तस्मिन्युद्धे (शा प ४०१९) | ३६३।१ | तारतारतरैरूत्त (शा प ५४४) | २०५।२ |
| तरुणिमनि (का प्र ४ ११०) | २७०।१७ | तस्या सुननुमरस्या | २७८।२४ | तारल्य मुखमेलने | ३५८।६२ |
| तरुणिमनि कृ (का प्र.१० ९०) | २५१।३२ | तस्या कचभरव्याजा | २५७।६ | ताराक्षतान्य्रवि | ३०१।७० |
| तरुणिमसमा (नीतिस ७७) | ३८७।४१६ | तस्या कि मुख | २८२।११७ | तारागणश्चन्द्रमस | २९०।१८ |
| तरुण्यालिङ्गित क(शा प ५२०) | १८४।८ | तस्या पद्म (शा प ३३५५) | २६८।३८२ | ताराधिनाथमभिजित्य | १२३।६ |
| तरुमूलयुगेन (नैषध २ ३७) | २६९।३९१ | तस्या (गीत १२ २३ ४) | ३२८।१७ | तारानायकशेखरा (रसगगाधर) | ६।८१ |
| तरुमूलादिषु (शा प९२१) | ४७।८८ | तस्या पादनख (बिल्हण) | २६९।४१९ | तारापते कुमुदिनी | २८२।१४५ |
| तरौ तीरो दूते (शा प ८०३) | २२१।२४ | तस्या प्रविष्टा (कुमार १ ३८) | २२९।२४८ | ताराविष्णूरणत्वित् | १९८।४४ |
| तर्कै तर्केशवक्त्रवाक्य | ३४।६१ | तस्या शलाका (कुमार १ ४७) | २५८।५७ | तारुण्य तरुणी | १७९।१०३४ |
| तर्केषु कर्कशतरा | ३३।३७ | तस्या श्रवणमार्गेण | २५९।६७ | तालं प्रभु स्यादनु | २६५।२७६ |
| तर्तु पर्वतसनिभेन | १८४।६६ | तस्या सान्द्र (अमरु २६) | ३११।२६ | तालीतरोरसु (शा प १०२५) | २४१।१३५ |
| तल्वेक्ष्यते (भा १२.४।४८) | ३८८।४३४ | तस्या महा (शा प ३४७९) | २८८।४० | तालीदलं (शा प ३३०७) | २६०।१२५ |
| तल्पीकृताहिरगणित | १६।४ | तस्या मुखस्याति (हर्ष) | २६२।१७९ | तावका कति न | १०४।८७ |
| तल्पे प्रभुरिव | ३५१।२३ | तस्यास्तुङ्गस्तन | २६४।२६३ | तावच्चकोरचरणा | २२५।१३५ |
| तल्पोपान्तमुपेयुषि | ३५८।६६ | तस्येवाभ्युदयो (शा प ७३९) | २०९।३ | तावज्जन्माति (पच १ २८८) | ९७।८ |
| तव करकमलस्था स्फा | ३।११ | ता जानीया परिमित | ३५९।८३ | तावतकर्णाध्वयाता | ९।१३४ |
| तव कुवलयाक्षि | ३१२।३१ | ता हेमचम्पकरुचिं | २७८।५२ | तावकविविहंगाना (शा प १८७) | ३६१।३५ |
| तव कुसुम (अ शा २.३) | २८२।१३६ | तादृङ्मस्या (शा प ३३०८) | २६१।१३२ | तावतकुलश्रीमर्यादा | ३५०।८ |