भारतकोश
सुभाषितरत्नभाण्डागार (पण्डित काशीनाथ शर्मा संग्रह)

सुभाषितरत्नभाण्डागार (पण्डित काशीनाथ शर्मा संग्रह)

Subhashita Ratna Bhandagara

पण्डित काशीनाथ शर्मा (सम्पादक: नारायण राम आचार्य) द्वारा

स्रोत: Subhashita Ratna Bhandagara (10,000+ Classic Sanskrit Epigrams & Maxims - Nirnaya Sagar Press) (उद्गम)

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सस्थाननिर्देशमनुक्रमकोशः४३

| नि पीतपीनति | २१६।१७ | नितरा नीचो (भामिनी अ ७) | २२०।६ | निम्नोन्नत वक्ष्यति | ८४।१७ | | नि पीते कलशो | ३६१।४७ | नितान्तस्वच्छहृदय | १९५।५० | निम्बे किं (शा प १०४०) | २४१।१५५ | | नि शङ्कं गजपति | २२३।७७ | नित्य छेदस्तुणूनाना (अष्टरत्न ३) | ३८५।२१८ | नियत (काम नी २ ४३) | १५२।४१० | | नि शङ्क बहिरम्ब | ३६५।९ | नित्यं (स्काद आ अ २५) | १६६।५९९ | नियत्तै पदैर्निक्षेप्य | १७१।७९७ | | नि शङ्कसोचित(नै ७ ७७) | २६५।२७८ | नित्य निरावृत्ति (सु ८९) | ९।१० | नियमयसि (अ शाकु ५ ८) | १०६।१९६७ | | नि शेषं व्यपनीय | ३२०।२० | नित्यं ब्रह्म (शा प १५५८) | २९१।३ | नियुक्त क्षत्रियो(हि २ ९७) | १४७।२०३ | | नि शेषच्युत (अमरु १०५) | २९३।७ | नित्यं मनोरथस्यापि | ३०४।१ | नियुक्तहस्ता (महा ना ९ ३४) | १५१।३८३ | | नि श्वासानलविद्ध | २७७।५८ | नित्य या (सु ५३८) | ७१।४२ | नियोगिभि (शा प १३३२) | १४४।-३ | | नि श्वासा वदनं (अमरु ९२) | ३०९।११ | नित्य वृद्धिसुपेषि | १८।१९४ | निरक्षरे वीक्ष्य | १७३।८५९ | | नि श्वासोद्गी (काम नी ३ १८) | ३८४।२८८ | नित्यं ज्ञाता सुगन्धा | ३५०।२ | निरञ्जने (किरात ८ ५२) | ३३८।९५ | | नि सारस्य (शा प ४८१) | १५५।११४ | नित्यमाचरतः | ३७१।११५ | निरतिशय (पच १ ३१) | १७१।७७५ | | नि सीम (भामिनी शृ.४६) | २५९।६१ | नित्यमाराधिता देवै | १९७।४९ | निरर्थकं जन्म (स क २ २५३) | २०५।५ | | नि सृप्तोऽह (शा प.४३२७) | ३७२।१४२ | नित्यमास्यं शुचि(शा प ६१२) | १५६।१४४ | निरवद्यानि पद्यानि | ३०।२ | | नि स्नेह नि करुण | ३५८।८० | नित्यानित्यविचारणा | ३७०।८४ | निरवधि (काव्यप्र १० ४२८) | १८।१६ | | नि स्नेह पतिरुज्झिता | २८७।९ | नित्यार्यपृथिवी | १५०।३२५ | निरस्थचालीके | ६७।५९ | | नि स्नेहो याति (शा.प ४१००) | ३६७।६ | निदधिरे (शिशु ६ २४) | ३३५।१२ | निरा (काव्यालं सू ३ १।१२) | २२३।९४ | | नि स्वो वष्टि शतं (अष्टरत्न ९) | ७७।५० | निद्रातुन्दिलशोण | ३२९।२३ | निरीक्षितुं (शिशु १७ ६२) | १२७।११ | | निकटस्थं (दृ श ७५) | १६९।७०६ | निद्रानिवृत्ता (का प्र १० २२) | ३२८।१ | निरीक्ष्य विद्युन्नयनै (कुव ६१) | ३४०।२० | | निकटस्थं दहल्यम्रिनं | १८४।११ | निद्रामीळित (भर्तृ.स ५७९) | २३१।५१ | निरीक्ष्य वेणी | ३३८।७१ | | निकाामं क्षामाङ्गी (मालती २ ३) | २७६।३४ | निद्रार्धमीलित (दश ४ २३) | २७८।४० | निरुत्साहं निरानन्दं(हि २ ७) | ९०।१० | | निखिलं जगदेव(रसगङ्गाधर ) | ३६७।२७ | निद्रितस्य बत | ३४०।४ | निरुद्यमानवद्याझ्या | १९३।२ | | निखिलेषु गुणेषु | १०४।८८ | निद्रे लोचनमुद्रणं | २८१।११० | निरुपादानसम्भार (वेणीसंहार ?) | ३।३ | | निचयिनि (किरात १० २९) | ३४६।१४ | निधे कलानामपि | २१०।१५ | निर्गतामलवाक्यस्य | ३४।३ | | निजकरनिकर (शा प ७५२) | २१०।८ | निन्दन्तु नीति (भर्तृ स.२६५) | ७८।११ | निर्गत्य न विशे | ३९३।६३५ | | निजगुणगरिमा | ८३।५ | निन्दा य (दृ श २७) | १६८।६८३ | निर्गुण इति मृत | ४०।२७ | | निजदोषा (का प्र.१० २३) | १७१।८०१ | निन्यते पितृभिस्त | ८९।८ | निर्गुणमप्यनुरक्त (सु २४२) | ४८।१४१ | | निजनयन (सा द ८ १५) | ३३४।१०३ | निन्यन्ते यदि (प्र राघव १ २०) | ३२।४८ | निर्गुणस्य हतं रूपं(वृ चा ८ १६) | ३८८।४३८ | | निजपतिराद्यः | १८१।२५ | निपतति किल | ९२।६२ | निर्गुणेष्वपि (शा प २३२) | ४६।३९ | | निजपदगतिगुप्परञ्जित | ४७।९६ | निपत्य युधि (शा प १६०७) | १४३।५१ | निर्जितसकलाराति | २०१।५९ | | निजपाणिपल्लव (शिशु ९.५२) | ३५९।८८ | निपपात संभ्रमभूत (शिशु ९ ७१) | ३१०।३ | निर्गतव्यो | २६८।३६५ | | निजप्रियमुरुखप्रान्त्या | ३३७।५९ | निपानमिव (हि १ १७६) | ८२।९ | निर्णेत्रुं शक्य (कुव १७१) | ३१२।१७ | | निजरज पटवास (६.३७) | ३४१।४३ | निग्रन्धनी (भा १२ ६५४८) | ३८०।१४८ | निर्दयं खङ्ग (कुमार १६ ६) | १२७।४ | | निजवर्षािहितस्नेहा | १४५।१२५ | निबिडतमत्तमाल | ३५४।७३ | निर्दहति कुल (प्रसंगा ८२) | ३८८।४२९ | | निजसौख्यं (हि १ १५८) | ७१।१८ | निबिडानुषक्त | २६६।३०८ | निर्धौते सति (शिशु ८.५१) | ३३९।१०८ | | निजा काय (शा प ३८३२) | ३३६।२१ | निभृत निभृतं | ३५२।२४ | निर्मग्नेन मयाम्भसि | १५।२६ | | निजांशुकावृता (शा.प ३७३४) | ३२७।२ | निमग्नस्य (घट नीति २०) | १६०।३०२ | निर्मजचक्षु (सूक्ति ९३ ३) | ३६६।१४ | | निजानपि गजा | ११७।७६ | निमित्तमुद्दि (घट नीति १०) | १७४।९०८ | निर्मासि मुखमण्डले | १२४।८ | | निजानुत्पत्त (भा ५ ११६५) | ३८६।३८४ | निमीलदाकेक (किरात ८ ५३) | ३३८।९६ | निर्माणकौशल(सा द १० ३३) | २५३।६ | | निजाशयवदाभाति | १८८।६९७ | निमीलनन्शंशजुषा(नै १ २७) | २५३।७ | निर्मथ्य खलजिह्वाग्रं (सु ३७६) | ५६।१०६ | | नितम्बगौरवेणासौ | २६८।३७५ | निमीलनाय (शा प.७४३) | २०९।४ | निर्मित्सु शुंदती | २५४।४५ | | नितम्बपीड्य | २६९।४०८ | निमेष (भा १२ १२५०३) | १६१।३५९ | निर्मुक्तरशेषधवलैरचले | १३५।२२ | | नितम्बबिम्ब | २६८।३७२ | निम्ननाभि (का प्र.१०.४६) | ३३८।९९ | निर्मुक्तांशैश (प्र.राघव २ १९) | २५३।२३ | | नितम्बिन्यो नित्यं विनय | ३५२।३७ | निम्नप्रदेशा (कुमार १४ १४) | १२८।४५ | निर्यच्छोणितपूरताम्र | ११५।४८ | | नितम्ब्यो विशाल. | १७५।९८४ | निस्त्रैण्वोधीभूत(शिशु १८ ६९) | १३०।९८ | निर्यद्द्वाससरजीव (विद्ध २ २२) | २९५।६२ |