सुभाषितरत्नभाण्डागार (पण्डित काशीनाथ शर्मा संग्रह)

सुभाषितरत्नभाण्डागार (पण्डित काशीनाथ शर्मा संग्रह)
Subhashita Ratna Bhandagara
पण्डित काशीनाथ शर्मा (सम्पादक: नारायण राम आचार्य) द्वारा
स्रोत: Subhashita Ratna Bhandagara (10,000+ Classic Sanskrit Epigrams & Maxims - Nirnaya Sagar Press) (उद्गम)
DevanagariSanskritpublished516 पृष्ठ
पृष्ठ 473, कुल 516 में से
संदर्भ में पढ़ेंपृष्ठ 473
४२ | सुभाषितरत्नभाण्डागारस्थपद्यानां ---|---|---
| न द्वयेन च (शा प ३०८०) २५।१२ | नानीयन्ते मधुनि ८०।३९ | नालम्बते दैष्टि(शिशु २ ८६) १४७।१८६ |
| न हायनैर्न (भा ३ १०६३२) १६७।६१४ | नान्नृषि कुरुते १६०।३०३ | नालसा (भा १२ ५२६९) १५३।१० |
| न हार नाहार २८९।६१ | नान्त प्रवेशमरणं (अमरु ११४) २७३।५ | नालस्य (शा.प ११३७) २४४।२३६ |
| नहि कस्य (श्रीकृष्णजन्मख ५) २९४।६८२ | नान्तरज्ञा (किरात ११.२४) १६१।३६७ | नालिङ्गन्ति (शा प १२४३) १०८।२०० |
| नहि जन्मनि ज्येष्ठ (शा प गुण ४) ८२।२९ | नान्तर्विचिन्तयति (सु २७६) ५१।२१४ | नािलङ्गिता नवलवङ्ग २२३।८६ |
| नहि बुद्धिगुणेनैव (मालवि ४ ६) ८८।१६ | नान्दीपदानि (दश २ ४०) २५२।४३ | नालीकभङ्गकृदतीव ११८।१२० |
| नहि भवति यन्न (भर्तृ स ५६९) ९१।४२ | नान्बौ स्कन्ध्नति २१४।७७ | नालेनेव स्थित्वा (शा प ८८९) २०८।२३ |
| नहि भवति वियोग ५१।२१८ | नापरीक्ष्य नयेद्दण्डं १५०।२३७ | नालोक क्रियते (सु २२६) ४६।७७ |
| न हीदृश सव (शा प १४७०) १५४।५१ | नापितस्य गृह ३९४।६८४ | नाल्पीयसि (शा प.२११) ३८६।३६३ |
| नाकालतो (भा १२ ८८१) ३७९।१०३ | नापुष्ट (पञ्च पा अ.११०) १६६।६१० | नावज्ञया प्रदा (र १ १२ ३१) ३८७।३९२ |
| नाकालतो म्रि(भा १२ ७४२) ३७९।१०६ | नापेतोऽनुनयेन (अमरु ४२) ३११।२७ | नावज्ञा नाप्यवैद (सूक्ति २७ २) २१५।१ |
| नाकालमत्ता (भा १२ ७४१) ३८०।१०९ | नाप्तं यत्केनचिदपि (सु ५१९) ७०।२७ | नावर्तो न च तरला २१६।६ |
| नाकाले म्रियते(नीतिसार १९) १६०।३०१ | नाप्राप्यमभि (भा ५ ९९३) १६३।४५८ | नाविदग्ध प्रियं १६४।५१० |
| नाकाश न दि (सूक्ति ६९ ११) २९८।३४ | नाभिप्रभिन्नाम्बु(सा द १० १४) १४०।४ | नाशयन्तो घनध्वान्त(मा द ७ ८) २९९।६ |
| नाक्रोशी स्या (भा ५ १२६५) ३८०।११२ | नाभिरन्ध्र २६७।३३९ | नाश्नन्ति पित(गरुड पू १०८) ३८९।४८६ |
| नाक्षराणि पठता (नै १२५) ७०।३२ | नाभिषेको (शैन नी ११५) २२०।७ | नाश्रिय किमभूद्भव २०।७१ |
| नागच्छन्नुपहूयते न ६१।२६१ | नाभिसङ्गेन २६७।३४१ | नाश्नाति सेवयौ (पच १ २९०) ९७।९ |
| नागविशेषेषु शेषे २०६।१५ | नाभीपद्मवस (प्र राघव १ ३) १५।३० | नाश्चर्यमेतदधुना (सु ४४५) ६०।२४५ |
| नागुणी गुणिन ४५।१३ | नाभीबिलान्तर २६७।३५९ | नाश्रम कारण ३८७।३९४ |
| नागेन्द्रहस्ता (कुव ४५) २६९।३१७ | नाभीवलयसबद्धा २६७।३४२ | नासत्यवादििन सख्य ८३।१ |
| नागो भाति (पञ्चरत्न १) १८०।१०४२ | नाभूतिकालेषु(भा १२.७३८) ३८७।३९६ | नासा कश्चि (भा १३.१२१८) ३४८।१५ |
| नाग्निस्तृप्यति (पंच २ १४८) १५४।६० | नाभूवन्भुवि यस्य (शा प ९२४) २३२।८३ | नासादसीया (नै ७ ३६) २६०।११६ |
| नाङ्गीकृतव्याकरणौष ४२।७ | नाभ्यस्ता (भर्तृ स.१९५) ३७४।२१७ | नासामौक्तिकमबले २६०।११८ |
| नाजारज १६५।५६२ | नामृत न विषं (भर्तृ स ९१) २५१।१० | नासावंशविनिर्मुक्त २५८।४४ |
| नात पर (शा प ३७५२) ३५१।३० | नामोदस्ताखिलामो २६१।९३ | नास्ति कामस (वृ चा ५ १२) १५९।२८६ |
| नात पापीयसी (सु ३१६४) ६६।२१ | नाम्बुजैर्न कुसुमैरु ३५२।२७ | नास्ति वर्मसमो (प्रसगा १२) ३८०।३८९ |
| नातिप्रसङ्ग (पच १ १४८) ३४९।६७ | नायं धार्यमधी २६३।२३१ | नास्ति क्षुवासमं दुख ९६।१ |
| नात्यक्त्वा (भा १२ ६५८३) ३८६।३६५ | नाय प्रयाति विकृतिं २९।१८ | नास्ति मेघ (वृ चा ५ १७) १५९।२८८ |
| नात्यर्थमर्थार्थी (शा प ४३३) १६७।६२५ | नायं मुवति २८९।७६ | नास्ति (भा.३ १३६४९) १५६।१४२ |
| नात्युच्चशिखरो (सु २२६०) ८३।१८ | नायाति वाडवशि ७८।८ | नास्ति (वराह अ १५३) १६७।६२४ |
| नात्र व्याधशरा २३४।१२० | नायातो यदि (सु १४३८) ३५८।७३ | नास्ति सत्य १६५।५५६ |
| नाथ मयूरो नृत्यति १८४।१९ | नारब्धं कुचपरि ३१३।४७ | नास्ति सत्या(भा १ ३०९७) ३८७।३९० |
| नाथ विलोकय मेघ १८४।९ | नारमेतान्यसा(भा २ १९७२) ३८७।४०२ | नास्ति स्त्रीणा (म ५ १५५) ३५१।१६ |
| नाथे श्रीपुरु (शांति १ ११) ३७६।२५८ | नारसिंहाकृतिं वीक्ष्य १९४।१२ | नास्तीदृशं (मत्स्य अ ३६) ३८४।३०० |
| नाथो मे विपणिं (कुव १५४) ३५५।८८ | नारिकेलसमाकारा (हि.१ ९४) ४५।२४ | नास्त्यन्या तृष्णया (शा प ४२२) ७६।५ |
| नाद्रव्ये निहिता (हि प्र ४४) १६२।४३० | नारीणा खलु ३५४।५८ | नास्माक शिबिका ८०।४४ |
| नाधन्याना (सूक्ति १०३.२६) २१५।१ | नारीणा मृगनाभि ३२६।३१ | नास्मिन्सततवेष्ट (सु २२९०) ७८।१५ |
| नाधीतेऽत्र जनो यदि ९९।९ | नारीणा वचनेन ६१।२६७ | नास्य भारग्रहे (शा प ९६१) २३४।१३९ |
| नाध्यापयिष्यन्निगमाश्च ४२।१ | नारी परमुखद्रष्ट्री १५७।१८० | नास्योच्छायवती (शा प ९०६) २३०।३९ |
| नानन्दि कैरवमवर्धि २१०।२८ | नारीभिर्गुरुज (शिशु ८ ४७) ३३९।१०४ | नाहं रक्षो न (शा प ४०८८) ३६७।१५ |
| नानन्वयस्ते न च ते १०४।९३ | नारुतुद (मनु २.१६१) १६७।६१५ | नाह दुश्चरिणी न ६३।३८ |
| नानाभूषणभूषित १०९।२१३ | नारुहेद्विषमं वृक्ष १६७।६५१ | नाह धार्यमधी २६४।२३१ |
| नानाविध (काव्य प्र १०.२७) १०५।१४४ | नार्य कुङ्कुमशङ्कया १३४।२१ | नाहूतापि पुर पद १०१।१३ |
| नानिवेद्य (हि २ ९०) १४६।१४२ | नार्यस्तन्वि (अमरु ८) ३१७।४ | नि पद्म शिशिरेण २१४।७८ |