भारतकोश
सुभाषितरत्नभाण्डागार (पण्डित काशीनाथ शर्मा संग्रह)

सुभाषितरत्नभाण्डागार (पण्डित काशीनाथ शर्मा संग्रह)

Subhashita Ratna Bhandagara

पण्डित काशीनाथ शर्मा (सम्पादक: नारायण राम आचार्य) द्वारा

स्रोत: Subhashita Ratna Bhandagara (10,000+ Classic Sanskrit Epigrams & Maxims - Nirnaya Sagar Press) (उद्गम)

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संस्थाननिर्देशमनुक्रमकोशः ४१


न माता शपते (धर्मवि १८) १६८।६६९न लज्जते सज्जन (सु ३५९) ५९।२२५नवे वयसि (गरुड पू अ ११४) १५६।१३४
नमामि मामनो (शा.प ५४८) २०५।१न लज्जा न (हि १ १२०) ३४९।३८न वै ताडनात्ता २४६।१९
नमिता फलभारेण न ३४४।८न लभन्ते विनोयोगं (दृ श ३५) ८३।१७न वैरमुद्दीपेय (मा ५ १०८२) ३९४।६९७
न मिथ्यावादस्ते १०६।१५४नलिकागतमपि ५६।१९९न वैरण्यभि (मा २ २४३८) ३९४।६७८
न मुग्धदयिता (शा प १८३) ३७।६१नलिनं मलिन (नैषध २ २३) २५९।९१नवोक्तिजतिरि (शा प १५२) ३०।४
न मुद्रीयान्मुद्री (सु ५५) १८।३०नलिनान्तिकोप (शिशु १३ ४३) १२६।४३न व्यावयो (मा.२ १९७४) ३८६।३७७
न मे दु ख (शा प ३४५६) २७७।४नलिनि निपुणता २४४।२२४न व्याधिर्न (योगवा सा १ २७) ३८६।३७८
नमो नम काव्यरसाय (सु.१६८) ३१।३०नलिनीदलगत (शा प ५५७) १७१।७९०न व्यासिरेषा (दृ श ४१) १६८।६८९
नमो रामपदाम्भोजं २०१।६नलिनीदलगत (मोहमुद्गर) ३७३।१७२न शब्दशास्त्रे (पञ्च सू १९) ३८९।४८४
नमो वाङ्मनसातीत (सु १५) १।५नलिनीदलताल २८५।६न शान्तान्तस्तुष्णा (सु ४९१) ७२।५६
नमो विश्वसृजे (रघु १० १६) १४।२न लोकायत (शा प १५२१) १६६।६०६न शीलं दृग्भङ्गी २५५।३३
नम्रत्वेनोन्नमन्त (भर्तृ २ ५९) ५३।२७७न लोपो वर्णाना १०६।१५३नश्यतो युध्य (मार्कण्डेयर ४९) ३८६।३७७
नयगुणोपचितामि (रघु ९ २७) ३३२।४०नवं वयो (शा प.२०८३) १४५।१११न श्लाघते खल १९९।१९
न यज्वानो (पच १ ३२३) १४९।२९८नव वस्त्रं नव (नीतिप्र १५) १५९।२९६न श्वेतांगुव (शा प ११११) २१८।६५
न यत्नकोटिशतकैरपि ५५।४४नवकदम्बरजोरु (शिशु ६ ३२) ३४१।३८नष्ट मृतमति (पच १ ३६३) १६४।५१३
न यत्र गुणव (सूक्ति ३६ ३७) २४७।५५नवकनकपिंशङ्ग(शिशु ११ ४३)३२७।१२नष्टमपात्रे दान (सु ३४१) ५८।१६६
न यत्र स्थेमानं २३०।३३नवकिसलयतल्प (ताराश १२२)२७५।२२नष्टे वारिजविपिने २२२।५९
नयनच्छलेन सुत २५९।७५नवकुङ्कुमचर्चिका २९९।१८न सशयमना (मा १ ५६१३) १६३।४३४
नयननिपाते (शा प ३५५५) ३१२।२६नवकुङ्कुमारुणपयो (शिशु ९ ७)२९४।३५न ससारोत्पन्नं (भर्तृ स २६३) ३६८।४३
नयननीरज (शा प ३३३६) २६५।२८४नवकुमुदवनश्रीहा(शिशु ११ २२)३०२।९न सदश्वा कशाघातं (सु २२६५)८०।२७
नयनपंथनिरोधा (शा प ५९४) २७७।८न नवोज्जालैषप्रभृति २८०।८६न समास समर्थस्य १०३।५२
नयनमसि (शा प ७५५) २१०।२१नवचन्द्रिकाकुसुम(शिशु ९.२८)३००।५३न सर्पस्य मुखे १४७।१९३
नयनयुगासेचन (सा द ३ २६७)२७०।१८न वध्यन्ते ह्य (पच १ १२३)१६४।५०५न सवर्णो न च रूप २८८।९
नयनविकारै (शा प ३७६५) ३५९।५७नवनखपदमङ्ग (शिशु ११ ३४) ३०९।६न साधु कुत्रापि ५२।२३९
नयनस्य तुला चक्रे २५९।७०नवनीतोप (सूक्ति १३०.३) ३८५।३१२न सारणीया १५५।१०२
नयनाञ्चलचञ्चरी २६०।१०५नवनीलमेघरुचिर (शा प ७३) ३६७।२९न सा (स्काद नागर अ ११५) ६५।३
नयनानन्द (काव्यप्र १० ५४) २९९।५नवपय कणकोम (शिशु ६ ३६) ३४१।४२न सा प्रीति (मा १३ १८१८) ३९४।६७३
नयनेन निरीक्षिता २७८।३१नवपलाशपलाशव (शिशु.६ २) ३३२।५८न सा सभा (शौन नी ११५) १७४।८८४
नयनोत्पलजलधारा २७५।११न वाचा दुर्गम (र ६ ६७) ३९३।६६८न साहसैकान्त(हि ३० ११६)१७४।९०९
न यस्य चेष्टितं(पच १ २८४)१६४।५१२न वारयामो भवती २१९।८न सुख न च सौभाग्यं ८३।२
नयेन जाग्र (काम नी ७.५८) ३९४।६६९न वित्तं दर्शये (पच १ ४३३) ६४।२न सौख्यसौभाग्य(शा प ३००) ८३।४
न येनाङ्कुरितं (वृ श ५३) १५०।३५९न विद्यया नैव कुलेन ६५।१२न स्कन्दते न (म ७ ८४) ३९४।६९१
नं योजनशतं दूरं (हि १ १४८) ७५।११न विना परिवादेन (शा प ३४६) ५४।२न स्त्रीजित (शा प. १५११) १५४।६६
नरत्वं दुर्लभं लो(अग्निपुराण) १६७।६६०न विना पार्थिवो (पच १ ८७) १४४।८५न स्त्रीणामप्रिय (हि १ ११७) ३४९।४१
नरनारीसमुत्पन्ना १८५।१५न विप्रापादोदकपङ्कि ८९।२न स्वातन्त्र्य (शा प ३२४) १६७।६२६
नरपतिहित (शा प १३५३) १५२।४०९न विमोचयितु ४८।१३२न ज्ञानं न च २९२।३३
न रम्य नारम्य १७७।९८९न विश्वसे (शा प.१३०१) १६०।३२३न स्पृशल्या (काव्या ३ १२१) ३९४।७०३
नरस्य चिह्नं १७४।८९०न विश्वासा (मा ५ १३६१) ३९४।६९५न स्म माति (शिशु १०५०) ३१६।१०
नरस्याभरणं रूपं रूप (चा नी ४३) ८३।२न विष विष (स ७ ४४) ९८।१न स्वप्नेन (गरुड पू अ १०८) १६६।५७३
नरा सस्कार (सु ३०६) १७७।९८०न विषममृतं (शा प ३७७) ६१।२५५न स्वल्पमप्यध्य (हि १ १७२) १७२।८३४
नराणा नापितो (पच ३ ७४) १५९।२७९न विषयभोगो ३६७।२२न स्वल्पस्य कृते (भोज १३) १६१।३५५
नराधिपा नीच(पच १ ४१४)१५०।३९६न विषेण न (कुव १२३) ३४९।५६न खा करेणुमपि २३१।७३
नरेशे जीवलो(काम.नी ४.४२) १४५।१२८नवीनदीनभावस्य याच(कविता ३९) ७३।७न खादुनौषधमिदं १००।४
नरैर्विफलजन्मभिर्गिरि ३१७।४न वेत्ति यो य (वृ चा ११ ८) १७३।८६५न खे सुखे (मा.५ १०८२) ३९४।६८८

६ सुभा०अनु०