भारतकोश
संग्रह पर लौटें

सुभाषितरत्नभाण्डागार (पण्डित काशीनाथ शर्मा संग्रह)

Subhashita Ratna Bhandagara

पण्डित काशीनाथ शर्मा (सम्पादक: नारायण राम आचार्य) द्वारा

स्रोत: Subhashita Ratna Bhandagara (10,000+ Classic Sanskrit Epigrams & Maxims - Nirnaya Sagar Press) (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished516 पृष्ठ

४२ | सुभाषितरत्नभाण्डागारस्थपद्यानां ---|---|---

न द्वयेन च (शा प ३०८०) २५।१२नानीयन्ते मधुनि ८०।३९नालम्बते दैष्टि(शिशु २ ८६) १४७।१८६
न हायनैर्न (भा ३ १०६३२) १६७।६१४नान्नृषि कुरुते १६०।३०३नालसा (भा १२ ५२६९) १५३।१०
न हार नाहार २८९।६१नान्त प्रवेशमरणं (अमरु ११४) २७३।५नालस्य (शा.प ११३७) २४४।२३६
नहि कस्य (श्रीकृष्णजन्मख ५) २९४।६८२नान्तरज्ञा (किरात ११.२४) १६१।३६७नालिङ्गन्ति (शा प १२४३) १०८।२००
नहि जन्मनि ज्येष्ठ (शा प गुण ४) ८२।२९नान्तर्विचिन्तयति (सु २७६) ५१।२१४नािलङ्गिता नवलवङ्ग २२३।८६
नहि बुद्धिगुणेनैव (मालवि ४ ६) ८८।१६नान्दीपदानि (दश २ ४०) २५२।४३नालीकभङ्गकृदतीव ११८।१२०
नहि भवति यन्न (भर्तृ स ५६९) ९१।४२नान्बौ स्कन्ध्नति २१४।७७नालेनेव स्थित्वा (शा प ८८९) २०८।२३
नहि भवति वियोग ५१।२१८नापरीक्ष्य नयेद्दण्डं १५०।२३७नालोक क्रियते (सु २२६) ४६।७७
न हीदृश सव (शा प १४७०) १५४।५१नापितस्य गृह ३९४।६८४नाल्पीयसि (शा प.२११) ३८६।३६३
नाकालतो (भा १२ ८८१) ३७९।१०३नापुष्ट (पञ्च पा अ.११०) १६६।६१०नावज्ञया प्रदा (र १ १२ ३१) ३८७।३९२
नाकालतो म्रि(भा १२ ७४२) ३७९।१०६नापेतोऽनुनयेन (अमरु ४२) ३११।२७नावज्ञा नाप्यवैद (सूक्ति २७ २) २१५।१
नाकालमत्ता (भा १२ ७४१) ३८०।१०९नाप्तं यत्केनचिदपि (सु ५१९) ७०।२७नावर्तो न च तरला २१६।६
नाकाले म्रियते(नीतिसार १९) १६०।३०१नाप्राप्यमभि (भा ५ ९९३) १६३।४५८नाविदग्ध प्रियं १६४।५१०
नाकाश न दि (सूक्ति ६९ ११) २९८।३४नाभिप्रभिन्नाम्बु(सा द १० १४) १४०।४नाशयन्तो घनध्वान्त(मा द ७ ८) २९९।६
नाक्रोशी स्या (भा ५ १२६५) ३८०।११२नाभिरन्ध्र २६७।३३९नाश्नन्ति पित(गरुड पू १०८) ३८९।४८६
नाक्षराणि पठता (नै १२५) ७०।३२नाभिषेको (शैन नी ११५) २२०।७नाश्रिय किमभूद्भव २०।७१
नागच्छन्नुपहूयते न ६१।२६१नाभिसङ्गेन २६७।३४१नाश्नाति सेवयौ (पच १ २९०) ९७।९
नागविशेषेषु शेषे २०६।१५नाभीपद्मवस (प्र राघव १ ३) १५।३०नाश्चर्यमेतदधुना (सु ४४५) ६०।२४५
नागुणी गुणिन ४५।१३नाभीबिलान्तर २६७।३५९नाश्रम कारण ३८७।३९४
नागेन्द्रहस्ता (कुव ४५) २६९।३१७नाभीवलयसबद्धा २६७।३४२नासत्यवादििन सख्य ८३।१
नागो भाति (पञ्चरत्न १) १८०।१०४२नाभूतिकालेषु(भा १२.७३८) ३८७।३९६नासा कश्चि (भा १३.१२१८) ३४८।१५
नाग्निस्तृप्यति (पंच २ १४८) १५४।६०नाभूवन्भुवि यस्य (शा प ९२४) २३२।८३नासादसीया (नै ७ ३६) २६०।११६
नाङ्गीकृतव्याकरणौष ४२।७नाभ्यस्ता (भर्तृ स.१९५) ३७४।२१७नासामौक्तिकमबले २६०।११८
नाजारज १६५।५६२नामृत न विषं (भर्तृ स ९१) २५१।१०नासावंशविनिर्मुक्त २५८।४४
नात पर (शा प ३७५२) ३५१।३०नामोदस्ताखिलामो २६१।९३नास्ति कामस (वृ चा ५ १२) १५९।२८६
नात पापीयसी (सु ३१६४) ६६।२१नाम्बुजैर्न कुसुमैरु ३५२।२७नास्ति वर्मसमो (प्रसगा १२) ३८०।३८९
नातिप्रसङ्ग (पच १ १४८) ३४९।६७नायं धार्यमधी २६३।२३१नास्ति क्षुवासमं दुख ९६।१
नात्यक्त्वा (भा १२ ६५८३) ३८६।३६५नाय प्रयाति विकृतिं २९।१८नास्ति मेघ (वृ चा ५ १७) १५९।२८८
नात्यर्थमर्थार्थी (शा प ४३३) १६७।६२५नायं मुवति २८९।७६नास्ति (भा.३ १३६४९) १५६।१४२
नात्युच्चशिखरो (सु २२६०) ८३।१८नायाति वाडवशि ७८।८नास्ति (वराह अ १५३) १६७।६२४
नात्र व्याधशरा २३४।१२०नायातो यदि (सु १४३८) ३५८।७३नास्ति सत्य १६५।५५६
नाथ मयूरो नृत्यति १८४।१९नारब्धं कुचपरि ३१३।४७नास्ति सत्या(भा १ ३०९७) ३८७।३९०
नाथ विलोकय मेघ १८४।९नारमेतान्यसा(भा २ १९७२) ३८७।४०२नास्ति स्त्रीणा (म ५ १५५) ३५१।१६
नाथे श्रीपुरु (शांति १ ११) ३७६।२५८नारसिंहाकृतिं वीक्ष्य १९४।१२नास्तीदृशं (मत्स्य अ ३६) ३८४।३००
नाथो मे विपणिं (कुव १५४) ३५५।८८नारिकेलसमाकारा (हि.१ ९४) ४५।२४नास्त्यन्या तृष्णया (शा प ४२२) ७६।५
नाद्रव्ये निहिता (हि प्र ४४) १६२।४३०नारीणा खलु ३५४।५८नास्माक शिबिका ८०।४४
नाधन्याना (सूक्ति १०३.२६) २१५।१नारीणा मृगनाभि ३२६।३१नास्मिन्सततवेष्ट (सु २२९०) ७८।१५
नाधीतेऽत्र जनो यदि ९९।९नारीणा वचनेन ६१।२६७नास्य भारग्रहे (शा प ९६१) २३४।१३९
नाध्यापयिष्यन्निगमाश्च ४२।१नारी परमुखद्रष्ट्री १५७।१८०नास्योच्छायवती (शा प ९०६) २३०।३९
नानन्दि कैरवमवर्धि २१०।२८नारीभिर्गुरुज (शिशु ८ ४७) ३३९।१०४नाहं रक्षो न (शा प ४०८८) ३६७।१५
नानन्वयस्ते न च ते १०४।९३नारुतुद (मनु २.१६१) १६७।६१५नाह दुश्चरिणी न ६३।३८
नानाभूषणभूषित १०९।२१३नारुहेद्विषमं वृक्ष १६७।६५१नाह धार्यमधी २६४।२३१
नानाविध (काव्य प्र १०.२७) १०५।१४४नार्य कुङ्कुमशङ्कया १३४।२१नाहूतापि पुर पद १०१।१३
नानिवेद्य (हि २ ९०) १४६।१४२नार्यस्तन्वि (अमरु ८) ३१७।४नि पद्म शिशिरेण २१४।७८
सस्थाननिर्देशमनुक्रमकोशः४३

| नि पीतपीनति | २१६।१७ | नितरा नीचो (भामिनी अ ७) | २२०।६ | निम्नोन्नत वक्ष्यति | ८४।१७ | | नि पीते कलशो | ३६१।४७ | नितान्तस्वच्छहृदय | १९५।५० | निम्बे किं (शा प १०४०) | २४१।१५५ | | नि शङ्कं गजपति | २२३।७७ | नित्य छेदस्तुणूनाना (अष्टरत्न ३) | ३८५।२१८ | नियत (काम नी २ ४३) | १५२।४१० | | नि शङ्क बहिरम्ब | ३६५।९ | नित्यं (स्काद आ अ २५) | १६६।५९९ | नियत्तै पदैर्निक्षेप्य | १७१।७९७ | | नि शङ्कसोचित(नै ७ ७७) | २६५।२७८ | नित्य निरावृत्ति (सु ८९) | ९।१० | नियमयसि (अ शाकु ५ ८) | १०६।१९६७ | | नि शेषं व्यपनीय | ३२०।२० | नित्यं ब्रह्म (शा प १५५८) | २९१।३ | नियुक्त क्षत्रियो(हि २ ९७) | १४७।२०३ | | नि शेषच्युत (अमरु १०५) | २९३।७ | नित्यं मनोरथस्यापि | ३०४।१ | नियुक्तहस्ता (महा ना ९ ३४) | १५१।३८३ | | नि श्वासानलविद्ध | २७७।५८ | नित्य या (सु ५३८) | ७१।४२ | नियोगिभि (शा प १३३२) | १४४।-३ | | नि श्वासा वदनं (अमरु ९२) | ३०९।११ | नित्य वृद्धिसुपेषि | १८।१९४ | निरक्षरे वीक्ष्य | १७३।८५९ | | नि श्वासोद्गी (काम नी ३ १८) | ३८४।२८८ | नित्यं ज्ञाता सुगन्धा | ३५०।२ | निरञ्जने (किरात ८ ५२) | ३३८।९५ | | नि सारस्य (शा प ४८१) | १५५।११४ | नित्यमाचरतः | ३७१।११५ | निरतिशय (पच १ ३१) | १७१।७७५ | | नि सीम (भामिनी शृ.४६) | २५९।६१ | नित्यमाराधिता देवै | १९७।४९ | निरर्थकं जन्म (स क २ २५३) | २०५।५ | | नि सृप्तोऽह (शा प.४३२७) | ३७२।१४२ | नित्यमास्यं शुचि(शा प ६१२) | १५६।१४४ | निरवद्यानि पद्यानि | ३०।२ | | नि स्नेह नि करुण | ३५८।८० | नित्यानित्यविचारणा | ३७०।८४ | निरवधि (काव्यप्र १० ४२८) | १८।१६ | | नि स्नेह पतिरुज्झिता | २८७।९ | नित्यार्यपृथिवी | १५०।३२५ | निरस्थचालीके | ६७।५९ | | नि स्नेहो याति (शा.प ४१००) | ३६७।६ | निदधिरे (शिशु ६ २४) | ३३५।१२ | निरा (काव्यालं सू ३ १।१२) | २२३।९४ | | नि स्वो वष्टि शतं (अष्टरत्न ९) | ७७।५० | निद्रातुन्दिलशोण | ३२९।२३ | निरीक्षितुं (शिशु १७ ६२) | १२७।११ | | निकटस्थं (दृ श ७५) | १६९।७०६ | निद्रानिवृत्ता (का प्र १० २२) | ३२८।१ | निरीक्ष्य विद्युन्नयनै (कुव ६१) | ३४०।२० | | निकटस्थं दहल्यम्रिनं | १८४।११ | निद्रामीळित (भर्तृ.स ५७९) | २३१।५१ | निरीक्ष्य वेणी | ३३८।७१ | | निकाामं क्षामाङ्गी (मालती २ ३) | २७६।३४ | निद्रार्धमीलित (दश ४ २३) | २७८।४० | निरुत्साहं निरानन्दं(हि २ ७) | ९०।१० | | निखिलं जगदेव(रसगङ्गाधर ) | ३६७।२७ | निद्रितस्य बत | ३४०।४ | निरुद्यमानवद्याझ्या | १९३।२ | | निखिलेषु गुणेषु | १०४।८८ | निद्रे लोचनमुद्रणं | २८१।११० | निरुपादानसम्भार (वेणीसंहार ?) | ३।३ | | निचयिनि (किरात १० २९) | ३४६।१४ | निधे कलानामपि | २१०।१५ | निर्गतामलवाक्यस्य | ३४।३ | | निजकरनिकर (शा प ७५२) | २१०।८ | निन्दन्तु नीति (भर्तृ स.२६५) | ७८।११ | निर्गत्य न विशे | ३९३।६३५ | | निजगुणगरिमा | ८३।५ | निन्दा य (दृ श २७) | १६८।६८३ | निर्गुण इति मृत | ४०।२७ | | निजदोषा (का प्र.१० २३) | १७१।८०१ | निन्यते पितृभिस्त | ८९।८ | निर्गुणमप्यनुरक्त (सु २४२) | ४८।१४१ | | निजनयन (सा द ८ १५) | ३३४।१०३ | निन्यन्ते यदि (प्र राघव १ २०) | ३२।४८ | निर्गुणस्य हतं रूपं(वृ चा ८ १६) | ३८८।४३८ | | निजपतिराद्यः | १८१।२५ | निपतति किल | ९२।६२ | निर्गुणेष्वपि (शा प २३२) | ४६।३९ | | निजपदगतिगुप्परञ्जित | ४७।९६ | निपत्य युधि (शा प १६०७) | १४३।५१ | निर्जितसकलाराति | २०१।५९ | | निजपाणिपल्लव (शिशु ९.५२) | ३५९।८८ | निपपात संभ्रमभूत (शिशु ९ ७१) | ३१०।३ | निर्गतव्यो | २६८।३६५ | | निजप्रियमुरुखप्रान्त्या | ३३७।५९ | निपानमिव (हि १ १७६) | ८२।९ | निर्णेत्रुं शक्य (कुव १७१) | ३१२।१७ | | निजरज पटवास (६.३७) | ३४१।४३ | निग्रन्धनी (भा १२ ६५४८) | ३८०।१४८ | निर्दयं खङ्ग (कुमार १६ ६) | १२७।४ | | निजवर्षािहितस्नेहा | १४५।१२५ | निबिडतमत्तमाल | ३५४।७३ | निर्दहति कुल (प्रसंगा ८२) | ३८८।४२९ | | निजसौख्यं (हि १ १५८) | ७१।१८ | निबिडानुषक्त | २६६।३०८ | निर्धौते सति (शिशु ८.५१) | ३३९।१०८ | | निजा काय (शा प ३८३२) | ३३६।२१ | निभृत निभृतं | ३५२।२४ | निर्मग्नेन मयाम्भसि | १५।२६ | | निजांशुकावृता (शा.प ३७३४) | ३२७।२ | निमग्नस्य (घट नीति २०) | १६०।३०२ | निर्मजचक्षु (सूक्ति ९३ ३) | ३६६।१४ | | निजानपि गजा | ११७।७६ | निमित्तमुद्दि (घट नीति १०) | १७४।९०८ | निर्मासि मुखमण्डले | १२४।८ | | निजानुत्पत्त (भा ५ ११६५) | ३८६।३८४ | निमीलदाकेक (किरात ८ ५३) | ३३८।९६ | निर्माणकौशल(सा द १० ३३) | २५३।६ | | निजाशयवदाभाति | १८८।६९७ | निमीलनन्शंशजुषा(नै १ २७) | २५३।७ | निर्मथ्य खलजिह्वाग्रं (सु ३७६) | ५६।१०६ | | नितम्बगौरवेणासौ | २६८।३७५ | निमीलनाय (शा प.७४३) | २०९।४ | निर्मित्सु शुंदती | २५४।४५ | | नितम्बपीड्य | २६९।४०८ | निमेष (भा १२ १२५०३) | १६१।३५९ | निर्मुक्तरशेषधवलैरचले | १३५।२२ | | नितम्बबिम्ब | २६८।३७२ | निम्ननाभि (का प्र.१०.४६) | ३३८।९९ | निर्मुक्तांशैश (प्र.राघव २ १९) | २५३।२३ | | नितम्बिन्यो नित्यं विनय | ३५२।३७ | निम्नप्रदेशा (कुमार १४ १४) | १२८।४५ | निर्यच्छोणितपूरताम्र | ११५।४८ | | नितम्ब्यो विशाल. | १७५।९८४ | निस्त्रैण्वोधीभूत(शिशु १८ ६९) | १३०।९८ | निर्यद्द्वाससरजीव (विद्ध २ २२) | २९५।६२ |

४४सुभाषीतरत्नभाण्डागारस्थपद्यानां
निर्यान्त्या (शा प ३७२८) ३२४।४८नीचस्तनोत्वश्रु निता (सु १७५) ४०।४३नृत्यत्तद्वद्विजिराजी (रसगङ्गाधर)१२६।२५
निर्लेपौ कुचकुड्मलौ ३२१।२९नीचावमानमलि (दृ श.२०) १६८।६७७नृत्यद्भगोदृहास (कुव १४८) ११६।५६
निर्वाणदीपे (नीतिप्र १३) १७३।८७४नीचेषु यावनी (शा प ५५९) ९९।१३३नृत्यारम्भसरत्सद्गरि ६।७०
निर्विवेकतया बाल्यं ३६७।१८नीचैर्धुर्यवने शुनी १००।३०नृप. कराभ्यासु (नै १२ ८०)१०४।११६
निर्विशेषो यदा (पंच १ ८६) १४६।१५७नीतं जन्म (अमरा ४ १२) २२४।१०८नृप कामासक्तो (हि २.१४२)१५२।४११
निर्विशेषेणापि (पच १ २२५) १५७।१७८नीत नवनवनीतं २२।१११नृपतिनिजाम तया ११५।३३
निर्विषोऽपि (शा प.१२९७) १४९।३१०नीता कुम्भस्थल क १२३।१नृपतिपुरुषशक्ति (मृच्छ ३ १०) २९६।२
निर्वीर्या पृथिवी ९९।२३नीतानामाकुली (कुव ६५) ३१२।१४नृपतिसुकुटरत्न (हनु ७ ३) ११८।१२१
निर्वृत्ताध्वरकृत्य १७८।१०८०नीतिर्भूमिभुजा (नवरत्न ३) १७९।१०३२नृपदीपौ धन (पच.१.२४४) १४९।२९३
निर्वृत्ते सुरतोत्सवे (सु २११६) ३२१।२६नीतिर्लक्ष्मीमुकुरो १११।२५६नृपाणा च नरा(शा.प १२८७)१४५।१२०
निर्व्याजा (शा प ३७५०) ३५१।३८नीते मेदं धौत (शिशु १८.२०)१२९।६५नृपोऽपकृष्ट (मुद्रा ४ १४) १५२।३९७
निर्ह्लादं क्रकचकक्षतै. ३१।४५नीत्वोच्चैर्विशिख (अमरु ११९) ३४७।४६नृसिंहदेवे चलिते १९०।७३
निलय श्रिय. (शिशु ९ १६) २९६।४नीपस्कन्धे कुहरिणि १४१।४नेता यस्य बृह (भर्तृ.स ४९) ९३।१००
निलीना वेश्मान्त २५४।३४नीपस्कन्धे निवसति १४०।१नेतु प्रयाणोन्मुखता १९०।६८
निलीयमानैर्विहगै (कुव १७१) २९३।६नीर दूर तदपि वि २१३।५७नेत्रे खञ्जनगञ्जने (सा.द ३ ५९)२७२।७१
निवासश्चिन्ताया (मृच्छ १.१५) ६७।५५नीरक्षीरविचे (भामिनी.अ १२) २२१।१०नेत्रे खञ्जनगञ्जने नव २८१।१०८
निविशते यदि (नै ४.११) २७५।१८नीरक्षीरे गृहीत्वा ११७।९६नेत्रैरिवोत्पलै (सा द १०.२५) १४०।१
निवृत्ता (भर्तृ स.१७३) ७७।४४नीरजान्यापि निषेव्य २२३।६८नेत्रोपान्तवतंसिते २७२।६०
निशम्य केलीभवनोप ३३०।२नीरन्ध्रं परिरभ्य (शृ ति.२ ६७) ३१०।३नेदं नभोम (सा द १०.३८) ३०४।१५१
निशाचरोऽपि दीनो २०९।६नीरसान्यापि (शा प.२९४) २४२।१८४नेदं मुख मृगवियुक्त २५३।२०
निशारत्नं चन्द्र (प्रसगा १५) ११५।४६नीरागा मृग (शा प ३४८८) २९०।७२नेदं समीरितमकारि ३५९।८९
निशितशरधि (काव्यप्र ४ १९) २५५।१६नीराञ्जिभं (भामिनी.अ ६१) २४४।२३७नेदं सर सरसवारि २२१।२१
निशीथे लीना (शा प ३८९२) ३४२।८६नीलनीरजनि (किरात ९ १९) ३००।३६नेपथ्यादपि रा (सूक्ति ८० २) ३२१।२५
निश्चितं समुद को १८७।९नीलाब्जद्युतिनं १८४।३९नेपालीनामराले १३८।७८
निषेवन्तामेते २३२।७७नीलाञ्जाना नय(स क २ ६७) २७१।४८नेयं विद्युद्भवमध्वि २७४।२१
निष्पन्दा किमु (शान्तिश ४ ३) ७४।४६नीलेन्दीवर (स क ३ ११५) २८१।१०२नैतच्चित्रं यद (अ शा २.१५) १०७।१७५
निष्पन्दामरवि(स क ४ ९४) २३५।१५५नीलोत्पलदल (सूक्ति ४ ९६) ३६।५४नैतद्दारिदगजितं ३४२।७०
निष्कलङ्ककलकैक (शा.प.४६४) ८२।४२नीलोत्पलाभ (शा प ४१२२) ३७२।१५१नैतद्विचित्रं म(भाग.१०.१२) ३८४।२९३
निष्कासयन्त्यनेके २७८।२५नीलोत्पलोल्लसित २५३।२४नैतत्सा प्रह्यति(शा प.३९४२) ३४८।१७
निष्कूजस्तिमिता. १४०।५नीवारप्रसवाग्रमुष्टि (सु.६३७) २३२।८१नैता स्वयमृप(शा प ७८८) २११।१७
निष्क्रामन्नमृश ३७२।१४३नीवारा शुकको (अ शा १ १३) १४१।७नैयायिकाना नलिनाम्ब ४३।४
निष्ष्णातोऽपि च (भामिनी.अ.८५) ५५।५९नीवारौदनमण्डमु १४६।१०नैयायिका वा ननु शाब्दिक ४३।४
निष्पाल्यासु हि • २६।१६५नीवीदर्भापरीतकरा ३१।८१८नैरन्तर्यच्छि (शिशु १८.७६) १३०।१०५
निष्पीडितो यद्य २१०।१६नीवीबन्धोच्छ्वस (मालती २.५) २७६।४८नैर्मल्य वपुषस्त २२९।२२९
निष्पेषोऽस्थिच २४३।१८६नीव्या सयमनं कचे ३२१।२८नैव व्याकरणाज्ञमे ३१।४३
निष्प्रत्यृहमनल्प (शा प १२४) १८।१९नीहाराकरसार (शा प ७७२) २१३।६०नैवाकृति फलति (भर्तृ स.४०) ९२।७२
निष्प्रत्यूहमुपासहे १५।३१नूनं दुग्धाब्धिम (सूक्ति ६ २) ४६।४७नैवात्मनो विनाशं(पच १.४४३)५६।११५
निसर्गसौरभोद्गान्त ३२०।३नून बादालशाइ शो(शा प ५५०)२०७।३नैवार्यं भगवानुद ३०३।१३४
निसर्गादारामे (भामिनी.अ ५२) २३८।७२नूनं हि ते क (भर्तृ स ११८) २५२।४२नैवालवालवलयं २१२।४४
निस्त्रिंशत्रुटि (नैषध.१२ ६६)११०।२४२नूनमयं मे पाप (सु १२६५) २७७।१८नैषा सध्याविधिरवि १३९।५
निहत निहत तूर्ण १४१।१नूनमाज्ञाकरस्त (भर्तृ १ ११) २५९।६०नैषा वेगं सुदुतर (मु २१०७) ३१९।३७
नीचं समृद्धमपि १७६।९६८नृणा धुरि स एवैको (सु ५१०) ७०।१९नैष्ठुर्यं कलकण्ठको २९०।८०
नीच समुत्थितो (शा प.३५६) ५५।६९नृणामन+यस्तफणामूदी ४२।६नो काम प्रति (सु.२५७६) १०८।१९६
नीचतामनवलम्ब्य ७२।२९नृत्यचन्द्रकिणि (सु.१७७३) ३४२।८९नो ग्लानिं भजते १२१।२५८

सस्थाननिर्देशसङ्क्रमकोशः (पृ. ४५)

स्तम्भ १स्तम्भ २स्तम्भ ३
नो चाटु श्रवणं (सा.द.३ ८२) ३०५।१३पक्ष्मालीपिज्र (मालती १ ४) ९।१४२पतिव्रता पतिप्रा (पच.३ १४४)३७७।१२
नो चापाकलनं न १३१।१२१पङ्कज जलेषु वा (शा प ९९) २४३।२१०पतिरतीव धनी सुभ ३५२।२६
नो चारु चर (सूक्ति १७ ९) २२८।२१८पङ्कसकराविगर्हितम(नैषध ५ ८७) ६९।२२पतिभार्या (मनु ९ ८) ३८६।३६१
नो चिन्तामणि (भर्तृ स.२६६) २१४।७५पङ्कानुषङ्गं पथि (शा प ३९१७)३४५।५७पतिर्हि देवो(बौधा स्मृ.१ १३) ३५१।१४
नोच्चै सत्यपि चक्षु (वेणी २ १) १३९।७पङ्गुष्वपि च देवर्षे ३४९।४८पतित्रताया कुच १७३।६६३
नो जानाति कुलीनमु ६३।४२पङ्गो वन्ध्यस्त्वम (स क.४ ११३)७४।३५पत्ति पंक्ति वाहमे १२९।५३
नो तल्पं भजसे न ३०९।२३पञ्चत्व यान्तु बाणा २८५।४५पत्ति पत्तिम (कुमार १६ २) १२७।२
नो तावत्कल्याणि ३६१।४६पञ्चत्वं तनुत्रेव भू (सु १३५५) २८४।३०पत्ति पदातिं र (रघु.७ ३७) १२८।२५
नोदन्वानर्थितामे (सु २६६५) १५३।११पञ्च त्वानुगमि (भा.५ १०४६) ३७७।२०पत्यु प्रवृत्तस्य रतौ ३१९।२४
नो धर्माय त (भर्तृ स ५८२) ३७५।२२३पञ्चदशीरजनिसमा १८६।१०पत्युर्यरपतितावशेष (सु ६३९) २३२।९०
नोपभोक्तु नच (हि १ ११३) ३८४।२७५पञ्चभि. कामिता १५५।११७पत्रं नैव यदा क (भर्तृ २ ८९) ९३।९६
नोपभोक्तुमपि क्लीबो (सु २६७६)७१।१५पञ्चभि. सम्भृत (हि.४ ७१) ३८६।३५०पत्रच्छायासु हं (मालवि २ १२)३३७।५६
नोपभोगपरानर्था १६९।७०४पञ्चभि सह गन्त १५५।८४पत्रपुष्पफलच्छाया (शा प ९७७) २३६।२
नोपभोगो न(काव्या.२ ३२६)३८८।४३५पञ्चभिर्याति दास (हि २ ३८)१६३।४७३पत्रफलपु (भामिनी अ.२२) २४२।१६०
नोपेक्षा न च दाक्षि २११।७पञ्चमेऽहनि षष्ठे (शा.प ३१४) ७५।६पत्राणि कण्टक (शा.प १०१२)२३९।९२
नोपेक्षितव्यो (सु २७६२) १४९।३१५पञ्चसायकमहेन्द्र २७८।३३पथि निपति (सूक्ति १७ ६) २२८।२१४
नो मन्ये दृढब (शा प ९३४) २३२।८९पञ्चास्यपञ्चदशनेत्र ९१।१६पथि पथि लता ३३४।१३१
नो मन्त्रीमयमी (शा प ८२०) २२४।१००पञ्चास्यस्य पराभवा (धर्मवि ७) ३७७।४पथि पथि (काव्य.प्र ४ २०) ३३३।८५
नो रविनं च (सूक्ति ६८ २०) २९४।१०पञ्चेन्द्रियस्य म (भा.५.१०४७) ३७७।५पदद्वयस्य सधान (सु १४०) ३९।१९
नोर्ध्वं न चा (कुमार १४ ३८) १२८।४१पञ्चैतानि विलि १६५।५५५पदन्यासो गेहाद्वहि ३५१।३२
नोर्ध्वमीक्षण (कुमार ८ ५६) २९७।११पञ्चैते पाण्डुपुत्राः ९५।१२८पदप्रणतमालोक्य ३१०।१
नो वा कियन्त २२०।२०पञ्चैव पूजयन् (भा ५.१०४५) ३७७।६पदबन्धोज्ज्वलो हारी ३५।३०
नो सलेन मृगा (भर्तृ १ ७७)३८४।२७६पटलमम्बुमुचा ३४१।३५पदमनन्तरवान्त्वि २०२।८४
नो सध्या समुपासते २०।७४पटालमे पत्यौ नमय (अमरु.४१) ३१८।९पदव्यक्तिव्यक्ती (सूक्ति ४.३५) ३३।४४
नो सेवा विहिता ६७।६५पटविघटितमपि २६५।२८८पदशब्दलीनहृद (सूक्ति ४६ ६) २९४।१
नौका वै भजते २४८।८५पटुत्वं सत्यवादित्वं (हि १ ९९)१६३।४५२पदस्थितस्य पद्मस्य (शा प ४८७) ८६।४
नौका च (शा प दुर्जन १८) ३८८।४३३पटु रटति पलितदूतो ९५।१०पदानि क्रतु (याज्ञ १.३२४) १५०।३४५
नौश्व दुर्जनजिह्वा (कविता.१०) ५४।१४पाठक पाठकश्चैव १५८।२५१पदाभ्यामुन्नि (प्र राघव २.९) २७१।४४
न्यग्रोधे फलशा २४१।१४७पठतो नास्ति मू(शा प.१४२४) १५३।५पदे पदे च रत्नानि (वृ चा २ १)१६०।३११
न्यञ्चञ्चल (सूक्ति.९६ १०) २०८।२५पण्डिते चैव मूर्खे १५८।२२९पदैश्चतुर्भि सुकृते (नै.१ ७) १०५।१२३
न्यञ्चति (भामिनी.शू ४१) २५५।६पण्डिते हि गुणा (स पाठो.५३) ३८।१पद्माकरं दिनकरो (भर्तृ २ ६५) ७५।१३
न्यस्तं यथा मू(शा प ४११५)३७२।१६६पण्डितै सह १५८।२५२पद्माकारैर्योधवक्रे १३०।१०१
न्यस्तं पन्नगमूर्ध्नि ३५३।५७पतङ्गपाकसमये पत ३३१।८पद्माक्षस्रग्दाम(नैषध ७ ४९) ४२६३।२२२
न्यस्तानि (सूक्ति ८६ ५) २६४।२४३पतति रविरपूर्ववारि २९४।४८पद्मातपन्नरसिके (कुव ९०) ३१३।५५
न्याय खलै (सु ३१७) ५०।२०८पतति व्यसने (सूक्ति ११० २३) ४६।२८पद्मानना पद्मपलाश १०१।१०
न्यायनिर्णीत (किरात ११ ३०) ८५।४पततु तवोरसि स (सु २१२०) ३२०।२पद्मापयोधरत (गीत.१ २.१०) १४।१८
न्यायार्जितधनस्तत्त्व ८९।१पततु नभसो गच्छ २०९।१४पद्माया स्तनहेमसद्म १६।१२
न्याय्यं मार्गमनु (सु ५३९) ७१।४३पतत्यविरतं वारि नृत्य (कुव ११४)३४०।७पद्मा सद्मनि केशवस्य १११।२६५
पतलेत्तत्तेजो (नैषध १२.४६) १३५।३१पद्मिनि किमिति २४४।२१४
पकानि प्रच्यवन्ते १४२।१४पतन्ति खङ्गधारासु (शा प ३४३) ६५।४पद्मिन्या सकला ३२४।४९
पकाक्षमिव (सु २७६६) १४४।८०पतन्ति नासि (किरात ४.२३) ३४४।१९पद्मिन्या दयितेऽनु ३२१।१०९
पक्षविकलश्च (मृच्छ.५ ४१) ६६।३३पतन्ति व्यसने दैवात् ४५।२८पद्मे त्वन्नयने स्म (कुव.२०) २४।१५८
पक्षावुत्क्षिप्य धुन्व (सु.२४१८)२०८।२६पतिते पतद्द्मृगराजि २९७।१४पद्मे मूढजने ददा ६३।३४
पक्षिभ्रेष्ठसखीबभूवुरा १९८।३पतितोऽपि राहुव (शा प.४८०) ४७।९२पद्मोदयदिना (सा.द १०.३०) १०३।५८
पक्ष्माग्रग्रथि (सूक्ति ३९ ११) २८६।२०
४६सुभाषितरत्नभाण्डागारस्थपद्यानां
पन्था सङ्कर दीर्घ११७।८८परार्थव्यास (भामिनी अ ७४)५२।२४६परोपकार कर्तव्य (पाञ्च उ २२)७४।१
पन्नगधारिकराग्रो गङ्गो१३।४परार्थानुष्ठाने जड (मुद्रा ३ ४)१३९।३परोपकारविज्ञानमा (सु २३१६)५६।९६
पपात गङ्गा हरमौलि३२१।५परार्थे य (शा प १०१२)२४२।१७९परोपकारशून्यस्य (शा प १४७८)७४।७
‘ पपात पाथ कणि२१२।२९परीक्षणं कश्चि (भर्तृ २ ३७)६५।१५परोपकाराय फल (विक्रम ६६)७५।१०
पपात मेरो सुरसिं३२१।४परिचरितव्या (भर्तृ २ १०८)३८६।३४८परोपकृतिकैवल्ये लोल७४।५
पम्पासरसि रामेण१९३।५परिचुम्बति स (शा प ३७८५)३३१।५परोपदेशकशला दृश्यन्ते८४।४
पयःपीठं दत्ते त्वरि३५७।५२परिच्छिन्नस्वादोऽमृत३१।४०परोपदेशवेलाया१५६।१५९
पयसि सलिल (शिशु ११ ४५)३२७।१४परिच्छेदती (मालती १ ३३)३७५।२४७परोपदेशे पाण्डित्यं (हि १ १०३)४५।२६
पयोदकेशेषु विक्रु२४७।१५परिच्छेदो हि (हि १ १५०)१६३।४५५परोपसर्पणानन्त (भामिनी अ ८४)२३६।५
पयोद हे वारि (उत्त.चातक ६)२१२।३५परिच्युतस्तत्कुच(रत्ना २.१४)२८३।१५७परोऽपि हितवा (सु २७०५)१५६।१५२
पयोधरघनीभाव२६४।२५३परिणयविधौ भङ्क्त्वा२०।८०परोऽप्यपत्यं(भाग ७ ५ ३७)३८७।४१३
पयोधरस्तावदय२६७।३५'परितप्यत एव (शिशु १६ २३)५९।२०१परोऽवजाना(किरात १४ २३)१७४।९०३
पयोधराकारघ (शा प.३९२७)३४६।३४परितोषयिता न(शिशु १६ २८)५९।१९७पर्जन्य इव भूता (शा प १८८३)१४२।४
पयोधे सर्वस्वं शिर२१७।५७परिपतति पयो (शा.प ३५८८)२९४।४५पर्यङ्क खास्तर (शा प ३७६६)३५२।३
पयोमुच प (काव्या २ १७३)२८८।४३०परिपीड्य करद्वयेन२४६।३७पर्यङ्कग्रन्थिबन्धद्वि (मृच्छ १ १)८।११२
परं क्षिपति (भा.५ १००७)३८६।३४५परिपूर्णगुणाभोगगिरि (सु ५०५)७०।१७पर्यङ्कीकृतनागनायक१५।३६
परं तदिह नास्ति२४२।१६६परिपूर्णेऽपि तटाके५६।१२३पर्यङ्को राजलक्ष्म्या११८।११०
परं पलितकायेन१६५।५६०परिमन्थरा (शा प ३९१४)३४५।५०पर्यच्छे सरसि (शिशु ८ ४६)३३९।१०३
परं विनीतत्वमुपै (भाव ४ ३)१५२।४००परिमन्थराभि (शिशु ९.७८)३११।१०पर्यत्तपुष्पस्तबक३३१।३४
परकाव्येन क(राजन ५ १५९)३९७।४२२परिमलसुरभित (शा प ९९०)२३७।३९पर्वतभेदि पवित्रं जैत्रं९।१२३
परगुह्यगुप्ति (भामिनी अ ८७)५७।१३९परिमृदितमृणा (मालती १ २५)२७५।२५पर्वताग्रे रथारूढो१८५।२७
परदारपरद्रव्यपर (शा प ६६७)१५४।४६परम्लानं पीन (रत्ना.२ १२)२७५।२७पर्वताग्रे रथो याति१८५।१९
परदारं परद्र (स पाठो ५४)१६१।३४९परम्लाने माने मुख (अमरु २५)३१०।४पलायिता तवारि११८।१०१
परदारा न गन्त (सु २९)१५४।४४परिलुठति ललाटे३०६।३६पलाशकुसुमभ्रा (कुव २५)२२२।४३
परदु खं समा (राजन १ २२७)४७।८१परिशिथिलित (शिशु ११ ११)३२३।२५पल्लवत कल्पतरोरे (कुव ५७)१०३।७९
परपतिनिर्दयकुल्टा३५१।२६परिशुद्धामपि वृ (शा प ३५५)५७।१३०पल्लवोपमितिसा(शिशु १०.५३)३१७।१५
परपरितापनकुतुकी५८।१५७परिश्रमज्ञ जनमन्त (सु १९५)३८।२१पल्लीनामधिपस्य पङ्क३५७।३९
परभृतशिशो (सूक्ति १४ ९)२२५।१३८परिसुरपतिसू (किरात.१० २०)३४०।२२पवनापनीतसौरभद्गदो२२२।६०
परमर्मघट्टनादिषु (सु ४०३)५८।१७८परिस्रुरन्मीन (किरात ८ ४५)३३८।८८पवित्रमतिसूक्तिकू२०३।१०५
परमर्मदिव्यदर्शिषु (सु ३९२)५७।१३९परिहर कृता (गीत.१० १९ ३)३०६।४९पश्चादङ्गी प्रसार्य (सु २४२०)२०७।१३
परमो महत्स (शा प ७९३)२१४।३परिहरत पराङ्गना१७५।९४१पश्यति परस्य युवति१७१।७८०
परवादे दशवदन.-(सु ३८९)५७।१२९परिहरति भयात्तवा२०१।६८पश्यन्ति नैव कवयो१७६।९६१
परश्लोकान्स्तोकान (सु १७९)४१।६०परिहरति यथा य(भाव ३.११)२५५।१५पश्यन्ति स्निग्धमुग्धं३५४।६५
परस्परानु (शा प १९२९)१५०।३५०परिहरति रतिं मतिं२९३।२पश्यन्तीं परिणामके३२०।४६
परस्परेण (रघु ७ ५३)१२८।३६परिरुह्य दुरारोहं२६७।३३१पश्यन्नन्यसख्यपथगा१०२।३८
परा विनीत (काम नी १ ६५)३७८।४६परीक्ष्य सत्कुलं वि (शा प ४०५)६५।४पश्यन्हतो (सूक्ति ५३ ८०)२६९।३९६
परागै कर्पूरैरस्तृहि२८०।७१परीवादस्तथ्यो (लक्ष्मणसेन)१७७।९७७पश्य पकफलिनीफ२९९।२६
पराधीनं वृथा१६०।३२८परेषा क्लेशदं (शा प १५१३)१५४।६८पश्य पश्चिमदिगन्त२९४।१३
परावरं प्राप्य दुर्बुद्धे (सु.२३११)३६३।३परेषा चेतांसि (भर्तृ ३ ६२)३६८।४५पश्यानुरूपमिन्द२४१।१५७
पराङ्गेन मुखे दग्धं(वृ चा ४ २३)९८।३परेषामात्मन. (पंच ३.८७)३७७।२१पश्याम किमिदं (अमरु २०)३११।२४
परापकारनिरतै१६८।६५९परै प्रोक्ता गुणा यस्य८३।१पश्यामि तामि (मालती १.४३)२७८।४९
पराभवं परिच्छे (हि २ १५०)१६४।४९०परै समुन्न्यते रा (हि २ १७६)१३९।१पश्यैकश्चिञ्चलचपल१३२।२३
परामृशन्तो लिङ्गानि४३।१परोक्तमात्रं (वृ. चा ४ ४९)३८१।१७२पश्योदञ्चदवाञ्चदञ्चित२०७।३
परोक्षे कार्यहन्तारं (स.पाठा.५४)८८।१पश्योदेति वि (प्र राघव ७.५९)३०१।९१
सस्थाननिर्देशमनुक्रमकोशः४७
पाकश्वेभ्र शु (राजत ३ ३०३) ६२।२७४पाथोदजालजटिलं ३४४।६पारीन्द्राणा धुरीणैरवनि १२६।३१
पाटलया वन (शा प १०१४) २३९।९७पादन्यास (सु ५६१) २१०।३३पार्वतीमोषधीमेकमपर्णा ११।२
पाटीर तव प (भामिनी अ ११) २३७।४३पादपाना (स पाठो.५४) १६२।४१४पार्श्वस्थपृथ्वीधरराजकन्या ४।२९
पाठीन कमठ (शा प १३३) १७।३पादसवाहने वज्री २५१।१७पार्श्वभिया (शा प ३५०५) २९३।१
पाणि पात्रं प (शान्ति ४ ७) ३७१।११३पादस्याविर्भवन्ती (मुद्रा १ २) १०१।५४पार्श्वस्फिाला (शा प ५८७) २०७।१९
पाणिग्रहे पर्वतराज ४।२८पादा कन्दुकवत्स्थि १४३।५७पाशक्षुण्णखुरस्य २३४।१२३
पाणिग्रहे पुलकितं वपु ४।१६पादाग्रस्थितया (सूक्ति २ ३८) १२।३८पाश्चात्यभागमिह (शिशु ४.२२) ३६३।१८
पाणिग्राहस्य सा (म ५ १५६) ३५१।१७पादाघातविघूर्णिता (सु ६३५) २३२।८६पाश्चात्याम्बुधिदृष्टपूर्व २९५।६४
पाणिपल्लवविधूत(किरात ९ ५०)३१८।१०पादाङ्गुष्ठेन (अमरु परि १३६) २८१, २१पाश्चात्यैर्म (शा प १८३१) ३३६।२७
पाणिरोधमविरो(शिशु १० ६९)३१८।१२पादसक्ते (अमरु ६८) ३०७।५२पाषाणखण्डे (शा प ४०९९) ३६७।२३
पाणिर्नीरवरूक्षण स्तन २९१।९५पादस्त एव ३१३।५८पाषाणा पयसि १८३।६२
पाणौ कङ्कणमुत्पर्गं (शृं ति ३ २) ७८९पादाहृत यदुत्थाय (शिशु २ ४६) ७९।५पाषाणो भिद्यते ५५।४५
पाणौ गृहीतापि पुर ३५२।२२पादाहतोऽपि (शा प ३६१) ६०।२३७पास्यन्ति कस्य कुसुमे २४१।१३४
पाणौ ताम्रघटी (सूक्ति ८९ ७) ३६५।४९पादेन क्रम्यते १५९।२७१पिकस्तावत्कृष्ण ८५।१२
पाणौ पद्म (सूक्ति ६५ ४०) ३३४।११९पादे मूर्धनि (शा प ३५६९) ३१०।७पिका गी वाचालीभवति २८५।२६
पाणौ मा कुरु (सु १३१३) २८२।१३८पादौ सस्तम्भयन्ती ९६।४८पिण्डे पिण्डे १५९।२६५
पाण्डित्यस्य विभूष (सु ३०५४) ८४।२३पान दुर्जनसंसर्ग (म ९ १३) १६६।५७६पिता (गरुड पू अ ११५) १६६।५७५
पाण्डु क्षामं वदन(काव्यप्र ७ १५)२८५।२पानं स्त्री (भा १२.५२७२) १४८।२३८पिता रत्नाकरो यस्य(वृ चा १७ ५)९१।२०
पात पूष्णो (भट्ट. १०) २०९।१३पानधौतनवया (शिशु १० २६)३१५।२९पिता रत्नावार शुचिसह ९३।१५
पातकानां समास्ता १४७।१५७पानमक्षा (शा प १३८९) १४६।१६४पिता वा (पंच १ ४५७) १४७।२२१
पात जले विष्णुपदापगा ४२।५पानायावरतोऽमृत २७२।६२पितुरधिपुर लङ्का ३२९।९२
पातयति हृदयदेशे २७५।८पानीय (भा १२ ४११४) १६३।४५६पित्रो पादाब्जे १०१।४७
पातालत. किमु (शा प ४०८०) ३६६।२पानीयं (शा प ३८०७) ३३५।१३५पित्रोर्निंल प्रियं १६७।६१८
पातालमिव ते नाभि ३१२।१०पानीय पातु (शा प ५३०) १८।४२पित्रोर्नैव वच शृणोति ९०।१२
पातालाङ्गुवनावलो २७४।२४पानीयमानीय २१२।२८पिदधाति (शा प ३६०१) २९७।१३
पातालाच्च विमो (शा प २५७) ८०।४४पान्तु वो (शा प ११३) २२।१०१पिदधानमन्वयुपग (शिशु ९ ७६)३१०।८
पाताले मज्जु मूलं १२१।१६१पान्थ मन्दमते २५४।६८पिनष्टीव तरंगाग्रै (कुव ३५) २९९।४
पातितोऽपि करा (भर्तृ २ ८३) ४५।३०पान्थाधार इति (शा प ९८३) २३६।२१पिनाकफणिभालेन्दुभस्म (शा.प ६३) ३।६
पातुं त्रीणि जग (शा प ४०१७) १८।३१पान्थाना प्रमदा ३३७।५६पिपासाक्षामकण्ठेन २२६।१४९
पातु न प्रथम व्यव (अ शा ४ ८) ३६३।३९पापं समाचरति (सु २७२) ५०।२१०पिपासुरिव चञ्चलं २६०।१११
पातु श्रोत्ररसायनं (सूक्ति ४ ९९) ३६४।४३पापं कर्तुमृण कर्तुं ९८।२पिपि प्रिय (शा प.३६५१) ३१६।६७
पातुमाहितर (किरात ९ ५१) ३१५।४३पापान्निवारयति (भर्तृ २ ६४) ८८।१८पिपीलिकार्जितं धान्यं १५५।१०१
• पातु व कपटकैरळके १८।२७पामारागाभि (सूक्ति ९८ १) १९४।१७पिबतस्ते (शा प ५३८) १९५।४२
पातु व शिति १०१।४४पार्यं पाय पिव (शा प ११५१) २२०।३पिबन्ति नद्य ४९।१७०
पातु वो निकषग्रावा ३।४पायात्पयोधिदुहितु (शा प १३४) १६।२पिबन्ति मधु (सु ६९०) ९१।८
पातु वो (मृच्छ १ २) १०१।४२पायात्स व (सु.४८) १६।४५पिब पय (शा प १२११) २३५।१५६
पातु वो मेदिनी (सु ३०) १८।२४पायादायासखे १०१।५७पिब स्तन्यं (भामिनी अ ५८) २३०।३६
पातु श्रीस्तनपत्र १८।३२पायाद्गजेन्द्रवदन (सु ८०) २।२३पिशुन खलु ५८।१६२
पात्र न तापयति ९०।१३पायाद् करणोऽरुणो २०६।१८पिशुनत्वमेव विद्या ५७।१५२
पात्रं पवित्रयति (सु ३२४) ५१।२१६पायाद्दो जमदग्निवश २०।७२पीठा कच्छपवत्तरन्ति ६८।७८
पात्रमपात्री (शा प ३७०) ८८।९पायान्मायामृगेन्द्रो १९।५८पीठीप्रक्षाल (शा प.४०२८) ३६५।५५
पात्रविशेषे (भा.१३ १७७) ८६।७पारिजाततरु यावन्न २३७।३८पीठे पीठनिषण्णबालक २४।१५७
पात्रापात्र (सु २९७५) १५७।२०३पारीन्द्रशावक न २३०।३०पीडिते पुर (शिशु १० ४६) ३१६।६
पात्रे त्यागी गुणे (प्रसगा ४) १४२।१२पारीन्द्रस्य (धर्मवि.८) १८३।५९पीतं येन पुरा पुरन्दरपुरे २३२।३७
४८सुभाषितरत्नभाण्डागारस्थपद्यानां
पीतं यत्र हिम (शा प ९२१) २३२।८३पुमासो ये हि (भाव १ ४०) ३९०।५०६पूरयित्वा (शान्ति. २.२१) ३६७।१२
पीत पङ्कजकानने २२४।११४पुर पूर्वमिव (रत्ना ३ ७) २०१।२८पूरोत्पीडे तडा १५६।१६६
पीत क्रुद्धेन (वृ चा १५ १६) ३८७।४१७पुर स्थित्वा (सूक्ति ४१ १२) २७३।१४पूर्ण पङ्कज २११।४८
पीतमत्र मधु यापिता २२३।६९पुरत कृच्छ्र ३९०।५१०पूर्णचन्द्रमुखी १९६।१४
पीतवल्यभिमते (शिशु १०.९) ३१४।१२पुरत प्रेय्यलाशा ७३।१६पूर्णनखेन्दुद्विगु ९१।३५
पीतशीधुमधु (शिशु १० ११) ३१५।१४पुरंदरमहस्त्राणि (सु ३३०९) ३७३।१९०पूर्णापूर्णे (पच १ १७) ३९३।६२९
पीतस्तुषार (अमरु १२०) ३१६।६६पुरस्तन्व्या (अमरु ५१) ३५७।५३पूर्णेन्दुमा (माकडेय २७.२५) ३९३।६३१
पीतस्त्वं कलशोद्भवेन १८३।६५पुरस्ताद्रच्छन्ती २८०।७८पूर्णेन्दु कर १३७।५५
पीतोऽगस्त्येन तातश्वरण ६४।४३पुरा कवीना गण (कुव १६४) ३५।७पूर्णे शतसहस्रे (शा प ३९८५) ३६०।८
पीतो यत. (अमरु १३०) २७९।५७पुराण (सूक्ति ५३ १३) २६०।११४पूर्वं तावत्कुवलय (शाति ४ १६) ३६९।६३
पीत्वा गर्जन्त्यपस्ते २१७।३९पुराणमित्येव (मालवि १ २) १७४।८९३पूर्वं द्विरेफ (सूक्ति ६५ १२) ३३४।११६
पीत्वा भृश (सूक्ति ८२ २८) ३२३।१५पुराणरश्मि २९३।३पूर्वं चेटी ततो (शा प ४०५२) ३६४।४
पीनोत्तङ्ग (शा प ३९३९) ३४७।१४पुराणान्ते १५८।२३२पूर्वं यत्र सर्व २९३।५
पीनोत्तुङ्गस्तनकलशयो २७६।४२पुरातनपरीमल ३२६।२१पूर्वजन्मकृतं कर्म (हि प्र ३२) ८२।६
पीयूष वपुषोऽ (शा प ७६१) २१०।३६पुराभूद (शा प ३५५८) ३१३।६५पूर्वजन्मजनितं ८३।१९
पीयूषाश्रयणं (सूक्ति ७२ ३०) ३०२।९७पुरा विद्वत्ता (भर्तृ ३ १००) ३७८।४२पूर्वत्रासिद्ध १२१।१६४
पीयूषेण कृतार्थिता २१७।३६पुरारितनुहारिणी १२।२४पूर्वदत्ता च १५८।२२४
पीयूषेण सुरा श्रिया २१७।३४पुरा शर (शिशु १७ ५५) १२७।४पूर्वभागतिमिर २९४।१६
पीलूना फलव (शा प.९५६) २३४।१३६पुरा सरसि (भामिनी अ २) २२१।२६पूर्वा क्षणक्रम ३९५।५२
पुंस सबोधन (शा.प ५५२) १९८।४२पुरीषस्य च ४५।१पूर्वाह्ने प्रतिबोध्य २०९।१७
पुंसा दर्शय सुन्दरि १६२।१७४पुरुष कीदृशो १९९।३१पूर्वे वयसि (भा १३ १७८८) ३८७।४१५
पुंसा सर्वसुखैक १४५।१९२पुरुष पौरुष ९१।२७पृच्छति पुरुष २००।४६
पुसामुन्नत (सूक्ति ७ ५) ७०।१३पुरुहूतदिगङ्गना (सु २२२०) ३२७।४पृच्छति शिरसिरुहो २०१।६९
पुंस्कोकिलकुलसैते १९४।१४पुरो (भामिनी अ ७९) २४५।११पृथिवी दह्यते (सु ३३०८) ३७२।१५४
पुच्छं चेदहमुन्नयाम्य १७।१२पुरोजनमा नाय(महा ना १ ४७)३६०।३३पृथिवी रत्न (भा १ ३१७५) ३९०।५३४
पुज्यमानानरुण १८२।३३पुरो दिगनुरा ३०६।४०पृथिव्या त्रीणि (वृ चा १४ १) २९।६
पुञ्जीभूतं प्रेम २२१।२४पुरोन्नम पक्षा (सूक्तिसङ्घ) २०७।११पृथुकार्तरस्वर (सूक्ति. १२७ ४) ६६।३५
पुण्यतीर्थे कृतं (हि १७) ९०।६पुरो रेवापारे (नीतिरत्न ५) ३७८।६८पृथु गगन (सूक्ति ६८ ६) २९५।५४
पुण्यान्नौ (सूक्ति ६४ १२) ३४८।२०पुरो वा पश्चाद्वा ८०।३३पृथुवर्तुलतन्नि (नै २ ३६) २६८।२७७
पुण्ये ग्रामे वने (भर्तृ ३ २४) ३७९।७६पुष्पं पुष्पं (भा ५ ११११) ३८८।४४९पृथ्वी तावन्त्रि ३५४।६६
पुण्यैर्मूलफलै (भर्तृ ३ २७) ३७०।८५पुष्प प्रवा (शा प ३३१८) २६१।१४८पृथ्वीपते शुभ १३५।२०
पुत्र (शान्ति २ १०) ३७०।९४पुष्पाणि प्रथमं ३३३।१५पृथ्वी पृथ्वीगुणा (सु ५०२) ७०।१६
पुत्रदारादि (शान्ति २.२५) ३६७।१३पुष्पे गन्धं (वृ चा ७ २१) ३९०।५१५पृथ्वी श्रीमदनङ्ग(शा प १२६०)११३।५
पुत्रपौत्र (चाणक्य. १०७) १४४।७७पुष्पेषुमाता पुरुषा १९०।७०पृथ्वीसबोधनं १९६।६
पुत्रपौत्रवधू १५६।१३२पुष्पेष्वोरभिषेक (सु १५४६) २६५।२९३पृष्टो ब्रूते न १४२।२९
पुत्रप्रयोजना (चाणक्य ५३) १६१।६८५पुष्पैरपि न (शा प १२९८) १५०।३२६पृष्ठत (हि २.३४) १६३।४७२
पुत्रमित्रकल (वामन. अ ७७) ३६७।२पुस्तकस्था (चाणक्य ८३) १६२।४१३पृष्ठे श्राम्यद (सु.३६) १८।२०
पुत्रसू पाक १५७।१९४पुस्तकेषु च (हि प्र ३८) ३९।१५पृष्ठे कञ्चुकमुत्कल्यै ३१।८७
पुत्रिण्य कति २३६।५पुस्तकप्रत्यया (वृ चा १७ १) ३९०।५१८पेटीचीवरपट्टवस्त्र ४१।७३
पुन प्रभातं ३७४।२१०पुस्तकेषु च या १५९।२६९पेशलमपि खल ४८।१२५
पुनरपि मिलनं २७८।२८पूजाया कि पद १९८।१पोतो दुस्तर (पंचरत्न. २) ६१।२६४
पुनर्वित्तं पुनर्मिं(वृ चा १४ ३) ३८७।४०९पूज्यो बन्धुरपि(पच १ २४०) ३७८।५१पौर सुतीयति १०५।१४७
पुनर्दांरा पुन (वृ चा १४ ४) ३८५।३३९पूतिपङ्कमये (सूक्ति ९८ ९) १९८।२९पौरस्त्यैदर्दाक्षि (शा प ११०८) २१८।७२
पुन्नाम्नो नर (भा.१ ३०२६) ३८९।५०१पूरयति पूर्णमेषा ६२।१७पौराणिकाना व्यभि ४४।१

संस्थाननिर्देशमनुक्रमकोशः

स्तम्भ १स्तम्भ २स्तम्भ ३
पौरैर्भ्यो न भयं ६८।७५प्रणालीदीर्घस्य (विद्ध ४ १४) २६०।१०८प्रत्युपकुर्वे (भा १२ ४९९३) ८०।२९
पौलस्त्य. (पच. २.४) १७९।१०२४प्रणीतक्षा (शा प १३१४) ३९२।६००प्रत्युपस्थित (मा.१२ ५२८०) ३७८।५९
पौलस्त्यपीनभुज (दश रू ४ २८) ११।२०प्रतापभीत्या (भोजप्र १९५) ११७।७७प्रत्यूह पुलका ३२०।४७
पौलोमीकुच ३०२।१३३प्रतिकामिनीति (शिशु ९ ३५) ३००।६०प्रत्यूहू (हि ३ ४५) १६६।५६८
पौलोमी (भामिनी. अ. ४४) २४५।२४२प्रतिकूलता (शिशु ९ ६) ९२।७०प्रत्येकं दिक्प १८४।७६
प्रकटमपि न (सु.४३५) ५९।२०९प्रतिक्षणमय (हि ४ ६६) ३९२।५९७प्रथम कला (शिशु ९.२९) ३००।५४
प्रकटं (शिशु १६ १९) १७५।९२४प्रतिक्षणसमुल्ल (शा प ३६६७) ३१७।३प्रथमं युद्धकारित्व (हि ३ ८६) १४३।६०
प्रकटमलिन (शिशु ११ ३०) ३२२।११प्रतिगतमर्थि (शा प.३८२५) ३३५।३प्रथमं संस्थिता (भा १ ३०३३) ३७८।६०
प्रकटान्यपि (शिशु १६ ३०) ४९।१५३प्रतिगृहकोणं १७०।१४४प्रथमदिवस १७७।९७५
प्रकाममभ्यस्यतु ४९।१६५प्रतिदिनमयलसुलभे (भर्तृ स ६०७) ९६।१प्रथममन्यमृता ३३२।४४
प्रकीर्ण (काम नी १ २५) ३९०।५२२प्रतिदिवस (पच ५ ४) ३९२।६२७प्रथममरुण (सूक्ति ७२ ४) ३०१।८५
प्रकुप्यत्प्र (राजत ६ २७८) ३९०।५२३प्रतिदिशमभि (किरात १० ०१) ३४०।२३प्रथमवयसि (विक्रम ९१) ५१।२२०
प्रकीर्णकेशामन १७४।९००प्रतिनगरमटन्ती १३५।२३प्रथमा गति (र २ ६०) ३८०।१३९
प्रकुर्वता सगति २१।०२०प्रतिपक्षेणापि (मालवि ५ १९) ३५१।२२प्रथमे ना (चाणक्य. ९३) ३७८।६१
प्रकृति (हि ३ १४४) १४५।१२७प्रतिपक्षो यदि २६५।२६९प्रथितोऽसि यत २१।२३०
प्रकृतिखलत्वाद (सु ४१३) ५८।१८६प्रतिबिम्बितगौरीमुख ४।२३प्रदह्यमाना (शा प ३७५) ३९०।५३७
प्रकृतिप्रत्ययो ४६।५०प्रतिबिम्बितप्रिया १।४९प्रदान प्रच्छन्नं (भर्तृ २.५४) ५२।२४९
प्रकोष्ठबन्धे २६४।२३७प्रतिरजनि प्रति (शा प.३७६०) ३५१।२०प्रदीप किमु २४७।६६
प्रखला एव गुण (सु.३९७) ५८।१७३प्रतीक्ष्यन्ते वीरा १३१।११४प्रदोषमातङ्ग ३०४।१४८
प्रगल्भाना (शा प ३२८१) २५५।२८प्रतीप (कथास ३१ ८७) ३९२।५८९प्रदोषे दीपकश्चन्द्र १५८।२१५
प्रचण्डचण्डमुण्ड ११।२३प्रतीपभूपैरिव (नै १ १३) १०५।१२७प्रदोषे (चाणक्य ९९) १६२।४२४
प्रचण्डवासनावा ३६७।९प्रतीयमानं पुनर (सु १५७) ३३।३४प्रधानाध्वनि १०३।७५
प्रचण्डसूर्य. ३३५।७प्रत्यक्षरक्षुत १०५।१४०प्रबुद्धाया प्रातलं ३२८।३
प्रजा न (पच. ३ २४९) १४५।१२१प्रत्यक्षे गुरव १५९।२७३प्रभव को १९६।११
प्रजां सर (काम नी १ १२) १४५।११७प्रत्यग्रज्व (सूक्ति ८२ २७) ३२५।५९प्रभव. खलु (किरात २ १२) १५१।३९०
प्रजाना धर्मसङ्घ (वे २७) १४९।३००प्रत्यस्मै पत्रनिश्चयै (सु ७८४) २३६।३प्रभवति मनसि (प्रब ७) २५१।१८
प्रजाना (पच १ २४०) १४९।२९०प्रत्यग्रोन्मेष (मुद्रा ३ २१) १५।४९प्रभाते पृच्छन्ती ३२८।१३
प्रजापीडन (याज्ञ. १ ३४०) १४५।१२३प्रत्यङ्गमङ्कुरित (प्र राघव १ ७) ३२।१प्रभुप्रसाद (पच १ ५५) १४८।२६२
प्रजावृद्ध धर्म (मा.५ १५५) ३७७।३०प्रत्यङ्गर्णं प्रति २२८।२१२प्रभुप्रसादे (शा प १५२०) १५४।७४
प्रज्ञया (मा ३ १४०७९) ३८१।१६०प्रत्यङ्गमस्यामभि (नै ७ १९) २७०।२३प्रभुभि पूज्यते(भोजप्र.६८) ८१।१९
प्रज्ञया वा विसारण्या ९०।३प्रत्यार्थिवामनयना १३३।८प्रभुर्विवेकी धन १७३।८५१
प्रज्ञागुप्त (भोजप्र १५) १४५।१३६प्रत्यहं प्रत्य (शा प १४२१) १५३।२प्रभूतमल्प (चाणक्य ६७) १६२।३९८
प्रज्ञातृतीयोग्रवि १२३।२प्रत्याख्याने च (हि १ १३) १६३।४३७प्रभूतवयस (वृ श. २३) १६९।६८०
प्रज्ञावास्त्वे(मा ३ १५३८३) ३८९।४९७प्रत्यादिष्टविशे (सूक्ति ४२ ५) २७४।७प्रश्रश्यच्युति ११२।२६७
प्रज्ञाशरेणा (मा ५ १३९१) ३९३।६३९प्रत्यावासक १०९।२१४प्रभ्रष्टै सरभ (शिशु ८ ४९) ३३९।१०६
प्रणतिमिरपि ३४३।१०२प्रत्यावृत्तं (शिशु १८ ५५) १३०।८६प्रमदा मदिरा १६०।३२५
प्रणमत्युन्नति (हि २.२७) ९७।१४प्रत्यावृत्य यदि ३५६।२८प्रमाणाभ्यधिक(पच १ ३१८)३९०।५३०
प्रणयकुपितप्रिया ४।२०प्रत्यासत्ति (राजत.४.३५४) ३७७।२७प्रमादिना (पच १ १६७) १४९।२८६
प्रणयकुपिता दृष्ट्वा (दश रू ४.६०) ५।४४प्रत्यासन्नतुषारदीधिति १४१।९प्रमोदं जनय १९५।५२
प्रणयकोप (शिशु ६ ३८) ३४१।४४प्रत्यासन्न (सूक्ति. ६५ २६) ३४२।७७प्रमोदे खेदे ४४।५
प्रणयमधुरा (भर्तृ सं २७३) ३९१।५८६प्रत्यासन्नविवा (सूक्ति २.३७) १२।२८प्रम्लाना (सूक्ति. १५ ७) २२२।३५
प्रणयादुप (हि. ४ १०) ३९१।५५०प्रत्यासन्नसुरेन्द्र ३२५।५८प्रयच्छति चम (सु १९०) ३१।३७
प्रणिपातेन (काम नी.३.३२) ३९२।५९१प्रत्यासन्ने (शिशु १८ २८) १२९।७०प्रयच्छतोञ्चै कु(किरात ८.१४)३५७।४५
प्रत्युपकुर्वन्मूर्ख (सु.५१५) ७०।२४प्रयत्ने समके (वृ. श ७०) १६९।७०२

७ सुभा०अनु०

५०सुभाषितरत्नभाण्डागारस्थपद्यानां
प्रयत्नै रस्तोकैः परि४३।६प्रहरति न पञ्च (शा प ५०६)१८४।५प्रातर्नीलनिचोलमच्युत२५१।७५
प्रयाणे तव१२५।१प्रहरविर (अमरु १२)३२९।११प्रातर्मूत्रपुरीषा (सु ३३३६)३६७।१९
प्रयाति शमनं (पञ्च ३ ३१)३९१।५६३प्रहरिष्यन्प्रियं (शा प १४२९)१५३।८प्रातर्हन्त कृतापराधोऽपि रज९९।२८
प्रयातुमस्माक (नै १ ६९)१२३।४प्राकारगोपुरा (शा प १५६५)१४३।३८प्रातिभ त्रिसर (शिशु १० २२)३१५।१५
प्रयातेऽस्तं भानौ (सु १०९०)२७५।२८प्राक्पादयो (हि १ ८१)६०।२३५प्राथमिकी घनवृष्टि प्राप्ता२१४।४
प्रयाहि तत्रैव३०९।२प्राकृतो हि (भा १२ ४२१७)३८९।४७२प्रादुर्भवन्ति वपुष (प्रब ९३)३७१।१२९
प्रयोगव्युत्पत्तौ प्रति३४।१प्रागल्भ्यं पुरुषा३०१।२१प्रादुर्भूते नवजलधरे त्वत्पथं२८९।५६
प्रयोजनेषु ये (भा ५ २४४१)३८०।१४२प्रागल्भ्य प्रयय२४८।७६प्रादुष्यातपण्डिताना कवि४२।७७
प्रलयसहायकरा (शा प ५१०)१८१।२४प्रागल्भ्यहीनस्य (ज्योतिस्तत्त्व)१७३।८५६प्रापितेन चटुकानुविडम्ब६९।१९
प्रवसतः (शिशु ६ ३०)३४१।३६प्रागेतद् (नै १२ ९३)११०।२४६प्राप्तं प्राज्यमिव श्रम३३५।१३४
प्रवातान्नीलोत्पल (कुमार १ ४६)२५९।७७प्राज्ञा मेति ततो (भर्तृ १ २५)३१।७७प्राप्तमदो मधुमास प्रबला१९४।३७
प्रविश झटिति (शृं ति ६)२६२।१९३प्राची वासकसज्जिकामुपगते३२५।६१प्राप्ताविद्यार्थ (पञ्च १ ४३२)३९०।५३२
प्रविष्टं सर्वं (र २.१२२ २०)३९१।५५५प्राचीकुङ्कुमतिल (प्र राघव ७ ९०)२७।४प्राप्तव्यमर्थ लभ (पञ्च २ १३३)९२।४९
प्रवीणे पाक्पदु (शा प १३३५)१४४।७४प्राची दिगम्बरमणौ दयिते३२३।१०प्राप्ता श्रिय (भर्तृ ३ ६८)१७६।९४९
प्रशस्त्यायुक्त१९४।३२प्राचीनाचलचुम्बिचन्द्र३०२।११६प्राप्ता जरा (शा प ४१६५)३७४।१९६
प्रशान्त (किरात ८ २८)३३८।७३प्राचीभागे सरागे धरणि३०३।१२२प्राप्तानपि न (सूक्ति ९ १९)७२।३७
प्रशान्ते नूपुरा (शा प ३६९६)३२०।१प्राचीमहीधरशिलाविनिवे३४३।११०प्राप्तार्थग्रहणं द्रव्य (हि २ १०३)१४२।२४
प्रसत्तेर्य. पात्रं३१।४१प्राचीमालम्ब (प्र राघव २.३३)२९५।७०प्राप्ताज्ञासात्पिपासातिशय१३३।४४
प्रसङ्गा (सु १४७)३९२।५९३प्राचीविभ्रमकर्णिकाकमलिनी३२५।५६प्राप्ते भये परि (पञ्च २ १९३)३९०।५२६
प्रसरति (पञ्च ३ २४५)१७७।९९४प्राचेतसस्यापसराशराधा३७।६६प्राप्ते वसन्तसमये (सु ७९४)२०२।९४
प्रसरदल (सूक्ति ६१ २७)३४३।१०५प्राज्ञो वा (भा १२.५७१७)३८९।४६७प्राप्यं कार्यं गरी (र ५ ८४)३८८।४६०
प्रसह्य मणिमुद्धरे (भर्तृ. २ ४)४०।५६प्राञ्जलावपि (किरात ९ १०)२९४।२९प्राप्य चलानधिकारा१७०।७४०
प्रसाद कुरुते (हि ३ १९)३७७।२८प्राज्ञे नियोज्य (चाणक्य ८५)१४६।१७८प्राप्यते गुणव (किरात ९ ५८)३१५।५०
प्रसाद्माधुर्यगुणौ४९।१६७प्राज्ञो हि जल्पता३८।६प्राप्यते स्म (शिशु १० ७८)३१९।२१
प्रसादग्म्य (किरात ११.३८)८५।३प्राणवद्रक्ष्ये (पञ्च ३ १२२)३९२।६०७प्राप्य नाम्नि (शिशु १० ६०)३१७।२१
प्रसादे व (सूक्ति ५७ २३)३०६।४४प्राणब्रुवन्त्येव (भाग ११ ७)३८५।३०९प्राप्य प्रमाणपद (भोजप्र १३४)२४७।६९
प्रसादो (सु.२७८५)१४६।१५८प्राणघातान्नि (भर्तृ २ ६०)१८०।१०५६प्राप्य मन्मथर (शिशु १० ८०)३१९।२३
प्रसादो नि (भोजप्र ४७)३७७।२९प्राणातिपात (भा १२.५८४)१५४।३९प्राप्य वित्त जडास्तूर्ण (दृ श ४४)५५।७७
प्रसाधिकाल (रघु ७ ७)१२६।३३प्राणत्यागे (पञ्च २ १७८)३९१।५८३प्रांभ्रश्राद्विष्णु (का प्र ७ १७४)१८८।४३
प्रसारणपरै करै.३०१।८७प्राणाना च (शा प ३०८९)२५१।६प्रामाण्यं स्वत एव नैव१०९।२१५
प्रसारितकरे (शा प.११३८)३९१।५७६प्राणाना बत कि (शान्ति १ १८)७४।४३प्रामाण्यं परत खतोऽपि१०९।२१६
प्रसार्य (शा प.३८७८)३४२।७४प्राणा यथात्मनो (हि.१ १२)१६३।४३६प्रामाण्यं परतो न शक्ति११७।९९
प्रसीदेति (रत्ना.२.१९)३०६।४५प्राणायामोपदेष्टा सरसिरुह३०२।११८प्राय कार्ये न मुह्यन्ति१९९।१२
प्रसूतकलिका३३३।९०प्राणेश तव विरहिणी हिम२८७।६प्राय काव्यैर्गमितवयस४३।५
प्रसूनबाणाद्वय (नै ७ ४८)२६३।२२१प्राणेशमभिस (शा प ३६१२)२९८।५प्राय. कुकवयो लोके३७।४
प्रसूनशृङ्गै (शा प.३७९१)३३१।१६प्राणेश विज्ञाप्ति (शृ.ति.१७)३३०।४प्राय. खलप्रकृतयो (सु ४०२)५८।१७७
प्रस्ताव (चाणक्य.१४.१५)१५८।२५०प्राणेशेन प्रहितनखरैश्छिन्न३२८।४प्राय परोपतापाय (सु ३५१)५६।९३
प्रस्तावे हेतुयुक्तानि३२।२प्राणेश्वरपरि (काव्या सू. १५)१७३।३०३प्राय प्रकाशता याति (सु ३५०)५६।९२
प्रस्थान (अमरु.३५)३२९।२१प्राणेश्वरे किमपि जल्पति३२९।९प्राय प्रकुप्यतितरा (दृ श ३०)५५।७६
प्रस्थाने तव१२५।१८प्राणैरपि हिता वृत्तिरद्रोहो८८।१७प्राय सन्त्युप (दृ श ६)१६८।६७०
प्रस्फुरत्प्रचुर३३२।७३प्रात क्षालितलोचना कर९६।५प्राय स्वभावमनिलो (सु ४४२)६०।२४३
प्रस्वेदमलदिग्धेन (सु.३३४२)३६६।१प्रात प्रात समुत्थाय द्वौ१९३।२प्राय स्वभावं (दृ. श ८०)४६।६५
प्रहरकमपनीय (शिशु ११.४)३२३।२२प्रातः प्रातरुपा (अमरु ३३)३५६।१९प्रायश्चरित्वा वसुधा (कुव ११०)३२५।९
प्रात. सीमन्ति (शा.प.३७३१)३२६।३२प्रायश्चित्त न गृहीतस्तन्वङ्ग्या२६४।२५२

सस्थाननिर्देशमनुक्रमकोशः ५१

प्रायेण धनिनामेव (शा प ४३४) ६९।७प्रिये सदा पूर्णतरं मनोहरे ३१३।४०बकुलमालिकायापि २८४।१४
प्रायेण नीचलोकस्य क १९९।२७प्रिये सलीलं (किरात ८ ४९) ३३८।९२बकोट ब्रूम (शा प.८९१) २२९।२२८
प्रायेण श्रीम (भा ५ १।४५) ३९०।५४३प्रियो मयैवावचित्ते प्रसूनै ३५२।२३बङ्गालिदाम भवतः शुभ ११६।६७
प्रायेण सुकरं (शा प ३९६२) ३६०।२प्रीणाति य (भर्तृ स २७९) ३७८।४७बत सखि (का प्र १० ४३१) २८४।२१
प्रायेणात्र (पच १ ४४८) १७९।१०२३प्रीतिं न प्रकटीकरोति (सु ४९३) ७२।६०बदरामलका (भामिनी शु ८) २६५।२८५
प्रायो दुरन्त (प्र राघव५ ४९) १५८।२३५प्रीतिं वस्तुगुना हरि कुत्र २५१।७६बद्धकोपोविकृती (किरात.९ ३४) ३१६।५६
प्रायो यत्किंचिदपि प्राप्नो ८६।९प्रीतिर्लक्ष्मीर्व्यय क्लेश १५७।१८४बद्धकोशमपि तिष्ठति २९४।१८
प्रारभ्यते न (मुद्रा २ १७) ३९०।५४८प्रेक्षणीयकमिव (शिशु १० ८२) ३२९।८बद्धा मणिम (पार्वती ५ १५) २६८।३८०
प्रारब्धे रति (शा प ३६९७) ३२०।१७प्रेङ्खणप्रेक्षणालापान्कुर्वत्य २५३।७बद्धा यदर्पणरसेन ४०।५२
प्रारब्धे विपरीतनामनि रते ३२०।१९प्रेङ्खद्भाजितरगमुन्मदगज २७२।२बद्धा पद्मासनं यो नयन २६।२०७
प्रारम्भतोऽतिविपुलं (सु ४२३) ५८।१९३प्रेम सत्यं तयोरेव १६०।३१४बद्धा हियोमा त्रिवली गुणेन २६६।३१८
प्रारम्भे (भामिनी. अ. ४६) २२४।१०९प्रेमार्द्रा (मालती.५ ७) २८०।९३बधिरयति कर्णविवर वाचं ६४।१२
प्रालेयमिश्रमकर (वेणी २ ७) ३२३।१३प्रेमैव मास्तु यदि चेत्पथि ५०।१९३बन्दीकृस्य (का प्र ५ ११९) ११२।२६८
प्रालेयलेशमिश्रे (पच ३ २३९) ३९१।५८२प्रेम्णोऽामितरेवतीमुख २६१।९६बन्दी (भर्तृ स ६१२) १८०।१०५२
प्रालेयशैल (शा प ३९२५) ३४६।२३प्रेरयति परम (शा प ३६४) ५७।१३१बन्धं लब्धत परस्य २२८।२२२
प्रावारैरङ्गारैर्गर्भ (शा प ३९३७) ३४७।१प्रेरितः शश (किरात ९ २८) ३००।४४बन्धनस्थो हि (शा प.१२०९) २३१।५८
प्रावृषि शैलश्रेणीनितम्ब २१२।२१प्रेषिक. प्रैष्यक (शा.प ४०६४) ३६४।९बन्धनानि (चाणक्य १५ १७) ३९०।५११
प्रावृषेण्यस्य (शा प ७६८) २११।१प्रेषितस्य कुतो (चाणक्य ६१) १६२।३९२बन्धु को नाम (हि २ १७४) १६४।४९३
प्रासस्रोतप्रवीरोल्बणरुधिर १३१।१२३प्रोज्वलज्वलनज्वाला १९।६३बन्धुत्याग (काव्या ३ १४७) ३८१।१५७
प्रासादीयति वैणवादिगहन २५०।२२प्रोद्यत्प्रौढार (शा प ३९२४) ३४६।३३बन्धुलीकृत्य (हि २ ८०) १६४।४८३
प्रासादे सा दिशि (अमरु १०२) २७९।६५प्रोषितवति (प्र राघव ५ ५) २१०।१०बन्धुकद्युति (शा प ३६५८) ३१४।६८
प्रियकृतपटस्येय (अमरु ११५) ३२१।१९प्रौढमौक्तिकरुच पयोमुचा ३४१।४८बन्धूकबन्धनुभव २६१।१४९
प्रियतमेन यया (शिशु ६ ५७) ३४६।१८प्रौढच्छेदानुरु (छलितराम) ३६५।११बन्धूकबन्धुरधर (प्र रा २.८) २७१।३२
प्रियप्राया (उ रामच २ २) ५१।२३७प्रौढिं धत्ता कलासु प्रथ १२१।१६५बन्धूना सुहृदा चैव १६६।५८१
प्रियमनु (राज त ४ ३२१) ३९१।५९९प्लवन्ते धर्मे (भा १३ २२) ३९१।५५९बभूव वल्मीकभव कवि. ३६।४२
प्रियमेवा (काम नीति.३ २६) ३७८।४४बर्बरेश्च तपस्वी (शा प १४९६) १५४।५९
प्रियवसतेरपया (सूक्ति ८२ १३) ३२३।४बर्ही रौति बका (शा प ३८८७) ३४३।८८
प्रियवाक्य (चाणक्य १६ १७) १५५।८३फणीन्द्रेस्ते (कुव ६३) १०२।३५बलमार्तभयो (रघु ८ ३१ ) १०४।८६
प्रियविरहमहो (विद्ध ३ २३) २८५।४८फल कतक (मनु ६ ६७) ३९०।५२५बलवदपि (किरात १० ३७) ३३६।१४
प्रियसखि न तथा पटीरपङ्के २८४।१८फल दूरतरे (शा प १०४८) २४२।१७३बलवानपि (किरात २.३७) १६४।४९२
प्रियसखि विपद् (शा प ४५१) ९३।८६फलं धर्मस्य (शुक ४०) ३९०।५३८बलाङ्गीतो (शा प ३६७८) ३१८।११
प्रियसखीसदृशं (शिशु ६ ८) ३३२।६३फल स्वेच्छाल् (भोज २७०) ७२।५४बलि पातालानिल (भोज २२१) १०१।७
प्रियस्य सुहृदो (मालती ९ ४१) ३६१।७फलतीह (पच ५ ९) ३९०।५२८बलिकर्णदधी (शा प १२२९) १०२।१७
प्रियदर्शनमेवास्तु (सूक्ति ४९ २) २०३।१फलहीनं नृपं (पच १ १६३) १४९।२८१बलिना सह (काम नी ९ ४९) १४८।२३२
प्रिया न्याय्या वृ (भर्तृ २ ६१) ५२।२४८फलाना च दलाना च २२२।४२बलीयसा हीन (पच ३ १२६) ३७७।२२
प्रियामुखीभूय सुखी सुधांशु २६१।१५२फलायते कुचद्वन्द्वमिय २७०।४बलोपपन्नो (पच ३ १११) ३७७।२३
प्रियाया (सूक्ति ४३.१८) ३२१।२२फलार्थी (पच १ ३७८) १४९।२९२बल्लाल क्षोणिपाल (भोज ६४) ११६।६८
प्रिया वा (महाना ९ १५) ३८८।४५७फलाशिनो मूलतृणाम्बु ६७।४९बल्हबलसमर्था मेघनादा १८४।४१
प्रियाविरहितस्या (सूक्ति ४२ १) २७४।१फलितस्य रसालशाखिन २३९।१०५बहव. पन्नवोऽपीह (सु.२२५५) ७८।२
प्रियासखीभूतवतो मुदं २६९।४१६फुलेषु य कम (शा प ८२५) २२३।८०बहवोऽविनया (म.५.४०) ३९३।६६५
प्रिया हिता (पच.१ ३२) ३७८।५७फेनमा (भा १२ १२०५०) ३८८।४५५बहि सर्वा (मालती.१ १७) १७७।९७८
प्रियेण संप्रथ्य (किरात ८ ३७) ३३८।८०बहिरतिनिर्मलरूपं २४७।६३
प्रियेण सिक्ता (किरात.८.५४) ३३८।९७बहिर्न लोला दृगपाङ्ग ३५१।२८
बककोयष्टिमिरुष्टे पल्वले २२।७बहु जगद पुर (शिशु ११.३९) ३२८।११
बकुलकुलमिलन्मिलिन्दमाला ३३२।७५

५२ सुभाषितरत्नभाण्डागारस्थपद्यानां

बहुतरहृते रसातलं १७०।७४३बाहू द्वौ च मृणाल (शृ ति १) ३७८।५५ब्रह्मघ्ने च सुरापे (पंच ४ ११) ७५।१
बहुधा बहुभि (पच ३ ७५) ३९०।५४०बाहू प्रियाया जयता मृणा २६४।२२८ब्रह्मघ्नोऽपि नर (चाणक्य ८२) ६४।४
बहुधा राज्यलाभेन यस्तो १०१।९बिडालभक्षिते दु ख ३७२।१६३ब्रह्मज्ञान (भर्तृ ३ १४) ३७५।२२४
बहुनात्र किमु (शा प ३५०६) २९२।२बिडौजा पुरा पृष्टवान् १००।३ब्रह्म नान्तमपि १८७।२४
बहुनिष्कपद्रोही बहुधा ५४।१३बिन्दुद्वन्द्वतरङ्गि (सूक्ति.४.१०६) ३५।२९ब्रह्महत्या (मनु ११ ५४) १५४।४७
बहुभिर्न (पच ३ ११९) १६५।५६५बिभर्ति वदनेन किं क २०३।१०३ब्रह्माण्ड कियद ८०।४३
बहुभिर्बत (शा प २०८५) १४५।१९३बिभेति पिशुना (सु ३७८) ५६।१०८ब्रह्माण्डं प्रवि १२६।३०
बहुभिर्मू (वृ चाणक्य ७ ११) १६९।७१६बिभेषि सखि (शा प ३४३३) २८३।२ब्रह्माण्डकुम्भकारं १६।५९
बहुनामप्यसा (सु २७४२) १४४।८३बिभ्रतौ (शिशु १० ८) ३१४।११ब्रह्माण्डच्छत्र (दशकु. पू १) २०१।६६
बहूनामल्पसाराणा (भोजप्र १४५) ८३।३बिभ्रत्पाथ कपर्दे सुर ८१।१७ब्रह्माण्डमण्डली (भर्तृ स २८४) ७९।३
बहूनि नरशीर्षाणि (सु १४४) ३९।२३बिभ्राणा गरलं कण्ठे भुजंग ५५।५२ब्रह्माण्डसपुटक्लेवर २७।८
बह्वपि स्वेच्छया (शिशु २ ७२) ८४।५बिभ्राणा हृदये (कुव.१५५) २९०।८४ब्रह्मा दक्ष कुबेरो (सु ८३) ९।१९
बह्वाशी स्वल्प (चाणक्य ६९) १६२।४००बिभ्राणे त्वयि (शा प ११६०) २४५।४ब्रह्मादयोऽपि ९१।०८
बाणं हरिरिव कुरुते सुजनो ४७।९७बिभ्राणोऽभिनवे (सूक्ति २ ७२) १८।३५ब्रह्मानन्दप्रचुरं ३१८।४
बाणकरवीरदमनकशत १०३।६९बिम्बाकारंसुधा (भर्तृ स ६१२) १९४।१५ब्रह्मा येन (गरुड अ ११३) ९३।९८
बाणाः पञ्च (रत्न ३ १) २८२।१४१बिम्बितं मृतपरि (शिशु १० ५) ३१४।८ब्रह्मा विष्णुदिने ३७३।१९३
बाणाशिक्षा (शिशु १८ ५६) १३०।८७बिम्बोष्ठ एव (नवसाहसाङ्क ) ३१२।९ब्रह्मैव सत्यमखिल ३५२।२९
बाणाग्निमस्तकरुणे विकिरण् २८२।१३५बिलाद्वहिर्बिलस्यान्त ३६४।१४ब्राह्मण ब्राह्म (भा ५ १४२५) ३९०।५२०
बाणान्सहर (विद्ध १ २२) २८२।१४३बिसमलमशनाय खादु पाना ६०।२४६ब्राह्मण (हि.० ९६) १४७।२०२
बाणेष्वारोप्य गुणान्विधाय ६५।१६बीजं चिन्तामणिश्चेत्क १२२।१६७ब्राह्मण (भा ३ १४०७५) ३८०।१२१
बालक्रीडनमिन्दुशेखर २१।८७बीजं चेदिन्द्रदन्तिस्फुरित १३८।८५ब्राह्मणा गणका १५६।१३१
बालक्रीडनमिन्दुशेखर १२१।१५३बीजैरङ्कुरितं (शा प ८५६) २२६।१६३ब्रूत नूतन (दश २ १३) ७९।२
बालया वा (मनु ५ १४७) ३५१।१५बीभत्सा (शान्ति १ ७) ३७६।२५७ब्रूतेऽन्यस्या (शा प २४२) ३८८।४५०
बालसखित्वमकारणहास्यं १७४।८९५बीभत्सा (शान्ति १ २०) ३७०।९३ब्रूते सप्रति (शा प १२५६) १२२।१८२
बालस्यापि रवे (पचं १ ३५७) ७८।१बुध कीटग्वचो ब्रूते २००।३०
बाला चन्दन (शा प ३५२९) ३०५।२बुधामे न (भोजप्र १२८) १६१।३६७भक्तं रक्तं (शा प १५१७) १५४।७२
बालाटाक्षसूत्रितमसती ३७।१५बुद्धिं वर्धयति श्रियं वित ८७।३६भक्ताना (पच १ ३०७) ९७।१७
बाला तन्वी (सु १४०१) ३१७।२बुद्धिप्रभाव (भा ५ १३७४) ३८२।२३५भक्ति प्रेयसि (शा प.३७५६) ३५१।३५
बालातप (गरुड पू १०८) ३८२।४८५बुद्धिमन्तं (भा १२ ६४९८) ३८३।२३७भक्तिप्रह्वविलोकन (रसगगा २ ७) १५।३२
बालादपि (हि २.७९) १६४।४८२बुद्धिमत्त्वाभि (वृ श.६९) १६९।७००भक्तिप्रह्वाय (शा प १३८) २७।१२
बाला मामियमित्छतीन्दुवद ३७२।१३५बुद्धिरूप (प्रसगा.१३) ३८३।२३९भक्तिर्भवे (का प्र १० ५२४) ४८।१२६
बालिकारचितवस्त्रपुत्रिका ३७५।२४१बुद्धिर्या सत्त्वरहिता (सु ५१२) ७०।२०भक्ते द्वेषो जडे (शा प ३४१) ६४।४
बालिशस्तुनरो (र ४ ७ १०) ३९३।६३६बुद्धिशस्त्र. (शिशु २ ८२) १४६।१८४भक्तो गुणी (हि २ १६) १४४।७१
बाले तवाधरसुधारसपान ३१३।४९बुद्धिश्च हीयते (भा ३.३०) ३७९।७०भगवदनभ्युपगमनं ४३।१
बाले नाथ (अमरु ५७) ३०९।७बुद्धिश्रेष्ठा (मा ५ १०५६) ३८३।२४०भगवन्तौ (शा प ४४०) ९०।५
बालेन्दुवक्राण्य (कुमार ३ २९) ३३१।२६बुद्धेरगोचर (शान्ति ३ १४) ३६८।३६भगिनि (सूक्ति ३९ ७) २८६।१४
बाले बाला विदुषि विबुधा १७८।१००५बुद्धौ कल्ल (भा २.२६८०) १६६।६०३भगीरथाय (शा प ४००३) ३७४।१९७
बाले मालेयमु (शा प ३८२९) ३३६।३१बुभुक्षित किंन (पच ४ १६) ३९०।५४२भग्नकुम्भशकल्येन ५९।२१५
बाले ललामले (शा प ३२९३) २५८।४१बुभुक्षितैर्व्याकिर (भर्तृ सं.६२१) ६४।११भग्ना वयं (सु ३१७९) ६७।५१
बालोऽपि नावमन्त (मनु ७.८) १४२।८बृहत्सहाय (शिशु २ १००) ८७।१९भग्नाशस्य (भर्तृ २ ९२) ९४।१०९
बाल्ये गेहपतौ निमीलति २५६।४८बोधयन्ति न (शा.प.२७४) ७१।९भग्नासु रिपुसे (शा प १२४४) १०२।१९
बाष्पाकुलं प्रलपतोर्गृहिणी ३२९।३बोधितोऽपि बहुसूक्तिवि ५९।२११भग्नेर्दण्डैरात (शिशु १८ ६७) १३०।९६
बाहुपीडनकच (शिशु १० ७२) ३१८।१५बोद्धारो (भर्तृ.३.२) ३९०।५३६भङ्क्त्वा (शृगाररसाष्टक ५) २९६।१३
बाहुवीर्यं (वृ.चाणक्य.६.११) ३८६।३५९भञ्जकीर्तिमपीम १३४।१७
बाहू तस्या कुचाभोग २६४।२२७

सस्थाननिर्देशसमनुक्रमकोशः

५३


भजन्त्यास्त (शा प ३६८.१) ३९।१३३
भण्डस्ताण्ड (सु ४६३) ६२।२७९
भद्रं तस्य तरो (शा प ३७७.१) ३५३।४५
भद्रं ते सदृशं (शा प ५८.१) २०८।३२
भद्रं भद्रं (नीतिरत्न ११) २२५।११८
भद्रामनो (रसगंगा २ श्लो) १०५।१४१
भद्रात्र ग्रामके (शा प ३८९५) ३४३।१६
भद्रे वाणि ममान (सु ३१९४) ६७।६९
भयं ताव (मुद्रा ५ १२) १३९।४
भयं प्रमत्तस्य (भाग ५ १) ३८९।४९०
भयादिवाश्लिष्य ३३८।८२
भयेन कृष्णान्यर्ह १२६।२८
भये वा (पच १ ११८) १६८।५०४
भर्ता देवो (दर्पदल ५८) १५६।१४५
भर्ता यद्यपि (भर्तृ स ६२५) ३५०।७९
भर्तारं किल (र २ २९ २०) ३८८।४६३
भर्तु पिण्डानुण (शा प ३९६१) ३६०।१
भर्तुर्यस्य कृते ३०९।१४
भर्तृभि प्रणय (किरात ९ ५४) ३१५।४६
भर्तृषुपसखि (किरात ९ ६६) ३१६।५८
भल्लैर्भिन्ना प्रति १३१।१९६
भवत इवाति १९६।८
भवतामहमिव १०३।६६
भवति गमनयो २०३।९८
भवति जघिनी २०३।९९
भवति (मालती. १० १५) ३१०।१
भवति (वासव ४) ४७।१०२
भवति (शा प १००८) १७७।९७६
भवतु विदितं (अमरु ३०) ३५६।१६
भवतु विदितं (सु १६१७) २९१।१४
भवत्कृते खञ्जन ३१२।३५
भवत्तुरगनिघुर १३०।१११
भवत्येकस्थले १६७।५३०
भवत्या विश्लेषे २९२।१६
भवनभुवि (विद्ध ४ १२) २६०।१०७
भवनमिव मदीयं ३५४।७७
भवनेत्रभवो २८२।१२४
भवने सुहृदो (पच २ १७) ३८९।४७६
भवनोदरेषु परि(शिशु ९ ३९) ३००।६४
भवन्ति ते ८५।१०
भवन्ति नम्रा (भर्तृ २ ६२) ७५।११
भवन्ति नरका (कुव १०४) ६९।५
भवन्तो वे (भर्तृ १ ५२) २५२।४८
भवबीजाङ्कुरजल (सु २६) १।९


भवभूतिमानाम्य (शा प १७८) ३६।३८
भवभूते सवन्वा ३६।३२
भवानिशकरोमेश १९५।४५
भवान्दि भगवा १०२।३०
भवितव्य (विक्रम १४८) ९१।२२
भवितव्यं यथा ९१।३०
भवित्री र (महा ना १० १२) २०५।९
भवेत्खपर (हि २ ३४) १४४।७८
भस्मनि स्मररिपो २४५।१
भस्मना (वृ चाणक्य ६ ३) ३८९।५३०
भस्माङ्गलिर्बको (शा प ४०६३) ३६४।८
भस्मान्धोरगफूत्कृति ५।६०
भस्मीभूत २८४।२९
भस्मोद्धूलन (कुव १२१) ३७०।८६
भागीरथी (कुमार ११ ३) २००।३६
भाग्यवन्तं (शा प ४४२) ९०।२
भाति निर्विवरे २६४।२५४
भाति रोमा (सूक्ति ५३ ६६) २६७।३४०
भाति विन्यस्तक (शा प ३२८७) २५७।२
भानु नाम (शिशु १० ८६) ३२१।१२
भानुबिम्बमिद २९४।११
भानो. पादैर्दहन ३३७।४१
भानो शीतकरस्य ४४।६
भानावभ्युदिते ३०२।१०
भानुर्वै जायते १९४।३६
भारं स (मा १२ १११४१) ३९२।६१७
भारत चेक्षुदण्डं २०५।१
भारत्या वदनं १३६।४७
भार्या पति (भा १ ३०२४) ३९०।५१७
भार्या हि (भा १२ ५५०६) ३९३।६४१
भार्या पुत्र (म ८ ४१६) ३७८।५६
भार्याविन्त (भा १ ३०२९) ३७८।५३
भार्यावियोग (चाण ३ १४) १७२।८२७
भाषासु मुख्या २९।१
भासते प्रति (का प्र ९ ३८७) २०५।१०
भासो रामिलसो (शा प १८८) ३७।६९
भास्वत्कर्कश ३०३।१२९
भास्वतकुण्डलमणि २५९।६९
भास्वद्वंश (प्र राघव १ ९) ३६।५२
भास्वाश्वततरू ३३०।७
भिक्षवो रुचिरा १९६।११
भिक्षार्थी स (कुव १५९) १३।४७
भिक्षाशनं (भर्तृ ३.१६) ७६।३७
भिक्षाशनं (शान्ति.१.२३) ३७५।२४३


भिक्षाहार (भर्तृ ३ २१) ३७०।१०१
भिक्षितकमल ३२५।५
भिक्षु कास्ति १२।४२
भिक्षुश्वोऽपि सक्लेप्सित ४।२७
भिक्षुद्वारि ११२।२७२
भिक्षो कन्था (सु २४०२) ६२।२८०
भिक्षो मास (दश ४ ७५) ६१।२७१
भित्त्वा (शिशु १८ २०) १२९।६७
भित्त्वा सद्य (मेघ २ ४४) २९२।२६
भिनत्ति (नीतिरत्न ७) २३०।२२
भिन्दन्नरातिहृदयानि (सु ४७) १६।४४
भिन्दानो (शा प ३८१४) ३२५।६६
भिन्ना महा (भामिनी अ १००) २३०।२९
भिन्ने चित्ते १६७।६३६
भिद्योरस्कौ (शिशु १८ ६५) १३०।९५
भिषजो (मा १२ ५१८४) ३८८।४४२
भीतवत्स (भा १ ५६२२) ३७७।१०
भीतासि नैव ३५५।२३
भीतिर्नास्ति भुजंगपुगव ५।५५
भीतो वाडववासतो २११।४९
भीमं यज्जलधिं १२०।१४०
भीमं वनं (मर्तृ २ ९९) ९२।७४
भीमश्यामप्रतनु (शा प ११४७) २२०।९
भीमभीमशुभ्रै (शा प ५००) १८१।१६
भुक्तं खाडुफलं (शा प ९७९) २३६।२०
भुक्तानि यैस्तव (शा प ९८०) २३६।१३
भुक्ता मृणा (भामिनी अ ४५) २२१।२३
भुक्तिमुक्तिञ्च (का प्र ४ ७८) ८७।१४
भुक्त्वा भव्य २३४।१२२
भुजभ्रूयुगलै १३१।१९८
भुजालंकं (प्र राघव ७ १५) ३०६।२७
भुजगकुण्डली व्यक्त ३।५
भुजंगभोग (काव्या ३ ३४६) १०१।१०
भुजतरुवनच्छाया (राजत १ ४६) ३३१।४५
भुजपञ्जरे (भामिनी शृ ३७) ३१।८४
भुजप्रभादण्ड २२१।१७
भुज्यन्ते खगहस्तिथा ७१।४०
भुजे विशाले विमले (सु २२७४) ७८।६
भुज्ञाना (राज त ३ १९४) ३७७।११
भुवनमोहनजेन २८२।१२९
भू पर्यङ्को (भर्तृ ३ ९३) १६९।६०
भूजाने किं न जाने १३४।३०
भूतानामपर (३ १३८५१) ३८८।४४५
भूतानाम (भा १२ २५२३) ३९३।६६०

५४ सुभाषितरत्नभाण्डागारस्थपद्यानां


स्तम्भ १स्तम्भ २स्तम्भ ३
भूतावेशनिवेशिता ३४।५६भोगाक्षमस्य १७१।८०६भ्रात कोकिल (शा प ८५१) २२९।१४४
भूतैराक्रम्य (भाग ११ ७) ३८५।३०८भोगा न (भर्तृ ३ ८) ३७४।२०९भ्रात पञ्जर (शा प.१२०६) २४६।४३
भूत्यालेपनभूषित ६।६३भोगा (भर्तृ ३ ३६) ३७३।१८६भ्रात पान्य (कुव १७८) ३४३।९३
भूत्वा कल्प (प्रब ०१) ३७३।१८४२भोगा भङ्गुर (भर्तृ स २०२) ३८५।३२७भ्रात पान्थ (शा प ३४०६) ३५५।८६
भूप कूप १४९।२८२भोगासक्तैकचेता १९८।१०६भ्रात पान्थ प्र (शा प ३८९४) ३४३।९५
भूस्तन्मौलित १२६।१२भोगास्तुङ्ग (भर्तृ ३ ३५) ३७३।१८५भ्रात प्राणगणप्रयाण ३५७।३६
भूयन्मीलितटीषु १२३।१९१भोगिन (पच १.६९) १४६।१७४भ्रातप्रम्ये कुविन्द २४६।२८
भूमात्रं कियदेन ३६।१३९भोगीन्द्र प्रमदो (सु २६३८) १३७।६४भ्रातर्द्विरेफ २८३।१५९
भूमिपतावर्ध १६९।७२०भोगेच्छा नोप १६८।६८५भ्रातर्धार्तराश (भर्तृ स ४९) ७४।३६
भूमिर्मित्रं (काम नी १० २८) १४९।३११भोगे रोगभय (भर्तृ ३ ३२) ३७०।९०भ्रातर्भ्रम्य (शा प ११८४) २२४।१०६
भूमौ स्थिता (भामिनी क २३) ३६२।३०भोज त्वत्कीर्ति (भोजप्र १२७) ११७।७८भ्रातश्चन्दन कि (शा प ९९३) २३७।५४
भूय कण्ठावधृति १९।५६भोज त्वद्दानपाथो ११७।७५भ्रान्त याचन (शा प ४२१) ७७।५३
भूयस्तराणि यदमूनि ३०१।७२भोजनाच्छादने (पच.५ ६०) ३४९।३१भ्रान्त देशमनेक (भर्तृ ३ ४) ७७।५४
भूयादेश सता १९।३७भोजनान्ते च कि १९६।५भ्रान्ता वेदान्तिन ४४।६
भूयिष्ठ द्रविणात्मज ९४।११५भोजप्रतापं तु (भोजप्र ९२) ११७।८५भ्रान्त्वा (सूक्ति ९७ २८) ११९।१३२
भूयो गर्जितमम्बु (शा प ७८७) २१३।६७भोजप्रतापामिर (भोजप्र २१८) ११७।८६भ्राम्यची (शा प ३८५७) ३४०।१३०
भूयो निपीय ३२७।९भोज्यं (चाणक्य २ २) १५५।१२१भ्राम्यन्मन्दर (पार्वती ५ २३) १५।३५
भूयो भूयस्त्व १२२।१७३भो पान्थ त्वरितो ३५५।८७भ्रुवौ काञ्चिल्ली (शा प ३२७४) २५५।२६
भूरिभारभरा (शा प ५६२) २०५।४भो पान्य (भर्तृ स ८५०) ३५४।७४भ्रूचातुर्या (भर्तृ १ ३) २५१।४१
भूरिशोऽपि च २३९।१०३भो मो. करी (शा प ९०५) २३१।६९भ्रूचापवल्ली (कुव ८५) २७७।१२
भूरेणुदिग्धा ( ध्वन्या ३) ३६०।२२भो भो कि कि (शा प ११५२) २२०।६भ्रूचापे निहि (शा प ३५०२) ३१४।७०
भूर्ज (शा प १०५६) २४३।१८४भो भो श्रीभो (शा प १२५२) ११७।९५भ्रूपल्लवो धनुर (शा प ३३८०) २५५।२३
भृशक्रस्य यशा (सूक्ति ९७ २५) १३९।९भो मेघ (मृच्छ ५ ४७) २८३।१५१भ्रूभङ्ग न करोषि ३०७।६३
भूशय्या (पच १.२९२) ९७।१०भो रोहिणि त्वमसि २८५।४९भ्रूभङ्गे रचि (अमरु २८) ३५९।९९
भूषणाद्युप (मुद्रा ३ २३) १०२।३२भो हंसास्ताव (शा प ८०७) २२२।४०भ्रूभङ्गै क्रियते ३०७।६२
भूसर्पकरंजो (शा.प १२७४) १३२।३१भ्रमच्चरणपल्लवक्वण ३४६।२९भ्रूभेदै कति (शा प ३७६३) ३५३।४१
भ्रुकुटीकुटिल ३६४।२०भ्रमति गिरि (सूक्ति १०८ २) २३५।४भ्रूभेदो रचित (अमरु ९७) ३५८।६७
भृङ्गश्रेणीश्याम (शिशु १८ ४१) १२९।७८भ्रमन्वनान्ते नवमञ्ज ९२।५९भ्रूभ्या प्रियाया भवता मनोभू २५९।५८
भृङ्गाङ्गनाजनम (शा प ७९९) २२१।१६भ्रमन्स (वृ चाणक्य ६ ६) १५९।२८१भ्रूयुग्ममुच्चैर्धनुरञ्जितञ्जय ३६७।३०
भृङ्गालीकण्ठमाला ३२७।४१भ्रमन्स्वैरं भ्रातर्भ्रमर २२४।९८भ्रूरेखायुगल (शा प ३२९७) २५८।५२
भृङ्गालीमुदरे २७२।६६भ्रम भ्रमर यूथीषु २२२।४५भ्रूविलास (किरात ९ ५६) ३१५।४८
भृत्यैर्विना (पच १ ८८) १४४।८६भ्रमय (मालती ९.४२) २८३।१५२भ्रूविभ्रमरेखा च तिलोत्तमा २७०।२४
भृशमद्यत याधर ३४६।१९भ्रमर भ्रमता (शा प ८१८) २२३।११
भेकेन कणता (भट्ट १६) २७७।४६भ्रमर मरणमीति २२३।१०मकरीविरचनभङ्ग्या (शा प ७७) २२१।०८
भैके कोटरशा (भोज २०१) २१३।६५भ्रमरहित कीदृक्षो १९६।१०मक्षिका मशको वेश्या १५६।१२८
भेतव्य (मुद्रा ३ १४) १३९।८भ्रमरहिता सा ३०।१९मक्षिका व्रणमि (चाणक्य ५८) १६७।६३७
भेदाभेदौ सपादि ३६९।६६भ्रमात्प्रकीर्णे (शा प ३०१७) ३४५।४९मग्ने मेरो पतति तपने १७।५
भेरीझाङ्कृति १२२।१८४भ्रष्टं नृपति (शा प ११०५) २१७।५१मङ्गलकलशाद्वयमय २।१२
भैषज्यमेतद्दु (भा ११ ७२) ३९३।६५६भ्राजिष्णवो (सु ७८०) २२९।२३८मज्जत्वम्भसि (भर्तृ स ४८) ९४।११६
भोक्तुं पुरुष (काम १३ १०) ३८९।४९९भ्रात कङ्कण किं ३५६।२९मज्जन्तोऽपि (सूक्ति ६ २९) ५२।२५८
भोक्तुं (काम.नी.१३.१०) ३८९।४९९भ्रात (शा प ४१६४) ३७४।२००मञ्जिष्ठारागदी (शा प २२८०) ३२८।२४
भोग. परो (हृ. श ७२) १६९।७०३भ्रात कस्त्व १००।७मञ्जुलघौ सभाचितगुणे १८४।४९
भोगस्य भाजन (हि.२.१२५) ३४७।२०८भ्रात काञ्चन (शा प ११९३) २४८।७२मणि शाणोल्ली (

संस्थाननिर्देशमनुक्रमकोशः ५५

मणिर्लुठति (नीतिरत्न १२) २१७।४७मधुर सुधाव (सा द १० १७) २७०।१५मनोभुर्मुग्धासु क्षिपति १०६।१५९
मणिहारलता विभाति तन्व्या २६६।३०५मधुरमिव वदन्ति स्वागतं १४१।३मनो मधुकरी मेघो मानिनी १५७।१८५
मण्डलीकृत्य (शा प ५६९) २०७।२०मधुरया (शिशु ६ २०) ३३२।६८मनोरथरथारूढ (सु ३२४१) ७६।१९
मण्डले मण्डलाकारो रेखा २०७।१०मधुरवचनै (सुधारति १ ४२) २५४।३९मनोरथान्करोत्युच्चैर्जनो ९१।१९
मतिरेव (गुणरत्न ८) १७५।९२५मधुरस्वना घृतोर्णा मध्या १८६।६मनोरागस्तीव्रं (मालती २ १) २८४।२७
मत्तेभकुम्भपरि (पचं १ २२०) ३१९।२७मधुरिमरुचि (का प्र १० ५१६) ५९।२०८मन्त्रतन्त्रार्पित (शा प १३५१) १४२।२१
मत्तो हिनस्ति सर्वं मिथ्या १००।५मधुरेणदृशा (काव्या ३ २०) ३८९।४६९मन्त्रबीजमिदं (हि २ ४५) १४७।२१४
मत्वा परीक्ष्य (भा ५ १४८७) ३८८।४६१मधुरोन्नतश्रु (शिशु ९ ७९) ३११।११मन्त्रभेदेऽपि (भा १५ १९३) १४७।२२८
मत्वा चापं शशिमुखि निज २६७।३३८मञ्चुव्रतौघ (कुव १११) ३०४।१५२मन्त्रसस्कारसपन्नास्तव २९३।१
मत्वा लोकम (सा द ६ १८७) १०३।५७मञ्जूके माध्वीक पिबसि २२४।९७मन्त्रिणा पृथ्वि (हि २ १६७) १४७।२१५
मत्वा सारं गुणाना (सु ४९४) ७२।६१मथो मन्दं मन्दं मरुति १८२।४३मन्त्रिणा (पच १ १३८) १६४।५०७
मत्स्यादयोऽपि जानन्ति नीर १५५।९१६मध्यं तनुकृत्य (नैषध ७ ८०) २६५।२८१मन्त्रे तीर्थे द्विजे (विक्रम ६४) ३७८।५४
मदकलकृतान्तकासर २८४।८मध्यं तव (सा द १० १५) २६६।३१४मन्त्रो द्वावि (शा प ४१५८) ३७५।२२१
मदनदहन (शा प ३४१३) २७५।२१मध्यं विष्णुपदं कुचौ शिव २७२।६८मन्त्रो योव (शिशु २ २९) १४६।१८१
मदनमपि गुणैर्विशेषयन्ती २७२।१३मध्यत्रिवली (शा प ३३४६) २६७।३३४मन्थक्ष्माधरघूर्णिता (सु ३५) १५।३७
मदनमवलोक्य (शा प ८२४) २२२।४९मध्यमोपलनिभे (किरात ९ २) २९०।२२मन्थानभूमिधर (कुव २७) ३०४।१५७
मदमयमदमयदुरगं (सु ३१) २२१।१५मध्यस्य प्रथ्रिमा (सा द ३ ५८) २५६।५१मन्यायस्तारणी (वेणी १ २२) ३६६।१३
मदरक्तस्य (भा ५.१४८४) २९४।७००मध्यात्ससानीय सुसारभा २६७।३३७मन्दं निक्षिपते पदानि ३३।५२
मदर्थसद्भू (नैषध १ १३७) ३६२।१९मध्याह्ने (दश रू २ ५०) ३३९।१२३मन्दं निधेहि (शा प ३६२०) २९८।१५
मदसिफमुखै (किरात २ १८) ७९।१८मध्याह्नार्क मरीचिका ११।३मन्दं मन्दं श्रवणपुटकोपान्त २५६।४१
मदाम्भसा (शिशु १७ ६८) १२७।३७मध्याह्ने चलतालवृन्त ३३७।४८मन्द मरुद्वहति गर्जति वारि २७४।३
मदुक्तिश्वेद्दन्तर्मद (कुव १३६) ३३।४६मध्याह्नेऽति (शा प ३८६१) ३३९।१२१मन्दं मुद्रितपास (अमरु.१२७) ३४१।५२
मदेकपुत्रा जननी (नैषध १ ३५) ३६२।१८मध्याह्ने दव (शा प ४०१४) ३६२।३६मन्दमग्रिमधुर्य्य (कुव ६५) ३२२।४
मदोपशमनं शास्त्र ३९।११मध्याह्ने नूनमापोऽपि तिग्म ३३६।३४मन्दमन्दगमना करिणो २४४।१४
मद्गेहे मुशकीव (सु ३१९७) ६८।७७मध्याह्ने हरितो हुताशन २३७।७७मन्दश्चन्द्रकिरी (शा प १२५४) ११६।६६
मद्यपस्य कुत सत्य दया १००।३मध्ये न कृशिमा स्तने ३५६।९मन्दस्मितेन (भामिनी क १२) २७८।४६
मद्यपा कि न जल्पन्ति १६६।५९२मध्यन (सा द १०८६) २६५।२६७मन्दाकिनीपय पान १५८।२४१
मद्यमन्दविगल (शिशु १० १७) ३१५।२०मध्यन सा (कुमार १ ३९) २६७।३२५मन्दार कुसुम (विद्ध २ ३) २७९।५६
मद्युगमध्योत्पन्ना कृतयुग ९८।८मध्येऽथ बलिसद्म दृष्टि २६६।२९८मन्दारमाला (शा प ६७) १०१।६१
मद्वाणि मा कुरु (भामिनी शा २८) ४०।५०मन प्रकृत्यैव (सु १२०६) २७७।१३मन्दारमेदुरमरदरसाल २२२।८७
मधुकरगणश्वतं (शा प ८२९) १७७।९९८मनसा चिन्तित (दृ श ३८) १६१।३७६मन्दोद्धूते शिरोभिर्मणि ११२।२८३
मधुकर तव (शा.प ८१५) २२२।४७मनसि (शा प ३३८१) ३२९।५मन्दोप्यमन्दतामे (मालवि.२ ७) ८६।१०
मधुकर मा कुरु शोकं २२२।६२मनसि वचसि (भर्तृ स १९) ५१।२२१मन्दोऽयं (सूक्ति ५९९) ३३२।९२
मधुकरैरपवाद (शिशु ६ ९) ३३२।६४मनसैव कृतं पाप न १६७।६३५मन्दिन्द्या (शान्तिश ३ ८) ७५।१६
मधु द्राक्षा (भामिना शा २९) ३५।१६मनस्यन्यद्वचस्य (वृ चा २ ६०) ५५।५०मन्ये तद्रूप (शा प ३३५७) २६८।३८८
मधु द्विरेफ कुछ (कुमार ३.३६) ३३१।३१मनस्विनो न (दृ श ८७) ८०।२१मन्ये मायैमम (शा प ४०९०) ३६७।३
मधुधारेव न मुञ्चसि मानिनि ३०५।१३मनस्सिहृदय धत्ते (दृ श ९) ८०।२०मन्येऽमुना कर्ण (नैषध ७ ६४) २६१।१२९
मधुना सिञ्चेन्निम्ब्र निम्बं १६०।३१६मनस्वी म्रियते (हि १ १३३) ८०।१९मन्ये मृत्यो सपत्नी जगति १२२।१६८
मधुप इव (भामिनी प्रा १७) २४४।२१७मनागनभ्यावृ (शिशु २ ४३) १६३।७१७मन्येऽरण्ये कुलगिरि ११४।२०
मधुपराजिपरा (हरिविजय) ३३०।१मनीषिण (भोजप्र ५८) १७४।९०२मन्ये सत्यमहं लक्ष्मी समु ६२।७
मधुपानप्रवृ (सा द १० ९५) १०२।४२मनुष्यजातौ तुल्याया (सु ३२१४) ९७।७मन्ये समास (शा प ३३५०) २६७।३२४
मधुपानसमुल्लसत्प्रवाल ३२०।१०मनोजराजस्य सितातपत्र २९१।१६मन्ये शशरीरमपि तवैव १०७।१८९
मधुपे मालतीपुष्पं सतुण २२२।४६मनो धावति सर्वत्र १५८।२२६मम करग्रहणाय (शा.प.५९३) १८२।३८
मधुमधुरिमभङ्गी मेजिरे ३४४।४२मनोऽपि शङ्कमानाभि २१३।८मम प्रिया कैरविणी करेण ३०४।१४९

५६ सुभाषितरत्नभाण्डागारस्थपद्यानां


पाद / प्रतीकपृष्ठ।संख्यापाद / प्रतीकपृष्ठ।संख्यापाद / प्रतीकपृष्ठ।संख्या
मम रूपकीर्तिं (शिशु.)२८८।२७महतोऽपि हि विश्वासा४७।९९मा गमनमदवि (किरात.९ ७०)३१६।६२
ममत्वं हिन (भा २ १९५६)३८९।४९६महतो हि (भाव.३१)३७७।१मा गर्वमुद्वह (सूक्ति ८६ १४)३५५।२
मया कुमार्यापि (शा प ३७६२)३५२।२१महतो सुवृत्तयो सखि४७।९८मा गा प्रत्युप (भर्तृ स ६४६)११४।११
मयास्योप (काम नीति ९ १०)३८९।४७४महल्पल्पेऽप्युपा (हि ३ ४९)१८४।२३४मा गा विषाद (सूक्ति १९ ४)२२३।८५
मयि जीवति बीजाढ्ये२४१।१३८महद्भि स्पर्धे (पच १ ४०४)३७७।२माघश्वोरो मयूरो सुररिपु३७७।१
मयि ते पादपतिते (पंच ४ ८)३०५।३महद्भिरोधैस्तम (सु.१९०३)२९४।४२माघेन विम्रितोत्सा (सूक्ति ४ ५९)३७।६४
मयि मलयसमीरो वर्षतीव३०९।२महागजाना गुरुबृंहितै१२८।३८मा चक्र चक्रि(शा प १२५७)१२३।१९४
मयि सकपटं (सा द ३ १६२)२७९।७०महागजाना (कुमार १६ ४२)१२८।४३मा जीवन्ध (शिशु २ ४५)८१।१
मयि स्थितिर्न (सु २५२१)००४।११५महाजनस्य संसर्ग (पच ३ ५९)८६।२माणिक्यद्रव (राघवचैतन्य)२२७।२००
मयूखनखरत्रुट (सु.१९८१)३०१।८६महातरुर्वा (सु.७८८)२४१।१४६मात क हृदये (दश रू २ ३९)२८६।३२
मय्यायाते सपदि शयना३५७।४९महादेवो देव (भर्तृ स २९९)३८८।४५८मात किं यदुनाथ देहि२४१।५२
मरणं प्रकृति (रघु.८ ८६)३७२।१७०महात्मानोऽनुगृ (शिशु २ १०४)४५।१४मातङ्ग कुम्भ (सूक्ति.५३.३८)२६६।३०२
मरालश्रेणीभिर्नियतमुप२७५।३०महानदीप्रतरणं (विक्रमच १६)१६७।६५०मातङ्गा किमु (सूक्ति २२ ६)२३१।४९
मरौ नास्त्येव सलि (सु ९३८)२२०।१महानपि (सूक्ति ९८.२१)१९५।७मातज्ञाना (शिशु.१८ ३४)१२९।७३
मर्कटस्य सुरापानं तस्य१५९।२६८महानप्यल्पता (हि.३ १२)१६४।४९८मातङ्गीमिव (भोजप्र २६१)३४।६६
मर्तव्यमिति (विक्रम.१४३)१६५।५४९महानुभावसंसर्ग (शा प ३२१)८६।१मातङ्गैरथ यैर्महे(शा प १५७६)१४३।४६
मर्दितरावणक्सौ सरयू२२१।७महानुभावसंसर्ग कस्य नो८६।३मातरं पितरं पुत्र (भोजप्र ३)६९।४
मर्यादानिलयो महोदधि२४९।१०३महान्तमप्य (भा ५ १५३३)३८८।४६४मातर्जीव किमेत (सु ६९)७।९४
मलयज (काव्याल सू ४ ३ १०)२९९।२३महाप्रलयमारु ( वेणी ३ ४)३६५।५मातर्धर्मपरे दया (सूक्ति ९६ ३)२०८।३१
मलयभुवि विरुद्धश्चन्दनेना६०।२४७महाबलान्प (भा ५ १५४६)३८८।४५३मातर्नति परमनुचितं यत्९७।११
मलयमग्ना (अमरू ३२)२८३।१५३महामतिरपि प्राज्ञो न१६४।५०६मातमयि (शान्ति ४.२३)३६९।६४
मलयशिखरादाकैलास३३४।१३०महाराज श्रीमज्जग (भोजप्र.८२)१३५।२९मातर्मेदिनि (भर्तृ स ३०१)३६९।७५
मलयस्य गिरेरपत्यमादौ२१९।५महाशयमतिस्वच्छं नीर१९५।१मातर्लक्ष्मि (भर्तृ स.३०२)३७०।१०२
मलयाचलगन्धेन विन्ध्यनं८६।४महाशय्या (शान्ति.४ ८)३६८।५४मातस्तर्णकर (सु १०१)२३१।४६
मलयानिल (सु १६६७)३६७।२८महासेनो यस्य प्रमदमय३६०।३२मातस्तातजटासु कि१२।३१
मलयानिल (काव्याल ३ ३०)३३१।१०महास्वन (कुमार १४ ३२)१२८।३७मा तात सपदा (सु २७४९)१४५।१३३
मलिनयितुं खलवदन (कुव ९४)१३८।२महिम्नामन्तर पश्य (सु २२५७)७८।४मा तात साहस (सु २७४७)१४५।१३०
मलिनहुतभुग्धूम (सु १७६०)३४१।५४महिष्या दृष्टया भाव्यं१४४।४२माता नताना सघट्ट२०५।८
मलिना अपि सय्यमनात्कृ२५७।१०महीपते सन्ति (शा प १६७)३३।३२माता निन्दति (नीतिसार २)६४।१६
मलिनात्मना (सूक्ति १४.४)२२४।१३०महीमण्डलीमण्डपीभूत३४१।४७माता पिता (शा प १३४७)१४६।१५२
मलिनेऽ
पाठसंख्यापाठसंख्यापाठसंख्या
मायति प्रमदा३४०।४५मार्गं देहि पदं (शा प ५८९)१४१।३मीलत्कैरवलोचना३४२।२३
माद्यद्विग्गज (शा.प.११३१)२१९।११मार्गे कर्दम (शा प ९६२)२४१।४५५मुकुटे रोपित. (हि २ ७३)१६४।४८१
माद्यद्द्रैतण्डगण्ड१२१।१६६मार्गे पञ्चचिते (सूक्ति ७१.२)३५०।३२मुकुलितमति (किरात १० २७)३४०।२९
माद्यन्मातङ्गकु (शा.प.४०७२)३६६।१२मार्गो भूरि (शा प ७७६)२१३।६४मुक्तं मौक्तिकदाम२९८।२०
मा धनानि कृपण७२।४७मार्जारो महिषो (हि १ ८७)१६३।४४९मुक्तमूललघु (किरात ९ ५)२९४।२४
माधवस्य मुरली२४६।३६मार्तण्डमण्डलसमं१३३।९मुक्ता (सूक्ति ९७ १९)११७।९२
मा धाव मा धाव९२।५०मार्दव सर्वे (भा ५ १४९८)३८९।५००मुक्ता पतन्ति भूमौ३२०।७
माधुर्यं (वामर्योक्त १)१७९।१०३५मालतीकुसुमे२३८।८०मुक्ताताटङ्कयुग२६१।१३१
माधुर्यंसाराधरि२४३।१८९मालतीमुकुला२४३।२०९मुक्ताफलै किं४०।३३
माधुर्यैरपि धुर्यैर्दाक्षा३५।१४मालाबहर्मनोज्ञ२५१।८१मुक्ताभा ऋकपाल (शा प.१०६)९।१२९
माध्वीके विधुमण्डले१८३।६४माला बालाम्बुज३५९।८४मुक्ताभूषणमिन्दु(भोजप्र.२५१)३२१।२७
मानं मानिनि मुञ्च (शृ ति २९)३०७।६९मालिन्यमब्ज (कुव.१२४)३१३।५३मुक्तावली स्मर२६६।३११
मानं मानिनि मुञ्च३०८।१७मालिन्यमवलम्बे५५।६८मुक्ता विद्रुमम (कुव ३७)२७२।७६
मानभ्रष्टपुना (शिशु १० २५)३१५।२८मालिन्यं परिदृश्यते३२५।६२मुक्ताहारगुणीभूय२४६।२४
मानम्लानमाना३५८।५७मा वन (भा ५ १३७८)३८९।५०८मुक्ताहार न च२८६।१७
मानसदुद्गहत (भर्तृ सं ६४८)३८५।३३८मा वम सत्तृणु४।१७मुक्ताहारलता (प्रव ७१)३५०।८२
मानव्याधि (अमरु १५७)३०९।१०मासि मासि (शा प ४८३)१५५।११५मुक्तिर्हि नाम परम (सु ९४)४।३८
मानाभिवर्धनम३५१।३१मितं ददाति (भा १२ ५५६६)३६१।४मुक्ते काञ्चनकुण्डले३४५।५४
मानिनीजन (किरात.९ २६)२९९।२२मितं भुङ्क्ते (भा ५ १०८८)३८८।४४०मुक्तेषु रश्मिषु (अ.शाकु १.८)१४०।३
मानिनो हतमानस्य८०।१८मितमायुर्वयो (शा प ४०९२)३६७।५मुक्तेर्यास्यति (सूक्ति २ ७१)१९।३६
मातुर्व्यं वरवंश (सु २९४९)८९।५मित्रं कलत्र (शा प ४१२५)१७२।१७५मुक्तोत्कर (सा द १० ४५)२६३।२१७
मातुव्ये सति (प्रसंगा ८)१८०।१०५०मित्रं परित्यज (पंच ५ २४)३८१।१७८मुक्तो मानपरिग्रह (सु १६३५)३०९।४
माने नेच्छति (भट्ट.७)७७।५१मित्रं प्रीतिरसाय (हि १ २१४)८८।१९मुक्त्वानङ्ग (विद्ध शा ३ २५)२७६।४०
माने म्लायिनि (भर्तृ स ३०३)३७६।२५४मित्रे स्वेच्छतया (नवरत्न.१)१७८।१००९मुख जुम्भारम्भि३२१।२१
मानोन्नेतेत्य (शा.प ३५४७)३०९।५मित्रखजनबन्धू (भोजप्र १५६)१५३।१५मुख तस्या (शा प ३४७२)२७०।६
मानो वा द (पंच ५.३)३७८।४५मित्रद्रुह (सु २९९०)१५५।९२मुखं पद्मदला (चाणक्य ७१)४९०।५१६
मान्याता स (भोजप्र ३८)३७४।२०४मित्रद्रोही (विक्रम ५७)१६४।४५९मुख पाण्डुच्छायं (सु १०९६)२८६।१९
मान्या एव हि४५।१७मित्रवान्सा (पच २ ८२)१६४।५२२मुख प्रसन्न (हि २ ५९)३७७।१९
मा पुनस्तमभि (शिशु १० २१)३१५।२४मित्रखजन (शा प १४३८)३७७।२४मुख प्रियाया३३०।३
मा बोधि वैद्यकमथापि४३।४मित्राणि शत्रुत्वं (मुद्रा ५ ८)१५१।२८१मुखं यदि किमिन्दु२७१।४०
मा भूत्सज्जनयोगो४८।१४९मित्राण्येव हि (र ४ २० १८)३७०।२५मुख वहति२६२।१६३
मा भूजन्म महाकुले (सु ३१९९)६८।८३मित्रार्थे (पंच १.३४६)३७७।२६मुख विकसित (शा प ३२७७)२५६।३५
मा भैष्ट नैते (शा प.३९६४)३६०।३मित्रे कापि (सूक्ति ६८ १४)२९६।१२मुखकमलक (शिशु ७ ४४)३३४।१०८
मामाकाशप्रणि (मेघ २ ४३)२९२।२५मिथ्योऽर्धचन्द्र (कुमार १६ ४९)१२८।२४मुखकृतबिस (शा प ३८२६)३३६।१९
मा मालति म्लायसि२३९।८३मिथ्यौषधैर्हन्त४४।६मुखमात्रेण (सु ९९६)३७।७
मा मा ससाध्वसम३०५।२२मिलितमिहिर१३०।११०मुखमिन्दुर्यथा (सा द १० १८)३०५।५
मायामयः प्रकृत्यैव (सु ३३७)५६।८३मिश्रीभूते तत्र (शिशु १८ १८)१२९।६३मुखविधुपरिवृत्तो२५५।९६
मायामीनतनोरूनोतु१७।९मीन. ज्ञानपर. (कविता ६०)३८६।३५८मुखसरोरुहं (शिशु ६ ४८)३४४।३६
मा याहीत्यपमङ्ग (सु १०४९)३३०।८मीनवती नयना (रसग २रू)२५३।९मुखारविन्ददत्त२६१।१४१
मारमासुषमा (सा.द १० १३)२०६।११मीमासका कति४३।२मुखारविन्दोपरि२५५।७८
मारयन्त्या (शा प.३३६५)२६९।४२३मीमासको मही१०२।२४मुखेन गरल (कुव १७१)२३६।६
मारस्य मित्रमसि२१०।२६मीमासा पठिता४१।७२मुखेन चन्द्रका (सूक्ति ५३.१७)२७०।२
मारारिशकरामेभ (काव्याल.५.६)२०५।७मीमांसाणर्वसोमं२२१।०६मुखेन नोद्गिर (शा प २४९)४५।१५
मा रोषीश्चिरमेहि (गा.प.४०८)६७।६२मीयता कथमभी (नैषध.५.३८)६९।१८मुखेनैकेन विध्यन्ति (छ्र.३७५)५३।१०५
मा वनं छि (भा.५.१६७८)३८९।५०४

८ सुभा०अनु०

५८ सुभाषितरत्नभाण्डागारस्थपद्यानां

मुखेन्दुच (सूक्ति ५३ ४६) ५६४।२६०मूर्ख व्यसनिनं १४२।३०मृत्युर्मायति मूर्ध्नि ७५।१९
मुखे यद्वैरस्यं (शा प १०५३) २४२।१८०मूर्ख खल्प (हि ३ १२५) ३९।१३मृत्योर्बिभेषि किं (सु ३२९५) ३७५।२३१
मुखे हारावाप्तिर्नय (शा प १२६२) ११३।७मूर्खेष्विहानि षडिति ३९।२मृत्योर्वा (भा १२ ९९५२) ३८८।४४३
मुखैरसौ (किरात.४ ३६) ३४४।२८मूर्खत्वं सुलभं (उद्भट १) ४१।६६मृदुचरणतलाप्रदु ३३४।११२
मुख्यमेक १५९।२६३मूर्खशिष्योप (वृ चाणक्य १४) १५५।९१मृदुनातिसुवृत्तेन (पञ्च.१.२९४) ९७।१२
मुग्धस्य कलिंविजि २९६।६मूर्खश्विरा (वृ चाणक्य ४ ६) ३८९।४७१मृदुपवनवि (विक्रमोर्व ४ २२) २८३।१६६
मुग्धस्य ते वद (शा प ३४३०) २८५।४७मूर्खस्तु (वृ चाणक्य.३ ७) ३८८।४४३मृदुभिर्बहुभि (दृ श.५४) १५१।३६०
मुग्धा कान्तस्य (काव्या २ १५५) ३२९।१मूर्खा यत्र (वृ चाणक्य ३ २१) ३८१।१९०मृदुराई. (हरिवश ११६८) ३८१।१९१
मुग्धा दुग्ध (सा द १० ३६) ३०३।१३६मूर्खाणा (पञ्च १ ४४९) १६४।५१८मृदुलकनककान्ति ३१३।५७
मुग्धा खप्रस (शृङ्गारति १ ५१) २७६।५१मूर्खे नियोज्य (चाणक्य ८५) १४६।१७९मृदुलवलितमध्यं २५५।९
मुग्धे किं (शा प ३५५३) ३०८।२०मूर्खों (वानर्यष्टक ५) १७१।८२१मृदुव्यवहितं (शिशु २ ८५) १४७।१८७
मुग्धे तवास्मि (सु २१२७) ३२०।१३मूर्खोऽपि मूर्ख ३९।६मृद्ना खादन्ता (शा प १००५) २३८।७६
मुग्धे दोर्लतिका (शा प ३४१९) २८६।२३मूर्खोऽशान्त (नवरत्न ६) १८०।१०५४मृदो परि (सु २६९२) १४६।१६८
मुग्धे धानुष्कता (सूक्ति ७४ १८) ३१२।१मूर्खो हि (भा १ ३०७७) ३९।३मृद्वटवत्सुख (हि १ ९२) ५७।१३५
मुग्धे प्रतार (शा प ३३३२) २६४।२३५मूर्तिमन्तमिवरा (सु २०१६) ३१४।३मृद्वङ्गि कठिनौ (शा.प.३३३९) २६४।२४७
मुग्धे मानं न ते ३०७।१मूर्ध्न्यध्याधूयमान (सा द ७ १६) १०।१५५मृष्टचन्दनवि (शिशु १० ८४) ३२१।१०
मुग्धे मानिनि ३०७।६८मूर्ध्ना कल्याण ११८।११५मेखलीयति मेदिन्या. १२३।१
मुग्धे मुग्ध (अमरु ७०) ३०८।२१मूल स्थूलमती(भामिनी प्रा ३२) २३६।२२मेघाटोपै स्वनित (सु १७८९) ३४१।५६
मुग्धे मुश्व विषा (सु ८४) १५।२९मूल दोषस्य (किरात ११ २०) १६१।३६३मेघालये भवति २०२।८६
मुग्धे विधेहि (गीत १० १९ २) ३०५।२३मूल बालकवीरुधा (विद्ध ४ ५) ३३६।२५मेघालये भवति २०२।९३
मुञ्चन्तश्चापलरस ४६।५२मूलं भुजगै (शा प ९९९) २३७।४६मेघालये भवति २०२।९०
मुञ्चति मुञ्चति (कुव ४१) १२३।१९२मूलभृत्यान्परि (हि २ १३६) १४७।२१३मेघा वर्षन्तु (मृच्छ ५.१६) २९८।१
मुञ्चद्विर्मदवारि १३१।११७मूलमेवादित (भा १ ५५५७) ३८१।१९२मेघैर्मेदुरमम्बरं (गीत.१ १ १) २३१।४१
मुञ्च मुञ्च सटिलं २१२।२४मूलादेव (शा प १०३७) २४१।१५०मेघैर्व्योम नवा (सु १७७७) ३४३।१०६
मुण्ड पृच्छति २०४।११०मृग प्रमील ११८।१००मेघो भाति १०९।२२०
मुण्डी जटी (शा प ४१७३) ३७५।२३७मृगत्रय भाति १९०।७१मेदरच्छेदकृशो (अ शाकुं २ ५) १४५।१०९
मुण्डो जटिलो (शा प ४०३०) ३६४।१९मृगमदकर्पूरा (सु ४१५) ५८।१८७मेदिन्या विषमेषु १०८।२०७
मुदं विषाद (हि.३.११८६) १७४।१९०मृगमीनसज्ज (भर्तृ स ३२) ५७।१३६मेधावी (स पाठोप ५५) १४४।६९
मुद्रदाली धृत (भोजप्र १४२) १८८।४२मृगशिशुदृश (दश रू २ २९) २८९।६५मेरु स्थितो (शा.प ४०४९) ३६४।३०
मुद्रीदालिशुशालित् १९३।९५मृगशिशुनयनाया १८२।४२मेरुर्द्रुरगतो हिमा १११।२६२
मुनिर्नयति (कुव १७१) २१७।४२मृगसबन्धिनी २५९।६६मेरूरुकेसरसुदार (सु ५४) १८।२८
मुनेरपि (भा.१२.४१४२) १६५।५५४मृगा प्रियालद्रु (कुमार ३ ३१) ३३१।२८मोमारामममादंदे १८८।३६
मुरारातिर्लक्ष्मी (शा प १०६८) २१५।९मृगाङ्गोड्य (शा प ३६२७) ३०१।७८मोहं रुन्द्धि विमली ४२।३
मुरारिपदभक्तिश्चेत्तदा ३६।३९मृगा मृगै (पञ्च.१ ३०५) १७२।८४०मोहान्मया सु (अ शाकु.७ २४) ३०६।२०
मुहुरनुपतता (किरात १० ३३) ३३३।७८मृगेन्द्रं वा भृगारिं (शा प ९०१) २२९।२मौढ्येन विपदा (कविता ७६) ३८१।१९४
मुहुर्मुहुरवेक्षणं ३०६।३७मृगेभ्यो रक्ष्यते (शा प ९०२) २२९।३मौनं कालविलम्ब १५८।२४३
मुहुर्लक्ष्योद्भेदा(मुद्रा.रा ५ ३) १५२।४१४मृगैर्नष्टं शशैलौघ (शा प ९०३) २२९।४मौनादस्तमितेव (सूक्ति.१.१०) ५।५२
मुहुर्व्यजनवीजनै. २८९।६६मृणालव्यालवलया (शा प ४६३२) ११।४मौनान्मूक (हि २.२६) ९७।१५
मुहूर्तंमपि (वृ चाणक्य १३ १) १६९।२७६मृत प्राप्नोति (हि २ १५९) १४७।२१७मौनी पादप्रहारे (शा.प.२८६) ७८।३
मूक परापवादे ४८।१२४मृतस्य लिप्सा १७२।८२५मौने मौनी १७८।१०००
मूकारब्ध कमपि ३६३।२०मृताना (पञ्च.२.३३८) १४९।२९७मौर्ये सर्वापदा (सु ३१५७) ६६।१६
मूकीभूय तमेव (सु ७२१) २२५।१४१मृत्तो दरिद्र (विक्रमच १५६) १६५।५२९मौलि खर्णकि (शा प ११८८) २४७।५२
मूढ जहीहि (मोहमूद्गर ) ८३।११०७मृत्पिण्डो जल (भर्तृ.स ३०४) ८०।४०मौलिं मानविधि १३२।३४
मूढे निरन्तरपयो २९८।१६मृत्यु शरीर (शा.प.३८०) ७१।४मौलीं किं नु महेश ६।६६

संस्थाननिर्देशानुक्रमकोशः (पृष्ठ ५९)

मौलौ केकिशिख २५।१८०य स्तोकेना (पञ्च २ १४८) १६५।५३२यत्प्रत्यग्रदलावलीकवल २३३।९५
मौलौ मन्दारदाम ३४।६७य स्यात्क्रवललक्ष्य (सु १९२) ३८।३०यत्प्रदेशमुपनीय (नैषध ५ ८५) ६९।२०
मौलौ सन्मणयो (उद्भट ६३) २३५।१६३य स्वभावो हि (हि १ ५८) ८४।३यत्प्रियव्यति (शिशु १० ५१) ३१६।११
प्रदीयसीपि (शिशु २ ७४) ८४।६य एवादि स एवा १८५।१८यत्र क्षिपामि दृशमन्य २७८।४५
प्रदीयस्त्वा (शा प १००७) २३९।८७यक्ष विरहिण क्वचि ३०३।१४०यत्र देशेऽथ (पञ्च १ ४४३) १६४।५१६
म्रियमाणं (शा प ४१६९) ३७३।१९२यच्च कामसु (भा १२ ६५०३) ७६।१६यत्र न फलितास्तरवो १६९।७३४
म्लानस्य जीवकुसु(मालती ६ ८) ३१३।५२यच्चिन्तितं तदिह १७६।९७१यत्र न मदनवि (शा प.३६६६) ३१७।२
यच्छक्यं प्र (भा ५ ११०७) १६६।६०२यत्र नार्यस्तु(भा १३ २८८८) ३८९।४९३
यच्छजलमपि जल (पञ्च २ ७९) ७०।२६यत्र नास्ति दधिमन्थन ८९।१
यं दृष्ट्वा मीनरूप १८।१४यच्छति प्रतिमु (किरात ९ १४) २९६।६यत्र पतत्यव (सा द १० ६३) २५१।२६
य प्राक्प्रत्यगवा ३०२।१९४यजमानेन क स्वर्गं १९९।३२यत्र यत्र चलते शनै २६०।१०६
य मातापितरौ (म २ २२७) १६७।६१७यज्जातोऽसि (शा प ७५८) २१०।३५यत्र विद्वज्जनो नास्ति (हि १ ६३) ३८।२
यं य नृपोऽनु (भोजप्र १३९) १४७।२०१यज्जीवति क्षणमपि (पञ्च १ २४) ९८।९यत्र श्यामाकवी ९५।१२९
यं शैवा समुपास (महा ना १ ३) १५।२७यत प्रभृति ते कान्तं २९१।४यत्र सूक्त (भा ५ ३२९०) ३८८।४४१
य कन्दुकैरिव ४।२७यत सत्यं त (विष्णु प्र अ ९) १४३।३५यत्र स्त्री यत्र (पञ्च ५ ६१) ३४९।३२
य करोति (किरात ११ १९) १६१।३६यत एवागतो (वृ श ६६) १६९।६९९यत्राकृतिस्तत्र गु(पञ्च.१ २०८) २७८।३२
य काकिनी (सु २९११) १५१।३७९यती व्रती चापि १७४।८८२यत्राखण्डलदन्तिद ९४।१२०
यः कुन्तपाणिरिह २४८।९१यतो गजैर्र्विना (शा प १५६०) १४३।३६यत्रात्मीयो जनो १५०।३३३
य कुर्यात्सन्धि (हि २ १३०) १४७।२११यतो यत षट्चर ३४५।५१यत्रानुल्लिखि (का प्र ७.२७३) २१८।६२
य. कुलाभिज्ञ (हि १ १३०) १४५।१९६यतो यतोऽङ्गा (शा प ३३७५) २७०।२८यत्रानेके क (भर्तृ स १७१) ३७४।१९९
य कृत्वा सुकृ (पञ्च १ ९३) १४९।२७५यत्कण्ठे गरल (शा प ५०२) १८२।५०यत्रापि कुत्रापि २२९।१४
य कृष्णं कुरु (शा प ८६४) २२६।१६५वत्करोल्यरतिं केश (गुणरत्न २) ७१।३यत्राभ्यागतदानमान ६३।४०
य कोटिहोमानल १३५।१३यत्कर्म कुर्व (मनु ४ १६१) १६७।६०३यत्रायुद्धे ध्रुवं (हि २ १७०) १४७।२१८
य कौमारहर (सा द १ २) ३५३।४२यत्कस्यामपि (नैषध १२ ८१) ११०।२४३यत्रार्जवेन लघिमा १६९।७३८
य पठति लिखति १७०।७६०यत्कीर्ति कापि गङ्गा १३८।८८यत्रास्ति लक्ष्मीर्विप १७३।८४७
य. परस्य विषमं १७१।८१२यत्कीर्तिर्वलयं भुव १३७।६७यत्रैकं श्रुतमक्षरं ३६९।८१
य पित्रा (मार्क पु २१ ९५) ३८५।३२६यत्कीर्त्या धवलीकृत १०७।१७९यत्रैता लहरीच (कुव.१७१) २५२।५६
य पीयूषसहो (शा प ११६४) २४५।१२यत्कोवनो(भा १२.११०१८) ३८९।५०५यत्रोदक (वृ चाणक्य ७ १३) ३८८।४४४
य पूतनामारणलब्ध २२।९८यत्क्षान्ति. (शान्तिश ३.१२) ३७०।९७यत्सग्रहो (राज.त ६.२२७) ३८८।४५१
य. पृष्ट्वा कुरु (पञ्च ४ ६४) १६५।५४४यत्खलु खलमूखेषु ५७।१४३यत्सकाशाच्च (पञ्च २.१००) १४९।२८०
य पृष्टुं युधि (नैषध १२ ९७) १०८।१९२यत्तादृशेषु सरलेषु न २१२।४२यत्सत्यव्रतभङ्गी (वेणी १ २४) ३६६।५
य प्रशंसति नरो ७०।३३यत्तालीदलपा (विद्ध शा.२.१५) २८६।२६यत्सद्गुणोऽपि (शा प ११९८) २४८।७४
य. प्रागासीदभि ३१३।५८यत्तीर्थाम्बु मुखाम्बुजा २७२।६९यत्सारस्वतवैभव गुरु(भोजप्र ९५) ३४।६३
य प्रीणयेत्सुच (भर्तृ स २७९) ५०।१९२यत्तु (काम नी ११ ३९) ३९०।५१४यत्स्मृत्यैव परां यान्ति (सु ३४८) ५६।९०
य. शौर्यावधिरे (शा.प ९१७) २३१।४६यत्त्वन्नेत्रसमान(सुवृत्तति २.३९) २९२।३०यथा काष्ठ (भा १२ १३३८) १६६।५८९
य श्रीख (प्र राघव ७ ६२) ३०२।१०४यत्नादन्विष्य का ग्राह्या १९९।२५यथा खननख् (मनु २ २१८) १६७।६१६
य सतापमपाक (शा प ८०९) २२१।३१यत्नादपि क (पञ्च १ ४४१) २२६।१७०यथा खरश्चन्दन (सुश्रु १.१३) ३८८।४५४
य समानं समा (पञ्च २ २२) १४९।३०४यत्नोत्थापन (शा.प ४०५६) ३६५।५०यथा गजपति श्रान्त (सु ३५४) ५६।९४
य सत्पदस्थमिह (सु १९१) ३८।२३यत्पङ्केरुहलक्ष्म ३०९।९५यथा गौर्दुह्य (का नी ५ ८४) १४९।२९४
य सर्वैका (राज त ४.५२९) ३८८।४८४यत्पद्ममादित्यु(नैषध २२ ११५) ३१२।३७यथा ग्रामान्त(र २ १०८.५.६) ३७७।३१
य. ससर्ज कमल २६२।१७७यत्पल्लव समभवत्कुसु २१२।४३यथा चतुर्भि (वृ.चा ५ २) १७५।९१४
य सिन्धौ फेनराशि ३।३४यत्पादा शिर (शा प.७४७) २०९।१६यथा चित्तं तथा (विक्रम २५२) ४६।३६
य सुन्दरस्तद्वनिता ९२।५८यत्पीयूषमयूखमालि ३०२।११३यथा छायातमौ (पञ्च २ १३६) ३७७।३३
य सृष्टिस्थितिसंहतीर्वि १।१५यत्पूर्वं पवना (शा.प.११७२) २४६।३१यथा तथापि य पूज्यो (सु.१९) १।६
य सैन्यै स्मर (शा प ३७२१) ३२४।४५

६० | सुभाषितरत्नभाण्डागारस्थपद्यानां

यथा तैलस्य (भा १३ ३३८) ३८८।४५९यदकांशुकान्त (शा प ५९५) २०७।१४यदि रामा (वृ.चाणक्य १७ १६) ८९।२
यथा दोषो हिमालयस्य (दृ श ४) ५५।७४यदर्ज्यते परिक्ले (शा प ३७८) ७१।२यदि वै मनसि १०४।९२
यथा धेनुसहस्रेषु (पच २ १३२) ९१।१२यदवधि वि (भामिनी शृ वि ६०) २५५।७यदि सत्सङ्गनिरतो (सु ४६१) ८७।१५
यथा नयति कै (शा प २०६१) १८८।३७यदवधि विबुद्ध ३५२।१७यदि सन्ति गुणा (कुव ५१) ८१।६
यथा परोपकारेषु ५६।१०७यदशक्य न त (हि १ ९०) १६३।४५०यदि समर (वेणी ३ ६) १५२।४०२
यथा प्रभुक्रुता (हि ३ ८८) १४८।२३६यदसेवनीयमसता ३१।२२यदि स्मरामि (शा प ३४६२) २७७।५
यथा बीजं विना(मा १३ २०१)३७७।३५यदस्माभि (शा प ४१२८) ३७३।१७८यदि स्याच्छीत (पंच १ २८७) ३४९।३५
यथा बीजा (शा प १२९२) १४५।१२४यदस्य यात्रासु बलो (नैषध १८) १२५।६यदि स्यात्पाव (पंच ३ १९३) ३४८।२३
यथामिषं ज (स्कंद नागर १८४) ६४।९यदा किञ्चिज्ज्ञोऽहं (भर्तृ स ५) ४१।५८यदि स्यान्म (सा.द १० ४७) २५९।७२
यथा मृत्पिण्डत (पञ्च भूमि ८१) ८२।८यदा तु भाग्य (मृच्छ १ ५३) ६७।४७यदिच्छसि (शा प.१४२६) १५८।२१०
यथायर्थ ता. (किरात ८ २) ३३४।१२०यदा त्वं चन्द्रो (शा प ३५६४) ३०९।३यदीयबलमालोक्य २८३।४
यथा यथा भोज (भोजप्र ७६) ११७।८७यदानतोऽयदान २०६।१३यदुपात्तं (मार्क पु २१.९३) ३८५।३३२
यथा यथाय वल २५८।३२यदा न योगो ३८९।४८०यदेक कासारं रच २९२।१९
यथा यथा विश (शा प ३२७०) २५४।१यदा पूर्वं ना (शान्तिश २ ६)३७६।३५०यदेकस्मिन्वर्षे २४०।११७
यथा यथास्या (शा प ३२८५) २५५।१७यदा प्रकृत्यैव (शान्तिश २ ४) ३२।३यदेतच्चन्द्रान्त (भोजप्र २३६) २०५।८
यथा यथैव स्नेहे (शा प ३७२) ५४।२२यदालोके सूक्ष्मं (अ शाकु १ ९) १४०।४यदेतत्कामिन्या (शा प ४१७०) २४६।३५
यथा यूनस्तद्व (नैषध २२ १५०) ३१।३९यदा वि (किरात.१४ २४) १७४।९०४यदेतत्क्षेत्राम्भ (शा प.१४०१) ५१।२३४
यथा रन्ध्रे व्योम्न (कुव १७१) ३४२।८७यदा विनाश (र ३ ६२ २०) ३८३।२४३यदेतत्स्वच्छन्दं (भर्तृ.३.५१) ३६८।४६
यथा विहंगास्तरुमा १७४।८८१यदा विनाशो (र ३ ६२ २०)३८८।४५६यदेते साधूना (शान्तिश ३ २३) ७२।५५
यथा वृष्टि समुद्रेषु ५५ ७१यदा शरीरस्य शरी(शाकु ९४)३८९।४६८यदेव भर्त्ता (शा.प.४९५) १६६।६०४
यथा शरीर किल (सु ५२६) ७०।३४यदासीदज्ञानं (भर्तृ स ६) ३७५।२४६यद्रन्ध्रद्विपदानवा १३७।६६
यथा शरीर (कथास २२ ४०)३८२।२२८यदासौ दु (शान्तिश १ २२) ३६८।४८यद्रम्यं गुरुगौर (अमरु १५९) ३०७।६७
यथा सत्प्रसव १९५।४यदि कुप्यसि ना (मृच्छ ५ ३४) ३०८।५यद्गुणैर्मथिते १३४।४
यथा हि पुरुष (स.पातोप ५६)३८२।२२९यदि क्षुण्ण पूर्वे १११।१२४यद्ददाति यदश्नाति (भोजप्र ६३) ६८।२
यथा हि (याज्ञ ३ १६२) ३८२।२३२यदि गन्तासि ३५४।७२यद्ददासि विशिष्ठे (हि १ १६९) ६८।३
यथा हि मलिनैर्वस्त्रै (पच ४ ३०) ८४।९यदि गर्जति (मृच्छ ९ ३२) २९८।९यद्दुर्गामटवीमट ६९।११
यथा हि शृङ्गं (भा १२ ९९२०) ७६।२०यदि तव हृदयं (भोजप्र ४९) १५१।३७२यद्धात्रा निजभाल (भर्तृ स ५६) ९२।९९
यथा ह्येकेन चक्रेण (याज्ञ १ ३५१) ८२।७यदि त्रिलोकी (नैषध ३ ४०) १०४।१०३यद्बाहू व (प्र राघव ३ २६) १०९।२२६
यथेयं वाग्देवी (शा प १८२) ३५।२२यदिदमगणयित्वा ३०६।३२यद्विम्बमम्बरमणि २७।६
यथोदयगिरौ द्रव्यं (हि प्र ४६) ८७।६३यदि दह्येतन (आनन्द देवीश.) ५०।१९०यद्बीजानि च १२१।१५७
यथोर्ध्वाक्ष पिब (कुव ९८) ३३९।११७यदि न स्यान्न (पच ४ ७१) १४५।१२६यद्धनु धनुरीश्वरस्य ९४।११३
यदक्षिभ्रूलतापा (शा प ४०५९) ३६४।५यदि नाम कुले (सु ३१५८) ६६।१७यद्भर्तुं कुरुते(नैषध १२.९२)११०।२४५.
यदचेतनोऽपि (भर्तृःस ६५) ७९।१५यदि नाम दैव (भर्तृ स ३०७) २२१।९यन्मूलते तरलिते २०८।४०
यदधोऽध (हि १ १५७) ७१।१७यदिन्दोरन्वेति ५१।२३५यद्यत्परवशं कर्म (म ४ १५९)१६७।६२०
यदन्तस्तन्न जि (पच ४ ५३) ३४९।२७यदिन्दोर्लक्ष्मीस्ते २९१।१५यद्यदिष्टतमं तत्तद्धे ५६।१११
यदपथ्यवता १६६।५७८यदि परगुणा (दश रू ४ १७) ६१।२५६यद्यदेव रुचे (शिशु १० ७१) ३१९।२२
यदपि कटकयात्रा ११६।६५यदि प्रभुरुदारधी ३३।४८यद्यदेव हि वाञ्छे(हि १ १९१)१६३।४६४
यदपि जन्म बभूव ९२।६९यदि प्रसारीकु (नैषध ७ ४३) २६३।२१०यद्यप्यनीनं चिर २४०।११४
यदपि मेघगणेन २२३।७५यदि प्राणा एव २९२।१८यद्यपि क्षितिपा(हनु ११.१९)१४७।१९४
यदपि रतिमहोत्सवे ३५।५१यदि प्रियावियो (शा प ३४४९) २७७।१यद्यपि खदिरारण्ये २३८।६५
यदभावि न (भर्तृ स ६६६) १६२।४२९यदि प्रिये वेत्सि तब ३०५।१५यद्यपि च दैवयो २२९।१६
यदमरशैलै सिन्धो २६२।१९४यदि भवति दै (पच.१ १९२) ३५२।१६यद्यपि चन्दन (भर्तृ स ६७१) २३७।४१
यदमी दश (शा प.२४४) ४८।११५यदि भवति (पच १ १९२) ७२।३३यद्यपि चातकप (चातक ८) २२६।१५३
यदम्बुकणमादा (शा प ७८९) २११।६यदि मत्तोऽसि (शा.प ९३६) २३१।६२यद्यपि तरणे कि २२९।२३३

सस्थाननिर्देशानुक्रमकोशः

६१

यद्यपि दिशि (शा प ११२१) २३९।९९यमो वैवस्वत (भा १ ३०१८) ३७७।९यस्मिन्सृष्टे (वृ चाणक्य ९ ९) १५७।१७६
यद्यपि दैवाल्लब्धा २४७।५८यममिव करधृतदण्डं ९५।८यस्मिन्वशे समु (शा प.३६३) ५४।१५
यद्यपि न भ (भर्तृ स ६७२) २४१।१३७यमाश्रित्य न (पच १ ५२) १४८।२६०यस्मिन्वस्तु (शा प ४१७१) ३७५।२३६
यद्यपि बद्ध शै (शा प.१०७८) २१५।७ययोरारोपित (सा द १० ८०) १०२।४१यस्मिन्विश्वं ३६९।६९
यद्यपि बहुगुणग (शा प १४९) २२०।५ययोरेव समं (पच१ ३०४) १४४।४९१यस्मिन्वेल्लति २३५।३
यद्यपि बहु नाधीषे तथा ४२।२यवनीनयनाम्बु २७।२११यस्मै ददाति (शा प ११७६) २३५।१६२
यद्यपि भ्रात(भा १२ ५०६४)३८५।३५६यवनैरवनि क्रान्ता ९८।१यस्य कृत्यं न (भा ५ ९९३) ३८९।४९५
यद्यपि रटति (भर्तृ स ६७४) २२९।१७यश करणधोरणी १०६।१७१यस्य क्षेत्र (पच १ २२९) १६२।४१५
यद्यपि शिरोऽधि (शा प.१७५६) २१०।९यश पटोडयमङ्गुष्ठे १२३।१यस्य क्षोणिपते १३६।४२
यद्यपि सन्ति बहू २१२।२२यश पदाङ्गुष्ठ (नैषध ७ १०७) २७०।२६यस्य चाप्रिय (शा प १४२८) १५।३७
यद्यपि स्वच्छ (शा प.२०७९) २१५।२यश पूरं (प्र राघव ७ ९२) १०६।१६५यस्य चित्तं (वृ चाणक्य १५ १)३८८।४६५
यद्यप्याप्रतरोरमु २२४।११२यश शशाङ्क ११८।१०३यस्य चेतसि (कुमार ६ १८) १०२।४३
यद्यप्युच्चैर्वि (काम नी ५.२७) ३७७।१७यश सौरभ्य (भामिनी प्रा ८०) ५५।६१यस्य जिह्वा ३४९।५५
यद्रात्रौ रहसि (अमरु १५०) ३२८।१८यश स्तोमानुच्चै १०६।१५७यस्य जीवन्ति ९७।१
यद्वक्तृ मु (शान्तिश १ १८) २३३।१९९यशश्चन्द्रैरुद्य १०६।१६०यस्य त्वया व्रण (शाकु ४.१३) ३६२।२६
यद्वञ्चनाहितमति (ध्वन्या उ ३) ५०।२०६यशस्करे (शा प १४०६) १७५।९२०यस्य द्वारि सदा १८४।७१
यद्ददन्ति चपले ६३।२२यशोदयामण्डि (शा प.१२३१) १०४।९७यस्य न ज्ञायते (पच २ ६३) १६५।५२७
यद्ददहल्याहे (मृच्छ ५.३०) २९८।८यशोधननिधे ३५।२३यस्य न ज्ञायते (पच ४.२०) १६७।६४७
यद्वद्धनमार्सिह च १४३।३७यशोऽधि (किरात ३.४०) १७२।८३२यस्य न सविधे (सा द १० ७) २५१।२५
यद्वन्नयोदधिसम ३६९।७०यशो यस्माद्धस्मी ८३।३यस्य नास्ति विवे (भा २ १९४५) ३९।८
यद्वात्मान सकलव ३६९।६७यश्वत्वारि शतानि ३५।१८यस्य नास्ति स्वय (हि ३ ११९) ३९।१
यद्विस्मयस्तिमि (मालती १ २२)२७९।४८यक्ष निम्बं (कुव ४६) २४१।१५६यस्य पुत्रो न वै ९०।७
यद्वीक्ष्यते खलाना ५७।१४२यक्ष मूढतमो १५७।२०१यस्य पुत्रो (प्रसगाभ १४) ३८९।४९८
यद्वीचीभि स्पृशसि २१६।२२यस्तीर्थानि २१।९२यस्य प्रसादे पद्मा (मनु ७ ११) १४२।९
यद्वीर्यं कूर्म (सा द ६ १८६) १०२।३९यस्तु कृच्छ्र (भा १ ४५५७) ३९०।५१२यस्य भार्या विरू(गरुड पूर्व १०८)३५१।१
यश्वान्द्रावितके(विद्ध शा ३ १४)३०३।१३५यस्तु शूद्रो (भा ३ १४०७५) ३८०।१२४यस्य भार्या (भा १२ ५५०५)३८५।४०२
यन्नाकृष्टसुवर्णस् (शा प १५४) ३१।४६यस्तु संचरते ९८।२यस्य भार्या शुचि ३५०।१
यन्न माति (शा प ३३४२) २६४।२४९यस्तोषं न २२२।६३यस्य मित्राणि मित्रा (का प्र ४ ३०) ९७।२
यन्नम्र सरल (पच २ १८८) ३७७।१५यस्माच्च येन च (पच.२ २०) ९२।७१यस्य मित्रेण सभाषा (हि.१ ३९) ८८।२
यन्नवे भाजने (हि प्र ८) ३७७।१६यस्मार्दार्य (शा प १०४१) २४१।१५९यस्य यस्य हि (पच १ ७४) १६३।४७८
यन्नादृतस्त्वमलिना २३८।६९यस्मादाक्रामतो २०१।६७यस्य वक्त्रकुहरे २९।१६
यन्नाब्यभ्रमिघूर्णमान ६।७२यस्मादासीत्कुमार १४।१०यस्य वज्रमणे (शा प १०९९) २१८।६४
यन्नाद्यापि समा ३५९।१०१यस्माद्विक्षुमुदेति १।१४यस्य षष्ठी चतुर्थी १८६।५
यन्नाम्न प्रथमाक्षर ९।१२८यस्मिञ्जीवति जीव (भर्तृ स ६८०) ९८।६यस्य स्त्री तस्य ३४९।५४
यन्नि शब्द (राज न ४ ३०८) ३७७।८यस्मिञ्जीवति (विक्रमच ४) २२९।१३यस्य स्नेहो (वृ चा १३ ६) ३९०।५१९
यन्निमित्त भवे (शा प १४६१) ३७८।७यस्मिन्कुलेय (पच १ ३१४) १७४।८९२यस्य स्त्रीषु (प्रसगाभ.१३ ) ३९०।५२१
यन्मञ्जुसिञ्जितमि २६२।१९२यस्मिन्कुल (पच १ ९४) १४९।२७४यस्या महत्त्व २२०।२
यन्मध्यदेशा (कुव ९७) ३१२।१५यस्मिन्खङ्गे (शा प ४६६०) १४३।५९यस्या मौलि १०१।५३
यन्मध्ये यच्च (शा प ४१२१) ३७२।१५०यस्मिन्देशे (पच २ ८३) १५५।८८यस्या यस्यामव (भा ११ ७८)३८८।४६२
यन्मनोरथशतैर (शा प.४५३) ९१।४६यस्मिंस्तुच्छे २३४।१३३यस्या स केस (शा प १२१३) २१५।१६
यन्माता विष्णु १५।१३०यस्मिन्नेवाधि (पच १ २६६) १४६।१६२यस्या सगम (शा.प ८३०) २२४।१०२
यन्मुक्तामण (शा प १११२) २१८।६१यस्मिन्बुद्धुदसक ५।५३यस्याः सन्नत २३४।१३७
यम प्रतिमही १०६।१७२यस्मिन्व्यथा व(भा ५ १३४०)३८९।४७३यस्याकर्ण्य वच.(शा प.८४६) २२८।२२०
यस्मिन्यदा पुष्क (भाग ४ ६) ३८९।४८९यस्यामि कोप ११६।७१