भारतकोश
सुभाषितरत्नभाण्डागार (पण्डित काशीनाथ शर्मा संग्रह)

सुभाषितरत्नभाण्डागार (पण्डित काशीनाथ शर्मा संग्रह)

Subhashita Ratna Bhandagara

पण्डित काशीनाथ शर्मा (सम्पादक: नारायण राम आचार्य) द्वारा

स्रोत: Subhashita Ratna Bhandagara (10,000+ Classic Sanskrit Epigrams & Maxims - Nirnaya Sagar Press) (उद्गम)

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सस्थाननिर्देशसङ्क्रमकोशः (पृ. ४५)

स्तम्भ १स्तम्भ २स्तम्भ ३
नो चाटु श्रवणं (सा.द.३ ८२) ३०५।१३पक्ष्मालीपिज्र (मालती १ ४) ९।१४२पतिव्रता पतिप्रा (पच.३ १४४)३७७।१२
नो चापाकलनं न १३१।१२१पङ्कज जलेषु वा (शा प ९९) २४३।२१०पतिरतीव धनी सुभ ३५२।२६
नो चारु चर (सूक्ति १७ ९) २२८।२१८पङ्कसकराविगर्हितम(नैषध ५ ८७) ६९।२२पतिभार्या (मनु ९ ८) ३८६।३६१
नो चिन्तामणि (भर्तृ स.२६६) २१४।७५पङ्कानुषङ्गं पथि (शा प ३९१७)३४५।५७पतिर्हि देवो(बौधा स्मृ.१ १३) ३५१।१४
नोच्चै सत्यपि चक्षु (वेणी २ १) १३९।७पङ्गुष्वपि च देवर्षे ३४९।४८पतित्रताया कुच १७३।६६३
नो जानाति कुलीनमु ६३।४२पङ्गो वन्ध्यस्त्वम (स क.४ ११३)७४।३५पत्ति पंक्ति वाहमे १२९।५३
नो तल्पं भजसे न ३०९।२३पञ्चत्व यान्तु बाणा २८५।४५पत्ति पत्तिम (कुमार १६ २) १२७।२
नो तावत्कल्याणि ३६१।४६पञ्चत्वं तनुत्रेव भू (सु १३५५) २८४।३०पत्ति पदातिं र (रघु.७ ३७) १२८।२५
नोदन्वानर्थितामे (सु २६६५) १५३।११पञ्च त्वानुगमि (भा.५ १०४६) ३७७।२०पत्यु प्रवृत्तस्य रतौ ३१९।२४
नो धर्माय त (भर्तृ स ५८२) ३७५।२२३पञ्चदशीरजनिसमा १८६।१०पत्युर्यरपतितावशेष (सु ६३९) २३२।९०
नोपभोक्तु नच (हि १ ११३) ३८४।२७५पञ्चभि. कामिता १५५।११७पत्रं नैव यदा क (भर्तृ २ ८९) ९३।९६
नोपभोक्तुमपि क्लीबो (सु २६७६)७१।१५पञ्चभि. सम्भृत (हि.४ ७१) ३८६।३५०पत्रच्छायासु हं (मालवि २ १२)३३७।५६
नोपभोगपरानर्था १६९।७०४पञ्चभि सह गन्त १५५।८४पत्रपुष्पफलच्छाया (शा प ९७७) २३६।२
नोपभोगो न(काव्या.२ ३२६)३८८।४३५पञ्चभिर्याति दास (हि २ ३८)१६३।४७३पत्रफलपु (भामिनी अ.२२) २४२।१६०
नोपेक्षा न च दाक्षि २११।७पञ्चमेऽहनि षष्ठे (शा.प ३१४) ७५।६पत्राणि कण्टक (शा.प १०१२)२३९।९२
नोपेक्षितव्यो (सु २७६२) १४९।३१५पञ्चसायकमहेन्द्र २७८।३३पथि निपति (सूक्ति १७ ६) २२८।२१४
नो मन्ये दृढब (शा प ९३४) २३२।८९पञ्चास्यपञ्चदशनेत्र ९१।१६पथि पथि लता ३३४।१३१
नो मन्त्रीमयमी (शा प ८२०) २२४।१००पञ्चास्यस्य पराभवा (धर्मवि ७) ३७७।४पथि पथि (काव्य.प्र ४ २०) ३३३।८५
नो रविनं च (सूक्ति ६८ २०) २९४।१०पञ्चेन्द्रियस्य म (भा.५.१०४७) ३७७।५पदद्वयस्य सधान (सु १४०) ३९।१९
नोर्ध्वं न चा (कुमार १४ ३८) १२८।४१पञ्चैतानि विलि १६५।५५५पदन्यासो गेहाद्वहि ३५१।३२
नोर्ध्वमीक्षण (कुमार ८ ५६) २९७।११पञ्चैते पाण्डुपुत्राः ९५।१२८पदप्रणतमालोक्य ३१०।१
नो वा कियन्त २२०।२०पञ्चैव पूजयन् (भा ५.१०४५) ३७७।६पदबन्धोज्ज्वलो हारी ३५।३०
नो सलेन मृगा (भर्तृ १ ७७)३८४।२७६पटलमम्बुमुचा ३४१।३५पदमनन्तरवान्त्वि २०२।८४
नो सध्या समुपासते २०।७४पटालमे पत्यौ नमय (अमरु.४१) ३१८।९पदव्यक्तिव्यक्ती (सूक्ति ४.३५) ३३।४४
नो सेवा विहिता ६७।६५पटविघटितमपि २६५।२८८पदशब्दलीनहृद (सूक्ति ४६ ६) २९४।१
नौका वै भजते २४८।८५पटुत्वं सत्यवादित्वं (हि १ ९९)१६३।४५२पदस्थितस्य पद्मस्य (शा प ४८७) ८६।४
नौका च (शा प दुर्जन १८) ३८८।४३३पटु रटति पलितदूतो ९५।१०पदानि क्रतु (याज्ञ १.३२४) १५०।३४५
नौश्व दुर्जनजिह्वा (कविता.१०) ५४।१४पाठक पाठकश्चैव १५८।२५१पदाभ्यामुन्नि (प्र राघव २.९) २७१।४४
न्यग्रोधे फलशा २४१।१४७पठतो नास्ति मू(शा प.१४२४) १५३।५पदे पदे च रत्नानि (वृ चा २ १)१६०।३११
न्यञ्चञ्चल (सूक्ति.९६ १०) २०८।२५पण्डिते चैव मूर्खे १५८।२२९पदैश्चतुर्भि सुकृते (नै.१ ७) १०५।१२३
न्यञ्चति (भामिनी.शू ४१) २५५।६पण्डिते हि गुणा (स पाठो.५३) ३८।१पद्माकरं दिनकरो (भर्तृ २ ६५) ७५।१३
न्यस्तं यथा मू(शा प ४११५)३७२।१६६पण्डितै सह १५८।२५२पद्माकारैर्योधवक्रे १३०।१०१
न्यस्तं पन्नगमूर्ध्नि ३५३।५७पतङ्गपाकसमये पत ३३१।८पद्माक्षस्रग्दाम(नैषध ७ ४९) ४२६३।२२२
न्यस्तानि (सूक्ति ८६ ५) २६४।२४३पतति रविरपूर्ववारि २९४।४८पद्मातपन्नरसिके (कुव ९०) ३१३।५५
न्याय खलै (सु ३१७) ५०।२०८पतति व्यसने (सूक्ति ११० २३) ४६।२८पद्मानना पद्मपलाश १०१।१०
न्यायनिर्णीत (किरात ११ ३०) ८५।४पततु तवोरसि स (सु २१२०) ३२०।२पद्मापयोधरत (गीत.१ २.१०) १४।१८
न्यायार्जितधनस्तत्त्व ८९।१पततु नभसो गच्छ २०९।१४पद्माया स्तनहेमसद्म १६।१२
न्याय्यं मार्गमनु (सु ५३९) ७१।४३पतत्यविरतं वारि नृत्य (कुव ११४)३४०।७पद्मा सद्मनि केशवस्य १११।२६५
पतलेत्तत्तेजो (नैषध १२.४६) १३५।३१पद्मिनि किमिति २४४।२१४
पकानि प्रच्यवन्ते १४२।१४पतन्ति खङ्गधारासु (शा प ३४३) ६५।४पद्मिन्या सकला ३२४।४९
पकाक्षमिव (सु २७६६) १४४।८०पतन्ति नासि (किरात ४.२३) ३४४।१९पद्मिन्या दयितेऽनु ३२१।१०९
पक्षविकलश्च (मृच्छ.५ ४१) ६६।३३पतन्ति व्यसने दैवात् ४५।२८पद्मे त्वन्नयने स्म (कुव.२०) २४।१५८
पक्षावुत्क्षिप्य धुन्व (सु.२४१८)२०८।२६पतिते पतद्द्मृगराजि २९७।१४पद्मे मूढजने ददा ६३।३४
पक्षिभ्रेष्ठसखीबभूवुरा १९८।३पतितोऽपि राहुव (शा प.४८०) ४७।९२पद्मोदयदिना (सा.द १०.३०) १०३।५८
पक्ष्माग्रग्रथि (सूक्ति ३९ ११) २८६।२०
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