सुभाषितरत्नभाण्डागार (पण्डित काशीनाथ शर्मा संग्रह)

सुभाषितरत्नभाण्डागार (पण्डित काशीनाथ शर्मा संग्रह)
Subhashita Ratna Bhandagara
पण्डित काशीनाथ शर्मा (सम्पादक: नारायण राम आचार्य) द्वारा
स्रोत: Subhashita Ratna Bhandagara (10,000+ Classic Sanskrit Epigrams & Maxims - Nirnaya Sagar Press) (उद्गम)
DevanagariSanskritpublished516 पृष्ठ
पृष्ठ 475, कुल 516 में से
संदर्भ में पढ़ेंपृष्ठ 475
| ४४ | सुभाषीतरत्नभाण्डागारस्थपद्यानां | |
|---|---|---|
| निर्यान्त्या (शा प ३७२८) ३२४।४८ | नीचस्तनोत्वश्रु निता (सु १७५) ४०।४३ | नृत्यत्तद्वद्विजिराजी (रसगङ्गाधर)१२६।२५ |
| निर्लेपौ कुचकुड्मलौ ३२१।२९ | नीचावमानमलि (दृ श.२०) १६८।६७७ | नृत्यद्भगोदृहास (कुव १४८) ११६।५६ |
| निर्वाणदीपे (नीतिप्र १३) १७३।८७४ | नीचेषु यावनी (शा प ५५९) ९९।१३३ | नृत्यारम्भसरत्सद्गरि ६।७० |
| निर्विवेकतया बाल्यं ३६७।१८ | नीचैर्धुर्यवने शुनी १००।३० | नृप. कराभ्यासु (नै १२ ८०)१०४।११६ |
| निर्विशेषो यदा (पंच १ ८६) १४६।१५७ | नीतं जन्म (अमरा ४ १२) २२४।१०८ | नृप कामासक्तो (हि २.१४२)१५२।४११ |
| निर्विशेषेणापि (पच १ २२५) १५७।१७८ | नीत नवनवनीतं २२।१११ | नृपतिनिजाम तया ११५।३३ |
| निर्विषोऽपि (शा प.१२९७) १४९।३१० | नीता कुम्भस्थल क १२३।१ | नृपतिपुरुषशक्ति (मृच्छ ३ १०) २९६।२ |
| निर्वीर्या पृथिवी ९९।२३ | नीतानामाकुली (कुव ६५) ३१२।१४ | नृपतिसुकुटरत्न (हनु ७ ३) ११८।१२१ |
| निर्वृत्ताध्वरकृत्य १७८।१०८० | नीतिर्भूमिभुजा (नवरत्न ३) १७९।१०३२ | नृपदीपौ धन (पच.१.२४४) १४९।२९३ |
| निर्वृत्ते सुरतोत्सवे (सु २११६) ३२१।२६ | नीतिर्लक्ष्मीमुकुरो १११।२५६ | नृपाणा च नरा(शा.प १२८७)१४५।१२० |
| निर्व्याजा (शा प ३७५०) ३५१।३८ | नीते मेदं धौत (शिशु १८.२०)१२९।६५ | नृपोऽपकृष्ट (मुद्रा ४ १४) १५२।३९७ |
| निर्ह्लादं क्रकचकक्षतै. ३१।४५ | नीत्वोच्चैर्विशिख (अमरु ११९) ३४७।४६ | नृसिंहदेवे चलिते १९०।७३ |
| निलय श्रिय. (शिशु ९ १६) २९६।४ | नीपस्कन्धे कुहरिणि १४१।४ | नेता यस्य बृह (भर्तृ.स ४९) ९३।१०० |
| निलीना वेश्मान्त २५४।३४ | नीपस्कन्धे निवसति १४०।१ | नेतु प्रयाणोन्मुखता १९०।६८ |
| निलीयमानैर्विहगै (कुव १७१) २९३।६ | नीर दूर तदपि वि २१३।५७ | नेत्रे खञ्जनगञ्जने (सा.द ३ ५९)२७२।७१ |
| निवासश्चिन्ताया (मृच्छ १.१५) ६७।५५ | नीरक्षीरविचे (भामिनी.अ १२) २२१।१० | नेत्रे खञ्जनगञ्जने नव २८१।१०८ |
| निविशते यदि (नै ४.११) २७५।१८ | नीरक्षीरे गृहीत्वा ११७।९६ | नेत्रैरिवोत्पलै (सा द १०.२५) १४०।१ |
| निवृत्ता (भर्तृ स.१७३) ७७।४४ | नीरजान्यापि निषेव्य २२३।६८ | नेत्रोपान्तवतंसिते २७२।६० |
| निशम्य केलीभवनोप ३३०।२ | नीरन्ध्रं परिरभ्य (शृ ति.२ ६७) ३१०।३ | नेदं नभोम (सा द १०.३८) ३०४।१५१ |
| निशाचरोऽपि दीनो २०९।६ | नीरसान्यापि (शा प.२९४) २४२।१८४ | नेदं मुख मृगवियुक्त २५३।२० |
| निशारत्नं चन्द्र (प्रसगा १५) ११५।४६ | नीरागा मृग (शा प ३४८८) २९०।७२ | नेदं समीरितमकारि ३५९।८९ |
| निशितशरधि (काव्यप्र ४ १९) २५५।१६ | नीराञ्जिभं (भामिनी.अ ६१) २४४।२३७ | नेदं सर सरसवारि २२१।२१ |
| निशीथे लीना (शा प ३८९२) ३४२।८६ | नीलनीरजनि (किरात ९ १९) ३००।३६ | नेपथ्यादपि रा (सूक्ति ८० २) ३२१।२५ |
| निश्चितं समुद को १८७।९ | नीलाब्जद्युतिनं १८४।३९ | नेपालीनामराले १३८।७८ |
| निषेवन्तामेते २३२।७७ | नीलाञ्जाना नय(स क २ ६७) २७१।४८ | नेयं विद्युद्भवमध्वि २७४।२१ |
| निष्पन्दा किमु (शान्तिश ४ ३) ७४।४६ | नीलेन्दीवर (स क ३ ११५) २८१।१०२ | नैतच्चित्रं यद (अ शा २.१५) १०७।१७५ |
| निष्पन्दामरवि(स क ४ ९४) २३५।१५५ | नीलोत्पलदल (सूक्ति ४ ९६) ३६।५४ | नैतद्दारिदगजितं ३४२।७० |
| निष्कलङ्ककलकैक (शा.प.४६४) ८२।४२ | नीलोत्पलाभ (शा प ४१२२) ३७२।१५१ | नैतद्विचित्रं म(भाग.१०.१२) ३८४।२९३ |
| निष्कासयन्त्यनेके २७८।२५ | नीलोत्पलोल्लसित २५३।२४ | नैतत्सा प्रह्यति(शा प.३९४२) ३४८।१७ |
| निष्कूजस्तिमिता. १४०।५ | नीवारप्रसवाग्रमुष्टि (सु.६३७) २३२।८१ | नैता स्वयमृप(शा प ७८८) २११।१७ |
| निष्क्रामन्नमृश ३७२।१४३ | नीवारा शुकको (अ शा १ १३) १४१।७ | नैयायिकाना नलिनाम्ब ४३।४ |
| निष्ष्णातोऽपि च (भामिनी.अ.८५) ५५।५९ | नीवारौदनमण्डमु १४६।१० | नैयायिका वा ननु शाब्दिक ४३।४ |
| निष्पाल्यासु हि • २६।१६५ | नीवीदर्भापरीतकरा ३१।८१८ | नैरन्तर्यच्छि (शिशु १८.७६) १३०।१०५ |
| निष्पीडितो यद्य २१०।१६ | नीवीबन्धोच्छ्वस (मालती २.५) २७६।४८ | नैर्मल्य वपुषस्त २२९।२२९ |
| निष्पेषोऽस्थिच २४३।१८६ | नीव्या सयमनं कचे ३२१।२८ | नैव व्याकरणाज्ञमे ३१।४३ |
| निष्प्रत्यृहमनल्प (शा प १२४) १८।१९ | नीहाराकरसार (शा प ७७२) २१३।६० | नैवाकृति फलति (भर्तृ स.४०) ९२।७२ |
| निष्प्रत्यूहमुपासहे १५।३१ | नूनं दुग्धाब्धिम (सूक्ति ६ २) ४६।४७ | नैवात्मनो विनाशं(पच १.४४३)५६।११५ |
| निसर्गसौरभोद्गान्त ३२०।३ | नून बादालशाइ शो(शा प ५५०)२०७।३ | नैवार्यं भगवानुद ३०३।१३४ |
| निसर्गादारामे (भामिनी.अ ५२) २३८।७२ | नूनं हि ते क (भर्तृ स ११८) २५२।४२ | नैवालवालवलयं २१२।४४ |
| निस्त्रिंशत्रुटि (नैषध.१२ ६६)११०।२४२ | नूनमयं मे पाप (सु १२६५) २७७।१८ | नैषा सध्याविधिरवि १३९।५ |
| निहत निहत तूर्ण १४१।१ | नूनमाज्ञाकरस्त (भर्तृ १ ११) २५९।६० | नैषा वेगं सुदुतर (मु २१०७) ३१९।३७ |
| नीचं समृद्धमपि १७६।९६८ | नृणा धुरि स एवैको (सु ५१०) ७०।१९ | नैष्ठुर्यं कलकण्ठको २९०।८० |
| नीच समुत्थितो (शा प.३५६) ५५।६९ | नृणामन+यस्तफणामूदी ४२।६ | नो काम प्रति (सु.२५७६) १०८।१९६ |
| नीचतामनवलम्ब्य ७२।२९ | नृत्यचन्द्रकिणि (सु.१७७३) ३४२।८९ | नो ग्लानिं भजते १२१।२५८ |