भारतकोश
सुभाषितरत्नभाण्डागार (पण्डित काशीनाथ शर्मा संग्रह)

सुभाषितरत्नभाण्डागार (पण्डित काशीनाथ शर्मा संग्रह)

Subhashita Ratna Bhandagara

पण्डित काशीनाथ शर्मा (सम्पादक: नारायण राम आचार्य) द्वारा

स्रोत: Subhashita Ratna Bhandagara (10,000+ Classic Sanskrit Epigrams & Maxims - Nirnaya Sagar Press) (उद्गम)

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४६सुभाषितरत्नभाण्डागारस्थपद्यानां
पन्था सङ्कर दीर्घ११७।८८परार्थव्यास (भामिनी अ ७४)५२।२४६परोपकार कर्तव्य (पाञ्च उ २२)७४।१
पन्नगधारिकराग्रो गङ्गो१३।४परार्थानुष्ठाने जड (मुद्रा ३ ४)१३९।३परोपकारविज्ञानमा (सु २३१६)५६।९६
पपात गङ्गा हरमौलि३२१।५परार्थे य (शा प १०१२)२४२।१७९परोपकारशून्यस्य (शा प १४७८)७४।७
‘ पपात पाथ कणि२१२।२९परीक्षणं कश्चि (भर्तृ २ ३७)६५।१५परोपकाराय फल (विक्रम ६६)७५।१०
पपात मेरो सुरसिं३२१।४परिचरितव्या (भर्तृ २ १०८)३८६।३४८परोपकृतिकैवल्ये लोल७४।५
पम्पासरसि रामेण१९३।५परिचुम्बति स (शा प ३७८५)३३१।५परोपदेशकशला दृश्यन्ते८४।४
पयःपीठं दत्ते त्वरि३५७।५२परिच्छिन्नस्वादोऽमृत३१।४०परोपदेशवेलाया१५६।१५९
पयसि सलिल (शिशु ११ ४५)३२७।१४परिच्छेदती (मालती १ ३३)३७५।२४७परोपदेशे पाण्डित्यं (हि १ १०३)४५।२६
पयोदकेशेषु विक्रु२४७।१५परिच्छेदो हि (हि १ १५०)१६३।४५५परोपसर्पणानन्त (भामिनी अ ८४)२३६।५
पयोद हे वारि (उत्त.चातक ६)२१२।३५परिच्युतस्तत्कुच(रत्ना २.१४)२८३।१५७परोऽपि हितवा (सु २७०५)१५६।१५२
पयोधरघनीभाव२६४।२५३परिणयविधौ भङ्क्त्वा२०।८०परोऽप्यपत्यं(भाग ७ ५ ३७)३८७।४१३
पयोधरस्तावदय२६७।३५'परितप्यत एव (शिशु १६ २३)५९।२०१परोऽवजाना(किरात १४ २३)१७४।९०३
पयोधराकारघ (शा प.३९२७)३४६।३४परितोषयिता न(शिशु १६ २८)५९।१९७पर्जन्य इव भूता (शा प १८८३)१४२।४
पयोधे सर्वस्वं शिर२१७।५७परिपतति पयो (शा.प ३५८८)२९४।४५पर्यङ्क खास्तर (शा प ३७६६)३५२।३
पयोमुच प (काव्या २ १७३)२८८।४३०परिपीड्य करद्वयेन२४६।३७पर्यङ्कग्रन्थिबन्धद्वि (मृच्छ १ १)८।११२
परं क्षिपति (भा.५ १००७)३८६।३४५परिपूर्णगुणाभोगगिरि (सु ५०५)७०।१७पर्यङ्कीकृतनागनायक१५।३६
परं तदिह नास्ति२४२।१६६परिपूर्णेऽपि तटाके५६।१२३पर्यङ्को राजलक्ष्म्या११८।११०
परं पलितकायेन१६५।५६०परिमन्थरा (शा प ३९१४)३४५।५०पर्यच्छे सरसि (शिशु ८ ४६)३३९।१०३
परं विनीतत्वमुपै (भाव ४ ३)१५२।४००परिमन्थराभि (शिशु ९.७८)३११।१०पर्यत्तपुष्पस्तबक३३१।३४
परकाव्येन क(राजन ५ १५९)३९७।४२२परिमलसुरभित (शा प ९९०)२३७।३९पर्वतभेदि पवित्रं जैत्रं९।१२३
परगुह्यगुप्ति (भामिनी अ ८७)५७।१३९परिमृदितमृणा (मालती १ २५)२७५।२५पर्वताग्रे रथारूढो१८५।२७
परदारपरद्रव्यपर (शा प ६६७)१५४।४६परम्लानं पीन (रत्ना.२ १२)२७५।२७पर्वताग्रे रथो याति१८५।१९
परदारं परद्र (स पाठो ५४)१६१।३४९परम्लाने माने मुख (अमरु २५)३१०।४पलायिता तवारि११८।१०१
परदारा न गन्त (सु २९)१५४।४४परिलुठति ललाटे३०६।३६पलाशकुसुमभ्रा (कुव २५)२२२।४३
परदु खं समा (राजन १ २२७)४७।८१परिशिथिलित (शिशु ११ ११)३२३।२५पल्लवत कल्पतरोरे (कुव ५७)१०३।७९
परपतिनिर्दयकुल्टा३५१।२६परिशुद्धामपि वृ (शा प ३५५)५७।१३०पल्लवोपमितिसा(शिशु १०.५३)३१७।१५
परपरितापनकुतुकी५८।१५७परिश्रमज्ञ जनमन्त (सु १९५)३८।२१पल्लीनामधिपस्य पङ्क३५७।३९
परभृतशिशो (सूक्ति १४ ९)२२५।१३८परिसुरपतिसू (किरात.१० २०)३४०।२२पवनापनीतसौरभद्गदो२२२।६०
परमर्मघट्टनादिषु (सु ४०३)५८।१७८परिस्रुरन्मीन (किरात ८ ४५)३३८।८८पवित्रमतिसूक्तिकू२०३।१०५
परमर्मदिव्यदर्शिषु (सु ३९२)५७।१३९परिहर कृता (गीत.१० १९ ३)३०६।४९पश्चादङ्गी प्रसार्य (सु २४२०)२०७।१३
परमो महत्स (शा प ७९३)२१४।३परिहरत पराङ्गना१७५।९४१पश्यति परस्य युवति१७१।७८०
परवादे दशवदन.-(सु ३८९)५७।१२९परिहरति भयात्तवा२०१।६८पश्यन्ति नैव कवयो१७६।९६१
परश्लोकान्स्तोकान (सु १७९)४१।६०परिहरति यथा य(भाव ३.११)२५५।१५पश्यन्ति स्निग्धमुग्धं३५४।६५
परस्परानु (शा प १९२९)१५०।३५०परिहरति रतिं मतिं२९३।२पश्यन्तीं परिणामके३२०।४६
परस्परेण (रघु ७ ५३)१२८।३६परिरुह्य दुरारोहं२६७।३३१पश्यन्नन्यसख्यपथगा१०२।३८
परा विनीत (काम नी १ ६५)३७८।४६परीक्ष्य सत्कुलं वि (शा प ४०५)६५।४पश्यन्हतो (सूक्ति ५३ ८०)२६९।३९६
परागै कर्पूरैरस्तृहि२८०।७१परीवादस्तथ्यो (लक्ष्मणसेन)१७७।९७७पश्य पकफलिनीफ२९९।२६
पराधीनं वृथा१६०।३२८परेषा क्लेशदं (शा प १५१३)१५४।६८पश्य पश्चिमदिगन्त२९४।१३
परावरं प्राप्य दुर्बुद्धे (सु.२३११)३६३।३परेषा चेतांसि (भर्तृ ३ ६२)३६८।४५पश्यानुरूपमिन्द२४१।१५७
पराङ्गेन मुखे दग्धं(वृ चा ४ २३)९८।३परेषामात्मन. (पंच ३.८७)३७७।२१पश्याम किमिदं (अमरु २०)३११।२४
परापकारनिरतै१६८।६५९परै प्रोक्ता गुणा यस्य८३।१पश्यामि तामि (मालती १.४३)२७८।४९
पराभवं परिच्छे (हि २ १५०)१६४।४९०परै समुन्न्यते रा (हि २ १७६)१३९।१पश्यैकश्चिञ्चलचपल१३२।२३
परामृशन्तो लिङ्गानि४३।१परोक्तमात्रं (वृ. चा ४ ४९)३८१।१७२पश्योदञ्चदवाञ्चदञ्चित२०७।३
परोक्षे कार्यहन्तारं (स.पाठा.५४)८८।१पश्योदेति वि (प्र राघव ७.५९)३०१।९१
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