भारतकोश
सुभाषितरत्नभाण्डागार (पण्डित काशीनाथ शर्मा संग्रह)

सुभाषितरत्नभाण्डागार (पण्डित काशीनाथ शर्मा संग्रह)

Subhashita Ratna Bhandagara

पण्डित काशीनाथ शर्मा (सम्पादक: नारायण राम आचार्य) द्वारा

स्रोत: Subhashita Ratna Bhandagara (10,000+ Classic Sanskrit Epigrams & Maxims - Nirnaya Sagar Press) (उद्गम)

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५८ सुभाषितरत्नभाण्डागारस्थपद्यानां

मुखेन्दुच (सूक्ति ५३ ४६) ५६४।२६०मूर्ख व्यसनिनं १४२।३०मृत्युर्मायति मूर्ध्नि ७५।१९
मुखे यद्वैरस्यं (शा प १०५३) २४२।१८०मूर्ख खल्प (हि ३ १२५) ३९।१३मृत्योर्बिभेषि किं (सु ३२९५) ३७५।२३१
मुखे हारावाप्तिर्नय (शा प १२६२) ११३।७मूर्खेष्विहानि षडिति ३९।२मृत्योर्वा (भा १२ ९९५२) ३८८।४४३
मुखैरसौ (किरात.४ ३६) ३४४।२८मूर्खत्वं सुलभं (उद्भट १) ४१।६६मृदुचरणतलाप्रदु ३३४।११२
मुख्यमेक १५९।२६३मूर्खशिष्योप (वृ चाणक्य १४) १५५।९१मृदुनातिसुवृत्तेन (पञ्च.१.२९४) ९७।१२
मुग्धस्य कलिंविजि २९६।६मूर्खश्विरा (वृ चाणक्य ४ ६) ३८९।४७१मृदुपवनवि (विक्रमोर्व ४ २२) २८३।१६६
मुग्धस्य ते वद (शा प ३४३०) २८५।४७मूर्खस्तु (वृ चाणक्य.३ ७) ३८८।४४३मृदुभिर्बहुभि (दृ श.५४) १५१।३६०
मुग्धा कान्तस्य (काव्या २ १५५) ३२९।१मूर्खा यत्र (वृ चाणक्य ३ २१) ३८१।१९०मृदुराई. (हरिवश ११६८) ३८१।१९१
मुग्धा दुग्ध (सा द १० ३६) ३०३।१३६मूर्खाणा (पञ्च १ ४४९) १६४।५१८मृदुलकनककान्ति ३१३।५७
मुग्धा खप्रस (शृङ्गारति १ ५१) २७६।५१मूर्खे नियोज्य (चाणक्य ८५) १४६।१७९मृदुलवलितमध्यं २५५।९
मुग्धे किं (शा प ३५५३) ३०८।२०मूर्खों (वानर्यष्टक ५) १७१।८२१मृदुव्यवहितं (शिशु २ ८५) १४७।१८७
मुग्धे तवास्मि (सु २१२७) ३२०।१३मूर्खोऽपि मूर्ख ३९।६मृद्ना खादन्ता (शा प १००५) २३८।७६
मुग्धे दोर्लतिका (शा प ३४१९) २८६।२३मूर्खोऽशान्त (नवरत्न ६) १८०।१०५४मृदो परि (सु २६९२) १४६।१६८
मुग्धे धानुष्कता (सूक्ति ७४ १८) ३१२।१मूर्खो हि (भा १ ३०७७) ३९।३मृद्वटवत्सुख (हि १ ९२) ५७।१३५
मुग्धे प्रतार (शा प ३३३२) २६४।२३५मूर्तिमन्तमिवरा (सु २०१६) ३१४।३मृद्वङ्गि कठिनौ (शा.प.३३३९) २६४।२४७
मुग्धे मानं न ते ३०७।१मूर्ध्न्यध्याधूयमान (सा द ७ १६) १०।१५५मृष्टचन्दनवि (शिशु १० ८४) ३२१।१०
मुग्धे मानिनि ३०७।६८मूर्ध्ना कल्याण ११८।११५मेखलीयति मेदिन्या. १२३।१
मुग्धे मुग्ध (अमरु ७०) ३०८।२१मूल स्थूलमती(भामिनी प्रा ३२) २३६।२२मेघाटोपै स्वनित (सु १७८९) ३४१।५६
मुग्धे मुश्व विषा (सु ८४) १५।२९मूल दोषस्य (किरात ११ २०) १६१।३६३मेघालये भवति २०२।८६
मुग्धे विधेहि (गीत १० १९ २) ३०५।२३मूल बालकवीरुधा (विद्ध ४ ५) ३३६।२५मेघालये भवति २०२।९३
मुञ्चन्तश्चापलरस ४६।५२मूलं भुजगै (शा प ९९९) २३७।४६मेघालये भवति २०२।९०
मुञ्चति मुञ्चति (कुव ४१) १२३।१९२मूलभृत्यान्परि (हि २ १३६) १४७।२१३मेघा वर्षन्तु (मृच्छ ५.१६) २९८।१
मुञ्चद्विर्मदवारि १३१।११७मूलमेवादित (भा १ ५५५७) ३८१।१९२मेघैर्मेदुरमम्बरं (गीत.१ १ १) २३१।४१
मुञ्च मुञ्च सटिलं २१२।२४मूलादेव (शा प १०३७) २४१।१५०मेघैर्व्योम नवा (सु १७७७) ३४३।१०६
मुण्ड पृच्छति २०४।११०मृग प्रमील ११८।१००मेघो भाति १०९।२२०
मुण्डी जटी (शा प ४१७३) ३७५।२३७मृगत्रय भाति १९०।७१मेदरच्छेदकृशो (अ शाकुं २ ५) १४५।१०९
मुण्डो जटिलो (शा प ४०३०) ३६४।१९मृगमदकर्पूरा (सु ४१५) ५८।१८७मेदिन्या विषमेषु १०८।२०७
मुदं विषाद (हि.३.११८६) १७४।१९०मृगमीनसज्ज (भर्तृ स ३२) ५७।१३६मेधावी (स पाठोप ५५) १४४।६९
मुद्रदाली धृत (भोजप्र १४२) १८८।४२मृगशिशुदृश (दश रू २ २९) २८९।६५मेरु स्थितो (शा.प ४०४९) ३६४।३०
मुद्रीदालिशुशालित् १९३।९५मृगशिशुनयनाया १८२।४२मेरुर्द्रुरगतो हिमा १११।२६२
मुनिर्नयति (कुव १७१) २१७।४२मृगसबन्धिनी २५९।६६मेरूरुकेसरसुदार (सु ५४) १८।२८
मुनेरपि (भा.१२.४१४२) १६५।५५४मृगा प्रियालद्रु (कुमार ३ ३१) ३३१।२८मोमारामममादंदे १८८।३६
मुरारातिर्लक्ष्मी (शा प १०६८) २१५।९मृगाङ्गोड्य (शा प ३६२७) ३०१।७८मोहं रुन्द्धि विमली ४२।३
मुरारिपदभक्तिश्चेत्तदा ३६।३९मृगा मृगै (पञ्च.१ ३०५) १७२।८४०मोहान्मया सु (अ शाकु.७ २४) ३०६।२०
मुहुरनुपतता (किरात १० ३३) ३३३।७८मृगेन्द्रं वा भृगारिं (शा प ९०१) २२९।२मौढ्येन विपदा (कविता ७६) ३८१।१९४
मुहुर्मुहुरवेक्षणं ३०६।३७मृगेभ्यो रक्ष्यते (शा प ९०२) २२९।३मौनं कालविलम्ब १५८।२४३
मुहुर्लक्ष्योद्भेदा(मुद्रा.रा ५ ३) १५२।४१४मृगैर्नष्टं शशैलौघ (शा प ९०३) २२९।४मौनादस्तमितेव (सूक्ति.१.१०) ५।५२
मुहुर्व्यजनवीजनै. २८९।६६मृणालव्यालवलया (शा प ४६३२) ११।४मौनान्मूक (हि २.२६) ९७।१५
मुहूर्तंमपि (वृ चाणक्य १३ १) १६९।२७६मृत प्राप्नोति (हि २ १५९) १४७।२१७मौनी पादप्रहारे (शा.प.२८६) ७८।३
मूक परापवादे ४८।१२४मृतस्य लिप्सा १७२।८२५मौने मौनी १७८।१०००
मूकारब्ध कमपि ३६३।२०मृताना (पञ्च.२.३३८) १४९।२९७मौर्ये सर्वापदा (सु ३१५७) ६६।१६
मूकीभूय तमेव (सु ७२१) २२५।१४१मृत्तो दरिद्र (विक्रमच १५६) १६५।५२९मौलि खर्णकि (शा प ११८८) २४७।५२
मूढ जहीहि (मोहमूद्गर ) ८३।११०७मृत्पिण्डो जल (भर्तृ.स ३०४) ८०।४०मौलिं मानविधि १३२।३४
मूढे निरन्तरपयो २९८।१६मृत्यु शरीर (शा.प.३८०) ७१।४मौलीं किं नु महेश ६।६६