सुभाषितरत्नभाण्डागार (पण्डित काशीनाथ शर्मा संग्रह)

सुभाषितरत्नभाण्डागार (पण्डित काशीनाथ शर्मा संग्रह)
Subhashita Ratna Bhandagara
पण्डित काशीनाथ शर्मा (सम्पादक: नारायण राम आचार्य) द्वारा
स्रोत: Subhashita Ratna Bhandagara (10,000+ Classic Sanskrit Epigrams & Maxims - Nirnaya Sagar Press) (उद्गम)
DevanagariSanskritpublished516 पृष्ठ
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सस्थाननिर्देशानुक्रमकोशः
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| यद्यपि दिशि (शा प ११२१) २३९।९९ | यमो वैवस्वत (भा १ ३०१८) ३७७।९ | यस्मिन्सृष्टे (वृ चाणक्य ९ ९) १५७।१७६ |
| यद्यपि दैवाल्लब्धा २४७।५८ | यममिव करधृतदण्डं ९५।८ | यस्मिन्वशे समु (शा प.३६३) ५४।१५ |
| यद्यपि न भ (भर्तृ स ६७२) २४१।१३७ | यमाश्रित्य न (पच १ ५२) १४८।२६० | यस्मिन्वस्तु (शा प ४१७१) ३७५।२३६ |
| यद्यपि बद्ध शै (शा प.१०७८) २१५।७ | ययोरारोपित (सा द १० ८०) १०२।४१ | यस्मिन्विश्वं ३६९।६९ |
| यद्यपि बहुगुणग (शा प १४९) २२०।५ | ययोरेव समं (पच१ ३०४) १४४।४९१ | यस्मिन्वेल्लति २३५।३ |
| यद्यपि बहु नाधीषे तथा ४२।२ | यवनीनयनाम्बु २७।२११ | यस्मै ददाति (शा प ११७६) २३५।१६२ |
| यद्यपि भ्रात(भा १२ ५०६४)३८५।३५६ | यवनैरवनि क्रान्ता ९८।१ | यस्य कृत्यं न (भा ५ ९९३) ३८९।४९५ |
| यद्यपि रटति (भर्तृ स ६७४) २२९।१७ | यश करणधोरणी १०६।१७१ | यस्य क्षेत्र (पच १ २२९) १६२।४१५ |
| यद्यपि शिरोऽधि (शा प.१७५६) २१०।९ | यश पटोडयमङ्गुष्ठे १२३।१ | यस्य क्षोणिपते १३६।४२ |
| यद्यपि सन्ति बहू २१२।२२ | यश पदाङ्गुष्ठ (नैषध ७ १०७) २७०।२६ | यस्य चाप्रिय (शा प १४२८) १५।३७ |
| यद्यपि स्वच्छ (शा प.२०७९) २१५।२ | यश पूरं (प्र राघव ७ ९२) १०६।१६५ | यस्य चित्तं (वृ चाणक्य १५ १)३८८।४६५ |
| यद्यप्याप्रतरोरमु २२४।११२ | यश शशाङ्क ११८।१०३ | यस्य चेतसि (कुमार ६ १८) १०२।४३ |
| यद्यप्युच्चैर्वि (काम नी ५.२७) ३७७।१७ | यश सौरभ्य (भामिनी प्रा ८०) ५५।६१ | यस्य जिह्वा ३४९।५५ |
| यद्रात्रौ रहसि (अमरु १५०) ३२८।१८ | यश स्तोमानुच्चै १०६।१५७ | यस्य जीवन्ति ९७।१ |
| यद्वक्तृ मु (शान्तिश १ १८) २३३।१९९ | यशश्चन्द्रैरुद्य १०६।१६० | यस्य त्वया व्रण (शाकु ४.१३) ३६२।२६ |
| यद्वञ्चनाहितमति (ध्वन्या उ ३) ५०।२०६ | यशस्करे (शा प १४०६) १७५।९२० | यस्य द्वारि सदा १८४।७१ |
| यद्ददन्ति चपले ६३।२२ | यशोदयामण्डि (शा प.१२३१) १०४।९७ | यस्य न ज्ञायते (पच २ ६३) १६५।५२७ |
| यद्ददहल्याहे (मृच्छ ५.३०) २९८।८ | यशोधननिधे ३५।२३ | यस्य न ज्ञायते (पच ४.२०) १६७।६४७ |
| यद्वद्धनमार्सिह च १४३।३७ | यशोऽधि (किरात ३.४०) १७२।८३२ | यस्य न सविधे (सा द १० ७) २५१।२५ |
| यद्वन्नयोदधिसम ३६९।७० | यशो यस्माद्धस्मी ८३।३ | यस्य नास्ति विवे (भा २ १९४५) ३९।८ |
| यद्वात्मान सकलव ३६९।६७ | यश्वत्वारि शतानि ३५।१८ | यस्य नास्ति स्वय (हि ३ ११९) ३९।१ |
| यद्विस्मयस्तिमि (मालती १ २२)२७९।४८ | यक्ष निम्बं (कुव ४६) २४१।१५६ | यस्य पुत्रो न वै ९०।७ |
| यद्वीक्ष्यते खलाना ५७।१४२ | यक्ष मूढतमो १५७।२०१ | यस्य पुत्रो (प्रसगाभ १४) ३८९।४९८ |
| यद्वीचीभि स्पृशसि २१६।२२ | यस्तीर्थानि २१।९२ | यस्य प्रसादे पद्मा (मनु ७ ११) १४२।९ |
| यद्वीर्यं कूर्म (सा द ६ १८६) १०२।३९ | यस्तु कृच्छ्र (भा १ ४५५७) ३९०।५१२ | यस्य भार्या विरू(गरुड पूर्व १०८)३५१।१ |
| यश्वान्द्रावितके(विद्ध शा ३ १४)३०३।१३५ | यस्तु शूद्रो (भा ३ १४०७५) ३८०।१२४ | यस्य भार्या (भा १२ ५५०५)३८५।४०२ |
| यन्नाकृष्टसुवर्णस् (शा प १५४) ३१।४६ | यस्तु संचरते ९८।२ | यस्य भार्या शुचि ३५०।१ |
| यन्न माति (शा प ३३४२) २६४।२४९ | यस्तोषं न २२२।६३ | यस्य मित्राणि मित्रा (का प्र ४ ३०) ९७।२ |
| यन्नम्र सरल (पच २ १८८) ३७७।१५ | यस्माच्च येन च (पच.२ २०) ९२।७१ | यस्य मित्रेण सभाषा (हि.१ ३९) ८८।२ |
| यन्नवे भाजने (हि प्र ८) ३७७।१६ | यस्मार्दार्य (शा प १०४१) २४१।१५९ | यस्य यस्य हि (पच १ ७४) १६३।४७८ |
| यन्नादृतस्त्वमलिना २३८।६९ | यस्मादाक्रामतो २०१।६७ | यस्य वक्त्रकुहरे २९।१६ |
| यन्नाब्यभ्रमिघूर्णमान ६।७२ | यस्मादासीत्कुमार १४।१० | यस्य वज्रमणे (शा प १०९९) २१८।६४ |
| यन्नाद्यापि समा ३५९।१०१ | यस्माद्विक्षुमुदेति १।१४ | यस्य षष्ठी चतुर्थी १८६।५ |
| यन्नाम्न प्रथमाक्षर ९।१२८ | यस्मिञ्जीवति जीव (भर्तृ स ६८०) ९८।६ | यस्य स्त्री तस्य ३४९।५४ |
| यन्नि शब्द (राज न ४ ३०८) ३७७।८ | यस्मिञ्जीवति (विक्रमच ४) २२९।१३ | यस्य स्नेहो (वृ चा १३ ६) ३९०।५१९ |
| यन्निमित्त भवे (शा प १४६१) ३७८।७ | यस्मिन्कुलेय (पच १ ३१४) १७४।८९२ | यस्य स्त्रीषु (प्रसगाभ.१३ ) ३९०।५२१ |
| यन्मञ्जुसिञ्जितमि २६२।१९२ | यस्मिन्कुल (पच १ ९४) १४९।२७४ | यस्या महत्त्व २२०।२ |
| यन्मध्यदेशा (कुव ९७) ३१२।१५ | यस्मिन्खङ्गे (शा प ४६६०) १४३।५९ | यस्या मौलि १०१।५३ |
| यन्मध्ये यच्च (शा प ४१२१) ३७२।१५० | यस्मिन्देशे (पच २ ८३) १५५।८८ | यस्या यस्यामव (भा ११ ७८)३८८।४६२ |
| यन्मनोरथशतैर (शा प.४५३) ९१।४६ | यस्मिंस्तुच्छे २३४।१३३ | यस्या स केस (शा प १२१३) २१५।१६ |
| यन्माता विष्णु १५।१३० | यस्मिन्नेवाधि (पच १ २६६) १४६।१६२ | यस्या सगम (शा.प ८३०) २२४।१०२ |
| यन्मुक्तामण (शा प १११२) २१८।६१ | यस्मिन्बुद्धुदसक ५।५३ | यस्याः सन्नत २३४।१३७ |
| यम प्रतिमही १०६।१७२ | यस्मिन्व्यथा व(भा ५ १३४०)३८९।४७३ | यस्याकर्ण्य वच.(शा प.८४६) २२८।२२० |
| यस्मिन्यदा पुष्क (भाग ४ ६) ३८९।४८९ | यस्यामि कोप ११६।७१ |