सुभाषितरत्नभाण्डागार (पण्डित काशीनाथ शर्मा संग्रह)

सुभाषितरत्नभाण्डागार (पण्डित काशीनाथ शर्मा संग्रह)
Subhashita Ratna Bhandagara
पण्डित काशीनाथ शर्मा (सम्पादक: नारायण राम आचार्य) द्वारा
स्रोत: Subhashita Ratna Bhandagara (10,000+ Classic Sanskrit Epigrams & Maxims - Nirnaya Sagar Press) (उद्गम)
DevanagariSanskritpublished516 पृष्ठ
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| संस्थाननिर्देशानुक्रमणिकोशः | ६३ |
|---|
| यूना धैर्यं २६८।३६८ | ये बालभावा (विक्रम १२३) ३८४।२९४ | यो धत्ते शेष १८४।२२ |
| यूना मोह २६५।२९४ | ये बाहवो न युधि (दश ४ ९) १५२।४०८ | यो धर्म (पञ्च सृष्टि २२४) ३८९।४९० |
| यूना येन २३१।४७ | येऽभिक्षा २४०।१२२ | योधैरेव १२७।२० |
| ये कन्द (का प्र.१०.५४७) १३२।१६ | ये मजन्ति (महा ना ७ १९) ११९।१३३ | यो ध्रुवाणि परि (गरुड १०८) १६२।३९४ |
| ये कायस्थ ९९।१८ | ये मुष्णन्ति ९९।२१ | यो न ददाति न (शा प ३८७) ६५।१६ |
| ये कुण्ठीकृत (शा प ३७२६) ३२४।४६ | ये ये खञ्जनमेक (शृङ्गारति ५) ३१४।७१ | यो न वेत्ति १८४।२५६ |
| ये के विचित्र ४०।४९ | ये लब्धाश्रय १११।२५३ | यो न सचरते ९८।१ |
| ये गृह्णन्ति (शा प ११०९) २१७।६० | येवर्धन्ते धनपति (भर्तृ स १७४) ९७।१० | यो नात्मजे न च (पञ्च १.११) ९८।१० |
| ये च प्राहुर्दुरा (पञ्च १ ४०) १४८।२५० | ये वर्धिता (विक्रमच २५९) २२१।१९ | यो नात्यु(भा १२ ११००८) ३९२।५९६ |
| ये च मूढ (भा १२ ७५९) ३९१।५७९ | येवर्धिता करि(विक्रमच.२५७) २२३।८१ | यो नानाद्युति (राज त ३ २१८)३७८।६३ |
| ये जाते व्यसने (शा प २४८) ५२।२५६ | ये शान्त १७३।८६२ | यो नास्ता १३४।२२ |
| ये जात्यादि (पञ्च १ ३९) १४८।२४९ | ये शिरसा २४७।५० | योऽनाहूत सम (पञ्च १ ९८) १४४।९० |
| ये जात्या लघव. (भल्लट ६०) २१४।१० | ये श्रमं हर्तुमी (सु ३४३) ५६।८६ | यो नोद्धतं (भा ५ १०८१) ३९१।५८८ |
| येऽणृत्वं १११।२५२ | येषा कण्ठ (का प्र १० ४८४) ११०।२३३ | योऽन्यथा स (मनु ४.२५५) ३७७।३६ |
| ये तावत्त्वद्गुणो (सु १६४) ४१।७५ | येषा कोमल (प्र राघव १ १८) ३४।६० | योऽभ्यर्थित (भा ५.१५३२)३९१।५६८ |
| ये त्वेनमभि (भा १.८४०५) ३९०।५०८ | येषा दोर्बल (का प्र ४ १०४) ११०।२३१ | योऽमित्रं कुरुते (पञ्च २ १३) १६५।५२४ |
| ये दीनेषु दयालव (शा प.२२८) ५२।२६४ | येषा न विद्या न (भर्तृ स ६०७) ४०।३२ | यो मे गर्भगतस्यापि (शा प.३१२) ७५।४ |
| ये दोलाकेलि (शा प ३८१६) ३३५।१३७ | येषा निमेषो (शा प ४१११) ३७२।१४६ | यो मोहान्मन्यते(पञ्च १ १५०) ३४८।१३ |
| येन ध्वस्त (ध्वन्या २.२५) १९२।४९ | येषा प्राणिवध (सु ३६७) ५६।९९ | यो य शस्त्रं (वेणी ३ ३२) ३६७।१६ |
| येन पाषाण (सु ८९५) ७९।१३ | येषा वल्लभया (भर्तृ स ६९८) ३६९।७७ | यो यत्र कुशल(भा.१ ३३२४)१४६।१४५ |
| येन भिन्न (भामिनी प्रा ४९) २३०।२४ | येषा श्री (वृ चाणक्य १२ ५) ३७६।२६३ | यो यत्र सतत (चा नी ४२) ३९१।५७७ |
| येन यत्रैव भोक्तव्यं (भर्तृ स ६९२) ९१।३३ | येषामन्यकल ६३।४१ | यो यमर्थं प्रार्थ (शा प.१४३६) १५३।१३ |
| येन शुक्लीकृता (हि १ १८३) १६३।४६१ | येषु येषु दृढं (शा.प ४१२०) ३७२।१४९ | यो येन प्रतिबद्ध. (हि ३ १३०) १४८।२४१ |
| येन स्वा विनिहत्य (शा प ४०८३) ३६६।६ | ये सतोषसुखप्रबुद्ध (भर्तृ स ३१४) २१५।५ | यो रक्ततामतित २७।७ |
| येनाकारि १८७।१० | ये ससत्सु विवादिन (शा प २०६) ४१।६४ | यो रामो निज २१।८२ |
| येनाकारि २४६।२९ | ये सूक्तीन्दुकला (शा प १४३) ८५।१६ | योऽर्थकामस्य(भा ५ ४१४६) ३९२।६२३ |
| येनाकारि मृणाल (नीतिप्र ३) ९५।१२२ | यै ह्याहवेषु १५०।३४४ | यो व्योमा १९२।९० |
| येनाञ्चलेन सर ९२।७७ | यै कारुण्यपरि (सु ३२००) ६८।८४ | योषित पति (शिशु १०.८५) ३२१।११ |
| येनात्मा पण्यता (दृ श ५५) १६८।६९३ | यै. प्राणापहति ३६६।८ | योषिदुद्धत (किरात.९ ६८) ३१६।६० |
| येनानन्दमये (शा प ८४४) २२५।१४२ | यैरिहोडसि १११।२५१ | योषिद्भिरप्या (भाग ११.८) ३८९।४८२ |
| येनानर्गलकाल (शा.प ९०८) २३०।४१ | यैर्वातुलो (सु ३२१) ५१।२३२ | योऽसकृत्वर (का प्र.९ ३७६) १०२।४८ |
| येनामन्दमरन्दे (भामिनी प्रा ९) २२२।५२ | यैस्त्वं गुणगण (भामिनी प्रा.१९) २३०।४४ | यो हि दिष्टमु (भा ३.२९१५)३९२।६०५ |
| येनामोदिनि (शा प ८३७) २२४।१०५ | यो गङ्गामतर ६८।७० | यो हि (भा १२.११३४१) ३९२।६१५ |
| येनास्य (का प्र १० ४४४) २११।४५ | योगीन्द्रश्छन्द ३६।४६ | यौ तौ शङ्खकपाल (शा प १११) १४।८ |
| येनाहंकार (पञ्च १० ४४४) १६४।५१७ | योग्यतयैव (सु २३९) ४८।१४० | यौवनं जरया (सु ३१४३) ७६।१५ |
| येनैवाम्बरखण्डेन (भर्तृ स ३१३) ६५।५ | योग्यस्य त्रिन (शिशु ८ ३३) ३३९।१०२ | यौवनं धन (द्वि.प्र १०) १५९।२६२ |
| येनोत्थाप्य १५।२८ | योजनाना सह ८२।११ | यौवने वर्ती ३४९।४६ |
| येनोत्पलानि २७१।३३ | यो जित (भा ५ ११४९) ३९१।५८१ | र |
| येनोन्मथ्य तमासि(शा.प ७४४) २०९।१५ | योऽत्ति यस्य (सु २९८४) १६५।५४८ | रक्त मर्कचरोध (शा.प.३९७५) ३६६।६ |
| येनोषितं २२५।१३६ | यो दिव्याम्बुज (शा प ८०५) २२१।२८ | रक्तत्वं कमलाना (भर्तृ.स.७०२) ८४।१४ |
| ये पाप १८४।४८ | यो दृष्ट (शा प १०१९) २४०।१२४ | रक्तभावमप २९९।२८ |
| ये पूर्वं परिपालि (शा प ९८५) २३६।२३ | योऽद्वा योद्धा २१।१० | रक्तमासमयं (शा प ४१४२) ३७१।११७ |
| ये पूर्वं यव (विद्ध.शा.३ १०) ३०२।१०५ | यो द्रोणाचल १८४।३४ | रक्तस्त्वं नवप (हनु ५.२४) २८३।१५४ |
| येऽप्यासन्निम (राज.त.१.४७) ३४।६६ | रक्ताब्जपुञ्जर (शा.प.८५८) २२६।१५९ |