सुभाषितरत्नभाण्डागार (पण्डित काशीनाथ शर्मा संग्रह)

सुभाषितरत्नभाण्डागार (पण्डित काशीनाथ शर्मा संग्रह)
Subhashita Ratna Bhandagara
पण्डित काशीनाथ शर्मा (सम्पादक: नारायण राम आचार्य) द्वारा
स्रोत: Subhashita Ratna Bhandagara (10,000+ Classic Sanskrit Epigrams & Maxims - Nirnaya Sagar Press) (उद्गम)
DevanagariSanskritpublished516 पृष्ठ
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६६ सुभाषितरत्नभाण्डागारस्थपद्यानां
| प्रतीक / पाद | पृष्ठ।पद्य | प्रतीक / पाद | पृष्ठ।पद्य | प्रतीक / पाद | पृष्ठ।पद्य |
|---|---|---|---|---|---|
| रोलम्बैर्निमि | २३७।२७ | लङ्काधा | १२२।१८४३ | लाभप्रणयिनो (सु २३०) | ४७।८० |
| रोलम्बो | २८५।३६ | लङ्कापते सकुचित (शा प १६१) | ३३।२९ | लाभस्तेषा | १६६।५८३ |
| रोषावेशादामि(शिशु १८ १२) | १२९।५८ | लङ्काभूप | १९७।३७ | लालने बह (भाग १० ११५) | १६१।३४३ |
| रोषावेशाङ्गच्छ (शिशु १८ ४) | १२९।५५ | लज्जा गुणौघ (भर्तृ स ३१८) | ३८५।३२८ | लालयन्तमर (प्र राघव ३।३) | २८।१ |
| रोहणं सूक्तिरत्ना (नल च १.८) | ३८।४ | लज्जा विहाय (शा प ३३८५) | ३२९।७ | लालयेत्पञ्च (भाग १० ११४) | १६०।३०८ |
| रोहणाचल (शा प १०७१) | २१५।१३ | लज्जा कीर्ति | ११९।१२६ | लाला वक्रास (दश रू ४ ७३) | ३७१।१२५ |
| रोहते सायकै (पञ्च ३ १०९) | ३८५।३२२ | लज्जा प्रौढ | ३४६।३० | लावण्य क नु | २०४।१९८ |
| रोहन्तो प्रथमं (अमरु १११) | ३१०।११ | लज्जामहे (सु ८६७) | २१६।२० | लावण्यं तद् (का प्र ४ ७५) | ३६७।११ |
| ल | लज्जावत (सु ३१७१) | ६६।२७ | लावण्यकान्तिप (दश ४ ३६) | ३०६।२८ | |
| लक्ष्मणेयुत्त | १९९।११ | लज्जावशा (शा प ३७५०) | ३५१।२९ | लावण्यद्रविण (औचित्य ११) | २८६।२९ |
| लक्ष्मणो लघु (शा प.३९८७) | ३६०।१० | लज्जा स्नेहः (पञ्च ५ ९१) | ३७९।७५ | लावण्यमधु (सा द १० ३२) | २६२।१६९ |
| लक्ष्मि क्षमस्व | ६३।२९ | लज्जे त्वं मज | ७७।५७ | लावण्यामृतदी (नल च ७ ४३) | २५४।४१ |
| लक्ष्मी तनोतु | २।२३ | लज्जैवोद्व | २८१।१११ | लावण्यामृतमा (शा प ३२.८४) | २५६।४७ |
| लक्ष्मी स्वय (सु १८४८) | २४४।२३३ | लता पुष्पवती | ३२५।१ | लावण्यामृतनव (दश ४.६९) | ३१४।७४ |
| लक्ष्मीकपोल (सु २९) | १४।३ | उताकुञ्ज (सा द ८ ४) | २३४।१२९ | लावण्यौकसि (खडप्रशस्ति) | १०९।२१२ |
| लक्ष्मीकेलि (सु २००५) | २११।४० | लताकुञ्जे | ३२६।२३ | लिखति न (शा प ३४०३) | २७५।६ |
| लक्ष्मीकौस्तुभ (भोजप्र २९) | ९४।११७ | लतानाामे (का.प्र १० ४९८) | २४५।२४३ | लिखन्त्या | २६७।३४४ |
| लक्ष्मीक्रीडा (भोजप्र २५९) | ३०२।१३८ | लतामूले (अल कौस्तु अति १) | २७५।२३ | लिखन्नास्ते (अमरु ७) | ३०८।१२ |
| लक्ष्मीधर | २००।५३ | लतास्ता | २२४।९६ | लिखिता चित्रगुप्तेन | ९१।३२ |
| लक्ष्मीपङ्क (सु ३४१९) | २४४।२३२ | लब्ध जन्म सह (शा प ७५९) | ९४।१०७ | लिम्पतीव (मृच्छ १ ३४) | २९६।१ |
| लक्ष्मीपयोधरोत्स (दश रू ४ ७२) | ७०।१० | लब्ध्व्यमर्थ (महा.ना २१४?) | ३९१।५७८ | लीढग्रस्त (शा प ५९२) | २०७।२ |
| लक्ष्मीपाणि (सूक्ति सहस्र ) | १५।२३ | लब्धसौरभ (शिशु १० २४) | ३१५।२७ | लीनानसूनसरोरुहदष्टे | २७५।१२ |
| लक्ष्मीरस्य हि (अनर्घ ७ ९३) | १४०।२ | लब्धार्थं (विक्रमच २७७) | १०३।६७ | लीनेव प्रति (मालती ५ १०) | २८१।१०५ |
| लक्ष्मीधर्मं (प्रसगाम १७) | ३९२।६२६ | लब्धास्य (शा प ४१३३) | ३७२।१५६ | लीने श्रोत्रेकदे (खडप्रशस्ति २२) | १९।३८ |
| लक्ष्मीर्निर्वृति (शातिश ४ १) | ८१।४६ | लब्धोच्छ्रायो (शा प ३५१) | ५७।१२७ | लीलयैव (शिशु १० ३८) | ३१५।४१ |
| लक्ष्मीर्यादोनिधे (शा प ५२९) | ६२।९ | लब्धोदयो (सु ३९५) | ५८।१७१ | लीलातामरसा (अमरु ७२) | २११।३१ |
| लक्ष्मीर्या | १९८।११२ | लब्ध्वा जन्म(सु ३१०५) | १०४।१०२ | लीलादोला (शा प ३८१५) | ३२७।४० |
| लक्ष्मीर्वसति | १५५।८७ | लभेत सिकतासु (भर्तृ स ३१९) | ४१।५७ | लीलाद्यूतजिता | ६।६२ |
| लक्ष्मीवन्कृत | १९२।९१ | लभेयदयुनं | ६५।१९ | लीलासु (भामिनी प्रा ६२) | २३१।६४ |
| लक्ष्मीवन्तो | ६४।२ | लम्बोदर तव | १८९।५७ | लीलायन्त्य (मा १३ १४७५) | ३७८।४० |
| लक्ष्मीश्चेन्न | १११।२५८ | लम्भिता | २६८।३८९ | लीलालु (भामिनी प्रा ७०) | ३८।२७ |
| लक्ष्मीसपर्क (शा प ११३९) | २७३।२०० | ललाटतिल | १९३।४ | लीलावतीना (भर्तृ स.८२) | ३७९।६९ |
| लक्ष्मीस्ते | १०९।२२२ | ललाटदेशे (पञ्च १ ३३४) | ३८६।३५७ | लीलावली | २७६।४६ |
| लक्ष्मीस्ते | १०९।२२४ | ललाटे कस्तूरीतिलक | २५२।४७ | लीलास्मितेन (शा.प ५४६) | २७८।५० |
| लक्ष्म्या परिपूर्णो (शा प १५०१) | ६४।१३ | ललितगमना नार्यो | २३१।३२ | लुब्ध स्तब्धो (सु ३७३) | ५६।१०३ |
| लक्ष्म्या (काम नी ५ ७३) | ३९२।६२६ | ललितमुरसा (अमरु १६१) | ३३७।६० | लुब्धमर्थेन (हि ४ १०४) | १५५।९७ |
| लक्ष्म्या श्री | २१७।३७ | ललितविभ्रम | ३३२।४६ | लुब्धाना (वृ चा १० ६) | १५६।१५७ |
| लग्नं रागा (वेणीदत्त.पद्यवेर्णी २) | १३८।७९ | ललितान्तानि | १६०।३३१ | लुब्धो न (कुव १०३) | ७१।२५ |
| लग्न केलिकच (का.प्र ७ २३७) | १२।४० | लवङ्गलतिका | ३२५।२ | लुलाये गोमायौ | ९३।९१ |
| लग्नाद्विरेफा (कुमार ३ ३०) | ३३१।२७ | लसन्नौक्तिक | २५७।२० | लुलित (शिशु.११ २०) | ३२४।३३ |
| लग्न पाद | २७४।२७ | लाक्षालक्ष्म (अमरु.६०) | ३७९।७४ | लूनग्रीवा (शिशु १८.५९) | १३०।८९ |
| लग्ना नांशुक (अमरु.६२) | ३२९।१७ | लाङ्गूलचालन (भर्तृ सं ५७) | २३१।७१ | लूनं मत्त (भामिनी प्रा.३९) | २४२।१८२ |
| लघुनि तृणकुटीरे(दशरू.४ २२) | ३४९।२५ | लाङ्गूलेनाभिहत्य (सा.द.१०.९२) | २०७।५ | लेखनी पुस्तक | १५८।२३२ |
| लघुरय | २१६।११ | लाटीनेत्र (सुकुन्द.३२) | ३७१।१०० | लेखन्ती व्योमगर्भे | १२४।१९ |