भारतकोश
सुभाषितरत्नभाण्डागार (पण्डित काशीनाथ शर्मा संग्रह)

सुभाषितरत्नभाण्डागार (पण्डित काशीनाथ शर्मा संग्रह)

Subhashita Ratna Bhandagara

पण्डित काशीनाथ शर्मा (सम्पादक: नारायण राम आचार्य) द्वारा

स्रोत: Subhashita Ratna Bhandagara (10,000+ Classic Sanskrit Epigrams & Maxims - Nirnaya Sagar Press) (उद्गम)

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सस्थाननिर्देशमनुक्रमणिकोशः ६७

लेखया विमल (किरात ९.२२) ३००।३९वक्रं निर्मल (विक्रमांक ८.८७) २७२।६७वदति राममनुष्य जघन्यजो २०२।८५
लोक शुभ (शा प ३९६९) ३६०।१७वक्र शीतकरो (शा प ९४) १२।३७वदनं दशनविहीनं (पच ५ ७३) ९५।९
लोक क्षय (भाग.५ ५) ३८४।३०६वक्रश्रीजितज (विद्ध शा २.११) २७४।३३वदनं प्रसादसदन ४७।१०३
लोक एष (सु ३०४१) १७७।८११वक्रश्रीजितल (शा प ३९२८) ३४७।४०वदनमिद न (अल कौ अप १) २८३।१५८
लोक एष परलोक (नैषध ५ ९१) ७२।४८वक्रसन्दि (का प्र १० ५३७) ३२०।०वदनशशिन (शा.प ३७११) ३२२।४
लोकत्रय (सू ९१) ९।११वक्रस्याधर ३५६।५वदनसौर ३३२।६६
लोकद्वयप्रति ९८।३वक्राणि पञ्च (अल कौस्तु रसा. १) ४।३३वदनाच्च बहि ७३।१२
लोकयात्राऽमर्थ (हि १.१०५) १६३।४५३वक्रादुद्रूस मे ७४।४०वदनेन निर्जित (कुव ५०) ३१२।२८
लोकानन्दन (कुव १३५) २३८।५७वक्राम्भोजं (भोजप्र २३०) ११३।२८७वदने विनिवेशिता ५५।२०५
लोकानामपि ३४९।५०वक्राम्मोरुहि ६।७५वदन्ती जारवृत्तान्त (कुव ३०) १८६।१
लोकाना मानमात्र ११३।२९३वक्रे गुह्यत्व २७०।५वदन्तु कतिचिद्बठात्ख ३३।४९
लोकानुग्रह (पच १ २४८) १४९।२९५चक्रे वल्गाप्रकर्षी ५३।२७८वदन्तु देव १३३।११
लोके कलङ्कम (कुव ००) २६२।१९१वक्रोपान्त २७४।२२वद प्रादुर्भावा २३९।९०
लोकेश कर्ण ११३।९वक्रता विश्रतो ५४।१९वद वल्लभ १९९।२४
लोकेषु निर्धनो १५८।२४८वक्रत्वं ननु ६१।२६८वध्यन्ते न ३९०।५०९
लोकोत्तरं चरित (अल सर्वस्व) ७८।७वक्ता नैष (शा प ११९१ २४९।९८वनानि दहतो (शा प ४८८) १५५।१२०
लोको वहति (हि ४ ६०) ३७९।७२वका कपटर्नि (कविनामृ १२) ५८।१६३वनान्ते खेल (अल कोस्तु विष १) २४५।९
लोचन (भामिनी शृ ५०) २५८।४५वकेण शिरसि (सु १६६९) ३३५।१३८वनान्यमूनि (काव्या २ २८९) ३६७।१५
लोचना (किरात ९.६०) ३१५।५२वक्तै क्रूतरैरै (शा प १५१५) १५४।७०वनिताकरतामर (भोज प्र ) ३४६।३५
लोचने हरिण २५९।९३वक्रोऽपि पङ्कज ८२।४३वनी मुनीनाम ३६२।१३
लोडितमखिलं २३९।१०१वक्रोऽस्तु बाल्ये २१०।१७वनेऽखिलकला (सा द.१० ९६) १३१।५
लोभ प्रतिष्ठा (भोजप्र १) ६९।१वक्ष किमु ३५६।१०वने जने ९२।५६
लोभ सदा (शा प ४२८) ६९।८वक्षःपीठे (शा प १०३) १३।५२वने जाता (शा प ५१५) १८४।२
लोभमूलानि पापानि १५८।२१४वक्षस्ते दृढलम ३२८।१६वनेऽपि सिंहा (पच ५ ७१) ४९।१६८
लोभश्चेदगुणेन (भर्तृ स ३७) १७८।१०१५वक्ष स्थली रक्षतु १४।१५वने वसति १८४।६
लोभात्क्रोध (भा.१२ ५८८०) ६९।३वक्ष स्थलीवदनवा २५०।१३वनेषु दोषा (शाति श २ २८) १७४।९०५
लोभात्क्रोध प्रभवति (भोजप्र २) ६९।२वक्षत्यावरणा (शा प ३२८०) २५६।४६वनेषु वन १३५।२७
लोभादेव (हि १ २४) ३८२।२००वक्षोजच्चि ३५६।१४वन्दामहे महे २०।७५
लोभाविष्टो नरो ६९।६वक्षोजौ निबिट २५८।२९वन्दे देवं जलधिशरधि (कुव ६८) ५।४६
लोभेन बुद्धिश्चलति (हि १ ४२) ६९।५वचनैरनमता (शिशु १६ २७) ४९।१५२वन्दे वन्दारुमन्दार २।१
लोलचोलचमत्कृति ३५७।४०वचसि भवति (भर्तृ स १४७) २५२।५१वन्द्य स पुमा (सु ३१९) ४९।१८३
लोलदृष्टि (किरात ९ ४७) ३१६।१२वचस्तत्रैव वक्त्त (पच १ ३४) १५९।२६४वन्द्याश्चिन्दति (सु ४५९) ६२।२७७
लोलाशुक्स्य (वेणी ५ २८) ३११।१२वचासि वाचस्पति (विक्रमांक १ ७) ३।९वपु कुञ्जीभूत (कविता ६४) ७६।४२
लोले ब्रूहि १४।९वचो वीचीदान ३११।१४वपु परीणाह (शा प.११०३) २५७।५२
लोलैलौचन (अमरु ६१) ३३०।६वचो हि सत्य ८४।१५वपुरनुपम (शा प ३३५४) २६८।३८५
लोहितायति (शा प ३९८३) ३६०।६वज्र च राजते (हि २ १६८) १४७।२१६वपुरविहितसिद्धा एव ५१।२२४
लौकिकाना हि (उत्तर रा १ १०) ३६।४७वज्रादपि कठो (उत्तर रा २१५) ४५।४वपुर्दलनसभ्रमा (खड प्र ३०) १९।४७
वज्रेण त्रिजग (सूक्ति ६१ ९) ३४१।६१वपुर्विषमसस्थान (भल्हट ?) २३४।१२४
वंश प्राशुरसौ (शा प ११८७) २४७।५१वटवृक्षो महानेष (शा प ५३९) १९५।४३वय काका वय काका २२८।२०४
वंशभवो गुणवानपि ८७।२१वणिक्प्र (शौनकी नी.अ.११५) ३८९।४७७वयं बाल्ये बाला(शा प ३७६१) ३५२।३२
वंशावलम्बन ५७।१४४वणिगालोक्य निजे ३९०।५३९वय येभ्यो (शा प ४११३) ३७३।१७७
वंशे गुण इव ५७।१५६वत्स गच्छ सम वाचिक ३६२।१०वय.प्रकर्षांदु (शा प.३३४४) २६६।३१७
वंशो विश्वावतंसो ८९।६वत्से मा गा विषादं (कुव १५५) १७।१५वयमपि कवयः कवयः ३५।५
वक्र चन्द्रविका (भर्तृ स ००) २५४।४३वदतानुत्तमवचनं ध्वनि २००।४४वयभिह परितुष्टा (शा प.३०८) ७५।१७
वयस परि (बृ.चा १२.२३) ३९२।६१३