सुभाषितरत्नभाण्डागार (पण्डित काशीनाथ शर्मा संग्रह)

सुभाषितरत्नभाण्डागार (पण्डित काशीनाथ शर्मा संग्रह)
Subhashita Ratna Bhandagara
पण्डित काशीनाथ शर्मा (सम्पादक: नारायण राम आचार्य) द्वारा
स्रोत: Subhashita Ratna Bhandagara (10,000+ Classic Sanskrit Epigrams & Maxims - Nirnaya Sagar Press) (उद्गम)
DevanagariSanskritpublished516 पृष्ठ
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स्थाननिर्देशमनुक्रमकोशः ६९
| वायुमित्र १८९।५९ | विकिर धवल (वेणी.२ १६) ३०६।३५ | विद्यया विमल ५९।२१२ |
| वायुरिव खलजनोऽयं (सु.४०५) ५८।१८० | विकीर्णहरिं (शा प ४०७८) ३६६।२ | विद्यया शस्यते ३९।१६ |
| वायुरेव महाभूतं २१४।१ | विक्रीतं नैव (शा.प ३२३) ४५।१६ | विद्यया सह १५९।२६७ |
| वारंवारं (मालती.१ ३८) २७९।६२ | विक्रन्ततीव ३६१।८ | विद्ययैव समं काम (सु ५०६) १६७।६१२ |
| वारंवारं धुत ३२६।२६ | विक्रीतं निज १६८।६९४ | विद्यातीर्थे (प्रसगाभ ६) १७८।१००१ |
| वारंवारमुदश्रु ३३०।१ | विगततिमिर (शिशु ११ २६) ३२३।२९ | विद्या नाधि (भर्तृ स १७५) ३७५।२२५ |
| वारणार्थपद (शिशु १० ७०) ३१८।१३ | विगतराग (शिशु ६ ३९) ३४१।४५ | विद्या नाम (भर्तृ स ७०) ३०।१६ |
| वारणेन्द्रो १९९।१५ | विगतशय्य (शिशु ६ ४९) ३४५।३७ | विद्या नाम ३०।१५ |
| वारस्त्रीव वन ३३३।९९ | विगाहमात्रे (किरात ८ ३१) ३३८।७६ | विद्याभ्यासो १५५।८६ |
| वारिजेनेव (सा द १० २६) १६८।६६१ | विगुणोऽपि ३२।२१ | विद्या मित्र (वृ चा ५ १४) १५९।२८७ |
| वार्ता च (प्र राघव २ १) ३७६।९५४ | विगृहीत ४६।४९ | विद्याया दुर्मदो (शा प ४९७) १८१।८ |
| वार्यन्तां २८५।४१ | विघ्नध्वान्त २।२६ | विद्यारत्न सरस (प्रसगाभ १४) ११५।४५ |
| बालीयुतश्रवण १३।५४ | विघ्नेश सर्वं ३।३० | विद्यावत कुलीनस्य (शा प.३९६) ७३।२ |
| वाश्वारेड् १९३।९६ | विघ्नेशो व स पाया (महा ना १ २) २।२९ | विद्यार्थी सेवक (वृ चा ९ ६) ३९२।६१० |
| वास का (पद्य सं ६) २२७।१९७ | विचरन्ति विला (सा द १०.८०) १३१।२ | विद्यावता (पच १ ३८) १४८।२४८ |
| वास खण्डमिद (शा प ४०९) ६७।६३ | विच्छिन्ना रथ (धनजय वि २४) १४०।५ | विद्यावन्तो ११२।२८६ |
| वास शुभ्र (चोर पचा ) १८०।१०४७ | विजनमिति (शिशु ७ ५१) ३३४।११५ | विद्याविधिविही ३९।१० |
| वास शैल (शा प ९९७) १३८।५६ | विजिगीषु (शा प १२९६) १५०।३४२ | विद्या विनयो ३९।१७ |
| वासनावा (शा प ४२२५) १८८।४० | विजितात्म (शा प ५१८) १८७।११ | विद्या विवा (गुण रत्न.७) ६०।२२९ |
| वासरगम्य ४७।९४ | विजेतव्या लङ्का (भोजप्र १७०) ५२।२५० | विद्याविहीना ९०।१२ |
| वासश्मर्म ६८।७६ | विजेतु प्रयते (हि ३ ३९) १४८।२३० | विद्या शस्त्रं च (हि.म ७) ३०।७ |
| वाससां (किरात.९.६५) ३१६।५७ | विज्ञै स्निग्धे (हि.२ १६०) ९७।१६ | विद्युच्चक्रकराल १९।५३ |
| वास्त्वस्तदेव २८५।८ | विडम्बनैव ७१।२९ | विद्ये हृद्यत ४१।७१ |
| वासांसि व्रज १७९।१०३० | विततपृथुवरत्रा (शिशु ११ ४४) ३२७।१३ | विद्योतन्ते २१५।८ |
| वासोऽर्थं (नागा.१.११) १४२।१२ | वितरति गुरुः (शा प.४१४) ४१।६१ | विद्राणे रण (नैषध १२.३०) ११०।२३६ |
| वासो वल्कल (शांति श २.१९) ७४।४४ | वितरवि १७१।७९२ | विद्राणे रुद्रवृन्दे स (शा.प.११२) १३।५१ |
| वासो विधूय ३२५।८ | वितरय कुच ३०६।३३ | विद्वत्कवय ३२।२२ |
| वाहव्यूहखर ११५।३८ | वितर वारिद २१२।३३ | विद्वत्ता चैव ७६।२७ |
| वाहितं १६६।५९५ | वितीर्णशिक्षा इव (सु १७१) ४०।३९ | विद्वत्ता वसु १००।३१ |
| विकचकचकलापः (सु १४८४) २५७।२३ | वित्तं देहि गुणा (वृ चा.८ ५) ३९२।५९८ | विद्वत्त्वं च नृपत्वं च (सु ३४२६) ३८।७ |
| विकचकमल (शिशु.११.१९) ३२६।१४ | वित्तं परि १७०।७४१ | विद्वद्द्रोहीगरिष्ठ ११५।३९ |
| विकटाटव्या ९१।३७ | वित्ते त्याग क्षमा (सु २६४) ४७।८२ | विद्वद्भि सुहृदा (पच २) ३९१।५७४ |
| विकसति नय (शा.प ५३३) १९१।७८ | वित्तेन किं (सप्त रत्न ५) १७६।९४७ | विद्वद्वृन्दगुणा ११७।९३ |
| विकसति सह ३३३।८७ | विदग्धे (भोजप्र.३०३) १८१।२३ | विद्वन्मान (अल सर्वस्व ) १०७।१८१ |
| विकसति सूर्ये ३४५।१० | विदधतु १०६।१५० | विद्वास कवयो १०१।२ |
| विकसदमर १३।२ | विदलितसकला (शिशु.१२ ७७) १०३।७८ | विद्वानुपालम्भ ६०।२२८ |
| विकसन्नेत्रनी (सा.द १०.१२) २७०।६ | विदुरेष्यदपाय (शिशु १६ ४०) ४०।४५ | विद्वान्पूजु (पच १) ३९२।६०४ |
| विकसामि रवानुदिते (सु.३१८६) ६६।३८ | विदुषा वदना २८।१३ | विद्वानेव विजा (कुव ५१) ३८।५ |
| विकसितकु (किरात १०.३२) ३३३।७७ | विदूरे (राघवान ) ३५९।९१ | विद्वान्सदसि (नवरत्न ९) १७९।१०३७ |
| विकसितमुखी (सा द.१० ५६) ३२२।१२ | विदेशेषु धनं विद्या (सु ३०५३) ८४।९३ | विधातुर्नै कन्ये ६७।५७ |
| विकसितसंकु (अनर्घ २ १२) ३२३।३ | विदेवज्ञं ग्रामं १७७।९८२ | विधात्रा रचिता (पच.२ १८४) ३८५।३४१ |
| विकसितसह ३३१।३ | विद्या सूगी २३३।१०१ | विधिरैव हि (कथास.३० ९१) ३७८।३९ |
| विकारं याति नो (पंच २०) ३९१।५६५ | विद्धि श्रीहृदयं १८३।५६ | विधाय मूर्धनि (नैषध.७ १४) २६९।२९३ |
| विकिरति (शा प.३४९८) २९३।३ | विद्यया विनया १६५।५५१ |