भारतकोश
सुभाषितरत्नभाण्डागार (पण्डित काशीनाथ शर्मा संग्रह)

सुभाषितरत्नभाण्डागार (पण्डित काशीनाथ शर्मा संग्रह)

Subhashita Ratna Bhandagara

पण्डित काशीनाथ शर्मा (सम्पादक: नारायण राम आचार्य) द्वारा

स्रोत: Subhashita Ratna Bhandagara (10,000+ Classic Sanskrit Epigrams & Maxims - Nirnaya Sagar Press) (उद्गम)

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संस्थाननिर्देशमनुक्रमकोशः७५
श्रीमद्गीराधिवीर १३४।२६श्रोत्र हसस्वनोऽय १४१।७सपन्नरमणीशील २५१।१६
श्रीमद्वैकण्ठकण्ठी ११६।५७श्रोत्रपीयूषगण्डूषै २६३।२१३सपादिता सपदि २१२।४८
श्रीमन्नायक १२०।१४२श्लाघ्य स एको (हि प्र २) ४९।१७२सपूर्णकुम्भो न १७३।८७०
श्रीमाहेश्वरमौलि २१।४४श्लाघ्यं कार्पास (शा प १०५४) २४३।१८४सप्रति न कल्पत (सूक्ति १३ ५) २११।१३
श्रीराजीवाक्षवक्ष स्थल १६।४०श्लाघ्यं जन्म (प्रसगा १२) ३९२।६१२सप्रवेष्टुमिव योषि (शिशु १० ४८) ३१६।८
श्रीराम त्वदनेक ११९।१३१श्लाघ्यं नीरसकाष्ठ (शृ ति १०) २४८।७१सप्राप्तचिकुरभाव २५८।३१
श्रीरामायणभारत ३७।६५श्लाघ्या महतामुच्च (शा प २२६) ७७।६सप्राप्त मकरध्वजेन १४।७
श्रीरामे मृगया १२०।१४६श्लाघ्याशेषतनुं (ध्वन्या) २६।१९८सप्राप्तेऽवविवा (सूक्ति ४४ ३०) २९०।७५
श्रीमङ्गललभ (मा ५ १२३२) ३८६।३४९श्लाघ्यैव वक्रि (श्रीकण्ठ च २ ३४) ४०।५४सप्राप्तान्विति (सु २२८९) ७८।९
श्रीलक्ष्मीनरसिंह ११५।४७श्लिष्टा समझ़ा सदृश्यां ३०।१०सप्राप्य पण्डि (रा ३ ४८ ५३) ३९२।५९०
श्रीवीर क्षिति ११२।२७३श्लिष्यत प्रिय (किरात ९ २७) ३००।४३सभाग्यमिष्ठभुवना १०५।१३९
श्रीवीर त्वद्रिपूणा ११३।२९५श्लिष्यति पश्यति २७।५९सभिन्नयोरसुख्या २५५।१०
श्रुत कृत (सा द १० ७६) १६८।६६३श्लेषे केचन शब्द (शा प १७७) ३५।२८सभूतिस्तव मानसे २४५।२४०
श्रुत दृष्ट स्पृष्टं (शा प ३०८७) २५२।४६श्लेष्माङ्गारे वसति २६०।११९सभोगाद्विष (शाति श ३ १३) ३७०।९८
श्रुति शिथिलता ९६।१५श्लोकस्तु श्लोकता याति ४५।३३सभोगानति (अनर्घ रा ७ ३७) १११।६५
श्रुतिमपरे स्मृति २२।११३श्लोकार्थस्वादकाले तु ३७।८सभोजनं (मा ५ १४६९) १४६।१६७
श्रुतिर्विभिन्ना १७३।८५५श्वश्रू विना वृत्तिरिह ६३।२४सभ्रम लेहमा १५७।११९
श्रुतिलङ्घनमीहमान २५९।९२श्वश्रू स्वापयति ३५९।९२समतोऽहं प्रभोर्नि (पच १ ५९) १४८।२६४
श्रुतिसिद्धान्तशूरस्य ८५।७श्वश्रू पद्मदल ददाति ३५९।८७समानाब्राह्मणो (मनु २ १६२) ३९२।५९२
श्रुतिसुखभमरखन ३३२।४५श्वश्रू पश्यति नैव ३५५।४समूर्च्छितं (योगयात्रा) ३६०।१९
श्रुतिस्मृत्युक्त (श प १५२५) १५४।७८श्वश्रूश्वशुरयो पादौ ३५०।१३समोहयन्ति (भर्तृ स ३३६) ३५०।६९
श्रुतेन बुद्धिवर्य (काव्यप्र ७ ९) १७४।८९९श्वसनचलित (किरात १० ३४) ३३३।७९संयोजयति विद्यैव (हि प्र ५) ३०।६
श्रुते महाकवे ३८।१६श्वास कि (शा प ३५०७) २९३।१०सरम्भोद्रिक्तनों ३०३।१२०
श्रुत्यध्ययनसपन्ना १४२।३७श्वासा एव मृगीदृशो २८०।९१सवरणाय वधूटी बहु ३२८।५
श्रुत्वा (शा प ११९७८) २४८।९७श्वासान्मुञ्चति (सा द ३ १०६) २९०।७७सवर्धितोऽपि भु (ख पाठो ४८) ३९२।६०९
श्रुत्वा तन्व्या (अमरु ५५) ३४३।१०९श्वासास्ते सखि सूच २८७।३३सविधातुमभि (किरात ९ ३२) ३००।४७
श्रुत्वा धर्म विजा (वृ चा ६ १) १५८।२२५सविष्टो ग्राम (शा प ३९४७) ३४८।२१
श्रुत्वा नामापि (अमरु ५९) २८५।४२षट्कर्णो (शा प १३५४) १४७।२२७सश्लिष्टा सानुरागं ३२२।१४
श्रुत्वा प्रदग्धं तनयं १८२।३५षट्कर्णो भिद्यते (सु २७१८) १४६।१५४ससकानिव पातुमौप २३१।४४
श्रुत्वा बालमृगी (शा प ३८८९) ३४३।९०षट्चक्रे क्रमभावे २६।२०३ससदि तदेव भूषण (शा प १३९) २९।११
श्रुत्वायान्त बहि (मा ३ १०४) ३०४।१षट्पद पुष्प १५९।२५८ससारकटुवृक्षस्य द्वे (हि १ १५४) २९।४
श्रुत्वा षडामनजनु ११।१५षड्दोषा पुरु (मा ५ १०४८) १६३।४४१ससार तव नि सार (शा प.४१९३) ८८।१
श्रुत्वा सागरबन्धनं १८३।६१ससाररात्रि (शा प ४११८) ३७२।१४८
श्रुत्वा साङ्ग्रामिकीं (पच १ १००) १४४।९३सप्तकस्थाय तारा ३५४।६४ससारविषवृक्षस्य द्वे (हि १ १५४) ८८।२
श्रूयता कौतुकं सोऽपि २५९।६८सपत्नय पराधीना (हि २ १५२) १३९।२ससारश्रान्त (प्रसगा ९) ३९२।६०१
श्रेय सदा दिशतु १५।१९सपत्नी कर्कशं (दृ श २२) ५५।७५ससार सार्क दर्पेण २०५।६
श्रेयस्त्री यत्र मान ८१।४९सपत्नी कोमलं (दृ श ३७) ४६।५८ससारेऽभिन्नसारे (भर्तृ स ८८) २५२।६०
श्रेयांसि वो दिशतु यस्र (सु ६५) ४।४०सप्तसरस्वती १५६।१५०ससारेऽस्मिनसारे (भर्तृ स ९७) २५२।६१
श्रेयान्विघोर्बहुल्पक्ष २१०।२५सपत्सु महता (भर्तृ स.३३५) ४५।२७ससारैनिमित्ताय (सु १८) ४।११
श्रेयो नून व्रजति १७८।१००४सपदमत ललम्ब्या २५०।७ससेवितमृगुतुङ्ग विध्यो ४।१४
श्रोणीबन्धस्त्यजति (बाल भा १) २५६।४३सपदा सुस्थित (शिशु २ ३२) ८३।१६सस्थितस्य गुणे (बृहात श ८) १६८।६७१
श्रोणीभारभरालसा २७४।२६सपदि यस्य (पच २.१०८०) ४७।८९सहति श्रेयसी राज (हि १.३६) ८३।१
श्रोतून्मूकयति ध्रुव ८६।१४सपदो महतामेव ४५।८स एकस्त्रीणि ज (सा द १० ६७) २५०।४
श्रोत्रं श्रुतेनैव न (भर्तृ स ५४) ७५।१२सपद्यास्ते परै (दृ श १९) १८८।६७६स एव खलु (मा ५ १३९३) ३८०।१११