भारतकोश
सुदामा चरित (महाकवि नरोत्तमदास - ब्रजभाषा काव्य एवं सान्वय सटीक)

सुदामा चरित (महाकवि नरोत्तमदास - ब्रजभाषा काव्य एवं सान्वय सटीक)

Sudama Charit of Mahakavi Narottamdas with Commentary

महाकवि नरोत्तमदास द्वारा

DevanagariHindipublished108 पृष्ठ

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८० / सुदामा-चरित चावल लेने लगे तभी रुक्मिणी ने उनका हाथ पकड़ लिया और कहा—आज आप धन-सम्पत्ति से इतना उदासीन क्यों हो गये हैं ? (५५) शब्दार्थ—यह धौं कौन मिलाप == यह कैसा मिलन है ? यह कैसी मित्रता है ? करत सुदामा...सुदामा आप==सुदामा को अपने समान ऐश्वर्यवान बना रहे हैं और स्वयं सुदामा के समान कंगाल बन रहे हैं। व्याख्या—(श्रीकृष्ण का हाथ रोक कर) रुक्मिणी ने उनके कान में कहा— भला, यह भी मिलने-भेंटने का कोई ढंग है कि आप सुदामा को अपने समान तीनों लोकों का स्वामी बना रहे हैं और स्वयं सुदामा के समान निर्धन बन रहे हैं। विशेष—इस दोहे में महादानी श्रीकृष्ण के दीनबन्धु तथा मित्रवत्सल रूप का चित्रण हुआ है वे अपना सर्वस्व अपने मित्र को देकर स्वयं उसकी निर्धनता अपना लेने में गौरव अनुभव करते हैं। (५६) शब्दार्थ—कौतुक—तमाशा; क्रीड़ा, विस्मयजनक प्रसंग । भई रसोई सिद्ध = भोजन तैयार हो गया । व्याख्या—इसी विस्मयजनक प्रसंग के समय सेवकों ने आकर निवेदन किया—महाराज, भोजन तैयार है। चल कर भोजन कीजिए । (५७) शब्दार्थ—मध्याह्न = दोपहर । व्याख्या—श्रीकृष्ण ने सुदामा के साथ स्नान किया, धुली-धुलाई धोती पहनी और दोपहर की संध्या की। फिर वे खाने के लिए चौके में जा बैठे । (५८) शब्दार्थ - रूपे के = चांदी के। रुचिर == सुन्दर । पायस दूध में बनी खीर । सिता = चीनी; मिसरी । सरद = शरद । सोंधो = सोंधा । पहिति = दाल। सुरभी = गाय । फूले-फूले फुलका = फूली-फूली रोटियां । प्रफुल्ल = खिला हुआ श्वेत कमल । दुति = द्युति; चमक; शोभा । फूले-फूले... मंद की = फूली-फूली रोटियों के सामने खिले हुए श्वेत कमलों की शोभा भी मंद पड़ जाती हैं। व्यंजन = तरकारियां; विविध खाद्य पदार्थ । आछे कै = अच्छी तरह । जेंवाय = भोजन करा कर; खिला कर । पाछे तैं = पीछे से । पछिया- वरि = श्रीखण्ड; सिखरन - दही या मट्ठे में शक्कर डाल कर बनी वस्तु ।