सुगम चिकित्सा
Sugam Chikitsa
आचार्य चतुरसेन शास्त्री द्वारा
स्रोत: June 1939 First Edition · सस्ता साहित्य मण्डल, दिल्ली (Sasta Sahitya Mandal, Delhi) · 1939 (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंभुगम चिकित्सा
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पराये धन पर दुरी नजर न डाले । पाप से बचे । खराब खवारी, दरखत, पहाड़ पर फजूल न चढ़े । विना बात हंसना, छींकना, नाक में उझली देना, व्यादा चक्कावास करना, दाँत कटकड़ाना, नाखूत घिसना छोड़ दे । सुने घर में अकेला न रहे, जङ्गल में न घूमें, मल-मूत्र, छींक, डकार के वेग को न रोके, अपरिचित स्थान में न जाय । इन नियमों के पालन करने से मनुष्य नीरोग रहकर बड़ी उम्र पाता है । बीमार होने पर रोग को मामूली न समझे, तुरन्त उसका बन्दोबस्त करे । रोग होने पर डरे नहीं, घर में रोगी हो तो उसे तसल्ली दे और अच्छे वैद्य का इलाज कराये । रोगी के पास विश्वासी, प्रेमी आदमी रहे । भीड़-भाड़ न रहे । रोगी का घर सूखा, हवादार हो, उसके कपड़े साफ और आरामदेह हों । जैसे डाक्टर बतावें उसी भांति दवा-पानी का बन्दोबस्त करे । इस तरह करने से असाध्य रोगी भी अच्छा हो जाता है ।