सुगम चिकित्सा

सुगम चिकित्सा
Sugam Chikitsa
आचार्य चतुरसेन शास्त्री द्वारा
स्रोत: June 1939 First Edition · सस्ता साहित्य मण्डल, दिल्ली (Sasta Sahitya Mandal, Delhi) · 1939 (उद्गम)
DevanagariHindipublished222 पृष्ठ
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तत्त्व की बातें
श्रुति—सत्त्व-रज-तम इनकी साम्यावस्था को प्रकृति कहते हैं।
पंचमहाभूत—पृथ्वी, जल, तेज, वायु, आकाश, ये पञ्च महाभूत कहाते हैं।
इन्द्रियार्थ—गन्ध, रस, रूप, स्पर्श और शब्द, ये ५ क्रम से इन्द्रियार्थ हैं।
ज्ञानेन्द्रिय—आँख, कान, नाक, जीभ, त्वचा, ये ५ ज्ञानेन्द्रिय हैं।
कर्मेन्द्रिय—हाथ, पैर, मुख, उपस्थ और वागेन्द्रिय, ये पाँच कर्मेन्द्रिय हैं।
उभयेन्द्रिय—मन उभयेन्द्रिय है।
चौबीस तत्त्व—५ महाभूत, ५ इन्द्रियार्थ, ५ ज्ञानेन्द्रिय, ५ कर्मेन्द्रिय, मन, बुद्धि, अहंकार और जीवात्मा इनको चौबीस तत्त्व कहते हैं।
जीव—गर्भाशय में गया रज-वीर्य जीव कहाता है।
गर्भ—जीव, प्रकृति और २४ तत्त्व मिलकर गर्भ कहाता है।