भारतकोश
सुगम चिकित्सा

सुगम चिकित्सा

Sugam Chikitsa

आचार्य चतुरसेन शास्त्री द्वारा

स्रोत: June 1939 First Edition · सस्ता साहित्य मण्डल, दिल्ली (Sasta Sahitya Mandal, Delhi) · 1939 (उद्गम)

DevanagariHindipublished222 पृष्ठ

पृष्ठ 42, कुल 222 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 42

: ७ :

रोगी की टहल

याद रखने की बात यह है कि रोगी को आराम करने के लिए सिर्फ दवा ही काफी नहीं है, बल्कि उसकी सेवा-टहल सबसे बड़ी

चीज है। अगर शुरू ही में रोगी को पूरा आराम,

रोगी की टहल

अच्छी टहल और परहेज का खाना मिले तो

रोग चाहे भी जैसा भयानक हो रोगी के चंगा हो जाने की पूरी-पूरी आशा रहती है। अक्सर ऐसा देखा जाता है कि जबतक रोगी बिल्कुल लाचार नहीं हो जाता वह न तो आराम करता है और न खाने-पोने ही का खयाल रखता है। जब रोग बढ़ जाता है तब यह कार्यवाही की जाती है, ऐसी हालत में उसको अधिक लाभ नहीं होता। रोगी को जल्द आराम होने के लिए नीचे लिखी बातों की सख्त जरूरत है।

१—रोगी को बिछौने पर चुपचाप लिटाये रहो और पूरा आराम करने दो।

२—ताजा हल्का और परहेज का खाना खाने को दो।

सुगम चिकित्सा · पृष्ठ 42, कुल 222 में से · BharatKosha