भारतकोश
सुगम चिकित्सा

सुगम चिकित्सा

Sugam Chikitsa

आचार्य चतुरसेन शास्त्री द्वारा

स्रोत: June 1939 First Edition · सस्ता साहित्य मण्डल, दिल्ली (Sasta Sahitya Mandal, Delhi) · 1939 (उद्गम)

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सुगम चिकित्सा

३६

३—कालतु मुलाकतियों को रोगी के पास मत आने दो।

४—अच्छे वैद्य-डाक्टर से इलाज कराओ।

५—जबतक पूरा आराम न हो जाय परहेज और आराम का पूरा ध्यान रखो।

६—रोगी को साफ हवादार कमरे में रखो और किसीको वहाँ हुक्का-बीड़ी मत पीने दो और न वहाँ भीड़ रहने दो।

७—रोगी को भरपूर नींद सोने दो।

दहल करनेवाला ऐसा आदमी होना चाहिए कि जो समझदार, धीरजवान और फुर्तिला हो। बीमार अक्सर चिड़चिड़ा होजाता है और अकारण ही बक-भक किया करता है।

दहल करनेवाला

जबतक सेवा करनेवाला रोगी से प्रेम न करेगा, वह उसकी बकभक सहन न करेगा और न उसकी गन्दगी साफ करेगा रोगी को आराम नहीं पहुँचा सकता। उसे डाक्टर-वैद्य की बताई हुई बातों का भी पूरा ध्यान रहना चाहिए जिससे वह पूरी तौर-पर उनका रोगी से पालन करा सके, तथा निरालस्य होकर रात-दिन रोगी की देख-भाल कर सके।

जिस कमरे या कोठरी में मरीज रखा जाय वह बिल्कुल खाली और साफ हो, उसमें सटर-पटर कोई सामान न हो। उसमें

कमरा

सिवा दहल करनेवाले के कोई न आवे, न सोवे।

उसमें हवा और उजाले की काफी गुंजाइश

रहनी चाहिए। पर हवा का मोका मरीज को न लगे यह ध्यान रहे।

छूत के मरीज को बिल्कुल दूर रखना चाहिए।